Gangaur Puja Geet 2026: गणगौर पूजा में रोज़ाना गाएं ये पावन राजस्थानी लोकगीत, शिव-पार्वती भर देंगे खुशियों से झोली
Gangaur Puja Geet 2026: यह तो आप सबा जानते हैं की सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य हेतु के लिए और कुंवारी कन्याओं के मनचाहे वर की प्राप्ति का महापर्व ‘गणगौर’ त्यौहार की शुरुवात हो चुकी है। पूरे 16 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर जी) की मिट्टी की मूर्तियों की पूजा की जाती है।
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खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में गणगौर की पूजा बिना लोकगीतों (Folk Songs) के बिल्कुल अधूरी मानी जाती है। पूजा के दौरान जब महिलाएं दूब (दूर्वा) से माता को जल के छींटे देती हैं और रोली-काजल की टीकी लगाती हैं, तो विशेष गीत गाए जाते हैं। Freeupay.in के इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं 5 सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक ‘गणगौर गीत’ (लिरिक्स सहित), जिन्हें गाकर आप माता को आसानी से प्रसन्न कर सकती हैं।
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🎶 1. गणगौर प्रार्थना गीत” (Prarthna Geet Lyrics)
गणगौर पूजा करते समय इस गीत से गणगौर की प्रार्थना की जाती है।
गौरि ए गणगौरी माता! खोल किवाड़ी‘
बाहर उबी थारी पुजनवाली।
पूजो ए पूजाओ बाई, काई – काई! मांगों?
अन्न मांगों, धन मांगों, लाछ मांगों, लछमी।।
जलहर जामी बाबल माँगा रातादेई माई।
कान कुंवर सो बीरों माँगा राई सी भोजाई।
ऊंट चढ्यो बहणेंई माँगा चुडला वाली बहणल।।
🎶 2. गणगौर पूजन का गीत (Pujan Geet Lyrics)
गणगौर पूजन करते समय इस गीत को गाया जाता है।
गौर – गौर गणपति ईसर पूजे पार्वती।
पार्वती का आला गीला, गौर का सोना का टिका ,
टिका दे, टमका दे, राजा रानी बरत करे,
करता करता, आस आयो वास आयो,
खेरो खांडो लाडू लायो,
लाडू ले बीरा न दियो, बीरो म्हाने चुनड दी,
चुनड को में बरत करयो,
सन मन सोला, ईसर गोरजा,
दोनु जौड़ा, जोर ज्वार,
रानी पूजे राज में, मैं पूजा सुहाग में,
रानी को राज घटतो जाई, म्हाखो सुहाग बढतों जाय,
किडी किडी कीड़ो ल्याय, किडी थारी जात दे,
जात दे, गुजरात दे, गुजरात्या को पानी,
दे दे थम्बा तानी, ताणी का सिघडा, बारी का बुजारा
म्हारो भाई एम्ल्यो खेम्ल्यो,
सेर सिंघाड़ा ल्यो, पेफ का फूल ल्यो,
सूरज जी को डोरों ल्यो, सोना को कचोलो ल्यो,
गणगौर पूज ल्यो।
🎶 3. सबसे प्रमुख पूजा गीत: “गोर-गोर गोमती” (Gor Gor Gomati Lyrics)
यह गणगौर का सबसे मुख्य गीत है। सुबह जब माता को दूब (घास) से जल चढ़ाया जाता है, तब यह गीत 16 बार गाया जाता है:
गोर-गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती पार्वती का आला-टीका, गौर सोने का टीखा।
देवे भम्बाळ, सोने का झाळ।
म्हारी गौर तिंवरयां, ओछी-ओछी पान्या।
कटे-कटे दीवो, रानी बरत करयो।
करतो-करतो आस आयो, मास आयो।
खेरे-खांडे लाडू लायो, लाडू ले बीरा ने दियो।
बीरो ले मने चुनरी ओढ़ाई, ओढ़-ओढ़ गौरज्यां माता पीहर गई।
पीहर जाके क्या किया? पीहर जाके ईसर जी रा गुण गाया!!
