WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: नृसिंह जयंती के दिन पढ़ें यह से शुरू करें यह अचूक ‘श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (PDF)’ का पाठ, हर संकट और शत्रु होगा दूर

Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram 2026: कहा जाता है की भगवान श्री विष्णु जी को दसावतार के नाम से भी जाना चाहता हैं ! जिसमे से एक अवतार नृसिंह अवतार हैं। श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली स्तोत्रम् का नियमित पाठ करने से भगवान श्री विष्णु जी के श्री नृसिंह अवतार का आशीर्वाद बना रहता हैं। श्री नृसिंह शतनामावली स्तोत्रम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram 2026: नृसिंह जयंती पर पढ़ें यह सिद्ध स्तोत्र, जीवन में नहीं फटकेगी कोई बाधा

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi
Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के उग्र स्वरूप ‘श्री नृसिंह’ (Lord Narasimha) को परम रक्षक और संकटमोचक देवता माना जाता है। इस बार 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को पूरे देश में ‘नृसिंह जयंती’ का महापर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

अक्सर 108 नामों का जाप अलग-अलग (नामावली रूप में) किया जाता है, लेकिन महर्षियों ने इन 108 नामों को एक अत्यंत शक्तिशाली काव्यात्मक रूप दिया है जिसे ‘श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र’ कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त आज नृसिंह जयंती की शाम को या अपनी दैनिक पूजा में रोज़ाना इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, तंत्र बाधा और भयंकर से भयंकर शत्रुओं का हमेशा के लिए सर्वनाश हो जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें यह अचूक स्तोत्र।

🕰️ आज 30 अप्रैल 2026: पूजा और स्तोत्र पाठ का ‘शुभ मुहूर्त’

भगवान नृसिंह का अवतार गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) में हुआ था। आज शाम की पूजा में इस स्तोत्र का पाठ करना 100 गुना अधिक फलदायी होगा:

विवरण (Event)तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time)
नृसिंह जयंती की तारीखआज, 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
शाम की पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्तशाम 04:17 बजे से 06:56 बजे तक
विशेष संयोगआज गुरु पुष्य नक्षत्र का अत्यंत शुभ योग बन रहा है।

📖 श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (Stotram in Hindi)

आज शाम की पूजा में घी का दीपक जलाकर पूर्ण भक्ति-भाव से भगवान नृसिंह के 108 नामों वाले इस सिद्ध स्तोत्र का पाठ करें:

