Sheetla Mata Vrat Katha 2026: बसोड़ा पूजा पर पढ़ें माता शीतला की ये पावन कथा, घर में कभी नहीं आएगी कोई गंभीर बीमारी
Sheetla Mata Vrat Katha 2026: हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि को माता शीतला (बसोड़ा) का पावन पर्व मनाया जाता है। यह तो आपको पता होगा, की माता शीतला को स्वच्छता, शीतलता और आरोग्य (Health) की देवी माना जाता है।
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इस दिन माता को बासी और ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे ‘बसोड़ा’ कहते हैं। ज्योतिष और वास्तु के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से पूजा करता है और माता शीतला की ‘व्रत कथा’ (Vrat Katha) पढ़ता या सुनता है, उसके घर में चेचक, खसरा (Measles) और भयंकर ज्वर जैसी बीमारियां कभी प्रवेश नहीं करतीं। Freeupay.in के इस लेख में पढ़ें माता शीतला की वह प्रामाणिक कथा, जिसके बिना बसोड़ा की पूजा अधूरी मानी जाती है।
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📖 शीतला माता व्रत कथा (Sheetla Mata Story in Hindi)
शीतला अष्टमी (बसोड़ा) की पूजा के समय माता को जल और बासी भोजन अर्पित करने के बाद, अपने हाथ में थोड़े से चावल (अक्षत) लेकर इस व्रत कथा का पाठ करना चाहिए:
शीतला माता के शरीर में छाले
यह कथा बहुत पुरानी है एक वार शीतला माता ने सोचा कि चलो आज देखु कि धरती पर मेरी पूजा कोन करता है कोन मुझे मानता हे यही सोचकर शीतला माता धरती पर राजस्थान के डुंगरी गाँव में आई और देखा कि इस गाँव में मेरा मंदिर भी नही है। ना मेरी पुजा है माता शीतला गाँव कि गलियो में घूम रही थी तभी एक मकान के ऊपर से किसी ने चावल का उवला पानी (मांड) निचे फेका वह उबलता पानी शीतला माता के ऊपर गिरा जिससे शीतला माता के शरीर में (छाले) फफोले पड गये शीतला माता के पुरे शरीर में जलन होने लगी शीतला माता गाँव में इधर उधर भाग भाग के चिल्लाने लगी।
अरे में जल गई मेरा शरीर तप रहा है जल रहा हे कोई मेरी मदद करो लेकिन उस गाँव में किसी ने शीतला माता कि मदद नही कि तभी अपने घर बहार एक कुम्हारन (महिला) बेठी थी उस कुम्हारन ने देखा कि अरे यह बुडी माई तो बहुत जल गई।
कुम्हारन ने की सेवा
इसके पुरे शरीर में तपन है इसके पुरे शरीर में ( छाले ) फफोले पड़ गये है यह तपन सहन नही कर पा रही है तब उस कुम्हारन ने कहा है माँ तू यहाँ आकार बेठ जा में तेरे शरीर के ऊपर ठंडा पानी डालती हु कुम्हारन ने उस बुडी माई पर खुब ठंडा पानी डाला और बोली हे
माँ मेरे घर में रात कि बनी हुई रावडी रखी है थोड़ा दही भी है तु ठंडी (जुवार) के आटे कि रावडी और दही खाया इससे शरीर में ठंडाई मिली तब उस कुम्हारन ने कहा आ माँ बेठ जा तेरे सिर के बाल बिखरे हे ला में तेरी चोटी गुथ देती हूँ और कुम्हारन माई कि चोटी गूथने हेतु (कंगी) कागसी बालो में करती रही।
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अचानक कुम्हारन कि नजर उस बुडी माई के सिर के पिछे पड़ी तो कुम्हारन ने देखा कि एक आँख वालो के अंदर छुपी हे यह देखकर वह कुम्हारन डर के मारे घबराकर भागने लगी तभी उस बुडी माई ने कहा रुक जा बेटी तु डरमत में कोई भुत प्रेत नही हु में शीतला देवी हु में तो इस घरती पर देखने आई थी कि मुझे कोन मानता है।
सच्ची भक्ति से हुई प्रसन्न
कोन मेरी पुजा करता है इतना कह माता चारभुजा वाली हीरे जबाहरात के आभूषण पहने सिर पर स्वर्णमुकुट धारण किये अपने असली रुप में प्रगट हो गई माता के दर्शन कर कुम्हारन सोचने लगी कि अब में गरीब इस माता को कहा विठाऊ तब माता बोली हे बेटी तु किस सोच मे पडगई तब उस कुम्हारन ने हाथ जोड़कर आँखो में आसु बहते हुए कहा है,
