Mauni Amavasya Vrat Katha 2026: मौनी अमावस्या पर पढ़ें यह पौराणिक कथा, पितरों के आशीर्वाद से घर में आएगी सुख-समृद्धि
Mauni Amavasya Vrat Katha: माघ महीने में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस साल 2026 में यह पावन पर्व का दिन 18 जनवरी, रविवार के दिन को आ रहा है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, इस दिन ‘मौन’ (चुप) रहकर स्नान-दान करने और व्रत कथा पढ़ने का बहुत महत्त्व बताया कहा गया हैं, ऐसा करने से व्यक्ति को सहस्त्र गायों के दान जितना पुण्य का लाभ प्राप्त होता है।
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अक्सर लोगों को पूजा करते हुए देखा जाता हैं, परन्तु इस दिन की व्रत कथा (Vrat Katha) को पढ़ना भूल जाते हैं। इसलिए Freeupay.in के इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं मौनी अमावस्या की सबसे प्रचलित और प्रभावशाली कथा केवल यहां पर।
📖 मौनी अमावस्या व्रत कथा (The Legend of Soma Dhobin)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर ‘सोमा धोबिन’ की कथा पढ़ने का विशेष महत्व है। यह कथा इस प्रकार है:
विवाह और वैधव्य का योग
प्राचीन काल में कांचीपुरी नामक नगर में देवस्वामी नामक एक ब्राह्मण रहता था। उनकी धर्मपत्नी बहुत गुणवान थी। दम्पत्ति को 7 पुत्र और एक पुत्री थी। देवस्वामी ने अपनी पुत्री के विवाह लिए ज्योतिष से एक बार सलाह ली। ज्योतिष ने कुंडली देख ब्राह्मण को ग्रह दशा के बारे में बताया। इस दौरान ज्योतिष ने बताया कि विवाह के बाद कन्या वैधव्य योग के कारण से विधवा हो जाएगी। ज्योतिष की ये बात सुनते ही ब्राह्मण दंपत्ति चिंता में डूब गए। लेकिन ज्योतिष ने साथ ही उन्हें समस्या का समाधान भी बताया।
समुद्र पार की यात्रा
ज्योतिष ने ब्राह्मण को सलाह दी कि सिंहलद्वीप की धोबिन सोमा की पूजा करने से दोष दूर हो जाते हैं। देवस्वामी ने धोबिन को घर बुलाकर उनकी पूजा की ब्राह्मण देवस्वामी के अतिथि सत्कार से धोबिन प्रसन्न हो गई और उसने पुत्री के पति को जीवनदान दिया।
अखंड सौभाग्य का वरदान
कालांतर में जब ब्राह्मण की पुत्री के पति की मृत्यु हुई तो वे धोबिन के वरदान से पुनः जीवित हो उठा। किन्तु जब धोबिन की पूजा करने का पुण्य क्षीण हो गया, तो पुनः उसके पति की मृत्यु हो गई। उस समय ब्राह्मण दंपत्ति ने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा-उपासना की ऐसा करने से वे पुनः जीवित हो उठे।
सारांश: तभी से ऐसी मान्यता है कि जो भी मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर पीपल की पूजा करता है और यह व्रत कथा पढ़ता है, उसे अखंड सौभाग्य और लंबी आयु का वरदान मिलता है।
🙏 कथा पढ़ने की विधि (How to Read)
सभी व्यक्ति को 18 जनवरी (रविवार) को स्नान करने के बाद पूजा विधि करते समय ये कथा जरुर पढ़ें:
- कथा पढ़ने या सुनने से पहले हाथ में काले तिल, जौ और एक फूल रख लें।
- इस कथा को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर या फिर अपने घर के मंदिर में बैठकर ऊपर बताई गई कथा पढ़ें।
- कथा पूरी पढ़ने या सुनने के बाद हाथ में ली हुई सभी सामग्री को भगवान विष्णु या पीपल की जड़ में अर्पित कर दें।
- अंत में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अपनी सामर्थ अनुसार करें।
🌟 मौनी अमावस्या का महत्व (Significance)
- मौन का महत्व: इस दिन कम बोलने से व्यक्ति के अन्दर आत्मबल बढ़ता है।
- त्रिवेणी स्नान: इस दिन प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है।
