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Varuthini Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF | वरूथिनी एकादशी 2026: संपूर्ण व्रत कथा और महत्व

Varuthini Ekadashi Vrat Katha 2026: 13 अप्रैल को एकादशी पूजा में पढ़ें यह प्रामाणिक कथा, नष्ट होंगे जन्म-जन्मांतर के पाप

Varuthini Ekadashi Vrat Katha 2026: हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन को ‘वरुथिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। ‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है ‘रक्षा करने वाली’। मान्यता है कि यह एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को संसार के हर प्रकार के संकट, रोग और दुर्भाग्य से बचाकर एक ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करता है।

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Varuthini Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF
Varuthini Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF

वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सब पाप नष्ट हो जाते है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता हैं। वरूथिनी एकादशी के उपवास का फ़ल दस हजार वर्ष तक तप करने के बराबर होता है। शास्त्रों अनुसार कहा गया है की हाथी का दान घोड़े के दान से श्रेष्ठ है। हाथी के दान से भूमि दान, भूमि के दान से तिलों का दान, तिलों के दान से स्वर्ण का दान तथा स्वर्ण के दान से अन्न का दान श्रेष्ठ है। अन्न दान के बराबर कोई दान नहीं है। अन्नदान से देवता, पितर और मनुष्य तीनों तृप्त हो जाते हैं।

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शास्त्रों में इसको कन्यादान के बराबर माना है। वरूथिनी एकादशी वाले दिन का व्रत करने से व्यक्ति को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के बराबर फल प्राप्त होता है। जो मनुष्य लोभ के वश होकर कन्या का धन लेते हैं वे प्रलयकाल तक नरक में वास करते हैं या उनको अगले जन्म में बिलाव का जन्म लेना पड़ता है। जो मनुष्य प्रेम एवं धन सहित कन्या का दान करते हैं, उनके पुण्य को चित्रगुप्त भी लिखने में असमर्थ हैं, उनको कन्यादान का फल मिलता है।

इस वर्ष में वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को रखा जायेगा। इस दिन भगवान विष्णु के ‘वराह अवतार’ की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक कि पूजा के अंत में इसकी प्रामाणिक व्रत कथा (Vrat Katha) का पाठ न किया जाए। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें राजा मान्धाता की वह पौराणिक कथा, जिसे पढ़ने और सुनने मात्र से कन्यादान जितना पुण्य प्राप्त होता है।

🕰️ वरुथिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय

वरुथिनी एकादशी व्रत रखने वालों के लिए एकादशी तिथि और व्रत खोलने (पारण) का सही समय जानना सबसे जरूरी है:

विवरण (Event)तारीख और समय (Date & Time)
वरुथिनी एकादशी व्रत की तारीख13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
एकादशी तिथि आरंभ13 अप्रैल 2026, रात 01:16 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त14 अप्रैल 2026, रात 01:08 बजे तक
व्रत पारण का समय (Dwadashi Parana)14 अप्रैल 2026, सुबह 06:54 से 08:37 बजे तक

(नोट: 14 अप्रैल की सुबह ऊपर बताये गये पारण के समय में भगवान विष्णु को भोग लगाकर और ब्राह्मण को दान देकर अपना व्रत खोलें।)

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📖 वरुथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Story in Hindi)

सुबह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते समय हाथ में पीले फूल और अक्षत (चावल) लेकर इस वरुथिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें:

राजा मान्धाता की तपस्या और भालू का हमला

प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम का राजा राज्य करता था। राजा बड़ा ही दानवीर व परम भक्त था। भगवान विष्णु का परम भक्त था। एक दिन मान्धाता राजा जंगल में तपस्या करने को गये। जब वह वन में भगवान श्री विष्णु जी की तपस्या कर रहे थे, तो तबी वंहा एक जंगली भालू आ गया। जंगली भालू ने राजा मान्धाता को तपस्या करते हुए देखा भालू राजा का पैर पकड़कर उसे खींचते हुए जंगल में ले गया। और राजा का पैर खाने लगा।

भगवान विष्णु द्वारा रक्षा

तभी राजा ने भगवान श्री हरी से अपने जीवन के बचाने की प्रार्थना करने लगे जब भगवान श्री हरी प्रकट हुए और भगवान श्री विष्णु जी ने अपने सुर्दशन चक्र से भालू का सर उसके शरीर से अलग कर दिया पर जब तक राजा मान्धाता का पैर भालू खा चुका था। इस पर भगवान श्री हरी ने कहा की यह तुम्हारे पिछले जन्मो का फ़ल हैं।

