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Sheetla Chalisa Lyrics in Hindi 2026: ‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) पर पढ़ें यह श्री शीतला चालीसा (PDF), घर में कभी नहीं आएगी कोई गंभीर बीमारी

Sheetla Chalisa 2026: 11 मार्च को बसोड़ा पूजा में पढ़ें ‘श्री शीतला चालीसा’, घर में कभी नहीं आएगी कोई गंभीर बीमारी

Sheetla Chalisa 2026: हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यानी ‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। इस वर्ष यह पावन पर्व 11 मार्च 2026 (बुधवार) को आ रहा है। माता शीतला को स्वच्छता, आरोग्य और रोगों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है।

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Sheetla Chalisa
Sheetla Chalisa 2026

सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति बसोड़ा के दिन माता को ठंडे भोजन का भोग लगाकर ‘श्री शीतला चालीसा’ (Shri Sheetla Chalisa) का पाठ करता है, उसके घर में चेचक, खसरा (Measles), और भयंकर ज्वर जैसी संक्रामक बीमारियां कभी प्रवेश नहीं करतीं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण शीतला चालीसा और इसे पढ़ने की सही विधि।

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🙏 श्री शीतला माता चालीसा (Sheetla Chalisa in Hindi)

‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) 11 मार्च की सुबह पूजा विधि करते समय अपने दोनों हाथों को जोड़कर सच्चे मन से शीतला माता का ध्यान करते हुए नीचे दी गई इस चालीसा का पाठ करें:

॥ दोहा ॥

जय जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान।

होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धी बल ज्ञान॥

घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार।

शीतल छैंयां में बैठई, तपय ताप भव भार॥

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॥ चौपाई ॥

जय जय श्री शीतला भवानी । जय जग जननि सकल गुणधानी ॥

गृह गृह शक्ति तुम्हारी राजती । पूरन शरन चंद्रसा साजती ॥

विस्फोटक सी जलत शरीरा । शीतल करत हरत सब पीड़ा ॥

मात शीतला तव शुभनामा । सबके काहे आवही कामा ॥

शोक हरी शंकरी भवानी । बाल प्राण रक्षी सुखदानी ॥

सूचि बार्जनी कलश कर राजै । मस्तक तेज सूर्य सम साजै ॥

चौसट योगिन संग दे दावै । पीड़ा ताल मृदंग बजावै ॥

नंदिनाथ भय रो चिकरावै । सहस शेष शिर पार ना पावै ॥

धन्य धन्य भात्री महारानी । सुर नर मुनी सब सुयश बधानी ॥

ज्वाला रूप महाबल कारी । दैत्य एक विश्फोटक भारी ॥

हर हर प्रविशत कोई दान क्षत । रोग रूप धरी बालक भक्षक ॥

हाहाकार मचो जग भारी । सत्यो ना जब कोई संकट कारी ॥

तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा । कर गई रिपुसही आंधीनी सूपा ॥

