Dhumavati Hriday Stotra: हमारे सनातन धर्म के तंत्र शास्त्र में वर्णित दस महाविद्याओं में से सातवीं शक्ति ‘मां धूमावती’ (Maa Dhumavati) को माना गया हैं। इस देवी का स्वरूप एक वृद्ध महिला का हैं, जिसने मलिन वस्त्र धारण किये हुए हैं और उग्र विधवा का रूप धारण किया हुआ है और हमेशा कौवे (Crow) पर सवार रहती हैं। इन्हें ‘अलक्ष्मी’ भी कहा जाता है, लेकिन तंत्र विज्ञान के अनुसार, जब साधक घोर विपत्ति में पड़कर इनके ‘हृदय स्तोत्र’ का गान करता है, तो माता उसके जीवन की सारी दरिद्रता, रोग, शोक और शत्रुओं को हमेशा के लिए अपने सूप में फटक कर बाहर कर देती हैं।
Dhumavati Hriday Stotra: धूमावती हृदय स्तोत्र का गुप्त पाठ, रातों-रात होगा भयंकर शत्रुओं और काले जादू का सर्वनाश
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जब जीवन में चारों तरफ से परेशानियां घेर लें, कोर्ट-कचहरी में हार का डर हो, या किसी तांत्रिक अभिचार (काले जादू) के कारण व्यापार पूरी तरह ठप हो गया हो, तब ‘धूमावती हृदय स्तोत्र’ (Dhumavati Hridayam) का पाठ एक अभेद्य तांत्रिक ढाल बनकर रक्षा करता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां धूमावती का संपूर्ण हृदय स्तोत्र, पाठ की सही विधि और तांत्रिक लाभ।
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🌺 क्विक लिस्ट: धूमावती हृदय स्तोत्र पाठ के 5 चमत्कारी लाभ (Dhumavati Hriday Stotra Benefits)
धूमावती हृदय स्तोत्र (Dhumavati Hriday Stotra) पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए मां धूमावती के इस सिद्ध स्तोत्र के पाठ से जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| जीवन का भयंकर संकट (Problem) | हृदय स्तोत्र पाठ के अचूक लाभ (Benefits) |
| काले जादू और भयंकर तंत्र-मंत्र | इस स्तोत्र के प्रभाव से शरीर या घर पर किया गया बड़े से बड़ा मारण, सम्मोहन या उच्चाटन प्रयोग तुरंत निष्प्रभावी हो जाता है। |
| गुप्त शत्रुओं का भयंकर षड्यंत्र | शत्रुओं की बुद्धि स्वयं ही भ्रमित होने लगती है और उनके वार निष्फल होकर उन्हीं पर लौट जाते हैं। |
| कोर्ट केस और कानूनी विवाद | झूठे मुकदमों (Court Cases) और कानूनी अड़चनों से मुक्ति मिलती है और निर्णय आपके पक्ष में आता है। |
| घोर दरिद्रता और भारी कर्ज | घर से दुर्भाग्य विदा होता है, जिससे कर्ज उतरता है और व्यापार में धन की आवक के नए मार्ग खुलते हैं। |
| पाठ का सर्वश्रेष्ठ दिन और समय | किसी भी शनिवार की रात (मध्यरात्रि 10 बजे के बाद) या धूमावती जयंती पर एकांत में। |
📿 श्री धूमावती हृदय स्तोत्रम् (Maa Dhumavati Hriday Stotra Lyrics in Sanskrit & Hindi)
पूर्ण पवित्रता, असीम निर्भयता और पूर्ण गोपनीयता के साथ रात्रि के समय काले रंग के आसन पर बैठें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मां धूमावती के उग्र स्वरूप का ध्यान करते हुए इस स्तोत्र (Dhumavati Hriday Stotra) का पाठ करें:
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
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ओं अस्य श्री धूमावतीहृदयस्तोत्र महामन्त्रस्य-पिप्पलादऋषिः- अनुष्टुप्छन्दः- श्री धूमावती देवता- धूं बीजं- ह्रीं शक्तिः- क्लीं कीलकं -सर्वशत्रु संहारार्थे जपे विनियोगः
करन्यासः –
