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Skandmata Vrat Katha in Hindi: माँ स्कंदमाता व्रत कथा 2025: नवरात्रि पाँचवा दिन जानें पूरी कहानी और महत्व

Skandmata Vrat Katha in Hindi: माँ स्कंदमाता व्रत कथा 2025: नवरात्रि पाँचवा दिन जानें पूरी कहानी और महत्व माँ स्कंदमाता जी के बारे में बताने जा रहे हैं, यहां हम आपको माता स्कंदमाता देवी का स्वरूप और मां स्कंदमाता कथा (Skandmata Vrat Katha) की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

🕉️ नवरात्रि पाँचवा दिन: संतान प्राप्ति का वरदान के लिए, पढ़ें मां स्कंदमाता की पूरी कहानी | Skandmata Katha Lyrics & Text

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Maa Skandmata Katha PDF Download: नवरात्रि के पांचवें दिन, ज्ञान, मोक्ष और संतान सुख देती है यह चमत्कारी कथा, पढ़ें स्कंदमाता की कहानी

Maa Skandmata Katha 2025: माता स्कंदमाता देवी का स्वरूप

माता स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं जिनमें से माता ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है जिससे वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं तथा एक हाथ से उन्होंने गोद में बैठे अपने पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है इनका वर्ण पूर्णतः शुभ है और ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, जिस कारण माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

माता स्कंदमाता को अपना नाम अपने पुत्र के साथ जोड़ना बहुत अच्छा लगता है इसलिए इन्हें स्नेह और ममता की देवी माना जाता है। इनका वाहन सिंह है ये माता भक्त की सभी इच्छाओंको पूर्ण करने वाली हैं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण श्री दुर्गा के इस स्वरुप को स्कंदमाता कहा जाता है।

Navratri Day 5 Special Maa Skandmata Complete Vrat Katha PDF Download | क्यों कहलाती हैं मां स्कंदमाता? जानें भगवान कार्तिकेय से जुड़ी उनकी पूरी कथा

मान्यताओं के अनुसार तारकासुर नामक एक राक्षस था जिसने अपनी तपस्या से ब्रह्मदेव को प्रसन्न कर लिया था उसने ब्रह्मदेव से अजर-अमर होने का वरदान माँगा ब्रह्मा जी ने उसे समझाया की इस धरती पर जिसने भी जन्म लिया है उसे मरना ही है तब उसने सोचा कि शिव जी तपस्वी हैं, इसलिए वे कभी विवाह नहीं करेंगे अतः यह सोचकर उसने भगवान से सिर्फ शिव के पुत्र द्वारा ही मारे जाने का वरदान मांग लिया ब्रह्मा जी इस बात से सहमत होकर उसे तथास्तु कहकर चले गए। Skandmata Vrat Katha

उसके बाद उस राक्षस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाना शुरू कर दिया उसके अत्याचार से तंग होकर देवतागण शिव जी के पास पहुँचे और उनसे विवाह करने का अनुरोध किया तब शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया और वे कार्तिकेय के पिता बनें शिव जी के पुत्र भगवान कार्तिकेय ने बड़े होकर तारकासुर दानव का वध किया और लोगों को बचाया। Skandmata Vrat Katha

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