Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali: यह तो आप सब पहले से जानते है की जीवन में आने वाली समस्त प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए भैरव देवता की आराधना का बहुत महत्व रखती है। यदि आप खास तौर से भैरव अष्टमी वाले दिन या शनिवार वाले दिन यदि आप बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें, तो आपको निश्चित ही आपके सारे कार्य सफल और सार्थक हो जाएंगे, साथ ही आप अपने व्यापार, व्यवसाय और जीवन में आने वाली समस्या, विघ्न, बाधा, शत्रु, कोर्ट कचहरी, और मुकदमे में आदि में पूर्ण सफलता प्राप्त करेंगे। बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली के बारे में बताने जा रहे हैं।
Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali: बटुक भैरव के 108 नाम, रातों-रात खत्म करेंगे भयंकर शत्रु और कंगाली
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इस कलियुग में भगवान शिव के जिस अवतार की पूजा अर्चना करने व्यक्ति को सबसे शीघ्र फल प्राप्त होता हैं, उन्हें ‘भैरव’ अवतार माना गया है। भैरव बाबा के अनेक स्वरूप हैं, जिनमें से एक ‘बटुक भैरव’ (Batuk Bhairav) भीं हैं, इनका स्वरूप 5 से 8 वर्ष का अत्यंत सौम्य, शांत और भक्तों पर कृपा लुटाने वाला बाल स्वरूप है।
जब कोई इंसान चारों तरफ से संकटों में घिर जाता है, अकारण मुकदमों में फंस जाता है, व्यापार में लगातार घाटा होता है या अज्ञात शत्रुओं का भय रातों की नींद उड़ा देता है, तब ‘श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली’ (बटुक भैरव के 108 नाम) का पाठ एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करता है। बाबा के इन 108 नामों के उच्चारण मात्र से नकारात्मक ऊर्जाएं भस्म हो जाती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें बटुक भैरव की संपूर्ण शतनामावली, पाठ की सही विधि और इसके चमत्कारिक तांत्रिक लाभ।
🌺 क्विक लिस्ट: बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली पाठ के 5 अचूक लाभ (Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali Benefits)
बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली (Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali) पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए बाबा बटुक भैरव के 108 नामों के नित्य स्मरण से जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| जीवन का भयंकर संकट (Problem) | शतनामावली पाठ के अचूक लाभ (Benefits) |
| अज्ञात शत्रुओं का भयंकर षड्यंत्र | विरोधियों की बुद्धि भ्रमित होती है, उनका अहंकार टूटता है और वे आपके सामने घुटने टेक देते हैं। |
| राहु-केतु और शनि जनित महादोष | नवग्रहों के क्रूर दोष शांत होते हैं और अचानक होने वाली दुर्घटनाओं (अकाल मृत्यु) का भय खत्म हो जाता है। |
| काले जादू और तंत्र-मंत्र का प्रभाव | घर या व्यापार पर किया गया कोई भी मारण या उच्चाटन प्रयोग (Black Magic) तुरंत निष्प्रभावी हो जाता है। |
| कोर्ट केस और कानूनी विवाद | वर्षों पुराने झूठे मुकदमों (Court Cases) और कानूनी अड़चनों से मुक्ति मिलती है और निर्णय आपके पक्ष में आता है। |
