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Kamala Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF | कमला एकादशी 2026: संपूर्ण व्रत कथा और महत्व

Kamala Ekadashi Vrat Katha: प्र. ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाई जाती हैं। यानी आती हैं। कमला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य यश के भागी होकर विष्‍णु लोक को प्राप्त होते है। और मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है। जो मनुष्‍यों के लिए भी दुर्लभ है।

Kamala Ekadashi Vrat Katha: कमला एकादशी पर पढ़ें यह चमत्कारी व्रत कथा, रातों-रात मिट जाएगी जन्मों की दरिद्रता

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Kamala Ekadashi Vrat Katha
Kamala Ekadashi Vrat Katha

यह तो आप सभी को मामुल होगा की, सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अन्य सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ (व्रतराज) माना जाता है। परन्तु ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) में आने वाली एकादशी को आने वाली कमला एकादशी (Kamala Ekadashi Vrat Katha) का महत्व अन्य एकादशी व्रत की तुलना में हजार गुना बढ़ जाता है। माता लक्ष्मी का एक नाम ‘कमला’ भी है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की भयंकर से भयंकर दरिद्रता और कर्ज हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

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शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति कमला एकादशी का व्रत रखता है और पूर्ण श्रद्धा से इसकी व्रत कथा (Kamala Ekadashi Vrat Katha) का श्रवण या पठन करता है, उसे साक्षात बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें कमला एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा, पूजा विधि और अचूक लाभ।

🕰️ कमला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय

कमला एकादशी (Kamala Ekadashi Vrat Katha) व्रत रखने वालों के लिए एकादशी तिथि और व्रत खोलने (पारण) का सही समय जानना सबसे जरूरी है:

विवरण (Event)तारीख और समय (Date & Time)
कमला एकादशी व्रत की तारीख27 मई, 2026 (बुधवार)
एकादशी तिथि आरंभ26 मई, 2026, सुबह 05:11 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त27 मई, 2026, सुबह 06:21 बजे तक
व्रत पारण का समय (Dwadashi Parana)28 मई, 2026, सुबह 05:25 से 07:56 बजे तक

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🌺 क्विक लिस्ट: कमला एकादशी व्रत के चमत्कारिक लाभ और नियम (Kamala Ekadashi Vrat Katha Benefits)

कमला एकादशी व्रत कथा (Kamala Ekadashi Vrat Katha) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए कमला एकादशी का व्रत करने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:

व्रत का विवरणकमला एकादशी के अचूक लाभ और नियम (Benefits & Rules)
मुख्य लाभ (Benefits)भयंकर कर्ज, आर्थिक तंगी और दुर्भाग्य हमेशा के लिए दूर हो जाता है। घर में अपार धन आता है।
पापों का नाशइस व्रत के प्रभाव से जाने-अनजाने में हुए जन्म-जन्मांतर के पाप तुरंत भस्म हो जाते हैं।
पूजनीय देवताभगवान श्रीहरि विष्णु (पुरुषोत्तम स्वरूप) और माता लक्ष्मी (कमला स्वरूप)।
व्रत का खास प्रसादभगवान को तुलसी दल (Tulsi) और माता लक्ष्मी को मखाने की खीर या पंचामृत का भोग लगाएं।

📖 कमला (पद्मिनी) एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा (Kamala Ekadashi Vrat Katha in Hindi)

श्री भगवान बोले हे राजन्- अधिक मास में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिक मास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।

अधिक मास या मलमास को जोड़कर वर्ष में 26 एकादशी होती है। अधिक मास में दो एकादशी होती है जो पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) और परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष) के नाम से जानी जाती है। ऐसा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा बताई थी। Kamala Ekadashi Vrat Katha

भगवान कृष्‍ण बोले- मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। इसका व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है। जो मनुष्‍यों के लिए भी दुर्लभ है।

यह एकादशी करने के लिए दशमी के दिन व्रत का आरंभ करके काँसी के पात्र में जौं-चावल आदि का भोजन करें तथा नमक न खावें। भूमि पर सोए और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में शौच आदि से निवृत्त होकर दन्तधावन करें और जल के बारह कुल्ले करके शुद्ध हो जाए। Kamala Ekadashi Vrat Katha

सूर्य उदय होने के पूर्व उत्तम तीर्थ में स्नान करने जाए। इसमें गोबर, मिट्‍टी, तिल तथा कुशा व आँवले के चूर्ण से विधिपूर्वक स्नान करें। श्वेत वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें। 

