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Sheetala Saptami Vrat Katha in Hindi: शीतला सप्तमी व्रत कथा 2026: शीतला सप्तमी पूजा में जरूर पढ़ें यह चमत्कारी कथा, बच्चों से कोसों दूर रहेंगी गंभीर बीमारियां

Sheetala Saptami Vrat Katha 2026: शीतला सप्तमी पूजा पर जरूर पढ़ें यह प्रामाणिक कथा, माता रानी की बरसेगी विशेष कृपा

Sheetala Saptami Vrat Katha 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी का पर्व हर वर्ष दो विशेष समयावधि में मनाई जाती है। पहले तो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को और दूसरी बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ‘शीतला सप्तमी’ का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष चैत्र मास में यह शुभ तिथि 10 मार्च 2026 (मंगलवार) को आ रही है। इस दिन माता शीतला की विशेषरूप से पूजा-अर्चना की जाती है।

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Sheetala Saptami Vrat Katha
Sheetala Saptami Vrat Katha 2026

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, माता शीतला को स्वच्छता और आरोग्य की देवी माना जाता है। शीतला सप्तमी की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि माता की पावन ‘व्रत कथा’ (Vrat Katha) न पढ़ी या सुनी जाए। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें वह पौराणिक कथा, जिसे पढ़ने मात्र से घर के बच्चों और बड़ों को चेचक, खसरा और भयंकर ज्वर (बुखार) जैसी बीमारियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

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📖 शीतला सप्तमी व्रत कथा (Sheetala Mata Story in Hindi)

शीतला सप्तमी 10 मार्च (मंगलवार) को सुबह माता की पूजा विधि करते समय हाथ में जल और थोड़े से चावल (अक्षत) लेकर इस व्रत कथा का पाठ जरुर करें:

राजा इंद्रायुम्ना की भक्ति

इंद्रायुम्ना नामक एक राजा था। वह एक उदार और गुणी राजा था जिसकी एक पत्नी थी जिसका नाम प्रमिला और पुत्री का नाम शुभकारी था। बेटी की शादी राजकुमार गुणवान से हुई थी। इंद्रायुम्ना के राज्य में, हर कोई हर साल उत्सुकता के साथ शीतला सप्तमी का व्रत रखता था। एक बार इस उत्सव के दौरान शुभकारी अपने पिता के राज्य में भी मौजूद थे। इस प्रकार, उसने शीतला सप्तमी का व्रत भी रखा, जो शाही घराने के अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है।

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शीतला देवी हुई प्रसन्न

अनुष्ठान करने के लिए, शुभकारी अपने मित्रों के साथ झील के लिए रवाना हुए। इस बीच, वे झील की तरफ जाते वक़्त अपना रास्ता भटक गए और सहायता मांग रहे थे। उस समय, एक बूढ़ी महिला ने उनकी मदद की और झील के रास्ते का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अनुष्ठान करने और व्रत का पालन करने में उनकी मदद की। सब कुछ इतना अच्छा हो गया कि शीतला देवी भी प्रसन्न हो गईं और शुभकारी को वरदान दे दिया। लेकिन, शुभकारी ने देवी से कहा कि वह वरदान का उपयोग तब करेंगी जब उसको आवश्यकता होगी या वह कुछ चाहेगी।

शीतला सप्तमी व्रत महत्त्व

जब वे वापस राज्य में लौट रहे थे, शुभकारी ने एक गरीब ब्राह्मण परिवार को देखा जो अपने परिवार के सदस्यों में से एक की सांप के काटने की वजह से हुई मृत्यु का शोक मना रहे थे। इसके लिए, शुभकारी को उस वरदान की याद आई, जो शीतला देवी ने उसे प्रदान किया था और शुभकारी ने देवी शीतला से मृत ब्राह्मण को जीवन देने की प्रार्थना की। ब्राह्मण ने अपने जीवन को फिर से पा लिया। यह देखकर और सुनकर, सभी लोग शीतला सप्तमी व्रत का पालन करने और पूजा करने के महत्व और शुभता को समझा। इस प्रकार, उस समय से सभी ने हर साल व्रत का पालन दृढ़ता और समर्पण के साथ करना शुरू कर दिया।

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🌟 प्रसिद्ध ज्योतिषी की सलाह: शीतला सप्तमी का महत्व

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि ऋतु के परिवर्तन (सर्दियों के जाने और गर्मियों के आने) होने पर मानव शरीर सबसे ज्यादा न चाहते हुए भी बीमारियों का शिकार हो जाता है। यह शीतला माता की पूजा और व्रत कथा हमें ‘शीतलता’ (ठंडक) और ‘स्वच्छता’ के बारे में महत्व सिखाती है। जो माताएं शीतला सप्तमी के दिन इस कथा को पढ़कर अपने बच्चों की आंखों पर माता का चढ़ाया हुआ जल लगाती हैं, उनके बच्चों को कभी भी मौसमी संबधित बीमारियां छूती भी नहीं है।


Sheetala Saptami Vrat Katha in Hindi ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी में क्या अंतर है?

Ans: दोनों का महत्व एक ही है। कुछ परिवारों में होली के सातवें दिन (सप्तमी) को बसोड़ा पूजा जाता है, तो कुछ परिवारों में आठवें दिन (अष्टमी) को। आपके घर की जो भी परंपरा हो, आप उसके अनुसार पूजा कर सकते हैं।

Q2: माता को किस चीज का भोग लगाना सबसे शुभ होता है?

Ans: माता शीतला को मीठे चावल (ओलिया), राबड़ी, हलवा, पूड़ी और दही का बासी भोग सबसे प्रिय है।

Q3: क्या इस दिन गर्म चाय पी सकते हैं?

Ans: परंपरा के अनुसार इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता। इसलिए चाय या गर्म पानी का सेवन भी वर्जित माना जाता है।

निष्कर्ष: शीतला सप्तमी का व्रत बीमारियों से लड़ने की शक्ति और परिवार में सुख-शांति प्रदान करता है। 10 मार्च 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस व्रत कथा का पूरे परिवार के साथ पाठ करें। माता शीतला आपके परिवार की हर संकट से रक्षा करेंगी।

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