Maa Shailputri Vrat Katha 2026: पूर्व जन्म में कौन थीं माँ शैलपुत्री? पूजा में पढ़ें यह कथा, अखंड सौभाग्य का मिलेगा वरदान
Maa Shailputri Katha 2026: इस साल में 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरूवात हो रही है। नवरात्रि का पहला दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप ‘माँ शैलपुत्री’ (Maa Shailputri) को समर्पित होती है।
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धर्म शास्त्रों के अनुसार, कहा जाता है की किसी भी व्रत और पूजा का पूर्ण फल तभी व्यक्ति को मिलता है जब आप उस देवी की कथा (Story) को सुनते या पढ़ते हैं। यह आप जानते हो की माँ शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में कौन थीं? Freeupay.in के इस लेख में आप पढ़ें माँ शैलपुत्री की संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा।
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📖 माँ शैलपुत्री व्रत कथा (The Legend of Maa Shailputri)
माँ शैलपुत्री पूजा कथा पढ़ने से पहले हाथ में फूल और अक्षत (चावल) लेकर नीचे दी गई इस कथा को पढ़ें:
पूर्व जन्म: सती और दक्ष प्रजापति
एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, लेकिन शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहां जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।
अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारण से हमसे नाराज हैं अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, लेकिन हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है कोई सूचना तक नहीं भेजी है ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना सही नहीं होगा।
शंकरजी के यह कहने से भी सती नहीं मानी उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहां जाने की अनुमति दे दी सती ने पिता के घर पहुंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।
यज्ञ में अपमान और आत्मदाह
परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत दुख पहुंचा यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।
सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं।
शैलपुत्री का जन्म
माता सती ने अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय (शैल) के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया था। ‘शैल’ का अर्थ होता है पर्वत, और पर्वत की बेटी होने के कारण से उनका नाम ‘शैलपुत्री’ रखा गया है। इन्हें ‘पार्वती’ और ‘हेमवती’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस जन्म में भी उन्होंने कठोर तप और तपस्या करके भगवान शिव को ही पति के रूप में पाया है। नवरात्रि के पहले दिन इन्हीं माता की पूजा अर्चना की जाती है क्योंकि ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम स्थान रखती हैं।
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🙏 माँ शैलपुत्री व्रत कथा पढ़ने की विधि (How to Read)
19 मार्च को पूजा कथा पढ़ने एवं सुनने के दौरान:
- अपने हाथ में व्यक्ति को लाल फूल और थोड़े चावल लेने चाहिए।
- फिर ऊपर दी गई कथा को श्रद्धापूर्वक के साथ पढ़ें या सुनें।
- कथा समाप्त होने के बाद हाथ में लिए गये फूल और चावल को माँ शैलपुत्री के चरणों में अर्पित करें और बोलें— “हे माँ! मेरी पूजा स्वीकार करें।”
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🌟 माँ शैलपुत्री की महिमा (Significance)
- बैल की सवारी: माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प रहता है। और नंदी (बैल) पर सवार रहती हैं, जो धर्म और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- स्थिरता (Stability): पर्वत की तरह अडिग होने के कारण, इनकी पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है और व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटकता नहीं है। इसी कारण से नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी योग साधना प्रारंभ होती है।
- चंद्रमा का कारक: इस कथा को पढ़ने से व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा ग्रह मजबूत होता है और मन की घबराहट दूर होती है।
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Maa Shailputri Katha 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: माँ शैलपुत्री का प्रिय भोग क्या है?
Ans: कथा पढ़ने के बाद माँ को शुद्ध देशी घी का भोग लगाएं। इससे आरोग्य मिलता है।
Q2: माँ शैलपुत्री का मंत्र क्या है?
Ans: || ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः ||
Q3: यह शैलपुत्री कथा कब पढ़नी चाहिए?
Ans: कलश स्थापना और सामान्य पूजा के बाद, लेकिन आरती से ठीक पहले कथा पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष: माँ शैलपुत्री का जीवन हमें त्याग और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख देता है। 19 मार्च 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस कथा के साथ अपनी पूजा संपन्न करें। माँ भवानी आपकी झोली खुशियों से भर देंगी। आरती और मंत्र के लिए Freeupay.in के अन्य पेज देखें।
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