Sheetala Ashtami Puja Vidhi 2026: बसोड़ा (शीतला अष्टमी), जानें माता शीतला की संपूर्ण पूजा विधि और सामग्री लिस्ट
Sheetla Ashtami Puja Vidhi 2026: होली के बाद शीतला अष्टमी यानी बास्योडा का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन को शीतला अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है, जिसे आम लोग बोलचाल में ‘बसोड़ा’ (Basoda) के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पर्व को 11 मार्च 2026 (बुधवार) के दिन को मनाया जाएगा।
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माता शीतला को ‘शीतलता’ (ठंडक) और ‘स्वच्छता’ की देवी माना जाता है। हिन्दू मान्यता है कि जो परिवार इस दिन विधि-विधान से शीतला माता की पूजा करता है और उन्हें ठंडे-बासी भोजन का भोग लगाता है, उनके घर में चेचक (Smallpox), खसरा (Measles), और भयंकर ज्वर जैसी बीमारियां कभी प्रवेश नहीं करतीं है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानें शीतला अष्टमी/बसोड़ा की संपूर्ण पूजा विधि, सामग्री और वे नियम जिनका पालन करना हर माता के लिए अनिवार्य है।
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🕰️ शीतला अष्टमी (बास्योडा) 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त (ध्यान दें!)
शीतला अष्टमी व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘सूर्योदय में की जाती है। इसलिए समय का खास ध्यान रखें:
| पूजा करने की तारीख: | 11 मार्च 2026 (बुधवार) |
| शुभ मुहूर्त (पूजा का समय): | सूर्योदय से सुबह 09:55 बजे तक। |
📋 बसोड़ा पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट (Puja Samagri)
शीतला अष्टमी पूजा की तैयारी सप्तमी की रात (10 मार्च) को ही कर लेनी चाहिए। आपकी पूजा की थाली में नीचे बताई गई ये पूजा सामग्री अवश्य होनी चाहिए:
| सामग्री (Items) | विवरण (Details) |
| ठंडा भोग (बसोड़ा) | मीठे भात/चावल (ओलिया), राबड़ी, हलवा, पूड़ी, गुलगुले, दही, खाजा, चूरमा, मगद, नमक पारे, शक्कर पारे, बेसन चक्की, पुए, पकौड़ी, बाजरे की रोटी और सब्जी आदि (सभी एक रात पहले बने हुए)। और कुल्हड़ में मोठ, बाजरा भिगो दें। |
| पूजा का सामान | सिक्का, नौ कंडवारे, एक कुल्हड़, एक दीपक, रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल), हल्दी, मेहंदी, कलावा (मौली) और काजल। |
| पवित्र जल | एक कलश (लोटे) में साफ ठंडा जल। |
| विशेष वस्तुएं | नीम की टहनियां/पत्ते, बड़कुले (गोबर की गुलरियां), मूंग की दाल, और सुहाग का सामान। |
| श्रृंगार | माता के लिए चुनरी और लाल फूल। |
🙏 शीतला अष्टमी की स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
शीतला अष्टमी (बास्योडा) 11 मार्च (बुधवार) की सुबह उठकर नीचे दी गई पूजा विधि के अनुसार पूरे परिवार के साथ माता शीतला की पूजा विधि करें:
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स्टेप 1: ठंडे जल से स्नान
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर ठंडे पानी से स्नान करें। इस दिन भूलकर भी गर्म पानी से नहाना नहीं चाहिए। इसके बाद साफ और धुले हुए सूती कपड़े पहनें।
स्टेप 2: घर में अग्नि न जलाएं
इस दिन घर की रसोई और चूल्हे को साफ करके उस पर रोली और हल्दी से स्वस्तिक (Swastik) का चिन्ह बनाएं। माता शीतला अग्नि से कष्ट पाती हैं, इसलिए आज के पुरे दिन घर में चूल्हा (गैस) नहीं जलाया जाता हैं और न ही गर्म चाय-पानी बनाई जाती है।
स्टेप 3: माता शीतला की मुख्य पूजा
- सबसे पहले अपने घर के पूजा स्थल पर एक साफ लकड़ी की चौकी (पाटा) पर माता शीतला की तस्वीर (फोटो) या फिर कलश की स्थापित करें।
- इसके बाद शीतला माता को ठंडे जल से अभिषेक (स्नान) कराएं (छींटे दें)।
- अब माता जी को रोली, हल्दी और मेहंदी से तिलक करें।
- सप्तमी तिथि की रात में बनाया गया भोजन (मीठे चावल, राबड़ी, हलवा, पूड़ी आदि) माता जी को अर्पित करके उन्हें भोग लगाये।
- माता जी को लाल चुनरी और अन्य सुहाग से संबधित सामग्री चढ़ाएं।
- शुद्ध घी का दीपक जलाये।
स्टेप 4: व्रत कथा और मंत्र जाप
अब अपने हाथ में थोड़े से चावल (अक्षत) और जल लेकर ‘शीतला माता की व्रत कथा’ को पढ़ें या सुनें। व्रत कथा पढ़ें या सुनने के बाद माता जी के सिद्ध मंत्र “ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः” का 108 बार रूद्राक्ष की माला से जाप करें। अब जलाये गये दीपक को थाली में रखकर या फिर कपूर से ‘शीतला माता की आरती’ को गाये। अपनी इच्छा अनुसार शीतला चालीसा एवं शीतला अष्टकम का भी पाठ कर सकते है।
