Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi 2026: हमारे सनातन धर्म में भगवान शिव के ‘भैरव’ अवतार को अत्यंत विशिष्ट स्थान दिया गया है। आमतौर पर देखा जाता हैं, की भैरव के नाम से व्यक्ति के मन में भय उत्पन्न होने लगता है, लेकिन ‘बटुक भैरव’ (Batuk Bhairav) को शिव जी का 5 से 8 वर्ष का अत्यंत सौम्य, शांत और बाल स्वरूप है। ऐसी मान्यता है, कि बटुक भैरव अपने भक्तों की रक्षा ठीक उसी तरह करते हैं जैसे एक पिता अपने बालक की करता है।
Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi 2026: इस सरल विधि से करें बटुक भैरव की पूजा, रातों-रात दूर होगी कंगाली और हर संकट
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वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बटुक भैरव जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यदि आप कोर्ट-कचहरी, गुप्त शत्रुओं, राहु-केतु के भयंकर दोष या व्यापार में लगातार हो रहे घाटे से परेशान हैं, तो बाबा बटुक भैरव की पूजा आपके लिए संजीवनी बन सकती है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए बटुक भैरव जयंती 2026 की संपूर्ण सात्विक बटुक भैरव जयंती पूजा विधि (Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi), अचूक मंत्र और चमत्कारिक उपाय।
📅 बटुक भैरव जयंती 2026 की तिथि और मुहूर्त (Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi)
साल 2026 में बटुक भैरव जयंती (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) का पावन पर्व 24 जून के महीने में अत्यंत शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा। इस दिन ‘रवि योग’ और ‘सिद्धि योग’ का निर्माण पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है।
| विवरण (Event details) | तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time) |
| बटुक भैरव जयंती | 24 जून, 2026 (बुधवार) |
| दशमी तिथि आरंभ | 23 जून, 2026 सांय 04:41 बजे से |
| दशमी तिथि समाप्त | 24 जून, 2026 सांय 06:12 बजे तक |
🪔 क्विक लिस्ट: बटुक भैरव जयंती पूजा सामग्री (Samagri List)
बटुक भैरव जयंती पूजा सामग्री लिस्ट (Checklist) सेव कर लें। इसके बिना बटुक भैरव देव की पूजा अधूरी मानी जाती है:
| पूजा सामग्री (Puja Item) | महत्व (Significance) |
| फोटो एवं प्रतिमा | बाबा बटुक भैरव या भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर |
| दीपक | सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीपक |
| भोग सामग्री | इमरती, जलेबी, मालपुआ, दूध, मिश्री और मेवे का भोग। |
| अन्य सामग्री | पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), लाल चंदन, रोली, अक्षत (साबुत चावल), लाल पुष्प (गुलाब या गुड़हल) की माला और गंगाजल, धूप-दीप, कपूर और बटुक भैरव आरती, चालीसा की पुस्तक। |
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🕰️ बटुक भैरव जयंती पूजा मुहूर्त 2026 (Choghadiya Muhurat 24 जून 2026)
24 जून को नीचे बताये गये समय पर बटुक भैरव जयंती पूजा विधि कर सकते है:
| मुहूर्त का प्रकार (Muhurat Type) | समय (Time) | स्थिति (Status) |
| सुबह का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | सुबह 05:34 से 07:18 बजे तक | ✅ शुभ एवं उन्नति |
| सुबह का मुहूर्त (Amrut Choghadiya) | सुबह 07:18 से 09:02 बजे तक | ✅ सर्वोत्तम |
| सुबह का मुहूर्त (Shubh Choghadiya) | सुबह 10:46 से दोपहर 12:29 बजे तक | ✅ उत्तम |
| सांय का मुहूर्त (Char Choghadiya) | दोपहर 15:57 बजे से 17:41 बजे तक | ✅ सामान्य |
| सांय का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | सांय 17:41 बजे से 19:24 बजे तक | ✅ शुभ एवं उन्नति |
| अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | इस दिन कोई मुहूर्त नहीं हैं। | 🌟 सर्वश्रेष्ठ |
| राहुकाल (Rahu Kaal) | दोपहर 12:29 बजे से 14:13 बजे तक | ❌ वर्जित (पूजा न करें) |
📿 बटुक भैरव जयंती की संपूर्ण पूजा विधि 2026 (Step-by-Step Puja Vidhi)
बटुक भैरव भगवान का बाल स्वरूप हैं, इसलिए इनकी पूजा काल भैरव की तरह तामसिक नहीं, बल्कि अत्यंत सात्विक और प्रेमपूर्ण तरीके से की जाती है। वर्ष 2026 की जयंती पर इस सरल से बटुक भैरव जयंती पूजा विधि (Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi) का पालन करें:
- पवित्र स्नान और वस्त्र: बटुक भैरव जयंती के दिन साधक को जल्दी प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर स्नान आदि से करके लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
- चौकी की स्थापना: इसके बाद अपने घर के पूजा स्थल में जाकर या फिर घर के ईशान कोण (North-East) में एक लकड़ी की चौकी या पट्टा रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। और फिर बाबा बटुक भैरव या भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
- दीप प्रज्वलन: अब बाबा के सामने सरसों के तेल का या फिर शुद्ध घी का चौमुखी दीपक (चार बत्तियों वाला दीपक) जलाएं और साथ में धूपबत्ती भी जलाये।
- आवाहन और स्नान: भगवान श्री गणेश का ध्यान करने के बाद बाबा बटुक भैरव जी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और गंगाजल से स्नान करवाना चाहिए। (यदि तस्वीर है तो केवल छींटे दें)।
- रोली-चंदन और पुष्प: बाबा बटुक भैरव जी को लाल चंदन, रोली, अक्षत (साबुत चावल) और लाल पुष्प (गुलाब या गुड़हल) की माला अर्पित करें।
- सात्विक भोग (अति महत्वपूर्ण): बटुक भैरव बाल स्वरूप हैं, इसलिए उन्हें मीठा अत्यंत प्रिय है। बाबा को इमरती, जलेबी, मालपुआ, दूध, मिश्री और मेवे का भोग लगाएं।
- आरती और श्वान भोजन: अंत में कपूर और लौंग से भैरव बाबा की आरती करें। पूजा संपन्न होने के बाद एक काले कुत्ते (भैरव जी का वाहन) को दूध, मीठी रोटी या जलेबी अवश्य खिलाएं।
🕉️ बटुक भैरव के शक्तिशाली संकटमोचन मंत्र
पूजा के दौरान रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए किसी भी एक मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप अवश्य करें। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:
- आपदुद्धारक मंत्र: “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा॥” (अचानक आए संकटों को टालने के लिए सर्वोत्तम)।
- बटुक भैरव मूल मंत्र: “ॐ ह्रीं बटुकाय क्ष्रौं क्ष्रौं बटुकाय ह्रीं ॐ॥”
🌺 क्विक लिस्ट: बटुक भैरव पूजा के 5 चमत्कारिक लाभ (Batuk Bhairav Puja Benefits)
बटुक भैरव जयंती के लाभ पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए बटुक भैरव की पूजा से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| जीवन का भयंकर संकट (Problem) | बटुक भैरव पूजा के अचूक लाभ (Benefits) |
| अज्ञात शत्रुओं का भयंकर षड्यंत्र | विरोधियों का अहंकार टूटता है, उनकी बुद्धि भ्रमित होती है और वे आपके सामने नतमस्तक हो जाते हैं। |
| राहु-केतु और शनि की महादशा | नवग्रहों के क्रूर दोष शांत होते हैं और अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। |
| काले जादू और तंत्र-मंत्र का प्रभाव | घर या व्यापार पर किया गया कोई भी तांत्रिक (Black Magic) प्रयोग तुरंत 100% निष्प्रभावी हो जाता है। |
| कोर्ट केस और कानूनी विवाद | झूठे मुकदमों और कानूनी अड़चनों से मुक्ति मिलती है और फैसला आपके पक्ष में आता है। |
| पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय | जयंती के दिन सुबह का समय या गोधूलि बेला (सूर्यास्त के बाद) पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है। |
🌟 राहु-केतु दोष और तंत्र शमन का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली (शक्ति विहार) स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि वैदिक ज्योतिष में भगवान भैरव को ‘राहु’ और ‘केतु’ (Rahu-Ketu) जैसे मायावी ग्रहों का अधिपति माना गया है। जब जन्म कुंडली में ये छाया ग्रह नीच के होते हैं या कालसर्प दोष बनाते हैं, तो व्यक्ति अकारण ही मुकदमों में फंस जाता है, अचानक दुर्घटनाएं होती हैं और अज्ञात शत्रुओं का भय सताता है।
कुंडली के इन भयंकर दोषों को 100% शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए राहु-केतु को नियंत्रित करने वाला साक्षात भैरव स्वरूप ‘8 मुखी रुद्राक्ष’ (8 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। बटुक भैरव जयंती 2026 के शुभ अवसर पर इसे धारण करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य तांत्रिक घेरा बन जाता है, जिसे कोई भी बुरी शक्ति भेद नहीं सकती।
⚠️ बटुक भैरव की पूजा में रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान
- तामसिक वस्तुओं का सख्त निषेध: ध्यान रहे, ‘काल भैरव’ की पूजा में मदिरा (शराब) का प्रयोग होता है, लेकिन ‘बटुक भैरव’ बाल स्वरूप हैं। इनकी पूजा में भूलकर भी मदिरा, मांस, लहसुन या प्याज का प्रयोग न करें।
- काले कुत्ते का सम्मान: भैरव बाबा का वाहन कुत्ता (श्वान) है। जयंती के दिन या उसके बाद भी कभी किसी कुत्ते को न मारें और न ही दुत्कारें। श्वान की सेवा करने से बाबा तुरंत प्रसन्न होते हैं।
- क्रोध और विवाद से बचें: पूजा के दिन घर में पूर्ण शांति बनाए रखें। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का भूलकर भी अपमान न करें।
Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi 2026❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती कब है?
Ans: बटुक भैरव जयंती प्रतिवर्ष ‘ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी’ को मनाई जाती है। साल 2026 में 24 जून, 2026 को बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी।
Q2: क्या घर के मंदिर में बटुक भैरव की मूर्ति रख सकते हैं?
Ans: जी हाँ! भगवान का बाल स्वरूप (बटुक भैरव) अत्यंत सौम्य है, इसलिए आप इनकी सौम्य तस्वीर घर के मंदिर में रख सकते हैं। उग्र स्वरूप (काल भैरव) की तस्वीर घर में नहीं रखी जाती।
Q3: भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए क्या दान करना चाहिए?
Ans: इस दिन ज़रूरतमंदों को काले उड़द, सरसों का तेल, काले वस्त्र, जूते-चप्पल और छाते का दान करना अत्यंत शुभ होता है।
Q4: बटुक भैरव जयंती के दिन किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
Ans: अचानक आने वाले संकटों को टालने के लिए बाबा के आपदुद्धारक मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा” का जाप सबसे अधिक फलदायी माना गया है।
निष्कर्ष: जीवन के हर अघोर संकट और भय से मुक्ति दिलाने वाले बाबा बटुक भैरव अपने भक्तों पर पिता के समान कृपा बरसाते हैं। साल 2026 की इस पावन बटुक भैरव जयंती पर Freeupay.in द्वारा बताई गई इस सात्विक बटुक भैरव जयंती पूजा विधि (Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi) और मंत्रों का पूर्ण श्रद्धा के साथ पालन करें। भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन की हर बाधा तुरंत नष्ट होगी और घर में अपार सुख-शांति आएगी।
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