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🎶 4. ईसर जी का गीत: “ईसर जी तो पेचो बांधे” (Isar Ji Geet)
यह गीत भगवान शिव (ईसर जी) और माता पार्वती के प्रेम को दर्शाता है। इसे पूजा के बीच में गाया जाता है:
ईसर जी तो पेचो बांधे, गौरां बाई पेंच संवारे।
म्हारी गौरां बाई नखराली, ईसर जी रा मन भायी॥
ईसर जी तो घोड़ल्या बैठे, गौरां बाई रथड़ा बैठे।
म्हारी गौरां बाई नखराली, ईसर जी रा मन भायी॥
ईसर जी तो महल बिराजे, गौरां बाई चोवड़ बैठे।
म्हारी गौरां बाई नखराली, ईसर जी रा मन भायी॥
🎶 5. माता को टीकी (बिंदी) लगाने का गीत
जब माता को दूब से रोली, मेहंदी और काजल की 16-16 बिंदियां (टीकी) लगाई जाती हैं, तब यह गीत गाएं:
टीकी म्हारी टीकी, ईसर जी री गौर की टीकी।
पहली टीकी रोली की, सुहाग की, भाग की।
दूजी टीकी मेहंदी की, रंग की, रूप की।
तीजी टीकी काजल की, नजर की, डगर की।
सोलह टीकी पूरण होय, गौर माता प्रसन्न होय॥
🎶 6. गणगौर माता को पानी पिलाने का गीत
पूजन के बाद जब ईसर-गौर को पानी पिलाया जाता है (जल अर्पित किया जाता है), तो महिलाएं यह गीत गाती हैं:
गौरा बाई पाणीडे ने चालो, हँसती खेलती पाणीडे ने चालो।
सोने की झारी में पाणी भर ल्याओ, ईसर जी ने पाणी पिलाओ।
ठंडो-ठंडो पाणी पीवो म्हारी गौर, सुहाग अमर राखो म्हारी गौर॥
🎶 7. माता की विदाई का गीत (उद्यापन के दिन)
चैत्र शुक्ल तृतीया को जब गणगौर माता को विसर्जित (विदाई) किया जाता है, तब यह भावुक गीत गाया जाता है:
भंवर म्हाने खेलन दो गणगौर, भंवर म्हाने पूजण दो गणगौर।
ओ जी म्हारी सखियां जोवे बाट, भंवर म्हाने खेलन दो गणगौर…
आज तो पूजूं म्हारी लाडली गणगौर, काल तो सिरावां म्हारी लाडली गणगौर॥
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🎶 8. सोलह बार गणगौर पूजने के बाद पाटे धोने का गीत गाते हैं
पाटा धोने का गीत
पाटो धोय पाटो धोय, बीरा की बहन पाटो धो,
पाटा ऊपर पिलो पान, महे जास्या बीरा की जान,
जान जास्या, पान खास्या, बीरा न परनार ल्यास्या,
अली गली में साँप जाय , भाभी थारो बाप जाय,
अली गली गाय जाय, भाभी तेरी माय जाये,
दूध में डोरों, म्हारो भाई गोरो,
खाट पर खाजा, म्हारो भाई राजा,
थाली में जीरो म्हारो भाई हीरो,
थाली में हैं, पताशा बीरा करे तमाशा,
ए खेले नंदी बैल, ओ पानी कठे जासी राज,
आधो जासी अली गली, आधो ईसर न्हासी राज,
ईसर जी तो न्हाय लिया, गौर बाई न्हासी राज,
गौरा बाई रे बेटो जायो, भुवा बधाई ल्याई राज,
अरदा तानो परदा तानो, बंदरवाल बंधाओ राज,
सार की सुई पाट का धागा, भुआ बाई के कारने भतीजा रहगया नागा,
नागा नागा काई करो और सिवास्या बागा,
ओडा खोडो का गीत,
ओडो छे खोड़ो छे घुघराए, रानियारे माथे मोर,
ईसर दास जी, गौरा छे घुघराए रानियारे माथे मोर….
[इसी प्रकार पुरे परिवार के सदस्यों का नाम ले]
इसी के साथ आरत्या भी करे।
एक बड़े दिये में एक कोढ़ी, सुपारी, चांदी की अगुठी और एक रुपया डाल कर उसमे थौड़ा पानी डाल कर लोटे के ऊपर रख कर आरती गाये।
🌟 प्रसिद्ध ज्योतिषी की सलाह: लोकगीतों का ज्योतिषीय महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि गणगौर पूजा के लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि ये शक्तिशाली ‘ध्वनि मंत्र’ (Sound Mantras) के रूप में भी काम करते हैं। जब कई सुहागिन महिलाएं एक साथ ताली बजाकर ऊपर बताये गये गीतों को श्रद्धा भाव के साथ में गाती हैं, तो उस स्थान की ऊर्जा (Aura) पूरी तरह सकारात्मक हो जाती है। जातक की जन्मकुंडली में शुक्र (Venus) ग्रह बलवान होने लगता है, जो आगे चलकर जातक के दांपत्य जीवन में अपार प्रेम, आकर्षण और सुख-शांति लेकर आता है।
Gangaur Puja Geet 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: ‘गोर गोर गोमती’ गीत कितनी बार गाना चाहिए?
Ans: पारंपरिक रूप से पूजा के समय माता को जल के छींटे देते हुए यह गीत लगातार 16 बार गाया जाता है।
Q2: क्या कुंवारी लड़कियां भी ये गीत गा सकती हैं?
Ans: बिल्कुल! कुंवारी लड़कियां भी 16 दिन तक गणगौर पूजती हैं। ये गीत गाने से उन्हें ईसर जी (शिव) जैसा सुयोग्य और प्रेम करने वाला वर प्राप्त होता है।
Q3: अगर गीतों की लय (Tune) न पता हो तो क्या करें?
Ans: अगर आपको राजस्थानी लोकगीतों की धुन नहीं आती है, तो आप इन्हें एक साधारण कविता या स्तुति की तरह भी श्रद्धा भाव से पढ़ सकती हैं। माता पार्वती केवल भक्त का भाव देखती हैं।
निष्कर्ष: गणगौर का पर्व हमारी संस्कृति और अखंड प्रेम की पहचान है। रोज़ाना की पूजा में Freeupay.in पर दिए गए इन पावन लोकगीतों को ज़रूर शामिल करें। ईसर-गौर आपके परिवार को सुख, समृद्धि और अमर सुहाग का वरदान देंगे।
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