Narasimha Ashtottara Shatanamavali 2026: कहा जाता है की भगवान श्री विष्णु जी को दसावतार के नाम से भी जाना चाहता हैं। जिसमे से एक अवतार नृसिंह अवतार हैं। श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली का नियमित पाठ करने से भगवान श्री विष्णु जी के श्री नृसिंह अवतार का आशीर्वाद बना रहता हैं। श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
Narasimha Ashtottara Shatanamavali 2026: नृसिंह जयंती पर पढ़ें भगवान नरसिंह के 108 नाम, जीवन में नहीं आएगा कोई संकट
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हिंदू सनातन धर्म में ‘श्री नृसिंह’ (Lord Narasimha) को भगवान विष्णु जी का उग्र स्वरूप बताया गया हैं इन्हें परम रक्षक और संकटमोचक देवता के रूप में पूजा जाता है। पूरे देश में ‘नृसिंह जयंती’ का महापर्व 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) के दिन में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जायेगा।
अथर्ववेद और पुराणों के अनुसार, भगवान नृसिंह को अति शीघ्र प्रसन्न करने के लिए सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है— ‘श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली’ (108 Names of Lord Narasimha)। मान्यता है कि जो भक्त आज नृसिंह जयंती की शाम को या अपनी दैनिक पूजा में रोज़ाना इन 108 नामों का जाप करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, तंत्र बाधा और गुप्त शत्रुओं का हमेशा के लिए सर्वनाश हो जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें भगवान नृसिंह के 108 पावन नाम और नामावली अर्चना की सही विधि।
🕰️ आज 30 अप्रैल 2026: पूजा और 108 नामों के जाप का ‘शुभ मुहूर्त’
भगवान नृसिंह का अवतार गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) में हुआ था। आज शाम की पूजा में इन 108 नामों का उच्चारण करना 100 गुना अधिक फलदायी होगा:
| विवरण (Event) | तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time) |
| नृसिंह जयंती की तारीख | आज, 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) |
| शाम की पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त | शाम 04:17 बजे से 06:56 बजे तक |
| विशेष संयोग | आज गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ योग भी बन रहा है। |
📿 श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली (108 Names of Lord Narasimha in Hindi)
आज शाम की पूजा में घी का दीपक जलाकर पूर्ण भक्ति-भाव से भगवान नरसिंह के इन 108 नामों का “ॐ” (Om) लगाकर उच्चारण करें:
- ॐ नारसिंहाय नमः ।
- ॐ महासिंहाय नमः ।
- ॐ दिव्यसिंहाय नमः ।
- ॐ महाबलाय नमः ।
- ॐ उग्रसिंहाय नमः ।
- ॐ महादॆवाय नमः ।
- ॐ स्तंभजाय नमः ।
- ॐ उग्रलॊचनाय नमः ।
- ॐ रौद्राय नमः ।
- ॐ सर्वाद्भुताय नमः ॥ १० ॥
- ॐ श्रीमतॆ नमः ।
- ॐ यॊगानंदाय नमः ।
- ॐ त्रिविक्रमाय नमः ।
- ॐ हरियॆ नमः ।
- ॐ कॊलाहलाय नमः ।
- ॐ चक्रिणॆ नमः ।
- ॐ विजयाय नमः ।
- ॐ जयवर्धनाय नमः ।
- ॐ पंचाननाय नमः ।
- ॐ परब्रह्मणॆ नमः ॥ २० ॥
- ॐ अघॊराय नमः ।
- ॐ घॊरविक्रमाय नमः ।
- ॐ ज्वलन्मुखाय नमः ।
- ॐ ज्वालामालिनॆ नमः ।
- ॐ महाज्वालाय नमः ।
- ॐ महाप्रभवॆ नमः ।
- ॐ निटिलाक्षाय नमः ।
- ॐ सहस्राक्षाय नमः ।
- ॐ दुर्निरीक्षाय नमः ।
- ॐ प्रतापनाय नमः ॥ ३० ॥
- ॐ महादंष्ट्रायुधाय नमः ।
- ॐ प्राज्ञाय नमः ।
- ॐ चंडकॊपिनॆ नमः ।
- ॐ सदाशिवाय नमः ।
- ॐ हिरण्यकशिपुध्वंसिनॆ नमः ।
- ॐ दैत्यदानवभंजनाय नमः ।
- ॐ गुणभद्राय नमः ।
- ॐ महाभद्राय नमः ।
- ॐ बलभद्रकाय नमः ।
- ॐ सुभद्रकाय नमः ॥ ४० ॥
- ॐ कराळाय नमः ।
- ॐ विकराळाय नमः ।
- ॐ विकर्त्रॆ नमः ।
- ॐ सर्वकर्तृकाय नमः ।
- ॐ शिंशुमाराय नमः ।
- ॐ त्रिलॊकात्मनॆ नमः ।
- ॐ ईशाय नमः ।
- ॐ सर्वॆश्वराय नमः ।
- ॐ विभवॆ नमः ।
- ॐ भैरवाडंबराय नमः ॥ ५० ॥
- ॐ दिव्याय नमः ।
- ॐ अच्युताय नमः ।
- ॐ कविमाधवाय नमः ।
- ॐ अधॊक्षजाय नमः ।
- ॐ अक्षराय नमः ।
- ॐ शर्वाय नमः ।
- ॐ वनमालिनॆ नमः ।
- ॐ वरप्रदाय नमः ।
- ॐ विश्वंभराय नमः ।
- ॐ अद्भुताय नमः ॥ ६० ॥
- ॐ भव्याय नमः ।
- ॐ श्रीविष्णवॆ नमः ।
- ॐ पुरुषॊत्तमाय नमः ।
- ॐ अनघास्त्राय नमः ।
- ॐ नखास्त्राय नमः ।
- ॐ सूर्यज्यॊतिषॆ नमः ।
- ॐ सुरॆश्वराय नमः ।