॥ श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥

नरसिंहो नरो नारस्रष्टा नारायणो नवः ।

नवेतरो नरपतिर्नरात्मा नरचोदनः ॥ १॥

नखभिन्नस्वर्णशय्यो नखदंष्ट्राविभीषणः ।

नारभीतदिशानाशो नन्तव्यो नखरायुधः ॥ २॥

नादनिर्भिन्नपाद्माण्डो नयनाग्निहुतासुरः ।

नटत्केसरसञ्जातवातविक्षिप्तवारिदः ॥ ३॥

नलिनीशसहस्राभो नतब्रह्मादिदेवतः ।

नभोविश्वम्भराभ्यन्तर्व्यापिदुर्वीक्षविग्रहः ॥ ४॥

निश्श्वासवातसंरम्भ घूर्णमानपयोनिधिः ।

निर्दयाङ्घ्रियुगन्यासदलितक्ष्माहिमस्तकः ॥ ५॥

निजसंरम्भसन्त्रस्तब्रह्मरुद्रादिदेवतः ।

निर्दम्भभक्तिमद्रक्षोडिम्भनीतशमोदयः ॥ ६॥

नाकपालादिविनुतो नाकिलोककृतप्रियः ।

नाकिशत्रूदरान्त्रादिमालाभूषितकन्धरः ॥ ७॥

नाकेशासिकृतत्रासदंष्ट्राभाधूततामसः ।

नाकमर्त्यातलापूर्णनादनिश्शेषितद्विपः ॥ ८॥

नामविद्राविताशेषभूतरक्षःपिशाचकः ।

नामनिश्श्रेणिकारूढनिजलोकनिजव्रजः ॥ ९॥

नालीकनाभो नागारिवन्द्यो नागाधिराड्भुजः ।

नगेन्द्रधीरो नेत्रान्तस्ख्सलदग्निकणच्छटः ॥ १०॥

नारीदुरासदो नानालोकभीकरविग्रहः ।

निस्तारितात्मीयसन्थो निजैकज्ञेयवैभवः ॥ ११॥

निर्व्याजभक्तप्रह्लादपरिपालनतत्परः ।

निर्वाणदायी निर्व्याजभक्त्येकप्राप्यतत्पदः ॥ १२॥

निर्ह्रादमयनिर्घातदलितासुरराड्बलः ।

निजप्रतापमार्ताण्डखद्योतीकृतभास्करः ॥ १३॥

निरीक्षणक्षतज्योतिर्ग्रहतारोडुमण्डलः ।

निष्प्रपञ्चबृहद्भानुज्वालारुणनिरीक्षणः ॥ १४॥

नखाग्रलग्नारिवक्षस्स्रुतरक्तारुणाम्बरः ।

निश्शेषरौद्रनीरन्ध्रो नक्षत्राच्छादितक्षमः ॥ १५॥

निर्णिद्ररक्तोत्पलाक्षो निरमित्रो निराहवः ।

निराकुलीकृतसुरो निर्णिमेयो निरीश्वरः ॥ १६॥

निरुद्धदशदिग्भागो निरस्ताखिलकल्मषः ।

निगमाद्रिगुहामध्यनिर्णिद्राद्भुतकेसरी ॥ १७॥

निजानन्दाब्धिनिर्मग्नो निराकारो निरामयः ।

निरहङ्कारविबुधचित्तकानन गोचरः ॥ १८॥

नित्यो निष्कारणो नेता निरवद्यगुणोदधिः ।

निदानं निस्तमश्शक्तिर्नित्यतृप्तो निराश्रयः ॥ १९॥

निष्प्रपञ्चो निरालोको निखिलप्रीतिभासकः ।

निरूढज्ञानिसचिवो निजावनकृताकृतिः ॥ २०॥

निखिलायुधनिर्भातभुजानीकशताद्भुतः ।

निशितासिज्ज्वलज्जिह्वो निबद्धभृकुटीमुखः ॥ २१॥

नगेन्द्रकन्दरव्यात्तवक्त्रो नम्रेतरश्रुतिः ।

निशाकरकराङ्कूर गौरसारतनूरुहः ॥ २२॥

नाथहीनजनत्राणो नारदादिसमीडितः ।

नारान्तको नारचित्तिर्नाराज्ञेयो नरोत्तमः ॥ २३॥

नरात्मा नरलोकांशो नरनारायणो नभः ।

नतलोकपरित्राणनिष्णातो नयकोविदः ॥ २४॥

निगमागमशाखाग्र प्रवालचरणाम्बुजः ।

नित्यसिद्धो नित्यजयी नित्यपूज्यो निजप्रभः ॥ २५॥

निष्कृष्टवेदतात्पर्यभूमिर्निर्णीततत्त्वकः ।

नित्यानपायिलक्ष्मीको निश्श्रेयसमयाकृतिः ॥ २६॥

निगमश्रीमहामालो निर्दग्धत्रिपुरप्रियः ।

निर्मुक्तशेषाहियशा निर्द्वन्द्वो निष्कलो नरी ॥ २७॥

📖 श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram Lyrics in Hindi)

