Hariyali Amavasya Puja Vidhi: श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या का अपना अलग ही महत्व है। हरियाली अमावस्या का त्योहार सावन महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशी में मनाया जाता है। हरियाली अमावस पर पीपल के वृक्ष की पूजा एवं फेरे किये जाते है तथा मालपूए का भोग बनाकर चढाये जाने की परम्परा है। हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का अधिक महत्व है। पितरों की आत्मा की शांति के लिये हवन-पूजा, श्राद्ध, तर्पण आदि करने के लिये भी यह अमावस्या श्रेष्ठ होती है। आइये जानते हैं हरियाली अमावस्या के दिन को विधि पूर्वक पूजा कर सकेंगे।
Hariyali Amavasya Puja Vidhi 2026: इस अचूक विधि से करें पूजा, रातों-रात दूर होगा पितृ दोष और घर में होगी धन वर्षा
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हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ‘हरियाली अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है, जबकि अमावस्या तिथि पितरों (Ancestors) की शांति के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसलिए, हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव, माता पार्वती, प्रकृति (पेड़-पौधों) और पितरों की एक साथ पूजा की जाती है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि जन्म कुंडली में भयंकर ‘पितृ दोष’, ‘कालसर्प दोष’ या आर्थिक तंगी हो, तो हरियाली अमावस्या के दिन विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन से सारे कष्टों को जड़ से उखाड़ फेंकती है। अक्सर लोग पूजा तो करते हैं, लेकिन सही विधि मालूम न होने के कारण उन्हें पूरा फल नहीं मिलता। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए हरियाली अमावस्या की संपूर्ण और प्रामाणिक पूजा विधि, सामग्री और चमत्कारिक नियम।
🕰️ हरियाली अमावस्या 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय (Hariyali Amavasya Shubh Muhurat)
हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya Puja Vidhi) करने वालों के लिए अमावस्या तिथि और व्रत का सही समय जानना सबसे जरूरी है:
| विवरण (Event) | तारीख और समय (Date & Time) |
| हरियाली अमावस्या व्रत की तारीख | 12 अगस्त, 2026 (बुधवार) |
| अमावस्या तिथि आरंभ | 11 अगस्त, 2026, रात्रि 01:53 बजे से |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 12 अगस्त, 2026, रात्रि 11:06 बजे तक |
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🕰️ हरियाली अमावस्या पूजा मुहूर्त 2026 (Choghadiya Muhurat 12 अगस्त 2026)
12 अगस्त को नीचे बताये गये समय पर शनि जयंती पूजा विधि कर सकते है:
| मुहूर्त का प्रकार (Muhurat Type) | समय (Time) | स्थिति (Status) |
| सुबह का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | सुबह 05:57 बजे से 07:35 बजे तक | ✅ शुभ एवं उन्नति |
| सुबह का मुहूर्त (Amrut Choghadiya) | सुबह 07:35 बजे से 09:14 बजे तक | ✅ सर्वोत्तम |
| सुबह का मुहूर्त (Shubh Choghadiya) | सुबह 10:53 से दोपहर 12:32 बजे तक | ✅ उत्तम |
| दोपहर का मुहूर्त (Char Choghadiya) | दोपहर 03:49 बजे से सांय 05:28 बजे तक | ✅ सामान्य |
| सांय का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | सांय 05:28 बजे से 07:07 बजे तक | ✅ उत्तम |
| अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | कोई नहीं | 🌟 सर्वश्रेष्ठ |
| राहुकाल (Rahu Kaal) | दोपहर 12:32 बजे से 02:10 बजे तक | ❌ वर्जित (पूजा न करें) |
🌺 क्विक लिस्ट: हरियाली अमावस्या पूजा सामग्री (Puja Samagri List)
हरियाली अमावस्या पूजा सामग्री लिस्ट (Hariyali Amavasya Puja Samgree Lists) जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। पूजा आरंभ करने से पहले घर में यह आवश्यक सामग्री अवश्य एकत्रित कर लें:
| पूजा का चरण (Puja Step) | आवश्यक पूजन सामग्री (Required Items) |
| शिव-पार्वती अभिषेक हेतु | गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत)। |
