Dhumavati Ashtakam: यह तो आप सब जानते है की धूमावती महाविद्या दस महाविद्याओं में सातंवी स्थान की साधना मानी जाती हैं। धूमावती अष्टकम पढ़ने से साधक के समस्त शत्रु के स्तम्भन और नाश हो जाते हैं। धूमावती अष्टकम के पढ़ने से साधक के जीवन के चारों तरफ से घिरी हुई परेशानियां दूर होने लगती हैं, कोर्ट-कचहरी में हार का डर हो, या फिर किसी तांत्रिक अभिचार (काले जादू) के कारण से आपका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया हो और आपके स्वास्थ्य में अचानक से गिरावट आने वाली सभी प्रकार की परेशानियाँ एवं शत्रु जड़ से नष्ट हो जाते है। साधक का जीवन भय रहित होता हैं।
Dhumavati Ashtakam: मां धूमावती अष्टकम का अचूक पाठ, भयंकर शत्रुओं और कंगाली को तुरंत करेगा नष्ट
हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।
हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

हम यहाँ आपको सनातन धर्म के तंत्र शास्त्र में बताई गई 10 महाविद्या साधना में सातवीं शक्ति की ‘मां धूमावती’ (Maa Dhumavati) साधना के बारे मने बताने जा रहे हैं, जिसका स्वरूप एक वृद्ध विधवा का है, जो मलिन वस्त्र धारण करती हैं और कौवे पर सवार रहती हैं। इन्हें ‘अलक्ष्मी’ या दुर्भाग्य की देवी भी कहा जाता है, लेकिन तंत्र विज्ञान के अनुसार, जब कोई जातक अत्यंत संकट में होकर इनकी शरण में जाता है, तो माता उसके जीवन के सारे कष्टों, दरिद्रता और शत्रुओं को अपने सूप में फटक कर हमेशा के लिए बाहर कर देती हैं।
ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें
ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)।
‘धूमावती अष्टकम’ (Dhumavati Ashtakam) का पाठ एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर रक्षा करता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां धूमावती का संपूर्ण अष्टक, पाठ की सही विधि और तांत्रिक लाभ।
🌺 क्विक लिस्ट: धूमावती अष्टकम का पाठ करने के 5 अचूक लाभ (Dhumavati Ashtakam Benefits)
मां धूमावती अष्टकम (Dhumavati Ashtakam) पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए मां धूमावती के इस दिव्य अष्टक से आपके जीवन में क्या चमत्कारिक बदलाव आते हैं:
| जीवन का घोर संकट (Problem) | धूमावती अष्टकम के अचूक लाभ (Remedies & Benefits) |
| काले जादू और भयंकर तंत्र-मंत्र | इस अष्टक के प्रभाव से शरीर, घर और व्यापार पर किया गया बड़े से बड़ा मारण, सम्मोहन या उच्चाटन प्रयोग तुरंत निष्प्रभावी हो जाता है। |
| गुप्त शत्रुओं का षड्यंत्र | आपके विरुद्ध चाल चलने वाले शत्रु स्वयं ही भ्रमित होने लगते हैं और उनका अहंकार पूरी तरह चकनाचूर हो जाता है। |
| अकाल मृत्यु और दुर्घटना से रक्षा | यह अष्टक साधक के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा घेरा (Shield) बनाता है जिसे कोई भी बुरी शक्ति या नकारात्मक ऊर्जा भेद नहीं सकती। |