॥ श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥

श्रीनृसिंहो महासिंहो दिव्यसिंहो महाबलः ।

उग्रसिंहो महादेव उपेन्द्रश्चाऽग्निलोचनः ॥ १॥

रौद्रश्शौरिर्महावीरस्सुविक्रम-पराक्रमः ।

हरिकोलाहलश्चक्री विजयश्चाजयोऽव्ययः ॥ २॥

दैत्यान्तकः परब्रह्माप्यघोरो घोरविक्रमः ।

ज्वालामुखो ज्वालमाली महाज्वालो महाप्रभुः ॥ ३॥

निटिलाक्षः सहस्राक्षो दुर्निरीक्ष्यः प्रतापनः ।

महादंष्ट्रायुधः प्राज्ञो हिरण्यकनिषूधनः ॥ ४॥

चण्डकोपी सुरारिघ्नस्सदार्तिघ्न-सदाशिवः ।

गुणभद्रो महाभद्रो बलभद्रस्सुभद्रकः ॥ ५॥

कराळो विकराळश्च गतायुस्सर्वकर्तृकः ।

भैरवाडंबरो दिव्यश्चागम्यस्सर्वशत्रुजित् ॥ ६॥

अमोघास्त्रश्शस्त्रधरः सव्यजूटस्सुरेश्वरः ।

सहस्रबाहुर्वज्रनखस्सर्वसिद्धिर्जनार्दनः ॥ ७॥

अनन्तो भगवान् स्थूलश्चागम्यश्च परावरः ।

सर्वमन्त्रैकरूपश्च सर्वयन्त्रविधारणः ॥ ८॥

अव्ययः परमानन्दः कालजित् खगवाहनः ।

भक्तातिवत्सलोऽव्यक्तस्सुव्यक्तस्सुलभश्शुचिः ॥ ९॥

लोकैकनायकस्सर्वश्शरणागतवत्सलः ।

धीरो धरश्च सर्वज्ञो भीमो भीमपराक्रमः ॥ १०॥

देवप्रियो नुतः पूज्यो भवहृत् परमेश्वरः ।

श्रीवत्सवक्षाः श्रीवासो विभुस्सङ्कर्षणः प्रभुः ॥ ११॥

त्रिविक्रमस्त्रिलोकात्मा कामस्सर्वेश्वरेश्वरः ।

विश्वंभरः स्थिराभश्चाऽच्युतः पुरुषोत्तमः ॥ १२॥

अधोक्षजोऽक्षयस्सेव्यो वनमाली प्रकंपनः ।

गुरुर्लोकगुरुस्स्रष्टा परंज्योतिः परायणः ॥ १३॥

ज्वालाहोबिलमालोल-क्रोडाकारञ्जभार्गवाः ।

योगनन्दश्चत्रवटः पावनो नवमूर्तयः ॥ १४॥

॥ श्री नृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

(जो भक्त इस स्तोत्र का नित्य पाठ करता है, वह जीवन के सभी सुखों को भोगकर अंत में भगवान श्रीहरि के परम धाम को प्राप्त होता है।)

🌟 वास्तु और ज्योतिषीय रहस्य: स्तोत्र के रोज़ाना पाठ के लाभ

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, इस स्तोत्र के श्लोकों की ध्वनि तरंगें (Sound Vibrations) सीधे तौर पर कुंडली में बैठे ‘राहु-केतु’ और उग्र ‘मंगल’ जैसे क्रूर ग्रहों के दुष्प्रभाव को भस्म कर देती हैं।

यदि आपके घर के दक्षिण (South) या नैऋत्य (South-West) भाग में वास्तु दोष है, जिससे आए दिन कोर्ट केस, दुर्घटनाएं या धन हानि होती है, तो इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ उस दोष को बेअसर कर देता है। जीवन में चारों ओर से सफलता, आर्थिक मजबूती और अनजाने भय से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु के साक्षात स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) को गले में धारण करना एक अमोघ ज्योतिषीय ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है।

⚠️ स्तोत्र पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for Daily Path)

  1. आसन और दिशा: आज जयंती पर शाम को पाठ करें। लेकिन रोज़ाना पाठ करने के लिए सुबह स्नान के बाद लाल या पीले कुशा के आसन पर पूर्व (East) दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. संकल्प और जल: पाठ शुरू करने से पहले एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा जल रख लें। पाठ पूरा होने के बाद उस अभिमंत्रित जल को घर के कोनों में छिड़क दें, इससे ‘नेगेटिव एनर्जी’ तुरंत बाहर निकल जाती है।
  3. सात्विकता: भगवान नृसिंह उग्र देवता हैं। जो साधक रोज़ाना इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का पूर्ण त्याग कर देना चाहिए।

Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: शतनामावली (अलग-अलग नाम) और शतनाम स्तोत्र में क्या अंतर है?

Ans: शतनामावली में 108 नामों का “ॐ” लगाकर अलग-अलग जाप किया जाता है (जैसे फूल चढ़ाते समय)। जबकि ‘शतनाम स्तोत्र’ में उन्हीं 108 नामों को संस्कृत श्लोकों में पिरोया गया है, जिसे लयबद्ध तरीके से गाया या पढ़ा जा सकता है।

Q2: क्या महिलाएं इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?

Ans: जी हाँ, परिवार की सुख-शांति और पति-बच्चों की रक्षा के लिए महिलाएं पूर्ण श्रद्धा के साथ इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ कर सकती हैं। (मासिक धर्म के दौरान पाठ न करें)।

Q3: आज की पूजा में भगवान को क्या भोग लगाएं?

Ans: भगवान के उग्र रूप को शांत करने के लिए आज उन्हें शीतल चीजें जैसे भीगी हुई चने की दाल, गुड़, पंचामृत और ठंडे फलों का भोग अवश्य लगाएं।

निष्कर्ष: भगवान नृसिंह का यह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र आपके परिवार के लिए एक अभेद्य ‘कवच’ के समान है। आज 30 अप्रैल 2026 को नृसिंह जयंती के परम शुभ अवसर पर Freeupay.in पर दिए गए इस सिद्ध स्तोत्र का पाठ अवश्य करें और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।

अभी तुरंत शेयर करें: आज ही नृसिंह जयंती है! इस ‘चमत्कारी स्तोत्र’ को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि आज शाम की पूजा में हर कोई इस महा-उपाय का लाभ उठा सके।

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment

Call Us Now
WhatsApp
We use cookies in order to give you the best possible experience on our website. By continuing to use this site, you agree to our use of cookies.
Accept