हे म‍ुनिवर! पूर्वकाल में त्रेया युग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था। उस राजा की एक हजार परम प्रिय स्त्रियाँ थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो उनके राज्य भार को संभाल सकें। देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अनेक चिकि‍त्सकों आदि से राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न किए लेकिन सब असफल रहे। (Kamala Ekadashi Vrat Katha)

एक दिन राजा को वन में तपस्या के लिए जाते थे उनकी परम प्रिय रानी इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए राजा हरिश्चंद्र की पद्मिनी नाम वाली कन्या राजा के साथ वन जाने को तैयार हो गई। दोनों ने अपने अंग के सब सुंदर वस्त्र और आभूषणों का त्याग कर वल्कल वस्त्र धारण कर गन्धमादन पर्वत पर गए। Kamala Ekadashi Vrat Katha

राजा ने उस पर्वत पर दस हजार वर्ष तक तप किया परंतु फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। तब पतिव्रता रानी कमलनयनी पद्मिनी से अनुसूया ने कहा- बारह मास से अधिक महत्वपूर्ण मलमास होता है जो बत्तीस मास पश्चात आता है। उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत करने से तुम्हारी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। इस व्रत करने से पुत्र देने वाले भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें शीघ्र ही पुत्र देंगे। 

रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया। वह एकादशी को निराहार रहकर रात्रि जागरण कर‍ती। इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इसी के प्रभाव से पद्मिनी के घर कार्तिवीर्य उत्पन्न हुए। जो बलवान थे और उनके समान तीनों लोकों में कोई बलवान नहीं था। तीनों लोकों में भगवान के सिवा उनको जीतने का सामर्थ्य किसी में नहीं था। Kamala Ekadashi Vrat Katha

सो हे नारद ! जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्‍णु लोक को प्राप्त होते है।

(कथा पूर्ण होने के बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।)

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

कमला एकादशी व्रत कथा का पुण्य (Kamla Ekadashi Vrat Katha Ka Punya)

पुराणों में बताया गया है कि कमला एकादशी व्रत करने से मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है। जो मनुष्‍यों के लिए भी दुर्लभ है।

🌟 अपार धन प्राप्ति का अचूक ज्योतिषीय रहस्य

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जब जन्म कुंडली में ‘शुक्र’ (Venus) और ‘बृहस्पति’ (Jupiter) ग्रह कमज़ोर होते हैं, तो व्यक्ति लाख मेहनत करने के बाद भी दरिद्रता और भारी कर्ज के जाल में फंसा रहता है। कमला एकादशी साक्षात माता लक्ष्मी (कमला) का दिन है।

कुंडली के दरिद्र योग को 100% शून्य करने और व्यापार में चारों दिशाओं से धन आकर्षित करने के लिए साक्षात माता महालक्ष्मी का स्वरूप ‘7 मुखी रुद्राक्ष’ (7 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। कमला एकादशी के पावन दिन इस 7 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने और इसी से माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

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⚠️ कमला एकादशी पूजा के 3 कड़े नियम

  1. तुलसी का प्रयोग: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी नहीं तोड़ने चाहिए। एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें और भगवान विष्णु को भोग लगाते समय इसका प्रयोग अवश्य करें।
  2. चावल पूर्णतः वर्जित: एकादशी के दिन घर में चावल (Rice) बनाना और खाना महापाप माना जाता है। इस दिन सात्विक फलाहार ही ग्रहण करें।
  3. क्रोध और निंदा से बचें: एकादशी के दिन किसी की चुगली करना, झूठ बोलना या क्रोध करना व्रत के सारे फल को नष्ट कर देता है। इस दिन पूर्ण सात्विक और शांत मन से भगवान का ध्यान करें।

Kamala Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: कमला एकादशी का पारण कब करना चाहिए?

Ans: एकादशी व्रत का पारण हमेशा अगले दिन (द्वादशी तिथि को) सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने पर शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।

Q2: कमला एकादशी पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का महामंत्र क्या है?

Ans: इस दिन माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप कमलगट्टे की माला से करना अत्यंत शुभ फलदायी है।

Q3: क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में व्रत कर सकती हैं?

Ans: मासिक धर्म के दौरान महिलाएं व्रत रख सकती हैं और मानसिक जाप कर सकती हैं, लेकिन उन्हें भगवान की मूर्ति या पूजा सामग्री को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष: कमला एकादशी का व्रत (Kamala Ekadashi Vrat Katha) आपके सोए हुए भाग्य को जगाने और जीवन की घोर दरिद्रता को भस्म करने का सबसे बड़ा अवसर है। Freeupay.in पर बताई गई इस कथा और विधि के अनुसार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें। आपके घर के धन-भंडार हमेशा भरे रहेंगे।

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