| घोर दरिद्रता और कंगाली से मुक्ति | माता दुर्भाग्य को घर से बाहर कर देती हैं, जिससे व्यापार में बरकत और धन की आवक के नए गुप्त स्रोत शुरू होते हैं। |
| अष्टकम पाठ का सर्वोत्तम समय | किसी भी शनिवार की रात (मध्यरात्रि 10 बजे के बाद) या धूमावती जयंती पर एकांत स्थान पर बैठकर। |
📿 श्री धूमावती अष्टकम (Maa Dhumavati Ashtakam Lyrics)
पूर्ण पवित्रता, असीम निर्भयता और पूर्ण गोपनीयता के साथ रात्रि के समय काले रंग के वस्त्र या आसन का प्रयोग करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और मां धूमावती का ध्यान करते हुए इस दिव्य अष्टकम (Dhumavati Ashtakam) का पाठ करें:
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें
ॐ प्रातर्वा स्यात कुमारी कुसुम-कलिकया जप-मालां जपन्ती।
मध्यान्हे प्रौढ-रुपा विकसित-वदना चारु-नेत्रा निशायाम।।
सन्ध्यायां ब्रिद्ध-रुपा गलीत-कुच-युगा मुण्ड-मालां वहन्ती।
सा देवी देव-देवी त्रिभुवन-जननी चण्डिका पातु युष्मान ।।१।।
बद्ध्वा खट्वाङ्ग कोटौ कपिल दर जटा मण्डलं पद्म योने:।
कृत्वा दैत्योत्तमाङ्गै: स्रजमुरसी शिर: शेखरं ताक्ष्र्य पक्षै: ।।
पूर्ण रक्त्तै: सुराणां यम महिष-महा-श्रिङ्गमादाय पाणौ।
पायाद वौ वन्ध मान: प्रलय मुदितया भैरव: काल रात्र्या ।।२।।
चर्वन्ती ग्रन्थी खण्ड प्रकट कट कटा शब्द संघातमुग्रम।
कुर्वाणा प्रेत मध्ये ककह कह हास्यमुग्रं कृशाङ्गी।।
नित्यं न्रीत्यं प्रमत्ता डमरू डिम डिमान स्फारयन्ती मुखाब्जम।
पायान्नश्चण्डिकेयं झझम झम झमा जल्पमाना भ्रमन्ती।।३।।
टण्टट् टण्टट् टण्टटा प्रकट मट मटा नाद घण्टां वहन्ती।
स्फ्रें स्फ्रेंङ्खार कारा टक टकित हसां दन्त सङ्घट्ट भिमा।।
लोलं मुण्डाग्र माला ललह लह लहा लोल लोलोग्र रावम्।
चर्वन्ती चण्ड मुण्डं मट मट मटितं चर्वयन्ती पुनातु।।४।।
वामे कर्णे म्रिगाङ्कं प्रलया परीगतं दक्षिणे सुर्य बिम्बम्।
कण्डे नक्षत्र हारं वर विकट जटा जुटके मुण्ड मालम्।।
स्कन्धे कृत्वोरगेन्द्र ध्वज निकर युतं ब्रह्म कङ्काल भारम्।
संहारे धारयन्ती मम हरतु भयं भद्रदा भद्र काली ।।५।।
तैलोभ्यक्तैक वेणी त्रयु मय विलसत् कर्णिकाक्रान्त कर्णा।
लोहेनैकेन् कृत्वा चरण नलिन कामात्मन: पाद शोभाम्।।
दिग् वासा रासभेन ग्रसती जगादिदं या जवा कर्ण पुरा-
वर्षिण्युर्ध्व प्रब्रिद्धा ध्वज वितत भुजा साSसी देवी त्वमेव।।६।।
संग्रामे हेती कृत्तै: स रुधिर दर्शनैर्यद् भटानां शिरोभी-
र्मालामाबध्य मुर्घ्नी ध्वज वितत भुजा त्वं श्मशाने प्रविष्टा।।
दृंष्ट्वा भुतै: प्रभुतै: प्रिथु जघन घना बद्ध नागेन्द्र कान्ञ्ची-
शुलाग्र व्यग्र हस्ता मधु रुधिर मदा ताम्र नेत्रा निशायाम्।।७।।
दंष्ट्रा रौद्रे मुखे स्मिंस्तव विशती जगद् देवी! सर्व क्षणार्ध्दात्सं
सारस्यान्त काले नर रुधिर वसा सम्प्लवे धुम धुम्रे।।
काली कापालिकी त्वं शव शयन रता योगिनी योग मुद्रा।
रक्त्ता ॠद्धी कुमारी मरण भव हरा त्वं शिवा चण्ड धण्टा।।८।।
।।फलश्रुती।।
ॐ धुमावत्यष्टकं पुण्यं, सर्वापद् विनिवारकम्।