ओं धां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ओं धीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ओं धूं मध्यमाभ्य़ां नमः ।
ओं धैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ओं धौं कनिष्ठकाभ्य़ां नमः ।
ओं धः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
अङ्गन्यासः –
ओं धां हृदयाय नमः ।
ओं धीं शिरसे स्वाहा ।
ओं धूं शिखायै वषट् ।
ओं धैं कवचाय हुं ।
ओं धौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ओं धः अस्त्राय फट् ।
ध्यानम् ।
धूम्राभां धूम्रवस्त्रां प्रकटितदशनां मुक्तबालाम्बराढ्यां ।
काकाङ्कस्यन्दनस्थां धवलकरयुगां शूर्पहस्तातिरूक्षाम् ।
कङ्काङ्क्षुत्क्षान्त देहं मुहुरति कुटिलां वारिदाभां विचित्रां ।
ध्यायेद्धूमावतीं कुटिलितनयनां भीतिदां भीषणास्याम् ॥ १ ॥
कल्पादौ या कालिकाद्याऽचीकलन्मधुकैटभौ ।
कल्पान्ते त्रिजगत्सर्वं भजे धूमावतीमहम् ॥ २ ॥
गुणागारा गम्यगुणा या गुणागुणवर्धिनी ।
गीतावेदार्थतत्त्वज्ञैः भजे धूमावतीमहम् ॥ ३ ॥
खट्वाङ्गधारिणी खर्वखण्डिनी खलरक्षसां ।
धारिणी खेटकस्यापि भजे धूमावतीमहम् ॥ ४ ॥
घूर्ण घूर्णकराघोरा घूर्णिताक्षी घनस्वना ।
घातिनी घातकानां या भजे धूमावतीमहम् ॥ ५ ॥
चर्वन्तीमस्तिखण्डानां चण्डमुण्डविदारिणीं ।
चण्डाट्टहासिनीं देवीं भजे धूमावतीमहम् ॥ ६ ॥
छिन्नग्रीवां क्षताञ्छन्नां छिन्नमस्तास्वरूपिणीं ।
छेदिनीं दुष्टसङ्घानां भजे धूमावतीमहम् ॥ ७ ॥
जाताया याचितादेवैरसुराणां विघातिनीं ।
जल्पन्तीं बहुगर्जन्तीं भजेतां धूम्ररूपिणीम् ॥ ८ ॥
झङ्कारकारिणीं झुञ्झा झञ्झमाझमवादिनीं ।
झटित्याकर्षिणीं देवीं भजे धूमावतीमहम् ॥ ९ ॥
हेतिपटङ्कारसम्युक्तान् धनुष्टङ्कारकारिणीं ।
घोराघनघटाटोपां वन्दे धूमावतीमहम् ॥ १० ॥
ठण्ठण्ठण्ठं मनुप्रीतां ठःठःमन्त्रस्वरूपिणीं ।
ठमकाह्वगतिप्रीतां भजे धूमावतीमहम् ॥ ११ ॥
डमरू डिण्डिमारावां डाकिनीगणमण्डितां ।
डाकिनीभोगसन्तुष्टां भजे धूमावतीमहम् ॥ १२ ॥
ढक्कानादेनसन्तुष्टां ढक्कावादनसिद्धिदां ।
ढक्कावादचलच्चित्तां भजे धूमावतीमहम् ॥ १३ ॥
तत्ववार्ता प्रियप्राणां भवपाथोधितारिणीं ।
तारस्वरूपिणीं तारां भजे धूमावतीमहम् ॥ १४ ॥
थान्थीन्थून्थेमन्त्ररूपां थैन्थोथन्थःस्वरूपिणीं ।
थकारवर्णसर्वस्वां भजे धूमावतीमहम् ॥ १५ ॥
दुर्गास्वरूपिणीदेवीं दुष्टदानवदारिणीं ।
देवदैत्यकृतध्वंसां वन्दे धूमावतीमहम् ॥ १६ ॥
ध्वान्ताकारान्धकध्वंसां मुक्तधम्मिल्लधारिणीं ।
धूमधाराप्रभां धीरां भजे धूमावतीमहम् ॥ १७ ॥
नर्तकीनटनप्रीतां नाट्यकर्मविवर्धिनीं ।
नारसिंहीं नराराध्यां न्ॐइ धूमावतीमहम् ॥ १८ ॥
पार्वतीपतिसम्पूज्यां पर्वतोपरिवासिनीं ।
पद्मारूपां पद्मपूज्यां न्ॐइ धूमावतीमहम् ॥ १९ ॥
फूत्कारसहितश्वासां फट्मन्त्रफलदायिनीं ।
फेत्कारिगणसंसेव्यां सेवे धूमावतीमहम् ॥ २० ॥
बलिपूज्यां बलाराध्यां बगलारूपिणीं वरां ।
ब्रह्मादिवन्दितां विद्यां वन्दे धूमावतीमहम् ॥ २१ ॥
भव्यरूपां भवाराध्यां भुवनेशीस्वरूपिणीं ।
भक्तभव्यप्रदां देवीं भजे धूमावतीमहम् ॥ २२ ॥
मायां मधुमतीं मान्यां मकरध्वजमानितां ।
मत्स्यमांसमदास्वादां मन्ये धूमावतीमहम् ॥ २३ ॥
योगयज्ञप्रसन्नास्यां योगिनीपरिसेवितां ।
यशोदां यज्ञफलदां यजेद्धूमावतीमहम् ॥ २४ ॥
रामाराध्यपदद्वन्द्वां रावणध्वंसकारिणीं ।
रमेशरमणीपूज्यामहं धूमावतीं श्रये ॥ २५ ॥
लक्षलीलाकलालक्ष्यां लोकवन्द्यपदाम्बुजां ।
लम्बितां बीजकोशाढ्यां वन्दे धूमावतीमहम् ॥ २६ ॥
बकपूज्यपदांभोजां बकध्यानपरायणां ।