| पाठ का सर्वश्रेष्ठ समय | किसी भी रविवार, मंगलवार या अष्टमी तिथि की सुबह अथवा गोधूलि बेला (शाम के समय) पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली (Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali in Hindi)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ लाल आसन पर बैठें। सामने सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं और भगवान शिव के बाल स्वरूप बटुक भैरव का ध्यान करते हुए इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें:
- ॐ भैरवाय नमः
- ॐ भूतनाथाय नमः
- ॐ भूतात्मने नमः
- ॐ भूतभावनाय नमः
- ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
- ॐ क्षेत्रपालाय नमः
- ॐ क्षेत्रदाय नमः
- ॐ क्षत्रियाय नमः
- ॐ विराजे नमः
- ॐ श्मशानवासिने नमः
- ॐ मांसाशिने नमः
- ॐ खर्वराशिने नमः
- ॐ स्मरांतकाय नमः
- ॐ रक्तपाय नमः
- ॐ पानपाय नमः
- ॐ सिद्दाय नमः
- ॐ सिद्धिदाय नमः
- ॐ सिद्धिसेविताय नमः
- ॐ कंकालाय नमः
- ॐ कालशमनाय नमः
- ॐ कलाकाष्ठाय नमः
- ॐ तनये नमः
- ॐ कवये नमः
- ॐ त्रिनेत्राय नमः
- ॐ बहुनेत्राय नमः
- ॐ पिंगललोचनाय नमः
- ॐ शूलपाणये नमः
- ॐ खड्गपाणये नमः
- ॐ कपालिने नमः
- ॐ धूम्रलोचनाय नमः
- ॐ अभीरवे नमः
- ॐ भैरवीनाथाय नमः
- ॐ भूतपाय नमः
- ॐ योगिनीपतये नमः
- ॐ धनधाय नमः
- ॐ धनहारिणे नमः
- ॐ धनवते नमः
- ॐ प्रीतीवर्धनाय नमः
- ॐ नागहाराय नमः
- ॐ नागपाशाय नमः
- ॐ व्योमकेशाय नमः
- ॐ कपालभर्ते नमः
- ॐ कालाय नमः
- ॐ कपालमालिने नमः
- ॐ कमनीयाय नमः
- ॐ कलानिधये नमः
- ॐ त्रिलोचनाय नमः
- ॐ ज्वलनेन्राय नमः
- ॐ त्रिशिखने नमः
- ॐ त्रिलोकेषाय नमः
- ॐ त्रिनेत्रतनयाय नमः
- ॐ डिम्भाय नमः
- ॐ शान्ताय नमः
- ॐ शांतजनप्रियाय नमः
- ॐ बटुकाय नमः
- ॐ बहुवेशाय नमः
- ॐ खट्वांगधारकाय नमः
- ॐ भूताध्यक्षाय नमः
- ॐ पशुपतये नमः
- ॐ भिक्षुकाय नमः
- ॐ परिचारकाय नमः
- ॐ धूर्ताय नमः
- ॐ दिगम्बराय नमः
- ॐ शराय नमः
- ॐ हरिणे नमः
- ॐ पांडुलोचनाय नमः
- ॐ प्रशांताय नमः
- ॐ शांतिदाय नमः
- ॐ सिद्दाय नमः
- ॐ शंकरप्रियबांधवाय नमः
- ॐ अष्टमूर्तये नमः
- ॐ निधीशाय नमः
- ॐ ज्ञानचक्षुये नमः
- ॐ तपोमदाय नमः
- ॐ अष्टाधाराय नमः
- ॐ षडाधाराय नमः
- ॐ सर्पयुक्ताय नमः
- ॐ शिखिसखाय नमः
- ॐ भूधराय नमः
- ॐ भूधराधीशाय नमः
- ॐ भूपतये नमः
- ॐ भुधरात्मज्ञाय नमः
- ॐ कंकालधारिणे नमः
- ॐ मुण्डिने नमः
- ॐ नागयज्ञोपवीतवते नमः
- ॐ ज्रम्भणाय नमः
- ॐ मोहनाय नमः
- ॐ स्तंभिने नमः
- ॐ मारणाय नमः
- ॐ क्षोभणाय नमः
- ॐ शुद्धनीलांजनप्रख्याय नमः
- ॐ दैत्यघ्ने नमः
- ॐ मुंडभूषिताय नमः
- ॐ बलिभूजे नमः
- ॐ बलिभूतनाथाय नमः
- ॐ बालाय नमः
- ॐ बालपराक्रमाय नमः
- ॐ सर्वपत्तारणाय नमः
- ॐ दुर्गाय नमः
- ॐ दुष्ट भूषिताय नमः
- ॐ कामिने नमः
- ॐ कलानिधये नमः
- ॐ कांताय नमः
- ॐ कामिनीवश कृद्वशिने नमः
- ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
- ॐ वैद्याय नमः
- ॐ प्रभवे नमः
- ॐ विष्णवे नमः
(सभी 108 नामों के अंत में ‘नमः’ लगाकर पूर्ण श्रद्धा से बाबा का ध्यान करें। पाठ पूर्ण होने पर अपनी मनोकामना उनके समक्ष रखें।)