य: पठेत् साधको भक्तया, सिद्धीं विन्दती वंदिताम्।।१।।
महा पदी महा घोरे महा रोगे महा रणे।
शत्रुच्चाटे मारणादौ, जन्तुनां मोहने तथा।।२।।
पठेत् स्तोत्रमिदं देवी! सर्वत्र सिद्धी भाग् भवेत्।
देव दानव गन्धर्व यक्ष राक्षरा पन्नगा: ।।३।।
सिंह व्याघ्रदिका: सर्वे स्तोत्र स्मरण मात्रत:।
दुराद् दुर तरं यान्ती किं पुनर्मानुषादय:।।४।।
स्तोत्रेणानेन देवेशी! किं न सिद्धयती भु तले।
सर्व शान्तीर्भवेद्! चानते निर्वाणतां व्रजेत्।।५।।
संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)
किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।
📿 श्री धूमावती अष्टकम (Maa Dhumavati Ashtakam Lyrics)
पूर्ण पवित्रता, असीम निर्भयता और पूर्ण गोपनीयता के साथ रात्रि के समय काले रंग के वस्त्र या आसन का प्रयोग करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और मां धूमावती का ध्यान करते हुए इस दिव्य अष्टकम (Dhumavati Ashtakam) का पाठ करें:
शत्रुनाशकरं दिव्यं सर्वरोगनिवारणम्।
धूमावत्यष्टकं पुण्यं सर्वसिद्धिप्रदायकम्॥ 1॥
विवर्णा चञ्चला कृष्णा दीर्घा च मलिनाम्बरा।
विमुक्तकुन्तला रूक्षा विधवा विरलद्विजा॥ 2॥
काकध्वजरथारूढा शूर्पहस्तातिरूक्षणी।
क्षुत्पिपासार्दिता नित्यं भयदा कलहास्पदा॥ 3॥
नमो नमस्ते सुखदे शरण्ये नमो नमस्ते चलचित्त रूपे।
नमो नमस्ते क्षुधिते त्रिनेत्रे धूमावति त्वां शरणं प्रपद्ये॥ 4॥
त्वं कालरात्रिस्त्वमदीर्घनासा त्वं घूर्णमाना च महाबला च।
त्वं श्मशानवासा नृकपालहस्ता धूमावति त्वां शरणं प्रपद्ये॥ 5॥
प्रसीद देवी परमेव रूपे प्रसीद विघ्नासुरनाशदक्षे।
प्रसीद शत्रून् कुरु भस्मसात्त्वं धूमावति त्वां शरणं प्रपद्ये॥ 6॥
इदं तु अष्टकं दिव्यं यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः।
तस्य शत्रोः क्षयो याति महासिद्धिश्च विन्दति॥ 7॥
दारिद्र्यं नश्यते तस्य रोगाः शाम्यन्ति तत्क्षणात्।
सत्यं सत्यं मयोक्तं हि भैरवेण प्रकीर्तितम्॥ 8॥
॥ इति श्री धूमावती अष्टकम् सम्पूर्णम् ॥
(पाठ पूर्ण होने के बाद माता से अपने ज्ञात-अज्ञात अपराधों की क्षमा याचना करें और अपनी रक्षा की प्रार्थना करें।)
🌟 केतु दोष, तंत्र बाधा और शत्रु शमन का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि तंत्र विज्ञान और वैदिक ज्योतिष में मां धूमावती का सीधा संबंध ‘केतु’ (Ketu) ग्रह की उग्र ऊर्जा और जीवन के संचित कठिन कर्मों से है। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में केतु नीच का होता है, या राहु-केतु मिलकर जीवन को पूरी तरह अशांत कर देते हैं, तो व्यक्ति अचानक गंभीर मुकदमों में फंस जाता है, उसे अज्ञात शत्रुओं का भय सताता है और घर में भयंकर तांत्रिक दोष महसूस होता है।
कुंडली के इन मायावी और मारक दोषों को 100% शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात महाविद्याओं की कृपा प्राप्त करने के लिए दस दिशाओं और दस महाविद्याओं का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे धारण करके धूमावती अष्टकम का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा घेरा बन जाता है जिसे ब्रह्मांड की कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