बालान्तीकारिसन्ध्येयां वन्दे धूमावतीमहम् ॥ २७ ॥
शङ्करीं शङ्करप्राणां सङ्कटध्वंसकारिणीं ।
शत्रुसंहारिणीं शुद्धां श्रये धूमावतीमहम् ॥ २८ ॥
षडाननारिसंहन्त्रीं षोडशीरूपधारिणीं ।
षड्रसास्वादिनीं स्ॐयां नेवे धूमावतीमहम् ॥ २९ ॥
सुरसेवितपादाब्जां सुरसौख्यप्रदायिनीं ।
सुन्दरीगणसंसेव्यां सेवे धूमावतीमहम् ॥ ३० ॥
हेरम्बजननीं योग्यां हास्यलास्यविहारिणीं ।
हारिणीं शत्रुसङ्घानां सेवे धूमावतीमहम् ॥ ३१ ॥
क्षीरोदतीरसंवासां क्षीरपानप्रहर्षितां ।
क्षणदेशेज्यपादाब्जां सेवे धूमावतीमहम् ॥ ३२ ॥
चतुस्त्रिम्शद्वर्णकानां प्रतिवर्णादिनामभिः ।
कृतं तु हृदयस्तोत्रं धूमावत्यास्सुसिद्धिदम् ॥ ३३ ॥
य इदं पठति स्तोत्रं पवित्रं पापनाशनं ।
स प्राप्नोति परां सिद्धं धूमावत्याः प्रसादतः ॥ ३४ ॥
पठन्नेकाग्रचित्तोयो यद्यदिच्छति मानवः ।
तत्सर्वं समवाप्नोति सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥ ३५ ॥
इति धूमावतीहृदयम् ।
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📿 श्री धूमावती हृदय स्तोत्रम् (Maa Dhumavati Hriday Stotra Lyrics in Sanskrit & Hindi)
पूर्ण पवित्रता, असीम निर्भयता और पूर्ण गोपनीयता के साथ रात्रि के समय काले रंग के आसन पर बैठें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मां धूमावती के उग्र स्वरूप का ध्यान करते हुए इस स्तोत्र (Dhumavati Hriday Stotra) का पाठ करें:
॥ श्री भैरव उवाच ॥
शृणु देवि परं गुह्यं धूमावत्याः सुरेश्वरि।
हृदयं परमं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ॥ 1॥
ॐ अस्य श्रीधूमावतीहृदयस्तोत्रमन्त्रस्य पिप्पलाद ऋषिः,
निवृत् छन्दः, श्रीधूमावती देवता, धूं बीजं, स्वाहा शक्तिः,
मम सर्वशत्रुविनाशार्थे जपे विनियोगः।
ॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा शिरो मे पातु सर्वदा।
विवर्णा पातु मे भालं भृकुटीं मलिनाम्बरा ॥ 2॥
दीर्घा मे पातु नेत्रे च कर्णावन्नप्रदायिनी।
चञ्चला पातु मे नासां मुखं मे पातु मोहिनी ॥ 3॥
काकध्वजरथारूढा कण्ठं मे पातु सर्वदा।
शूर्पहस्ता भुजौ पातु हृदयङ्कलहप्रिया ॥ 4॥
क्षुत्पिपासार्दिता पातु नाभिं मे परमेस्वरी।
रूक्षाक्ष्या पातु मे गुह्यं ऊरू मे पातु भीषणा ॥ 5॥
जानुनी पातु मे देवी पादौ मे पातु भैरवी।
सर्वाङ्गं पातु मे नित्यं धूमावती महाबला ॥ 6॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं तु हृदयं दिव्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
यः पठेद्भक्तिभावेन तस्य शत्रुर्विनाशयेत् ॥ 7॥
दारिद्र्यं नश्यते तस्य रोगाः शाम्यन्ति तत्क्षणात्।
सत्यं सत्यं मयोक्तं हि भैरवेण प्रकीर्तितम् ॥ 8॥
॥ इति श्री धूमावती हृदय स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
(पाठ पूर्ण होने के बाद माता से अपने ज्ञात-अज्ञात अपराधों की क्षमा याचना करें और अपनी रक्षा की प्रार्थना करें।)
🌟 केतु दोष, तंत्र बाधा और शत्रु शमन का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि तंत्र विज्ञान और वैदिक ज्योतिष में मां धूमावती का सीधा संबंध ‘केतु’ (Ketu) ग्रह की उग्र ऊर्जा और जीवन के संचित कठिन कर्मों से है। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में केतु नीच का होता है, या राहु-केतु मिलकर जीवन में मारक स्थितियां (जैसे कालसर्प या ग्रहण दोष) पैदा कर देते हैं, तो व्यक्ति अचानक गंभीर मुकदमों में फंस जाता है, उसे अज्ञात शत्रुओं का भय सताता है और घर में भयंकर तांत्रिक दोष महसूस होता है।
