Gangaur Puja Vidhi 2026: 16 दिनों तक रोज़ाना ऐसे करें ईसर-गौर की पूजा, माता पार्वती देंगी अखंड सौभाग्य का वरदान
Gangaur Puja Vidhi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (होली के अगले दिन) से लेकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक, पूरे 16 दिनों तक ‘गणगौर’ का पावन पर्व मनाया जाता है। ‘गण’ यानी भगवान शिव (ईसर जी) और ‘गौर’ यानी माता पार्वती।
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गणगौर तीज पूजा कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व एवं पूजा विधि गणगौर एक त्योहार है जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। होली के दूसरे दिन यानी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से जो नवविवाहिताएं प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं, वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं और दूसरे दिन सायंकाल के समय उनका विसर्जन कर देती हैं। यह व्रत विवाहिता लड़कियों के लिए पति का अनुराग उत्पन्न कराने वाला और कुमारियों को उत्तम पति देने वाला है। इससे सुहागिनों का सुहाग अखंड रहता है।
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सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं शिव जैसे सुयोग्य और प्रेम करने वाले वर की प्राप्ति के लिए 16 दिन तक ईसर-गौर को पूजती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानें कि इन 16 दिनों तक रोज़ाना सुबह गणगौर माता की पूजा कैसे करनी चाहिए और इसके क्या नियम हैं।
📋 गणगौर पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट (Puja Samagri)
गणगौर पूजा शुरू करने से सबसे पहले अपनी थाली में नीचे बताई गई ये आवश्यक चीज़ें जरूर रख लें:
| सामग्री (Items) | विवरण (Details) |
| मूर्तियां | कुम्हार के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से बने हुए ईसर जी और गौरी जी की मूर्ति। |
| पवित्र जल | एक तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल। |
| टीकी लगाने के लिए | रोली (कुमकुम), सूखी मेहंदी, हल्दी और काजल। |
| छींटे देने के लिए | दूब (दूर्वा घास) का एक छोटा सा गुच्छा और एक चांदी का अंगूठी, छल्ला या कौड़ी। |
| भोग और अन्य | गेहूं की बालियां, ताजे फूल, दीपक (घी का), और मीठा भोग (गुड़/चूरमा)। |
| अन्य सामग्री | गणगौर पूजा में होली की राख़, एक टोकरी, फुल, चार कटोरियां, चावल, एक मिट्टी की कटोरी, हल्दी की गांठ, साबुत सुपारी, एक कौड़ी, एक छोटे किनारे की थाली। पाटे (चौकी) पर लाल कपड़ा। |
🙏 रोज़ाना की गणगौर पूजा विधि (Step-by-Step Gangaur Puja Vidhi)
इन 16 दिनों तक रोज़ाना सुबह (सूर्योदय के आसपास) स्नान करके साफ कपड़े पहनें और इस विधि से गणगौर पूजा करें:
- कब करें: गणगौर पूजा का आरम्भ फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक की जाती है। होली के दुसरे दिन से गणगौर पूजा की जाती हैं। यह पूजा सोलह दिन तक चलती हैं। नवविवाहिताएं अपने सुहाग के लिए शादी के बाद की पहली गणगौर की विशेष रूप से पूजा करती हैं। होली के दुसरे दिन स्नान करके होली की राख़ और कुम्हार के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से ईसर जी और गौरी जी की मूर्ति और आठ गणगौर बनाई जाती हैं। टोकरी में दूब बिछा कर इन गणगौरों को रख दिया जाता हैं। इसके बाद उन्हें छोटे छोटे कपड़ों से लपेट देते हैं।