स्टेप 5: होलिका दहन स्थल की पूजा (महत्वपूर्ण)
(विशेषकर राजस्थान और उत्तर भारत में) घर की पूजा विधि करने के बाद, सभी महिलाएं उस चौराहे या स्थान पर जाती हैं जहाँ पर होलिका दहन किया गया था। वहाँ होलिका की राख की पूजा की जाती है और थोड़ा सा जल और बासी भोजन वहाँ भी अर्पित किया जाता है।
- शीतला माता जी की पूजा के लिए ऐसी रोटी बनानी चाहिए जिनमे लाल रंग के सिकाई के निशान नहीं हों ।
- एक थाली में कंडवारे रखकर उसमें थोड़ा दही, राबड़ी, चावल (ओलिया), पुआ, पकौड़ी, नमक पारे, रोटी, शक्कर पारे, भीगा मोठ, बाजरा व सिक्का आदि जो भी बनाया हो रखें। और एक शुद्ध जल से भरा लोटा।
- एक आटे का छोटा सा दीपक बना लें और उसमे रुई की बत्ती घी में डुबोकर लगा लें। (बिना नमक के आटे का) पंरतु इस इस दीपक को बिना जलाए ही माता जी को चढ़ाया जाता है।
- जंहा होली का दहन हुआ था वंहा जाकर शीतला माता जी की पूजा करें।
- सभी खाघ सामग्री का भोग लगाकर रोली और हल्दी से टीका करें। और शुद्ध जल के छीटें दें।
- शीतला अष्टमी पूजा (Sheetala Ashtami Puja) की थाली पर, कंडवारों पर तथा घर के सभी सदस्यों को रोली, हल्दी से टीका करें। खुद के भी टीका कर लें।
- हाथ जोड़ कर माता से प्रार्थना करें: हे माता, मान लेना और शीली ठंडी रहना।
- उसके बाद परिक्रमा लगाये।
स्टेप 6: नीम के जल का छिड़काव (सुरक्षा कवच)
पूजा विधि के अंत में माता के सामने रखे कलश के जल में नीम के पत्ते डालें। इस पवित्र जल को पूरे घर के हर कोने में और परिवार के सभी सदस्यों (विशेषकर बच्चों) की आँखों पर लगाएं।
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🌟 वास्तु और ज्योतिष के अनुसार बसोड़ा का महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, शीतला अष्टमी का पर्व पूरी तरह से विज्ञान और वास्तु शास्त्र पर आधारित है।
ऋतु परिवर्तन (सर्दियों से गर्मियों की ओर) के समय वातावरण में वायरस और बैक्टीरिया सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। इस दिन घर में आग न जलाकर हम घर के तापमान (Temperature) को ‘शीतल’ करते हैं। पूजा के बाद पूरे घर में नीम मिले हुए जल का छिड़काव करने से घर का वातावरण सैनिटाइज़ (Sanitize) हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा तथा राहु-केतु जनित वास्तु दोषों का जड़ से नाश होता है।
⚠️ बसोड़ा पूजा के 3 सख्त नियम (Do’s and Don’ts)
- गर्म भोजन न खाएं: शीतला अष्टमी (बास्योडा) 11 मार्च को पूरे दिन केवल बासी और ठंडा भोजन (एक रात्रि पहले बनाया गया भोजन) ही खाया जाता है। इस दिन ताज़ा या गर्म खाना पकाना और खाना सख्त वर्जित माना जाता है।
- सिलाई-बुनाई न करें: इस दिन महिलाओं को सुई-धागे का काम (सिलाई या कढ़ाई) नहीं करना चाहिए।
- दीपक की दूरी: यदि आप पूजा करते समय दीपक या धुपबत्ती जला रहे हैं, तो उसे शीतला माता की तस्वीर से काफी दूर रखना चाहिए। माता शीतला को आंच नहीं लगनी चाहिए।
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Sheetala Ashtami Puja Vidhi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या 11 मार्च को हम चाय पी सकते हैं?
Ans: परंपरा के अनुसार इस दिन घर में चूल्हा जलाना मना है, इसलिए गर्म चाय बनाना या पीना वर्जित माना जाता है। हालांकि, अगर घर में कोई बीमार या बुजुर्ग है, तो बाहर से उनके लिए व्यवस्था की जा सकती है।
Q2: जो भोजन माता को चढ़ाया जाता है, उसका क्या करें?
Ans: माता को भोग लगाया हुआ बासी भोजन (बसोड़ा) परिवार के सभी सदस्यों को ‘प्रसाद’ के रूप में खाना चाहिए। इसे पशुओं (गाय या कुत्तों) को भी जरूर खिलाना चाहिए।
Q3: क्या शीतला अष्टमी का व्रत रखना अनिवार्य है?
Ans: माताएं अपने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखती हैं। यदि आप व्रत न भी रखें, तो भी इस दिन केवल ठंडा भोजन ही ग्रहण करें, माता की कृपा प्राप्त होगी।
निष्कर्ष: बसोड़ा का यह पावन पर्व हमारे शरीर और घर की अशुद्धियों को दूर करने का सबसे बड़ा अवसर है। 11 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताई गई इस संपूर्ण विधि से माता शीतला की आराधना करें। माता आपके परिवार पर कभी कोई संकट नहीं आने देंगी।
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