कुंडली के इन मायावी दोषों को 100% शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात महाविद्याओं की पूर्ण कृपा प्राप्त करने के लिए साक्षात भगवान विष्णु और दस महाविद्याओं का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे धारण करके धूमावती हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य तांत्रिक सुरक्षा घेरा बन जाता है जिसे ब्रह्मांड की कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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⚠️ मां धूमावती हृदय स्तोत्र पाठ के 3 अत्यंत कड़े नियम (Rules for Reciting Dhumavati Hriday Stotra)
चूंकि मां धूमावती दस महाविद्याओं में सबसे उग्र सत्ता हैं, इसलिए इनकी साधना में इन नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है:
- सुहागिन महिलाएं दूर रहें: तंत्र शास्त्रों के अनुसार, सुहागिन महिलाओं (विवाहित स्त्रियों) को मां धूमावती की स्तुति, उग्र साधना या पाठ नहीं करना चाहिए, क्योंकि माता स्वयं विधवा स्वरूप में हैं। महिलाएं केवल दूर से मानसिक प्रार्थना कर सकती हैं। यह पाठ मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा या विशेष तांत्रिक मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
- दिशा और भोग का नियम: माता धूमावती की पूजा करते समय साधक का मुख हमेशा दक्षिण (South) दिशा की ओर होना चाहिए। माता को मीठे का भोग नहीं लगता, उन्हें उड़द की खिचड़ी, नमकीन वस्तुएं या तीखे पकवान अत्यंत प्रिय हैं।
- पूर्ण एकांत और मध्यरात्रि: इस स्तोत्र का पाठ कभी भी दिन के उजाले में, परिवार के बीच या शोर-शराबे वाले स्थान पर न करें। मध्यरात्रि का अंधकार और पूर्ण एकांत इसके लिए अनिवार्य है। माता की तस्वीर को घर के मुख्य मंदिर में स्थापित नहीं किया जाता है।
Dhumavati Hriday Stotra Lyrics in Sanskrit & Hindi❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां धूमावती का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध और अत्यंत तीव्र बीज मंत्र “धूं धूं धूमावती स्वाहा॥” है। स्तोत्र पाठ के बाद इस मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करना विशेष फलदायी होता है।
Q2: धूमावती हृदय स्तोत्र का पाठ कब शुरू करना चाहिए?
Ans: यदि शत्रुओं का भय बहुत अधिक हो या कोर्ट केस में फंसे हों, तो किसी भी ‘शनिवार’ की रात से या ‘चतुर्दशी’ तिथि से एकांत में बैठकर इस स्तोत्र का निरंतर पाठ शुरू करना चाहिए।
Q3: क्या मां धूमावती केवल विनाशकारी देवी हैं?
Ans: नहीं! वे दुष्टों, शत्रुओं और तांत्रिक बाधाओं के लिए विनाशकारी हैं, लेकिन अपने सच्चे साधकों के लिए वे करुणा की सागर हैं जो भक्त को असीम सिद्धियां, धन और निर्भयता प्रदान करती हैं।
निष्कर्ष: जीवन के सबसे अंधकारमय और कठिन दौर में जब मनुष्य अकेला पड़ जाता है, तब मां धूमावती की शरण ही एकमात्र सहारा बनती है। वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर कर उन्हें अभय दान देती हैं। Freeupay.in पर बताए गए इन नियमों और पूर्ण सावधानी के साथ इस स्तोत्र (Dhumavati Hriday Stotra) का गान करें। माता भवानी की कृपा से आपके जीवन की हर भयंकर बाधा और शत्रुओं का तुरंत अंत होगा।
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