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Sri Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram : श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् भगवान श्री नरसिम्हा जी को समर्पित हैं श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् हम भगवान श्री नरसिम्हा जी के 108 नामों के बारे में बताने जा रहे हैं। श्री नृसिंह शतनामावली स्तोत्रम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् — Sri Narasimha Ashtottara Shatanama Stotram
नारसिंहो महासिंहो दिव्यसिंहो महाबलः !
उग्रसिंहो महादेवो स्तंभजश्चोग्रलोचनः ॥१-८॥
रौद्रो सर्वाद्भुतः श्रीमान् योगानन्दस्त्रिविक्रमः !
हरिः कोलाहलश्चक्री विजयो जयवर्धनः ॥९-१८॥
पञ्चाननः परब्रह्म अघोरो घोरविक्रमः !
ज्वालामुखो ज्वालमाली महाज्वालो महाप्रभुः ॥१९-२६॥
निटिलाक्षः सहस्राक्षो दुर्निरीक्ष्यः प्रतापनः !
महादंष्ट्रायुधः प्राज्ञः चण्डकोपी सदाशिवः ॥२७-३४॥
हिरण्यकशिपुध्वंसी दैत्यदानवभञ्जनः !
गुणभद्रो महाभद्रः बलभद्रो सुभद्रकः ॥३५-४०॥
करालो विकरालश्च विकर्ता सर्वकर्तृकः !
शिंशुमारो त्रिलोकात्मा ईशः सर्वेश्वरो विभुः॥४१-४९॥
भैरवाडम्बरो दिव्यो अच्युतः कविमाधवः !
अधोक्षजोऽक्षरो शर्वः वनमाली वरप्रदः ॥५०-५८॥
विश्वंभरोऽद्भुतो भव्यो विष्णुश्च पुरुषोत्तमः !
अमोघास्त्रो नखास्त्रश्च सूर्यज्योतिः र्सुरेश्वरः॥५९-६७॥
सहस्रबाहुः सर्वज्ञः सर्वसिद्धिप्रदायकः !
वज्रदंष्ट्रो वज्रनखः महानादः परंतपः ॥६८-७४॥
सर्वमन्त्रैकरूपश्च सर्वयंत्रविदारणः !
सर्वतन्त्रात्मकोऽव्यक्तः सुव्यक्तो भक्तवत्सलः॥७५-८०॥
वैशाखशुक्लसंभूतो शरणागतवत्सलः !
उदाराकीर्तिः पुण्यात्मा महात्मा चण्डविक्रमः॥८१-८६॥
वेदत्रयप्रपूज्यश्च भगवान् परमेश्वरः !
श्रीवत्साङ्कः श्रीनिवासः जगद्व्यापी जगन्मयः॥८७-९३॥
जगत्पालो जगन्नाथः महाकायो द्विरूपभृत् !
परमात्मा परंज्योतिः निर्गुणोऽथ नृकेसरी ॥९४-१०१॥
परतत्त्वॊ परंधाम सच्चिदानन्दविग्रहः !
लक्ष्मीनृसिंहो सर्वात्मा धीरः प्रह्लादपालकः॥१०२-१०८॥

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