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Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi 2026: Step-by-Step अंगारकी चतुर्थी 2026: जानें संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi 2026: आज करें इस विधि से पूजा, कर्ज और संकट होंगे दूर

Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi: इस साल 2026 के शुरुआत में ही एक बेहद शुभ संयोग आरंभ हो रही है। आज 6 जनवरी, मंगलवार को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, जब संकष्टी चतुर्थी किसी मंगलवार के दिन को पड़ती है, तो उसका महत्व अन्य चतुर्थी तिथि से 100 गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi
Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi

यह दिन भगवान गणेश के साथ-साथ मंगल देव (Mars) की कृपा पाने और कर्ज (Debt) से मुक्ति पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। Freeupay.in के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं अंगारकी चतुर्थी की विशेष पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और अर्घ्य देने का नियम आदि सभी महत्वपूर्ण जानकारी बताई जाएगी।

📋 अंगारकी चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट (Puja Samagri List)

अंगारकी चतुर्थी पर लाल रंग का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए सामग्री में अधिकतर लाल चीजों का समावेश जरूर करें:

  • मूर्ति: भगवान गणेश की प्रतिमा या फोटो (तस्वीर) (सिंदूरी रंग की हो तो उत्तम)।
  • वस्त्र: लाल रंग का कपड़ा (चौकी पर बिछाने के लिए)।
  • फूल: लाल गुड़हल (Hibiscus) या लाल गुलाब, फूलों की मालाएं।
  • प्रसाद: गुड़ और तिल के लड्डू, मोदक, मोतीचूर या बेसन के लड़्‌ड़ु (इनमें से कोई भी ले सकते है)।
  • अन्य सामग्री: रोली, कुमकुम, लाल चंदन (इनमे से कोई एक), सिंदूर और घी मिलाकर चोला, सिंदूर, 21 दूर्वा, जनेऊ, पान, सुपारी, घी का दीपक, धुपबत्ती, कलश और जल।

🙏 अंगारकी चतुर्थी पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step Vidhi)

इस अंगारकी चतुर्थी पूजा विधि से पूजा करने पर भगवान गणेश और मंगल देव दोनों प्रसन्न होते हैं:

1. संकल्प और स्नान (Sankalp)

इस दिन जातक को प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नानादि करके साफ़ वस्त्र (लाल रंग के कपड़े) धारण करने चाहिये। इसके बाद अपने हाथ में जल, अक्षत और लाल फूल लेकर आज का व्रत रखने के लिए संकल्प लें: “हे विघ्नहर्ता! अपना नाम बोले, फिर आज अंगारकी चतुर्थी पर मैं अपने कष्टों और कर्ज की मुक्ति के लिए यह व्रत/पूजा कर रहा हूँ/रही हूँ।”

2. गणेश स्थापना (Sthapana)

पूर्व दिशा या ईशान कोण (पूर्व-उत्तर) में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और श्री गणेश जी की फोटो या प्रतिमा स्थापित करें।

3. अंगारक अभिषेक (Abhishek)

श्री गणेश जी को जल और पंचामृत से अभिषेक कराएं। इसके बाद उन्हें सिंदूर का चोला या गीला सिंदूर अर्पित करें। ध्यान दें: अंगारकी चतुर्थी पर सिंदूर चढ़ाना सबसे शुभ होता है।

4. लाल फूल और दूर्वा

श्री गणेश जी को रोली या कुमकुम का तिलक लगाकर अक्षत लगायें और गंध और लाल गुड़हल के फूल चढ़ाएं। इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” बोलते हुए 21 दूर्वा की गांठे अर्पित करें। फल, पान और सुपारी अर्पित करके श्री गणेश जी को मोतीचूर या बेसन के लड़्‌ड़ुओं का भोग लगायें। 

5. विशेष मंत्र जाप (Mantra Chanting)

पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्रों का 108 बार जाप करें। यह कर्ज मुक्ति के लिए रामबाण है:

  • गणेश मंत्र: ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा। या फिर
    • गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
  • अंगारक (मंगल) मंत्र: ॐ अं अंगारकाय नमः।

6. भोग और आरती

भगवान को गुड़-तिल के लड्डू या मोदक या फिर मोतीचूर या बेसन के लड़्‌ड़ुओं का भोग लगाएं। अंत में घी का दीपक जलाकर और धूपबत्ती जलाकर “श्री गणेश अथर्वशीर्ष” का पाठ करके “श्री गणेश जी की” की आरती करें।

