Sheetla Mata Ki Aarti 2026: 11 मार्च को बसोड़ा पूजा में जरूर गाएं माता शीतला की यह पावन आरती, घर में हमेशा रहेगी सुख-शांति
Sheetla Mata Ki Aarti 2026: हिंदू धर्म में चैत्र महीनें की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी ‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) का दिन माता शीतला को समर्पित किया जाता है। इस वर्ष को यह त्योहार 11 मार्च 2026 (बुधवार) के दिन को मनाया जा रहा है। माता शीतला को चेचक, खसरा, बुखार और चर्म आदि रोगों को हरने वाली देवी के रूप में पूजन किया जाता है।
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हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, किसी भी देवी-देवता की पूजा तब तक पूर्ण और सफल नहीं मानी जाती, जब तक कि पूजा के अंत में श्रद्धापूर्वक उनकी आरती न उतारी जाए। बासी ठंडे भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाने और व्रत कथा पढ़ने के बाद, पूरे परिवार को एक साथ मिलकर माता शीतला की आरती (Sheetla Mata Aarti) गानी चाहिए। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें माता की संपूर्ण आरती और उसे करने की सही विधि।
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🪔 श्री शीतला माता की आरती (Sheetla Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi)
‘बसोड़ा’ (शीतला अष्टमी) 11 मार्च की सुबह पूजा अर्चना संपन्न होने के बाद, कपूर या घी का दीपक जलाकर (माता की मूर्ति (तस्वीर) से थोड़ा दूर रखकर) प्रेम पूर्वक नीचे दी गई यह आरती एक साथ गाएं:
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता…॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता…॥
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता…॥
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता…॥
घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता…॥
ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता…॥
जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता…॥
रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता…॥
बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता…॥
शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता…॥
दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता। जय शीतला माता…॥
🪔 श्री शीतला माता आरती (Sheetla Mata Aarti Lyrics in Hindi)
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जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता।
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण बरणत, पार नहीं पाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
इन्द्र मृदंग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावत, नारद मुनि गाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
घंटा शंख शहनाई, बाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरति, लखि लखि हर्षाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
भक्तन नीक द्यालु, घट-घट की ज्ञाता।
कष्ट निवारण कारिणि, जग की पितु माता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
चैत्र मास पगुधारन, अष्टमि तिथि आता।
बासोड़ा व्रत करते, सब जग हर्षाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
बालकनाथ योगी, जो जन दर्शन पाता।
शीतला माँ की आरती, जो भी नर गाता।
रोग-शोक सब भागैं, सुख-सम्पत्ति पाता॥ ॥ ॐ जय शीतला माता…॥
(शीतला आरती पूर्ण होने के बाद: “बोलो शीतला माता की जय! बोलो सांचे दरबार की जय!”)
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🌟 आरती करने के ज्योतिषीय और वैज्ञानिक लाभ (Expert Benefits)
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि शीतला अष्टमी के दिन कपूर (Camphor) जलाकर आरती करने का एक विशेष विज्ञान और वास्तु महत्व है:
- वास्तु दोष और वायरस का नाश: यह तो आपको पता होगा, की चैत्र मास में जब मौसम गर्म होने शुरू होते है, तो हवा में बैक्टीरिया पनपते लगते हैं। कपूर के धुएं और आरती की ध्वनि से घर का वातावरण पूरी तरह शुद्ध (Sanitize) हो जाता है और राहु-केतु जैसे अशुभ ग्रह के प्रभाव से पैदा होने वाले वास्तु दोष भी खत्म होने लगते हैं।
- संतान सुख और सुरक्षा: शीतला आरती के बाद सभी माताये से अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करने से ‘चंद्रमा’ (जो मन और सेहत का कारक है) मजबूत होता है, जिससे बच्चों की इम्युनिटी बढ़ती है।
🌸 आरती करते समय रखें इन 3 नियमों का ध्यान (Aarti Rules)
चूँकि माता शीतला ‘शीतलता’ (ठंडक) की देवी हैं, इसलिए इनकी आरती में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- दीपक की दूरी: माता शीतला को गर्म चीजों से दुरी बनाकर रखनी चाहिए। इसलिए आरती का दीपक (चाहे वह घी का हो या फिर कपूर का) माता की मूर्ति या तस्वीर से थोड़ा दूर रखकर ही आरती करनी चाहिए। पूजा आरती की अग्नि माता तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
- नीम की टहनी: शीतला आरती की थाली के पास या कलश पर ‘नीम की टहनी’ जरूर रखनी चाहिए।
- आरती के बाद जल का छिड़काव: शीतला माता की आरती लेने के बाद, माता को अर्पित किए गए जल को उसी नीम की टहनी से पूरे घर में और परिवार के सदस्यों के ऊपर छिड़कें। यह जल हर बुरी नजर और बीमारी से बचाता है।
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Sheetla Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या बिना दीपक जलाए (मानसिक रूप से) आरती गा सकते हैं?
Ans: यदि आपके परिवार की परंपरा में बसोड़ा के दिन घर में बिल्कुल भी अग्नि नहीं जलाई जाती (दीपक भी नहीं), तो आप हाथ जोड़कर बिना दीपक के भी माता की आरती का गायन कर सकते हैं।
Q2: आरती किस समय करनी चाहिए?
Ans: बसोड़ा की पूजा सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर होने से पहले तक कर लेनी चाहिए। पूजा के ठीक अंत में आरती करनी चाहिए।
Q3: आरती के बाद बचे हुए बासी भोजन का क्या करें?
Ans: माता को भोग लगाया हुआ भोजन (बसोड़ा) परम पवित्र प्रसाद बन जाता है। आरती के बाद पूरे परिवार को सबसे पहले वही प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
निष्कर्ष: आरती ईश्वर के प्रति हमारे समर्पण और प्रेम का सबसे सुंदर रूप है। 11 मार्च 2026 को बसोड़ा की सुबह Freeupay.in पर दी गई इस आरती को पूरे परिवार के साथ मिलकर गाएं। माता शीतला की कृपा से आपके घर में कभी कोई रोग या शोक नहीं आएगा।
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