वरुथिनी एकादशी का व्रत और भगवान का निर्देश

राजा ने भगवान श्री हरी से अपने पैर को वापस सही करने की प्रार्थना करी जब श्री हरी ने कहा की तुम मथुरा जाकर एकादशी तिथि को आने वाली वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा अर्चना करना। उस पूजा अर्चना के प्रभाव से तुम पहले जैसे पुनः सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। ऐसा कहते ही भगवान अन्तर्धान हो गये।

पापों से मुक्ति और स्वर्ग की प्राप्ति

राजा मान्धाता ने श्री हरी के बताये अनुसार मथुरा जाकर विश्वास व् श्रद्धापूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत व् उपवास रखकर पूजा अर्चना की इससे राजा पुन: संपूर्ण शरीर के अगों वाला हो गया। हे राजन् ! जो मनुष्य विधिवत इस एकादशी को करते हैं। उनको स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। अत: मनुष्यों को पापों से डरना चाहिए। इस व्रत के महात्म्य को पढ़ने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। इसका फल गंगा स्नान के फल से भी अधिक है।

(कथा समाप्त। बोलो श्रीहरि नारायण की जय!)

🌟 प्रसिद्ध ज्योतिषी की सलाह: एकादशी पर क्या दान करें?

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि वरुथिनी एकादशी का दिन गुरु (Jupiter) और सूर्य (Sun) ग्रह को मजबूत करने का सबसे उत्तम दिन है।

वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और खरबूजे का भोग लगया जाता हैं। इस दिन जल से भरा कलश, खरबूजा, तिल और अन्न का दान करने से व्यक्ति को दस हजार वर्ष की तपस्या के बराबर फल मिलता है। जिन लोगों को नौकरी या व्यापार में लगातार असफलता मिल रही है, उन्हें इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (जो साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप है) धारण करना चाहिए। इससे दसों दिशाओं से सफलता प्राप्त होती है और जीवन में बड़ा भाग्योदय होता है।

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⚠️ वरुथिनी एकादशी व्रत के 3 सख्त नियम (Do’s and Don’ts)

  1. चावल का पूर्ण त्याग: किसी भी एकादशी पर चावल खाना सख्त वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव (Reptile) की योनि में जाता है।
  2. तुलसी न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए तुलसी दल हमेशा एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़ कर रख लेने चाहिए।
  3. क्रोध और विवाद से बचें: व्रत के दिन मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या बुरे विचार नहीं लाने चाहिए। पूरा दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का मानसिक जाप करें।

⚠️ वरूथिनी एकादशी पूजा मंत्र (Ekadashi Mantra)

वरूथिनी एकादशी के दिन “ॐ नमोः नारायणाय नमः।” और “ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।” मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा आप वरूथिनी एकादशी के दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता हैं।

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Varuthini Ekadashi Vrat Katha in Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: वरुथिनी एकादशी का व्रत कब है, 13 या 14 अप्रैल?

Ans: उदया तिथि के अनुसार, इस साल वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को ही रखा जाएगा। 14 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा।

Q2: एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?

Ans: जो लोग निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। आप व्रत में कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, दूध, दही और मौसमी फल (जैसे खरबूजा, केला) खा सकते हैं।

Q3: बिना व्रत रखे भी इस कथा को पढ़ा जा सकता है?

Ans: जी हाँ! यदि आप किसी कारणवश व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो भी 13 अप्रैल को सात्विक भोजन ग्रहण करें और भगवान विष्णु की इस पावन कथा का पाठ अवश्य करें।

निष्कर्ष: वरुथिनी एकादशी जीवन के हर संकट और कष्ट से उबारने वाली अलौकिक शक्ति रखती है। 13 अप्रैल 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस व्रत कथा का पूरे परिवार के साथ पाठ करें और वराह भगवान की आराधना करें। आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।

अभी तुरंत शेयर करें: इस प्रामाणिक कथा और व्रत के पारण मुहूर्त को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में आज रात ही शेयर कर दें ताकि कल सुबह हर कोई सही विधि से भगवान की पूजा कर सके।

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