- पितृ शांति: यह दिन हमारे पितरों को तर्पण देने के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है।
- तिल का महत्व: मौनी अमावस्या पर तिल का महत्व भी बढ़कर बताया गया है। सफेद तिल भगवान विष्णु को अतिप्रिय एवं काला तिल पितरों के तर्पण में प्रयोग होता है। अत: इस दिन देवों की तृप्ति के लिए सफेद तिल का एवं पितरों के लिए काले तिल का दान करना चाहिए। इसके साथ ही कपास एवं छत्री का दान करना भी शुभ फल देने वाला होता है।
- ऊनी वस्त्र का दान: इस दिनों शीत ऋतु अपने चरम पर होती है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को कंबलादि ऊनी वस्त्र दान देना चाहिए। किसी गरीब को यदि स्वेटर, कंबलादि का दान दिया जाता है, तो राहु एवं शनि की महादशा का अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसी दिन दूसरों के लिए अलाव जलाने से अग्रि देवता प्रसन्न होते हैं एवं सूर्य, मंगल एवं गुरु की कृपा प्राप्त होती है।
🙏 मौनी अमावस्या से जुड़ी खास बातें
- – धर्म शास्त्रों के अनुसार Mauni Amavasya पर मौन रहकर अथवा मुनियों के समान आचरण करने का विशेष महत्व है। इस तिथि पर सुबह स्नान कर तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, व वस्त्र का दान करना चाहिए। काले तिल के लड्डू बनाकर उसे लाल वस्त्र में बांधकर ब्राह्मण को दान देने एवं भोजन कराने से पितरों को शांति प्राप्त होती है। श्राद्ध तर्पणादि करने का भी इस दिन बड़ा महत्व माना गया है।
- – अमा का अर्थ है करीब तथा वस्य का अर्थ है रहना। अमावस्या का पूर्ण अर्थ है करीब रहना। इस दिन चंद्रमा दिखाई नही देता तथा तिथियों में इस तिथि के स्वामी पितर होते हैं। चंद्रमा दिखाई नही देने से शरीर में एक महत्वपूर्ण तत्व जल का संतुलन ठीक नही रहता जिससे निर्णय सही नही हो पाते नकारात्मकता अधिक होती है। Mauni Amavasya तिथि पर मौन रहने का बड़ा महत्व माना गया है तथा संयम पूर्वक रहने का विधान है।
- – अमावस्या तिथि होने से चंद्रमा सूर्य के साथ मकर राशि में होते हैं, जो शनि के स्वामित्व वाली राशि है। सूर्य एवं चंद्रमा दोनों से शनि शत्रु का भाव रखते हैं। चंद्रमा मन का स्वामी है उसके शत्रु राशि मे होने से मन चंचल होने के संभावना रहती है एवं स्वयं का अहित करने वाले विचार मन में आ सकते है। इसलिए Mauni Amavasya के दिन संयम पूर्वक बिताने की सलाह एवं मुनियों जैसा जीवन बिताने की सलाह हमारे धर्म ग्रंथों में दी गई है।
- – अमावस्या को सूर्य चंद्रमा की युति वाणी संयम के लिए भी आवश्यक मानी गई अर्थात मौन रहें। यह नही हो सके तो किसी के भी प्रति कटु शब्दों को प्रयोग नही करें एवं असत्य भाषा से बचने का प्रयास करें। वाणी के इस संयम को भी मौन की संज्ञा दी गई है।
Mauni Amavasya Vrat Katha in Hindi ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मौनी अमावस्या 2026 में कब है?
Ans: यह 18 जनवरी 2026, रविवार को है।
Q2: कथा सुनने के बाद क्या करना चाहिए?
Ans: कथा सुनने के बाद आरती करें और किसी ब्राह्मण को तिल के लड्डू और कंबल का दान करें।
Q3: क्या पुरुष भी यह व्रत कथा पढ़ सकते हैं?
Ans: जी हाँ, यह कथा सभी के लिए है। यह पापों का नाश करती है और पितृ दोष दूर करती है।
निष्कर्ष: मौनी अमावस्या का व्रत धैर्य और संयम सिखाता है। 18 जनवरी 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस कथा को पढ़कर अपने व्रत को पूर्ण करें। भगवान विष्णु आप पर कृपा करें।
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