हम यंहा आपको इस पोस्ट के माध्यम से चातुर्मास का महत्व और व्रत विधि के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं ! हमारे इस पोस्ट के माध्यम से आप चातुर्मास के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva
हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।
हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

🧿 लैब सर्टिफाइड और अभिमंत्रित सिद्ध रुद्राक्ष पाने के लिए तुरंत कॉल करें मोबाइल नंबर: 9667189678
चातुर्मास कब से है?
आषाढ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक अथवा आषाढ माह की पूर्णिमा से कार्तिक माह पूर्णिमा तक चार महीने के समय को “चातुर्मास” कहा जाता है। जो की साल 2025 में 10 जुलाई से 02 नवम्बर, 2025 तक रहेगा।
चातुर्मास का महत्व
चातुर्मास का महत्व इसलिए ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकी कहते है की चातुर्मास को उपासना एवं साधना करने से जातक को और समय की तुलना में ज्यादा पुण्यकारक एवं फलदायी देती है। हिन्दू धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का समय देवताओं के शयन काल का होता है। इसलिए इस समय में हिन्दू धर्म के कोई भी मांगलिक कार्य नही होते है। और इसलिए ही चातुर्मास के आरंभ में जो भी एकादशी आती है, उसे शयनी अथवा “देवशयनी एकादशी” कहते हैं। मतलब देवताओं की शयन काल का समय। तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। मतलब देवताओं के उठने का समय।
Chaturmas Ke Upay : Chaturmas Me Kya Upay Kare : चातुर्मास के उपाय
Chaturmas Me Kya Kare : Chaturmas Ke Niyam : चातुर्मास में क्या करे
Chaturmas Ka Mahatmya : Chaturmas Ki Mahima : चातुर्मास का महात्म्य
चातुर्मास व्रत विधि
चातुर्मास के काल को व्रत विधियों का भी समय माना जाता है। धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता कुछ ज्यादा ही बढ जाती है। इसलिए इसे समय में हमें हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है। इसलिए चातुर्मास में किए जाने वाले उपवास व व्रत विधियों द्वारा देवताओं की उपासना व आवाहन करके सत्त्वगुण को बढ़ाना चाहिए। चातुर्मास में व्रत रखने के बहुत लाभ मिलते है।

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
