Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026: 19 मार्च को बन रहा 72 साल बाद महा-संयोग, नोट करें कलश स्थापना का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026: हिंदू धर्म में माँ दुर्गा शक्ति की उपासना और ऊर्जा का सबसे बड़ा पर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ की शुरुआत बहुत ही जल्द होने जा रही हैं। यह तो आप सब जानते है, की इसी दिन से हमारा ‘हिंदू नव वर्ष’ (विक्रम संवत 2083) की भी शुरुवात होती है।
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इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुवात 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से हो रही है, और जिसका समापन 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) (रामनवमी) को होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस दिन नवरात्रि का पर्व शुरू हो रहा हैं (19 मार्च), उसी दिन सूर्योदय के समय ‘अमावस्या’ तिथि भी रहेगी और इसके बाद सुबह 06:52 बजे से ‘प्रतिपदा’ तिथि लगेगी। यह 72 सालों के बाद एक बेहद और दुर्लभ संयोग बन रहा है।
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चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) करने का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। कहा जाता हैं, की गलत मुहूर्त में रखा गया नवरात्रि कलश स्थापना आपके घर में अशुभ परिणाम ला सकती है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त, संपूर्ण सामग्री लिस्ट और कलश स्थापित करने की वैदिक विधि यहां बताई जा रही है।
🕰️ चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना 2026 का सटीक ‘शुभ मुहूर्त’ (Shubh Muhurat)
हिन्दू पंचांग और वैदिक गणनाओं के अनुसार, 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए तीन सबसे उत्तम मुहूर्त बन रहे हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी समय घटस्थापना कर सकते हैं:
| विवरण (Event details) | तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time) |
| चैत्र नवरात्रि प्रारंभ | 19 मार्च 2026 (गुरुवार) |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 19 मार्च, सुबह 06:52 बजे से |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 20 मार्च, सुबह 04:52 बजे तक |
| घटस्थापना (कलश स्थापना) का पहला मुहूर्त | सुबह 06:54 बजे से 07:50 बजे तक (मीन लग्न) (अवधि: 56 मिनट) |
| घटस्थापना (कलश स्थापना) का दूसरा मुहूर्त | सुबह 11:24 बजे से 01:38 बजे तक (मिथुन लग्न) (अवधि: 58 मिनट) |
| दूसरा मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) | दोपहर 12:11 बजे से 12:59 बजे तक (अवधि: 48 मिनट) |
(नोट: कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। दोपहर बाद या राहुकाल में कलश स्थापित करना शास्त्रों में वर्जित है।)
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🕰️ चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना 2026 (Choghadiya Muhurat 19 मार्च 2026)
19 मार्च को नीचे बताये गये समय पर चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना कर सकते है:
| मुहूर्त का प्रकार (Muhurat Type) | समय (Time) | स्थिति (Status) |
| सुबह का मुहूर्त (Shubh Choghadiya) | सुबह 06:54 से 08:05 बजे तक | ✅ उत्तम |
| सुबह का मुहूर्त (Char Choghadiya) | सुबह 11:05 बजे से 12:34 बजे तक | ✅ सामान्य |
| दोपहर का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | दोपहर 12:35 बजे से 02:03 बजे तक | ✅ शुभ एवं उन्नति |
| दोपहर का मुहूर्त (Amrut Choghadiya) | दोपहर 02:04 बजे से 03:32 बजे तक | ✅ सर्वोत्तम |
| सांय का मुहूर्त (Shubh Choghadiya) | सांय 05:03 बजे से 06:31 बजे तक | ✅ उत्तम |
| अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | दोपहर 12:11 बजे से 12:59 बजे तक | 🌟 सर्वश्रेष्ठ |
| राहुकाल (Rahu Kaal) | दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक | ❌ वर्जित (पूजा न करें) |
📋 घटस्थापना के लिए 10 जरूरी चीजें (Kalash Sthapana Samagri List)
नवरात्रि के पहले दिन बाजार में बहुत भीड़ होती है, इसलिए कलश स्थापना की ये सामग्री एक दिन पहले (18 मार्च) ही घर ले आएं:
- कलश: एक मिट्टी, तांबे या पीतल का लोटा (स्टील या प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें) या फिर कलश होना चाहिए।
- मिट्टी और जौ: जौ बोने के लिए एक मिट्टी का सकोरा (बर्तन), साफ मिट्टी और जौ (Barley) बोने के लिए होने चाहिए।
- पल्लव: कलश के मुख पर लगाने के लिए आम या अशोक के 5 या 7 ताजे पत्ते।
- नारियल: एक जटा वाला पानी भरा हुआ नारियल।
- कपड़ा: नारियल पर लपेटने और माता रानी के लिए एक लाल रंग की चुनरी और चौकी पर बिछाने के लिए सवा मीटर लाल कपड़ा।
- कलश में डालने के लिए: गंगाजल, एक सिक्का (सिल्वर/कॉपर), एक साबुत सुपारी, हल्दी की गांठ और थोड़ी सी दूर्वा (दूब)।
- अन्न और श्रृंगार: कलश के ढक्कन पर रखने के लिए चावल (अक्षत) और माता के लिए सिंदूर, मोली (कलावा)।