माँ मेरे घर में तो चारो तरफ दरिद्रता है बिखरी हुई हे में आपको कहा बेठाऊ मेरे घर में ना तो चोकी है ना बैठने का आसन तब शीतला माता प्रसन्न होकर उस कुम्हारन के घर पर खड़े हुए गधे पर बेठ कर एक हाथ में झाड़ू दूसरे हाथ में डलिया लेकर उस कुम्हारन के घर कि दरिद्रता को झाड़कर डलिया में भरकर फेक दिया।
और उस कुम्हारन से कहा है बेटी में तेरी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हु अब तुझे जो भी चाहिये मुझसे वरदान मांग ले तब कुम्हारन ने हाथ जोड़ कर कहा है माता मेरी इक्छा है अब आप इसी (डुंगरी) गाँव मे स्थापित होकर यही रहो और जिस प्रकार आपने आपने मेरे घर कि दरिद्रता को अपनी झाड़ू से साफ़ कर दूर किया।
घर कि दरिद्रता का होगा नाश
ऐसे ही आपको जो भी होली के बाद कि सप्तमी को भक्ति भाव से पुजा कर आपकी ठंडा जल दही व वासी ठंडा भोजन चडाये उसके घर कि दरिद्रता को साफ़ करना और आपकी पुजा करने वाली नारि जाति (महिला) का अखंड सुहाग रखना उसकी गोद हमेसा भरी रखना साथ ही जो पुरुष शीतला सप्तमी को नाई के यहा बाल ना कटवाये धोबी को कपड़े धुलने ना दे और पुरुष भी आप पर ठंडा जल चडाकर नरियल फूल चढ़ाकर परिवार सहित ठंडा वासी भोजन करे उसके काम धंधे व्यापार में कभी दरिद्रता ना आये तव माता बोली तथा अस्तु है बेटी जो जओ तुने वरदान मांगे में सब तुझे देती हु।
है बेटी तुझे आशीर्वाद देती हु कि मेरी पुजा का मुख्ख अधिकार इस धरती पर सिर्फ कुम्हार जाति का ही होगा। तभी उसी दिन से डुंगरी गाँव में शीतला माता स्थापित हो गई और उस गाँव का नाम हो गया (शील कि डुंगरी) शील कि डुंगरी भारत का एक मात्र मुख्य मंदिर है। शीतला सप्तमी वहाँ बहुत विशाल मेला भरता है। इस कथा को पड़ने से घर कि दरिद्रता का नाश होने के साथ सभी मनोकामना पुरी होती है।
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🌸 व्रत कथा पढ़ने के 3 बड़े लाभ (Benefits)
शीतला अष्टमी (बसोड़ा) के दिन इस व्रत कथा को पढ़ने और माता को जल चढ़ाने के होंगे अद्भुत लाभ:
- रोगों से मुक्ति: इससे आपके बच्चों को होने वाली मौसमी बीमारियों, चेचक और स्किन इन्फेक्शन आदि से सुरक्षा मिलेंगी।
- वास्तु दोष निवारण: अपने घर में माता की पूजा के नाम का अर्पित किया हुआ ठंडा जल छिड़कने से आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष शांत होने लगते है।
- पारिवारिक शांति: इस व्रत कथा को पढ़ने से व्यक्ति के घर में शीतलता (ठंडक) और सभी सदस्यों के बीच में आपस में प्रेम भाव बना रहता है।
Sheetla Mata Vrat Kathain Hindi ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: बसोड़ा के दिन घर में चूल्हा क्यों नहीं जलाते हैं?
Ans: माता शीतला ‘शीतलता’ (ठंडक) की प्रतीक हैं। अग्नि या गर्म चीजें उन्हें कष्ट पहुंचाती हैं। इसलिए माता को प्रसन्न रखने के लिए इस दिन चूल्हा जलाना वर्जित माना गया है।
Q2: क्या व्रत कथा रात में पढ़ सकते हैं?
Ans: शीतला माता की पूजा और कथा का पाठ सुबह के समय (सूर्योदय से लेकर दोपहर तक) करना सबसे शुभ माना जाता है।
Q3: पूजा के बाद बचे हुए जल का क्या करें?
Ans: माता को चढ़ाने के बाद जो जल कलश में बच जाए, उसमें नीम के पत्ते डालकर पूरे घर में और परिवार के सभी सदस्यों (खासकर बच्चों) पर छिड़कें। यह एक शक्तिशाली ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है।
निष्कर्ष: माता शीतला स्वच्छता और स्वास्थ्य की देवी हैं। आने वाले बसोड़ा पर्व पर Freeupay.in पर दी गई इस व्रत कथा का पूरे परिवार के साथ पाठ करें। माता रानी आपके घर-परिवार को हर बुरी नजर और बीमारी से दूर रखेंगी।
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