Giriraj Ji Ki Aarti: दिवाली के अगले दिन श्री गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती हैं। गोवर्धन हमारे हिन्दू धर्म में वैष्णव जातीयता के लिए एक पवित्र स्थान है। जो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आता हैं। यंहा आपको गोवर्धन पर्वत के दर्शन भी हो जायेगे यंहा विश्व भर से लोग दर्शन के लिए आते हैं ! यंहा पर श्री गिरिराज जी की आरती उतारी जाती हैं। Shri Giriraj Ji Ki Aarti आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
Giriraj Ji Ki Aarti: श्री गिरिराज जी की आरती, रोज़ाना गाने से घर में होगी अपार धन-धान्य की वर्षा
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हिन्दू धर्म के अनुसार मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस आरती को भक्ति और श्रद्धा के साथ अपने घर में या गोवर्धन परिक्रमा के दौरान ‘गिरिराज जी की आरती’ (Shri Giriraj Ji Ki Aarti) गाता है, उसके जीवन से दरिद्रता, रोग और हर प्रकार के संकट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। गिरिराज जी महाराज अपने भक्तों को अचल संपत्ति और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें गिरिराज जी की संपूर्ण आरती, इसे करने के सटीक नियम और अचूक लाभ।
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🌺 क्विक लिस्ट: गिरिराज जी की आरती करने के 5 चमत्कारिक लाभ (Giriraj Ji Ki Aarti Benefits)
गिरिराज जी की आरती (Giriraj Ji Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना गिरिराज जी महाराज की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | गिरिराज जी की आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| अपार धन और अचल संपत्ति | गिरिराज जी महाराज की कृपा से घर में अन्न और धन के भंडार कभी खाली नहीं होते। प्रॉपर्टी से जुड़े रुके हुए काम पूरे होते हैं। |
| पारिवारिक शांति | घर-क्लेश और विवाद खत्म होते हैं, परिवार के सदस्यों में प्रेम और एकता बढ़ती है। |
| संकटों से रक्षा | जैसे भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा की थी, वैसे ही यह आरती हर प्राकृतिक या आकस्मिक संकट से बचाती है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | रोज़ सुबह पूजा के समय या गोधूलि बेला (शाम के समय) शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 श्री गिरिराज की आरती (Shri Giriraj Ji Ki Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गिरिराज महाराज का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें और इस पावन आरती का गान करें:
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ओउम जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज।
संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज।। ओउम जय ।।
इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौ ध्यान धरैं।
रिषि मुनिजन यश गावें, ते भव सिन्धु तरैं।। ओउम जय ।।
सुन्दर रूप तुम्हारौ श्याम सिला सोहें।
वन उपवन लखि-लखि के भक्तन मन मोहे।। ओउम जय।।
मध्य मानसी गंग कलि के मल हरनी।
तापै दीप जलावें, उतरें वैतरनी।। ओउम जय।।
नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन-पावन सुखकारी।
बायें राधा कुण्ड नहावें महा पापहारी।। ओउम जय।।
तुम्ही मुक्ति के दाता कलियुग के स्वामी।
दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तरयामी।। ओउम जय।।
हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी।
देवकीनन्दन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी।। ओउम जय।।
जो नर दे परिकम्मा पूजन पाठ करें।
गावें नित्य आरती पुनि नहिं जनम धरें।। ओउम जय।।
(आरती पूर्ण होने के बाद गिरिराज जी को साष्टांग प्रणाम करें, कर्पूर या दीपक की लौ से आरती लें और जयकारा लगाएं- “बोलिए गिरिराज महाराज की जय!”)
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🌟 घर में सुख-शांति और संपत्ति वृद्धि का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि गोवर्धन पर्वत (गिरिराज जी) साक्षात ‘पृथ्वी तत्व’ और भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप हैं। जब कुंडली में ‘बुध’ और ‘शुक्र’ कमज़ोर होते हैं, तो व्यक्ति का अपना घर (Property) नहीं बन पाता और घर में हमेशा कलह रहती है।
इन ग्रहों को मजबूत करने, घर में अचल संपत्ति बनाने और साक्षात भगवान विष्णु व कृष्ण की कृपा पाने के लिए ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। 10 मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु के दसों अवतारों का प्रतीक है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना गिरिराज जी की आरती करने से व्यक्ति के जीवन के 10 प्रकार के पाप और सभी बाधाएं तुरंत समाप्त हो जाती हैं।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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⚠️ गिरिराज जी की आरती करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान (Rules for reciting Giriraj Ji Ki Aarti)
- स्वच्छता और भोग: आरती हमेशा खड़े होकर और पूर्ण श्रद्धा भाव से करनी चाहिए। गिरिराज जी को दूध, माखन-मिश्री या छप्पन भोग अति प्रिय है। आरती से पहले दूध और मिष्ठान का भोग अवश्य लगाएं।
- दीपक का चुनाव: गिरिराज जी की आरती के लिए हमेशा गाय के शुद्ध घी का दीपक (बत्ती) ही प्रयोग करें। कर्पूर से आरती करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
- मानसिक परिक्रमा: यदि आप गोवर्धन परिक्रमा नहीं कर सकते, तो आरती गाने के बाद अपने ही स्थान पर खड़े होकर 7 बार गोल घूमकर (मानसिक परिक्रमा) करें। इससे परिक्रमा का पूर्ण फल मिलता है।
Giriraj Ji Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: गिरिराज जी की आरती किस दिन करना सबसे शुभ होता है?
Ans: वैसे तो रोज़ाना आरती करना उत्तम है, लेकिन गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), एकादशी और पूर्णिमा के दिन गिरिराज जी की आरती करने का विशेष और अनंत पुण्य प्राप्त होता है।
Q2: घर में गोवर्धन महाराज की पूजा कैसे करें?
Ans: घर के मंदिर में गिरिराज जी की एक शिला (पत्थर) या तस्वीर रखें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं, रोली-चंदन का तिलक लगाएं, तुलसी दल अर्पित करें और फिर यह आरती गाएं।
Q3: गिरिराज महाराज को क्या चढ़ाना चाहिए?
Ans: आरती की पंक्तियों के अनुसार ही, गिरिराज जी को मुख्य रूप से कच्चा दूध, पान, फूल और मिठाई का भोग चढ़ाना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष: श्री गिरिराज जी की आरती (Giriraj Ji Ki Aarti) वह अचूक और दिव्य मार्ग है जो आपके जीवन में स्थिरता, संपत्ति और अपार खुशियां ला सकता है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपने घर में इस आरती का गान शुरू करें। भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज की कृपा से आपके घर के भंडार हमेशा भरे रहेंगे।
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