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Chaturmas Vrat Vidhi : Chaturmas Ka Mahatva : चातुर्मास व्रत विधि

हम यंहा आपको इस पोस्ट के माध्यम से चातुर्मास का महत्व और व्रत विधि के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं ! हमारे इस पोस्ट के  माध्यम से आप चातुर्मास के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva

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Chaturmas Vrat Vidhi
Chaturmas Vrat Vidhi

चातुर्मास कब से है?

आषाढ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक अथवा आषाढ माह की पूर्णिमा से कार्तिक माह पूर्णिमा तक चार महीने के समय को “चातुर्मास” कहा जाता है। जो की साल 2025 में 10 जुलाई से 02 नवम्बर, 2025 तक रहेगा।

चातुर्मास का महत्व

चातुर्मास का महत्व इसलिए ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकी कहते है की चातुर्मास को उपासना एवं साधना करने से जातक को और समय की तुलना में ज्यादा पुण्यकारक एवं फलदायी देती है। हिन्दू धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का समय देवताओं के शयन काल का होता है। इसलिए इस समय में हिन्दू धर्म के कोई भी मांगलिक कार्य नही होते है। और इसलिए ही चातुर्मास के आरंभ में जो भी एकादशी आती है, उसे शयनी अथवा “देवशयनी एकादशी” कहते हैं। मतलब देवताओं की शयन काल का समय। तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। मतलब देवताओं के उठने का समय।

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चातुर्मास व्रत विधि

चातुर्मास के काल को व्रत विधियों का भी समय माना जाता है। धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता कुछ ज्यादा ही बढ जाती है। इसलिए इसे समय में हमें हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है। इसलिए चातुर्मास में किए जाने वाले उपवास व व्रत विधियों द्वारा देवताओं की उपासना व आवाहन करके सत्त्वगुण को बढ़ाना चाहिए। चातुर्मास में व्रत रखने के बहुत लाभ मिलते है।

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