7. व्रत कथा (Vrat Katha)

संध्या (प्रदोष काल) के समय श्री गणेश जी के सामने घी का दीपक और धुप जलाकर पूजन करके अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़े या सुने (व्रत कथा हमारी वेबसाइट में दी गई है)

🌙 अंगारकी चतुर्थी अर्घ्य विधि (Moon Arghya)

आज चाँद निकलने का समय (लगभग रात 09:05 बजे) है। अंगारकी चतुर्थी पर अर्घ्य देने का तरीका सामान्य दिनों से थोड़ा अलग है:

  1. तांबे के लोटे में जल लें।
  2. उसमें लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और थोड़ा गुड़ मिलाएं।
  3. चंद्रमा को देखते हुए अर्घ्य दें और प्रार्थना करें कि जीवन से अंधकार दूर हो।
  4. अर्घ्य देते समय बोलें: “ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिषाम्पते:। नमस्ते रोहिणीकान्त अर्घ्यं मे प्रतिगृह्यताम्॥”
  5. पूजा करने के बाद रात्रि को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन करें।
  6. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से लेकर रात्रि को चंद्रमा के दर्शन तक रखा जाता हैं। रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता हैं। पुरे साल में केवल भाद्रपद मास की कलंक चतुर्थी के दिन ही चंद्र दर्शन निषेध माना जाता हैं।
  7. व्रती को दिन पूजा के उपरांत फलाहार का सेवन करें, इस दिन सेंधा नमक का सेवन भी ना करें।

🌟 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पूजा महत्व (Significance)

  1. कर्ज से मुक्ति: यदि आप कर्ज से परेशान हैं, तो अंगारकी चतुर्थी के दिन “ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र” का पाठ अवश्य करें।
  2. मंगल दोष निवारण: जिनकी जन्म कुंडली में मंगल दोष है, उनके लिए आज का व्रत करना रामबाण उपाय है।
  3. सर्वश्रेष्ठ चतुर्थी: शास्त्रों में कहा गया है कि साल भर कोई व्रत न कर पाएं, तो केवल अंगारकी चतुर्थी का व्रत करने से मोक्ष और सुख की प्राप्ति होती है।
  4. गृह क्लेश से मुक्ति: इस व्रत को करने से गृह क्लेश से मुक्ति मिलती हैं, और घर-परिवार में सुख शांति बनी रहती हैं।
  5. नकारात्मक प्रभाव: जातक के घर-परिवार से सभी प्रकार की नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं।
  6. कार्यों मे सफलता: जातक की समस्त मनोकामनायें पूरी होती हैं। और सभी प्रकार के कार्यों मे सफलता प्राप्त होती है।
  7. रोग नाश: इस भगवान श्री गणेश जी पूजा अर्चना करने से उनकी कृपा से समस्त प्रकार के रोगों का नाश होता हैं।
  8. अन्य फायदे: व्रत को करने से जातक को सभी प्रकार की समस्याओं और विपत्तियों नष्ट और सभी प्रकार के दुख दूर हो जाते हैं और जातक के धन-सम्पत्ति में वृद्धि होती हैं।

❓ Angarki Sankashti Chaturthi Puja Vidhi 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: अंगारकी चतुर्थी पर क्या खास उपाय करना चाहिए?

Ans: आज के दिन गणेश जी को ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ सुनाने से पुराने से पुराना कर्ज उतरने लगता है।

Q2: क्या पूजा में तुलसी का प्रयोग कर सकते हैं?

Ans: नहीं, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी (Tulsi) का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है। केवल दूर्वा चढ़ाएं।

Q3: व्रत का पारण (Vrat Parana) कब करें?

Ans: रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें। फलाहार में तिल-गुड़ का सेवन करें।

निष्कर्ष: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी साल में केवल एक या दो बार ही आती है। आज 6 जनवरी 2026 का यह दिन चूकें नहीं। Freeupay.in द्वारा बताई गई इस विधि से पूजा करें, बप्पा आपकी झोली खुशियों से भर देंगे। धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ मुहूर्त की जानकारी के लिए Freeupay.in को सब्सक्राइब करें।

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