📅 चैत्र नवरात्रि स्थापना 2026 की तिथियां (Vrat Dates 2026)
नवरात्रि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चलती है।
- 19 मार्च 2026: नवरात्र की प्रथम तिथि को देवी के “शैलपुत्री” रूप का पूजन किया जाता है।
- 20 मार्च 2026: नवरात्र की द्वितीया तिथि को देवी “ब्रह्मचारिणी” रूप की पूजा की जाती है।
- 21 मार्च 2026: नवरात्र की तृतीया तिथि को देवी दुर्गा के “चंद्रघंटा” रूप की आराधना की जाती है।
- 22 मार्च 2026: नवरात्र की चतुर्थी तिथि को मां भगवती के “देवी कूष्मांडा” रूप की उपासना की जाती है।
- 23 मार्च 2026: नवरात्र की पंचमी तिथि को भगवान कार्तिकेय की “माता स्कंदमाता” रूप की पूजा की जाती है।
- 24 मार्च 2026: नवरात्र की षष्ठी तिथि को “माँ कात्यायनी” की पूजा की जाती है।
- 25 मार्च 2026: नवरात्र की सप्तमी तिथि को “माँ कालरात्रि” रूप की पूजा की जाती है।
- 26 मार्च 2026: नवरात्र की अष्टमी तिथि को “माँ महागौरी” रूप की पूजा की जाती है। इस दिन बहुत से लोग कन्या पूजन भी कर देते है।
- 27 मार्च 2026: नवमी तिथि को “देवी सिद्धदात्री” रूप की पूजा की जाती है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान और पूजा पूर्ण हो जाती है।
🌺 चैत्र नवरात्रि साधना (Navratri Sadhana)
चैत्र नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा व साधना करते हैं। यह सारी साधना करने की विधि आप इस वेबसाइट में पढ़ सकते हो।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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🙏 कलश स्थापना की स्टेप-बाय-स्टेप वैदिक विधि (How to do Ghatasthapana)
19 मार्च की सुबह स्नान करने के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करें और इस सरल विधि से कलश स्थापित करें:
- दिशा का चुनाव: घर के मंदिर या ईशान कोण (North-East direction) को अच्छे से साफ करके वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- जौ बोना: चौकी पर थोड़े से चावल (अक्षत) रखकर अष्टदल कमल बनाएं। उसके ऊपर मिट्टी का सकोरा रखें। इसमें मिट्टी और जौ मिलाकर भर दें (थोड़ा जल छिड़कें)।
- कलश तैयार करना: कलश (लोटे) पर मोली (कलावा) बांधें और उस पर रोली से ‘स्वास्तिक’ बनाएं। कलश को शुद्ध जल और गंगाजल से भर दें।
- कलश के अंदर: जल भरे कलश में सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और दूर्वा डाल दें।
- पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते रखें। एक मिट्टी के ढक्कन में चावल भरकर उसे कलश पर रखें। अब लाल कपड़े और मोली में लपेटे हुए जटा वाले नारियल को सबसे ऊपर स्थापित कर दें। (ध्यान रहे: नारियल का मुख आपकी ओर होना चाहिए)।
- आवाहन: हाथ जोड़कर भगवान गणेश और माता शैलपुत्री का ध्यान करें और 9 दिनों तक कलश में विराजमान रहने की प्रार्थना करें। इसके बाद माता की आरती करें।
🌟 वास्तु और ज्योतिष के अनुसार कलश स्थापना का महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि नवरात्रि का कलश पूरे ब्रह्मांड और उसमें मौजूद ऊर्जा का प्रतीक है।
- राहुकाल का त्याग: जैसा कि आपको ऊपर पहले ही बता दिया गया है, की 19 मार्च को दोपहर 1:30 से 3:00 के बीच घटस्थापना कदापि न करें।
- दिशा: चैत्र नवरात्रि के लिए कलश स्थापना हमेशा ईशान कोण दिशा (North-East) में ही करना शुभ माना जाता है।
- नारियल का मुख: कलश के ऊपर रखा जाने वाले नारियल का मुख (जहाँ से वह पेड़ से जुड़ा होता है) हमेशा पूजा करने वाले व्यक्ति की तरफ होना चाहिए।
- रुद्राक्ष: जो भक्त इन 9 दिनों तक माता की पूजा के समय गौरी-शंकर रुद्राक्ष या 9 मुखी रुद्राक्ष (जो माता दुर्गा का ही स्वरूप है) धारण करते हैं, उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है और हर प्रकार के भय का नाश होता है।
Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: कलश स्थापना के बाद क्या कलश को हिला सकते हैं?
Ans: बिल्कुल नहीं! एक बार शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित हो जाने के बाद उसे 9 दिनों तक अपने स्थान से हिलाना नहीं चाहिए। विसर्जन के दिन (दशमी को) ही इसे हटाया जाता है।
Q2: यदि सुबह का मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?
Ans: यदि आप सुबह 06:54 से 07:50 के बीच कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो आप दोपहर में ‘अभिजीत मुहूर्त’ (12:11 PM से 12:59 PM) के बीच आराम से घटस्थापना कर सकते हैं। यह बहुत ही शुभ समय होता है।
Q3: कलश स्थापना के समय कौन सा मंत्र पढ़ें?
Ans: कलश स्थापित करते समय देवी के नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का निरंतर मानसिक जाप करना चाहिए।
निष्कर्ष: चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर है। 19 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताए गए इस सटीक मुहूर्त और प्रामाणिक विधि से कलश स्थापना करें। माता भवानी आपके घर को सुख, शांति और अपार धन-धान्य से भर देंगी।
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