⚠️ मां धूमावती अष्टकम का पाठ करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान (Rules for Reciting Dhumavati Ashtakam)
चूंकि मां धूमावती दस महाविद्याओं में उग्र और विशिष्ट सत्ता हैं, इसलिए इनकी साधना में इन नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है:
- सुहागिन महिलाओं के लिए वर्जन: तंत्र शास्त्रों के अनुसार, सुहागिन महिलाओं (विवाहित स्त्रियों) को मां धूमावती की मूर्ति, तस्वीर या उग्र साधना घर में नहीं करनी चाहिए, क्योंकि माता स्वयं विधवा स्वरूप में हैं। महिलाएं केवल दूर से प्रार्थना कर सकती हैं। यह अष्टकम मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा या किसी योग्य मार्गदर्शक की देखरेख में ही पढ़ा जाना चाहिए।
- भोग और दिशा का नियम: माता धूमावती की पूजा करते समय मुख हमेशा दक्षिण (South) दिशा की ओर होना चाहिए। माता को नैवेद्य में मीठी चीज़ें नहीं चढ़ाई जातीं, बल्कि उड़द की दाल की खिचड़ी, नमकीन वस्तुएं या तीखे पकवान अर्पित किए जाते हैं।
- एकांत और पूर्ण गोपनीयता: इस अष्टक का पाठ कभी भी शोर-शराबे वाले स्थान या दिन के उजाले में न करें। मध्यरात्रि का समय और पूर्ण एकांत इसके लिए अनिवार्य है। घर के सामान्य पूजा स्थल पर इनकी तस्वीर भूलकर भी न रखें।
Dhumavati Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां धूमावती का सबसे प्रभावशाली मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध और अत्यंत तीव्र बीज मंत्र “धूं धूं धूमावती स्वाहा॥” है। अष्टकम पाठ के बाद इस मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जाप करना विशेष फलदायी होता Sky-rocket परिणाम देता है।
Q2: धूमावती अष्टकम का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
Ans: यदि शत्रुओं का भय बहुत अधिक हो या कोर्ट केस में फंसे हों, तो शनिवार से शुरू करके लगातार 21 दिनों तक रोज़ाना रात्रि में इस अष्टक का 3 या 7 बार पाठ करना चाहिए।
Q3: क्या धूमावती अष्टकम से नजर दोष दूर होता है?
Ans: जी हाँ! यह अष्टक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। इसके पाठ से व्यापार या घर को लगी बड़ी से बड़ी नजर और ऊपरी हवा तुरंत दूर हो जाती है।
निष्कर्ष: जीवन के सबसे कठिन दौर में जब मनुष्य अकेला पड़ जाता है, तब मां धूमावती की शरण ही एकमात्र सहारा बनती है। वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर कर उन्हें निर्भय कर देती हैं। Freeupay.in पर बताए गए इन नियमों और पूर्ण सावधानी के साथ इस अष्टक (Dhumavati Ashtakam) का पाठ करें। माता भवानी की कृपा से आपके जीवन की हर भयंकर बाधा और शत्रुओं का तुरंत नाश होगा।
वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
