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Gangaur Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi 2026: रोज़ाना ईसर-गौर की पूजा में गाएं यह ‘पावन गणगौर माता आरती’, मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान

Gangaur Mata Ki Aarti 2026: गणगौर पूजा में रोज़ाना गाएं माता की यह पावन आरती, शिव-पार्वती भर देंगे खुशियों से झोली

Gangaur Mata Ki Aarti 2026: हिंदू धर्म में दांपत्य जीवन (Married Life) की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए ‘गणगौर’ का पर्व सबसे बड़ा माना जाता है। होली (धुलंडी) के अगले दिन से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक, पूरे 16 दिनों तक सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं शिव जी (ईसर जी) और माता पार्वती (गौरी) की पूजा करती हैं।

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Gangaur Mata Ki Aarti
Gangaur Mata Ki Aarti 2026

शास्त्रों के अनुसार, कोई भी पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक कि अंत में भगवान की आरती न उतारी जाए। गणगौर माता की पूजा के बाद उनकी आरती (Gangaur Aarti) गाने से घर में सुख-शांति आती है और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न होती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें गणगौर माता की संपूर्ण आरती और उसे करने की सही विधि।

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🪔 श्री गणगौर माता की आरती (Gangaur Mata Aarti Lyrics in Hindi)

सुबह और शाम की गणगौर पूजा संपन्न होने के बाद, कपूर या गाय के घी का दीपक जलाकर पूरे परिवार या सहेलियों के साथ मिलकर माता की यह गणगौर आरती गाएं:

म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी

म्हारी मालण फुलडा से लाय।

सूरज जी थाको आरत्यों जी

चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी।

ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी

ईसर जी थाको आरत्यो जी।

थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू

पान की पचास मेलू।

पीली पीली मोहरा मेलू , रुपया मेलू

डेड सौ सुपारी मेलू , मोतीडा रा आखा मेलू।

राजा जी रो सुवो मेलू , राणी जी री कोयल मेलू

करो न भाया की बहना आरत्यो जी।

करो न सायब की गौरी आरत्यो जी।।

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🪔 श्री गणगौर की आरती (Gangaur Aarti Lyrics in Hindi)

जय गणगौर माता, मैया जय गणगौर माता।

तुम शिव की अर्धांगिनी, जग की भाग्य विधाता॥

मैया जय गणगौर माता…

माथे पर तेरे मुकुट विराजे, कानों में कुंडल साजे।

लाल चुनरिया ओढ़े मैया, रूप तेरा अति भावे॥

मैया जय गणगौर माता…

ईसर जी के संग विराजो, गौरा रूप सुहावन।

सोलह दिन तक पूजें तुमको, मन हो जाए पावन॥

मैया जय गणगौर माता…

सुहागिनें मांगें अखंड सौभाग्य, कन्याएं वर मनचाहा।

जो भी ध्यावे मन से तुमको, तुमने पार लगाया॥

मैया जय गणगौर माता…

रोली, मोली, दूब, अक्षत से, हम सब करें तुम्हारी पूजा।

इस जग में हे मात भवानी, तुम सा देव न दूजा॥

मैया जय गणगौर माता…

आरती गणगौर माता की, जो कोई नर-नारी गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, मन वांच्छित फल पावे॥

मैया जय गणगौर माता…

(आरती के बाद: “बोलो ईसर-गौर महाराज की जय! बोलो गणगौर माता की जय!”)

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🌟 प्रसिद्ध ज्योतिषी की सलाह: आरती का ज्योतिषीय लाभ

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि गणगौर माता (माता पार्वती) की आरती में एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का काम करती है। जो महिलाएं या कन्याएं रोज़ाना कपूर (Camphor) को जलाकर यह गणगौर की आरती पढ़ती हैं, उनकी कुंडली में ‘शुक्र’ (Venus) और ‘बृहस्पति’ (Jupiter) ग्रह अत्यंत मजबूत होने लगते हैं। इससे वैवाहिक जीवन की हर कड़वाहट दूर होती है, पति के प्रति प्रेम बढ़ता है और न हो रही शादी या फिर शादी में आ रही रुकावटें हमेशा के लिए खत्म होने लगती हैं।

🌸 आरती करते समय रखें इन 3 बातों का ध्यान (Aarti Rules)

गणगौर माता की आरती का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करें:

  1. दीपक कैसा हो? गणगौर की आरती हमेशा संभव हो तो गाय के शुद्ध घी के दीपक या कपूर को जलाकर ही करनी चाहिए। तेल का दीपक इस पूजा में वर्जित माना जाता है।
  2. आरती की थाली: आरती करते समय थाली में थोड़ी सी रोली, चावल, थोड़े से ताजे फूल और दूर्वा (दूब) जरूर रखनी चाहिए।
  3. आरती लेने की विधि: आरती गाने के बाद सबसे पहले ईसर-गौर को आरती देनी चाहिए, फिर जल से तीन बार आचमन (जल वारना) करें और अंत में सभी महिलाएं और कन्याएं को आरती लेनी चाहिए।

Gangaur Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: गणगौर की आरती दिन में कितनी बार करनी चाहिए?

Ans: परंपरा के अनुसार, गणगौर माता की पूजा सुबह जल्दी (सूर्योदय के आसपास) और शाम को (गोधूलि बेला में) की जाती है। अतः दोनों समय पूजा के बाद आरती करनी चाहिए।

Q2: क्या आरती के साथ लोकगीत (Geet) भी गाए जाते हैं?

Ans: जी हाँ! गणगौर राजस्थान और उत्तर भारत का प्रमुख लोकपर्व है। इसलिए आरती से पहले माता के लोकगीत (जैसे- ‘गोर गोर गोमती’, ‘ईसर जी तो पेचो बांधे’) गाना बहुत शुभ माना जाता है।

Q3: आरती में कपूर का प्रयोग क्यों किया जाता है?

Ans: कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और वास्तु दोष खत्म होते हैं। शिव और पार्वती दोनों को कपूर की सुगंध अत्यंत प्रिय है (कर्पूरगौरं करुणावतारं)।

निष्कर्ष: ईसर-गौर की पूजा प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। आज ही से Freeupay.in पर दी गई इस आरती को रोज़ाना अपनी पूजा में शामिल करें। गणगौर माता आपके घर को खुशियों और अखंड सौभाग्य से भर देंगी।

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