🌟 राहु-केतु दोष और तंत्र शमन का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि वैदिक ज्योतिष में भगवान भैरव को ‘राहु’ और ‘केतु’ (Rahu-Ketu) जैसे क्रूर और मायावी ग्रहों का अधिपति माना गया है। जब जन्म कुंडली में ये छाया ग्रह नीच के होते हैं, तो व्यक्ति अकारण ही मुकदमों में फंस जाता है, उसे अज्ञात शत्रुओं का भय सताता है और घर में भयंकर तांत्रिक दोष का असर दिखने लगता है।
कुंडली के इन भयंकर मारक दोषों को 100% शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए राहु-केतु को नियंत्रित करने वाला ‘8 मुखी रुद्राक्ष’ (8 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे धारण करके इस शतनामावली का पाठ करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य तांत्रिक घेरा बन जाता है, जिसे ब्रह्मांड की कोई भी बुरी शक्ति या दुर्भाग्य भेद नहीं सकता।
⚠️ बटुक भैरव नामावली पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for Reciting Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali)
बटुक भैरव भगवान का बाल स्वरूप हैं, इसलिए इनकी पूजा और पाठ में इन सात्विक नियमों का पालन अनिवार्य है:
- तामसिक वस्तुओं का सख्त निषेध: ध्यान रहे, ‘काल भैरव’ की पूजा में मदिरा का प्रयोग होता है, लेकिन ‘बटुक भैरव’ की पूजा में भूलकर भी मदिरा, मांस, लहसुन या प्याज का प्रयोग न करें। बाबा को मीठा (जलेबी, इमरती, दूध) अत्यंत प्रिय है।
- काले कुत्ते का सम्मान: भैरव बाबा का वाहन कुत्ता (श्वान) है। इस नामावली का पाठ करने के बाद एक काले कुत्ते को मीठी रोटी, दूध या जलेबी अवश्य खिलाएं। कुत्ते को कभी मारें या दुत्कारें नहीं।
- क्रोध और विवाद से बचें: पाठ के दिन घर में पूर्ण शांति और पवित्रता बनाए रखें। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का अपमान करने से बाबा तुरंत रुष्ट हो जाते हैं।
Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali Lyrics in Sanskrit & Hindi❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: बटुक भैरव के 108 नामों का पाठ कब करना चाहिए?
Ans: अकारण आने वाले संकटों और शत्रुओं से मुक्ति के लिए रविवार, मंगलवार या अष्टमी तिथि के दिन प्रातःकाल या गोधूलि बेला में इस नामावली का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है।
Q2: क्या महिलाएं बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कर सकती हैं?
Ans: जी हाँ! बटुक भैरव भगवान का बाल स्वरूप हैं, इसलिए महिलाएं भी पूर्ण सात्विकता और पवित्रता के साथ एक मां के भाव से इस नामावली का पाठ कर सकती हैं।
Q3: बटुक भैरव बाबा को क्या भोग लगाना चाहिए?
Ans: बाबा बटुक भैरव को मीठी वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। आप उन्हें जलेबी, मालपुआ, इमरती, दूध और मिश्री का भोग लगा सकते हैं।
निष्कर्ष: जीवन के हर अघोर संकट और भय से मुक्ति दिलाने वाले बाबा बटुक भैरव अपने भक्तों पर एक पिता की तरह कृपा बरसाते हैं। Freeupay.in द्वारा बताई गई इस सात्विक पूजा विधि और 108 नामों की नामावली (Shri Batuk Bhairav Ashtottara Shatanamavali) का पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करें। भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन की हर बाधा तुरंत नष्ट होगी और घर में अपार सुख-शांति आएगी।
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