- ॐ सहस्रबाहवॆ नमः ।
- ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
- ॐ सर्वसिद्धिप्रदायकाय नमः ॥ ७० ॥
- ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः ।
- ॐ वज्रनखाय नमः ।
- ॐ महानंदाय नमः ।
- ॐ परंतपाय नमः ।
- ॐ सर्वमंत्रैकरूपाय नमः ।
- ॐ सर्वयंत्र विधारणाय नमः ।
- ॐ सर्वतंत्रात्मकाय नमः ।
- ॐ अव्यक्ताय नमः ।
- ॐ सुव्यक्ताय नमः ।
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः ॥ ८० ॥
- ॐ वैशाखशुक्लभूतॊत्थाय नमः ।
- ॐ शरणागतवत्सलाय नमः ।
- ॐ उदारकीर्तयॆ नमः ।
- ॐ पुण्यात्मनॆ नमः ।
- ॐ महात्मनॆ नमः ।
- ॐ दंडविक्रमाय नमः ।
- ॐ वॆदत्रयप्रपूज्याय नमः ।
- ॐ भगवतॆ नमः ।
- ॐ परमॆश्वराय नमः ।
- ॐ श्रीवत्सांकाय नमः ॥ ९० ॥
- ॐ श्रीनिवासाय नमः ।
- ॐ जगद्व्यापिनॆ नमः ।
- ॐ जगन्मयाय नमः ।
- ॐ जगत्पालाय नमः ।
- ॐ जगन्नाथाय नमः ।
- ॐ महाकायाय नमः ।
- ॐ द्विरूपभृतॆ नमः ।
- ॐ परमात्मनॆ नमः ।
- ॐ परंज्यॊतिषॆ नमः ।
- ॐ निर्गुणाय नमः ॥ १०० ॥
- ॐ नृकॆसरिणॆ नमः ।
- ॐ परतत्त्वाय नमः ।
- ॐ परंधाम्नॆ नमः ।
- ॐ सच्चिदानंद विग्रहाय नमः ।
- ॐ लक्ष्मीनृसिंहाय नमः ।
- ॐ सर्वात्मनॆ नमः ।
- ॐ धीराय नमः ।
- ॐ प्रह्लादपालकाय नमः ॥ १०८ ॥
॥ श्री नरसिंहाष्टॊत्तर शतनामावलिः सपूर्णम् ॥
🌟 वास्तु और ज्योतिषीय रहस्य: 108 नामों के रोज़ाना जाप के लाभ
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, ‘108’ का अंक ब्रह्मांड की पूर्णता का प्रतीक है। जब आप भगवान नरसिंह के 108 अलग-अलग नामों की ध्वनि तरंगें (Sound Vibrations) पैदा करते हैं, तो कुंडली में बैठे राहु-केतु और उग्र मंगल जैसे क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव स्वतः ही शांत हो जाता है।
यदि आपके घर के दक्षिण (South) भाग में वास्तु दोष है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं या धन हानि होती है, तो इन 108 नामों का रोज़ाना जाप उस दोष को बेअसर कर देता है। जीवन में चारों ओर से सफलता, आर्थिक मजबूती और सुरक्षित भविष्य के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु के साक्षात स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) को धारण करना एक अमोघ ज्योतिषीय उपाय है।
⚠️ नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली अर्चना के 3 सटीक नियम (Rules for Daily Path)
- नामावली अर्चना (फूल चढ़ाना): आज शाम की पूजा में एक थाली में 108 लाल फूल या तुलसी के पत्ते रख लें। प्रत्येक नाम (जैसे ‘ॐ नारसिंहाय नमः’) बोलने के बाद भगवान की मूर्ति पर एक फूल/पत्ता अर्पित करें।
- माला का प्रयोग: यदि आप केवल जाप कर रहे हैं, तो 108 मनकों वाली शुद्ध तुलसी या रुद्राक्ष की माला से ही जाप करें।
- रोज़ाना पाठ की दिशा: यदि आप इसे अपनी नित्य पूजा का हिस्सा बना रहे हैं, तो रोज़ाना सुबह स्नान के बाद पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर मुख करके ही इन 108 नामों का पाठ करें।
Narasimha Ashtottara Shatanamavali Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या 108 नामों का जाप मन में कर सकते हैं?
Ans: आप मन में (मानसिक जाप) भी कर सकते हैं, लेकिन बोलकर (उपांशु जाप) करने से ध्वनि तरंगें आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को तेजी से बाहर निकालती हैं।
Q2: यदि संस्कृत पढ़ने में कठिनाई हो तो क्या करें?
Ans: हमने ऊपर दी गई टेबल में नामों को बहुत ही सरल हिंदी में लिखा है। भगवान भावना देखते हैं, इसलिए यदि उच्चारण में थोड़ी बहुत चूक भी हो जाए, तो सच्ची श्रद्धा से किया गया पाठ फलदायी ही होता है।
Q3: पूजा के बाद चढ़ाए गए 108 फूलों/तुलसी का क्या करें?
Ans: पूजा के अगले दिन उन निर्माल्य (चढ़ाए गए) फूलों और तुलसी पत्रों को किसी बहती नदी में प्रवाहित कर दें या घर के किसी गमले (पीपल/तुलसी के अलावा) की मिट्टी में डाल दें।
निष्कर्ष: भगवान नरसिंह के ये 108 नाम आपके परिवार के लिए एक अभेद्य ‘कवच’ के समान हैं। आज 30 अप्रैल 2026 को नृसिंह जयंती के परम शुभ अवसर पर Freeupay.in पर दी गई इस अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ अवश्य करें और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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