- स्थापना एवं दिशा: पूर्व दिशा की दिवार के पास एक साफ लकड़ी के पाटे (चौकी) पर लाल कपड़ा बिछाकर ईसर-गौर (शिव-पार्वती) की मूर्तियों और गणगौर की स्थापित को विराजमान करें। (दीवार पर भी गणगौर और ईसर का चित्र बना सकते है)
- जल के छींटे (पाणी पिलाना): एक लोटे में जल भर लें उसके ऊपर दूब और फुल रख लें। इसके बाद अपने हाथ में दूब (घास) का गुच्छा लें। अब उसमें चांदी का छल्ला फंसाएं। अब लोटे के जल में दूब को डुबोकर ईसर-गौर को 16 बार जल के छींटे दें। इस दौरान आपको “गोर-गोर गोमती” (दूब वाला गीत) गीत गाएं।
- 16 टीकी का नियम (सबसे महत्वपूर्ण): अलग अलग चार कटोरियाँ में हल्दी, रोली, मेहंदी, और काजल की एक डिबिया लेकर दीवार पर इन सभी से अलग अलग सोलह बिंदिया लगाई जाती हैं। एक कागज या दीवार पर (जहाँ पूजा कर रही हैं) माता के नाम की 16-16 बिंदियां (टीकी) लगाई जाती हैं:
- सबसे पहले रोली की 16 टीकी लगाएं।
- फिर मेहंदी की 16 टीकी लगाएं।
- फिर हल्दी की 16 टीकी लगाएं।
- अंत में काजल की 16 टीकी लगाएं।(कुंवारी कन्याएं 16 की जगह 8-8 टीकी ही लगाती हैं)।
- बिंदी लगाने के बाद पूजा ख़त्म करके ही उठाना चाहिए। एक मिटटी की कटोरी में थोडा सा जल, एक हल्दी की गांठ, कौड़ी, चांदी की अंगूठी और थोड़ी सी दूब रख लें।
- गणगौर के फुल चढाने के बाद सवेर का गीत गाए। गणगौर की पूजा दो महिलाएं को जोड़े से करनी चाहिए। दोनों महिलाये एक दुसरे की छोटी अंगुली से हाथ पकड़ लेती हैं। गणगौर पूजा पूरी करने के बाद ही हाथ से जोड़ा छोड़ा हैं। यदि किसी महिला का जोड़ा नहीं हैं तो वह अपनी चूड़ी या चुनड़ी को पकड़कर भी जोड़ा ले सकती हैं। दोनों हाथों में दूब लेकर मिटटी की कटोरी को थाली से थोडा सा उठाकर धीर धीरे हिलाते हैं और और खेल वाला गीत गाते हैं। इसके बाद दूब से पाटा धोते हैं और पाटा धोने का गीत गाते हैं और गणगौर पूजा हैं।
- भोग और सुहाग सामग्री: माता गौरी को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी अर्पित करें और ईसर जी को जनेऊ व वस्त्र रूपी कलावा चढ़ाएं। इसके बाद मीठे का भोग लगाएं।
- कथा और आरती: पूजा अर्चना के अंत में हाथ में गेहूं के दाने लेकर ‘गणगौर की व्रत कथा’ पढ़ें। इसके बाद कपूर या घी का दीपक जलाकर गणगौर माता की आरती पढ़ें।
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🌸 गणगौर पूजा कैसे करे (Gangaur Puja)
गणगौर की पूजा करने के लिए सोलह बार पूजा का गीत गाते जाते हैं और बीच बीच में दूब को जल के लोटे में डुबोकर गणगौर को जल का छींटा मारते हैं। जब एक बार यह गीत हो जाय तो पाटे पर एक बिंदी लगा दें। इस तरह जब सोलह बिंदी लग जाए तो गणगौर पूजा हो जाती हैं।
🎶 गणगौर पूजा का गीत (Gangaur Geet)
गौर-गौर गणपति ईसर पूजे पार्वती,
पार्वती का आला टीला, गोर का सोना का टीला,
टीला दे, टमका दे, राजा रानी बरत करे,
करता करता, आस आयो मास,
आयो, खेरे खांडे लाडू लायो,
लाडू ले बीरा ने दियो, बीरो ले गटकायो,
साड़ी में सिंगोड़ा, बाड़ी में बिजोरा,
सान मान सोला, ईसर गोरजा,
दोनों को जोड़ा, रानी पूजे राज में,
दोनों का सुहाग में,
रानी को राज घटतो जाय,
म्हारो सुहाग बढ़तो जाय,
किडी किडी किडो दे,
किडी थारी जात दे,
जात पड़ी गुजरात दे,
गुजरात थारो पानी आयो,
दे दे खंबा पानी आयो,
आखा फूल कमल की डाली,
मालीजी दूब दो, दूब की डाल दो
डाल की किरण, दो किरण मन्जे
