Gangaur Puja Muhurat 2026: 21 मार्च को मनेगा मुख्य गणगौर पर्व, जानिए सिंजारा की डेट और पूजा का सबसे सटीक ‘शुभ मुहूर्त’
Gangaur Puja Muhurat 2026: सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर का 16 दिवसीय पावन पर्व ‘गणगौर’ चल रहा है। 4 मार्च (होली के अगले दिन) से शुरू हुई ईसर-गौर की यह दैनिक पूजा अपने चरम (समापन) की ओर बढ़ रही है।
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गणगौर व्रत का मुख्य और अंतिम दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (Gauri Teej) को मनाया जाता है। इसी दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके व्रत रखती हैं, माता की विदाई (विसर्जन) करती हैं और सिंजारा मनाया जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में जानें साल 2026 में मुख्य गणगौर की सही तारीख, सिंजारा का दिन और पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त।
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🕰️ गणगौर पूजा 2026: मुख्य तारीख और शुभ मुहूर्त (Important Dates & Time)
हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस साल के चैत्र मास को शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को आ रही है। इसी दिन गणगौर का मुख्य पर्व और उद्यापन और विसर्जन किया जाएगा:
| विवरण (Event) | तारीख और समय (Date & Time) |
| सिंजारा (Sinjara Date) | 20 मार्च 2026 (शुक्रवार) |
| मुख्य गणगौर पूजा (Gauri Teej) | 21 मार्च 2026 (शनिवार) |
| चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि आरंभ | 21 मार्च 2026, रात 02:31 बजे से |
| चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त | 21 मार्च 2026, रात 11:56 बजे तक |
| सुबह की पूजा का ‘सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त’ | सुबह 06:31 बजे से 08:42 बजे तक |
(नोट: 21 मार्च को सुबह के इस शुभ मुहूर्त में ही ईसर-गौर को अंतिम बार पानी पिलाया जाएगा और सुहाग की टीकी लगाई जाएगी।)
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🎁 गणगौर से एक दिन पहले ‘सिंजारा’ (Sinjara – 20 मार्च 2026)
मुख्य गणगौर पर्व से ठीक एक दिन पहले यानी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ‘सिंजारा’ का पर्व मनाया जाता है। इस साल सिंजारा पर्व को 20 मार्च (शुक्रवार) के दिन मनाया जायेगा।
- क्या है सिंजारा? नवविवाहित लड़कियों के लिए उनके मायके से और जिन भी लड़कियों की सगाई हो चुकी है, तो उनके ससुराल से कपड़े, गहने, मिठाई (घेवर) और सुहाग का सामान (मेहंदी) आदि को भेजा जाता है। इसे ही सिंजारा कहते हैं।
- मेहंदी का नियम: 20 मार्च की रात को सभी सुहागिन महिलाएं और लड़कियां अपने हाथों और पैरों में मेहंदी जरूर लगाती हैं, क्योंकि इसे माता पार्वती का आशीर्वाद माना जाता है।
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🌸 21 मार्च: अंतिम पूजा और विसर्जन की विधि (Visarjan Vidhi)
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि 21 मार्च (शनिवार) को किए जाने वाले विसर्जन में कुछ ज्योतिषीय और पारंपरिक नियमों का पालन करने से दांपत्य जीवन में अपार खुशियां आती हैं:
- सुबह की विदाई पूजा: 21 मार्च की सुबह 06:31 से 08:42 बजे के बीच ईसर-गौर की विधिवत पूजा करें। उन्हें मीठे गुणे, चूरमा या हलवे का भोग लगाएं।
- सुहाग लेना: विसर्जन के लिए घर से निकलने से पहले, ईसर-गौर के चढ़ाए गए सिंदूर (रोली) से अपनी मांग जरूर भरें। इसे माता पार्वती से “सुहाग लेना” कहते हैं।
- शाम को विसर्जन: शाम के समय (गोधूलि बेला में), गाजे-बाजे और गणगौर के लोकगीत (“भंवर म्हाने खेलन दो गणगौर”) गाते हुए मिट्टी की मूर्तियों को किसी पवित्र कुएं, बावड़ी या नदी में प्रवाहित (विसर्जित) कर दें। विसर्जन के बाद ही पानी पीकर अपना व्रत खोलें।
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Gangaur Puja Muhurat 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: गणगौर व्रत कब खोला जाता है?
Ans: 21 मार्च (शनिवार) को शाम के समय ईसर-गौर का जल में विसर्जन करने के बाद, माता का प्रसाद (सीरा या चूरमा) खाकर और पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
Q2: जो लोग 16 दिन पूजा नहीं कर पाए, वे क्या करें?
Ans: अगर आप 16 दिनों तक रोज़ाना पूजा नहीं कर पाई हैं, तो आप केवल मुख्य दिन (21 मार्च) को ईसर-गौर की पूजा करके और कथा सुनकर भी गणगौर का पूरा पुण्य प्राप्त कर सकती हैं।
Q3: सिंजारा के दिन क्या खाना चाहिए?
Ans: सिंजारा (20 मार्च) के दिन घेवर, फीणी और मीठे पकवान खाने की परंपरा है। इस दिन घर में कोई भी नमकीन या कड़वी चीज़ खाने से बचना चाहिए।
निष्कर्ष: गणगौर भारतीय संस्कृति में स्त्री-आस्था और अखंड प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है। 21 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताए गए इस सटीक मुहूर्त में पूरे हर्षोल्लास के साथ माता गौरी की पूजा और विदाई करें। शिव-पार्वती आपके घर को खुशियों से भर देंगे।
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