विस्फोटक हि पकड़ी करी लीन्हो । मुसल प्रमाण बहु बिधि कीन्हो ॥

बहु प्रकार बल बीनती कीन्हा । मैय्या नहीं फल कछु मैं कीन्हा ॥

अब नही मातु काहू गृह जै हो । जह अपवित्र वही घर रहि हो ॥

पूजन पाठ मातु जब करी है । भय आनंद सकल दुःख हरी है ॥

अब भगतन शीतल भय जै हे । विस्फोटक भय घोर न सै हे ॥

श्री शीतल ही बचे कल्याना । बचन सत्य भाषे भगवाना ॥

कलश शीतलाका करवावै । वृजसे विधीवत पाठ करावै ॥

विस्फोटक भय गृह गृह भाई । भजे तेरी सह यही उपाई ॥

तुमही शीतला जगकी माता । तुमही पिता जग के सुखदाता ॥

तुमही जगका अतिसुख सेवी । नमो नमामी शीतले देवी ॥

नमो सूर्य करवी दुख हरणी । नमो नमो जग तारिणी धरणी ॥

नमो नमो ग्रहोंके बंदिनी । दुख दारिद्रा निस निखंदिनी ॥

श्री शीतला शेखला बहला । गुणकी गुणकी मातृ मंगला ॥

मात शीतला तुम धनुधारी । शोभित पंचनाम असवारी ॥

राघव खर बैसाख सुनंदन । कर भग दुरवा कंत निकंदन ॥

सुनी रत संग शीतला माई । चाही सकल सुख दूर धुराई ॥

कलका गन गंगा किछु होई । जाकर मंत्र ना औषधी कोई ॥

हेत मातजी का आराधन । और नही है कोई साधन ॥

निश्चय मातु शरण जो आवै । निर्भय ईप्सित सो फल पावै ॥

कोढी निर्मल काया धारे । अंधा कृत नित दृष्टी विहारे ॥

बंधा नारी पुत्रको पावे । जन्म दरिद्र धनी हो जावे ॥

सुंदरदास नाम गुण गावत । लक्ष्य मूलको छंद बनावत ॥

या दे कोई करे यदी शंका । जग दे मैंय्या काही डंका ॥

कहत राम सुंदर प्रभुदासा । तट प्रयागसे पूरब पासा ॥

ग्राम तिवारी पूर मम बासा । प्रगरा ग्राम निकट दुर वासा ॥

अब विलंब भय मोही पुकारत । मातृ कृपाकी बाट निहारत ॥

बड़ा द्वार सब आस लगाई । अब सुधि लेत शीतला माई ॥

यह चालीसा शीतला पाठ करे जो कोय ।

सपनेउ दुःख व्यापे नही नित सब मंगल होय ॥

बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल भाल भल किंतू ।

जग जननी का ये चरित रचित भक्ति रस बिंतू ॥

॥ दोहा ॥

शीतला माता की जय, जो जन निशदिन ध्याय।

कहत दास प्रभु शरण में, सब संकट कट जाय॥

(पाठ पूर्ण होने के बाद माता शीतला की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।)

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🌟 शीतला चालीसा पाठ के 3 चमत्कारिक लाभ (Astrological Benefits)

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, ‘शीतला चालीसा’ केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह शरीर और घर के वास्तु दोष को संतुलित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

  1. राहु-केतु की शांति: ‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) के दिन इस चालीसा को पढ़ने से व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु ग्रह के बुरे प्रभाव (जो अचानक बीमारियां देते हैं) शांत होने लगते हैं।
  2. संतान की सुरक्षा: जो माताएं अपने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर इस शीतला चालीसा का पाठ करती हैं, माँ शीतला उनके बच्चों के चारों ओर एक दिव्य ‘सुरक्षा कवच’ बना देती है।
  3. वास्तु दोष निवारण: इस शीतला चालीसा का पाठ अपने घर में करने से ‘शीतलता’ (सकारात्मक ऊर्जा) आती है और घर से कलह-क्लेश दूर होने लगता है।

🌸 शीतला चालीसा पढ़ने की सही विधि (Puja Vidhi)

इस चालीसा का पूरा फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करें:

  1. समय: इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर ठंडे पानी से स्नान करें (गर्म पानी का प्रयोग स्नान में न करें)।
  2. आसन और दिशा: अब साफ कपड़े पहनकर कुशा या ऊनी आसन पर उत्तर (North) या पूर्व (East) मुख दिशा की ओर बैठना चाहिए।
  3. जल और नीम: शीतला चालीसा पढ़ते समय अपने पास में एक कलश में शुद्ध जल और नीम के पत्ते जरूर रखें।
  4. छिड़काव: चालीसा का पाठ समाप्त होने के बाद, माता का ध्यान और स्मरण करते हुए उस जल को नीम के पत्तों से पूरे घर में और विशेषकर बच्चों की आंखों पर लगाएं।

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Sheetla Chalisa Lyrics in Hindi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या शीतला चालीसा का पाठ केवल बसोड़ा के दिन ही किया जाता है?

Ans: बसोड़ा (शीतला अष्टमी) के दिन इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है। लेकिन घर में किसी को चेचक, खसरा या तेज बुखार होने पर आप किसी भी दिन सुबह स्नान करके इसका पाठ कर सकते हैं।

Q2: क्या चालीसा पढ़ने के लिए मूर्ति का होना जरूरी है?

Ans: यदि आपके पास मूर्ति नहीं है, तो आप एक कलश में जल भरकर और उस पर नीम की टहनी रखकर उसे माता शीतला का स्वरूप मानकर चालीसा पढ़ सकते हैं।

Q3: पाठ के बाद बासी भोजन का क्या करें?

Ans: माता को भोग लगाया हुआ बासी भोजन (जैसे मीठे चावल, पूड़ी, हलवा) पूरे परिवार को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।

निष्कर्ष: बदलते मौसम की बीमारियों से परिवार को बचाने के लिए माता शीतला की यह चालीसा एक अमोघ अस्त्र है। 11 मार्च 2026 को बसोड़ा की सुबह Freeupay.in पर दी गई इस चालीसा का पूरे परिवार के साथ पाठ करें। माता रानी आपके घर-परिवार को सदैव स्वस्थ रखेंगी।

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