एक, दो, तीन, चार, पांच, छ:, सात, आठ,
नौ, दस, ग्यारह, बारह, तेरह, चौदह, पंद्रह, सोलह।
यह गीत सोलह बार गाने के बाद गणगौर की आरती करें। आरती का गीत गाने के बाद हाथ खोले लें। और एक हाथ में दूब को गणगौर पर चढ़ा दें। दुसरे हाथ की दूब को हाथ में ही रखें और गणगौर की कहानी पढ़ें या सुनें।
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📖 गणगौर व्रत का उद्यापन विधि (Udyapan Vidhi)
यदि आप गणगौर व्रत का उद्यापन करने के लिए सोलह सुहागन स्त्रियों को समस्त सोलह शृंगार की वस्तुएं देकर भोजन चाहिए। इसके बाद गौरी जी की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए। कथा सुनने के बाद बाद देवी गौरी जी पर चढ़ाए हुए सिन्दूर से स्त्रियां को अपनी मांग भरनी चाहिए। फिर उसके बाद उन्हें केवल एक बार भोजन करके गणगौर व्रत का उद्यापन कर दिया जाता है। गणगौर का प्रसाद पुरुषों के लिए वर्जित है।
🌟 दांपत्य जीवन के लिए ज्योतिषीय महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि गणगौर की पूजा दांपत्य जीवन (Married Life) के हर वास्तु दोष और ग्रह दोष को दूर करने का सबसे शक्तिशाली उपाय है। दूब (दूर्वा) से माता को जल अर्पित करने से कुंडली में ‘बुध’ और ‘शुक्र’ ग्रह मजबूत होते हैं। इससे पति-पत्नी के बीच आकर्षण, प्रेम और आपसी समझ में जबरदस्त वृद्धि होती है। यह व्रत वैवाहिक जीवन के तनाव को जड़ से खत्म कर देता है।
⚠️ गणगौर पूजा के 3 सख्त नियम (Do’s and Don’ts)
गणगौर पूजा का व्रत अन्य सभी व्रतों से थोड़ा सा अलग होता है, इसलिए नीचे बताये गये इन नियमों का पालन अवश्य करें:
- प्रसाद का नियम: गणगौर माता को जो भी भोग या प्रसाद चढ़ाया जाता है, उसे केवल पूजा करने वाली महिलाएं या कन्याएं ही खा सकती हैं। इसे पुरुषों (पति या भाई) को देना सख्त वर्जित माना गया है।
- गुप्त व्रत: यह व्रत पति से छिपाकर (गुप्त रूप से) रखा जाता है। पति को पूजा की सामग्री या व्रत के बारे में नहीं बताया जाता।
- विसर्जन (उद्यापन): 16वें दिन (चैत्र शुक्ल तृतीया) को सुहाग के गीत गाते हुए मिट्टी के ईसर-गौर को किसी पवित्र नदी, कुएं या सरोवर में विसर्जित किया जाता है।
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Gangaur Puja Vidhi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या इन 16 दिनों में रोज़ व्रत रखना होता है?
Ans: नहीं, 16 दिनों तक केवल रोज़ सुबह पूजा की जाती है। निर्जला (बिना पानी का) व्रत केवल अंतिम दिन यानी चैत्र शुक्ल तृतीया (मुख्य गणगौर) के दिन ही रखा जाता है।
Q2: अगर पीरियड्स (मासिक धर्म) आ जाएं तो पूजा कैसे करें?
Ans: पीरियड्स के दौरान आप खुद पूजा नहीं कर सकतीं। ऐसे में आप अपनी जगह किसी अन्य महिला या कुंवारी कन्या से अपनी ईसर-गौर की पूजा करवा सकती हैं और दूर बैठकर कथा सुन सकती हैं।
Q3: कुंवारी लड़कियां 8 टीकी क्यों लगाती हैं?
Ans: परंपरा के अनुसार, कुंवारी कन्याएं 8 टीकी (बिंदी) लगाती हैं, जबकि सुहागिन महिलाएं पूरा सुहाग मांगते हुए 16 टीकी लगाती हैं।
निष्कर्ष: गणगौर केवल मिट्टी की मूर्तियों की पूजा नहीं है, यह शिव और पार्वती के शाश्वत प्रेम को अपने जीवन में उतारने का अवसर है। रोज़ाना सुबह Freeupay.in पर बताई गई इस विधि से पूजा करें। ईसर-गौर महाराज आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे।
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