| महादेव के श्रृंगार हेतु | सफेद चंदन, भस्म, बेलपत्र (108), भांग, धतूरा, मदार के फूल, शमी पत्र। |
| पितृ तर्पण सामग्री | शुद्ध जल, काले तिल (Black Sesame), कुशा (घास), जौ, सफेद फूल। |
| प्रकृति (वृक्ष) पूजा हेतु | कच्चा सूत (कलावा), सरसों के तेल का दीपक, बताशे, जल का लोटा। |
| दान-पुण्य (Daan) हेतु | अन्न (गेहूं/चावल), फल, छाता, वस्त्र और ब्राह्मणों के लिए दक्षिणा। |
🌳 हरियाली अमावस्या का महत्व (Hariyali Amavasya Puja Ka Mahtav)
श्रावण मास की अमावस्या को Hariyali Amavasya के नाम से जाना जाता है। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या का अपना अलग ही महत्व है। हरियाली अमावस्या का त्योहार सावन महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशी में मनाया जाता है। इस माह में मौसम का नज़ारा कुछ अलग देखने मिलता हैं। हर तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती हैं। आसमान में बादलों की घटायें बिखरी हुई नजर आती हैं। Hariyali Amavasya Puja से एक दिन पहले शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है उसके बाद इस हरियाली अमावस्या से तीसरे दिन तीज मनाई जाती हैं। जो बीजारोपण का त्यौहार माना जाता हैं।
🌳 हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण (Hariyali Amavasya Par Vraksharopan)
हमारे सनातन धर्म में वृक्षों को देवता स्वरूप माना गया है। मनु-स्मृति के अनुसार वृक्ष योनि पूर्व जन्मों के कमों के फलस्वरूप मानी गयी है। हरियाली अमावस्या के दिन नए वृक्ष लगाए जाते हैं इससे प्रकृति हमेशा हरी भरी रह सके। वृक्षों का रोपन करना हमारे साथ जनकल्याण के लिए भी परोपकार का कार्य हैं। हमारे हिन्दू धर्म में पीपल के वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि पीपल के वृक्ष में अनेकों देवताओं का वास माना गया है। Hariyali Amavasya Puja के दिन पीपल के मूल भाग में जल, दूध चढाने से पितृ तृप्त होते है तथा शनि शान्ति के लिये भी शाम के समय सरसों के तेल का दिया लगाने का विधान है।
📿 हरियाली अमावस्या की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
हरियाली अमावस्या के दिन पूजा तीन चरणों में संपन्न होती है: शिव पूजा, पितृ तर्पण और प्रकृति (वृक्ष) पूजा। इस प्रामाणिक विधि का पालन करें:
चरण 1: स्नान और पितृ तर्पण (सुबह का समय)
- पवित्र स्नान: सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें। नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- सूर्य अर्घ्य और संकल्प: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद दिन भर सात्विक रहने या व्रत रखने का संकल्प लें।
- पितृ तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक बर्तन में जल, काले तिल, कुशा और सफेद फूल लेकर अपने पूर्वजों (पितरों) का स्मरण करें और जल अर्पित करें। उनसे अपने अपराधों की क्षमा मांगें और परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद लें।
चरण 2: भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
- शिवलिंग का महाभिषेक: घर के मंदिर या शिवालय में शिवलिंग को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। अभिषेक करते समय लगातार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- श्रृंगार और नैवेद्य: शिवलिंग पर भस्म और सफेद चंदन का लेप करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां) चढ़ाएं।
- आरती और कथा: भगवान शिव को खीर या मौसमी फलों का भोग लगाएं। इसके बाद ‘हरियाली अमावस्या व्रत कथा’ का पाठ करें और कपूर से आरती उतारें।
चरण 3: वृक्ष पूजा और दीपदान (शाम का समय)
- पीपल पूजा: हरियाली अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का सबसे अधिक महत्व है। शाम के समय (प्रदोष काल में) पीपल के वृक्ष की जड़ में जल, दूध और बताशा अर्पित करें।
- परिक्रमा: पीपल के तने के चारों ओर कच्चा सूत (कलावा) लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा करें।
- दीपदान: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक अवश्य जलाएं। यह उपाय शनि दोष और कालसर्प दोष को तुरंत शांत करता है।
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🌳घर में ऐसे करें हरियाली अमावस्या की पूजा (Hariyali Amavasya Pujan Vidhi)
Hariyali Amavasya Puja के दिन नए वृक्ष लगाने का विधान हैं। यह आप सब जानते हो की पेड़-पौधों से मनुष्य नही बल्कि प्रकृति में रहने वाले समस्त जीव जंतु का जीवन सुरक्षित होता है। इस दिन पीपल, बरगद, केला, निंबू, तुलसी आदि का वृक्षारोपण करना बेहतर ही शुभ माना जाता है। Hariyali Amavasya Puja के दिन विशेष रूप से पीपल की पूजा की जाती है। पीपल पर जल चढ़ाया जाता हैं । फिर उसके बाद दीपक जलाकर मालपूओं का भोग लगाया जाता है। और फिर फेरे लिये जाते हैं। क्योंकी पीपल में जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है वहीं आवंला में भगवान लक्ष्मीनारायण को विराजमान माना जाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन को गेंहू, ज्वार, मक्का आदि की सांकेतिक बुआई भी की जाती है। गुड़ व गेंहू की धानि प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है। यह पर्व खास रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। पौधारोपण करने के लिये विशेष रूप से उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, रोहिणी, मृगशिर, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी, हस्त आदि नक्षत्र श्रेष्ठ व शुभ फलदायी माने जाते हैं।
🌳 हरियाली अमावस्या का सबसे बड़ा महा-उपाय (वृक्षारोपण)
हरियाली अमावस्या का पर्व तब तक अधूरा माना जाता है, जब तक आप प्रकृति को कुछ न लौटाएं। इस दिन कम से कम एक नया पौधा (Plant) अवश्य लगाना चाहिए।
- धन लाभ के लिए: आंवला, तुलसी या बिल्वपत्र का पौधा लगाएं।
- पितृ शांति और मोक्ष के लिए: पीपल या बरगद का पौधा किसी सार्वजनिक स्थान या मंदिर में लगाएं।
- रोगों से मुक्ति के लिए: नीम या अशोक का पौधा लगाएं।
⚠️ हरियाली अमावस्या पूजा के 3 कड़े नियम
- पेड़-पौधे न काटें: हरियाली अमावस्या के दिन किसी भी पेड़ की टहनी काटना या पत्ते तोड़ना घोर पाप माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक बेलपत्र या फूल एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।
- पूर्ण सात्विकता: यह दिन पितरों को समर्पित है। इस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
- किसी का अपमान न करें: घर के बुजुर्गों, असहाय लोगों या सफाई कर्मचारियों का अपमान भूलकर भी न करें। इस दिन चींटियों को आटा और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना अत्यंत पुण्यकारी होता है।
Hariyali Amavasya Puja Vidhi 2026❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: हरियाली अमावस्या की पूजा किस समय करनी चाहिए?
Ans: पितरों का तर्पण और शिव पूजा सुबह के समय (ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर 12 बजे तक) करना सबसे उत्तम है। वहीं, पीपल की पूजा और दीपदान शाम के समय (गोधूलि बेला) में करना चाहिए।
Q2: क्या हरियाली अमावस्या पर व्रत रखना ज़रूरी है?
Ans: व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन जो लोग पितृ दोष, भारी कर्ज या अकारण धन हानि से परेशान हैं, उन्हें इस दिन फलाहार व्रत अवश्य रखना चाहिए।
Q3: इस दिन क्या दान करना सबसे शुभ होता है?
Ans: हरियाली अमावस्या के दिन ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को अन्न (गेहूं, चावल), छाता, जूते-चप्पल और वस्त्र का दान करना महापुण्यकारी माना जाता है।
निष्कर्ष: हरियाली अमावस्या केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने और अपने पूर्वजों का आशीर्वाद पाने का सबसे पावन दिन है। Freeupay.in पर बताई गई इस प्रामाणिक पूजा विधि और नियमों का पूर्ण श्रद्धा से पालन करें। महादेव और पितरों की असीम कृपा से आपके जीवन की हर अड़चन दूर होगी और घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होगा।
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