Holi Puja Vidhi 2026: अपने घर पर इस सरल विधि से करें होली की पूजा, घर में आएगी सुख-शांति
Holi Puja Vidhi 2026: यह तो आपको पता होगा की होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्त प्रह्लाद की नारायण भक्ति का प्रतीक है। इस वर्ष 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन किया जा रहा है और 4 मार्च (बुधवार) को रंग (धुलंडी) खेल खेला जाएगा।
होली का नाम सुनते ही अपने मन व दिल में आनन्द व उल्लास के गुब्बारे खिल जाते है। क्योंकि यह पर्व ही कुछ ऐसा है। होली का पर्व सारे देश में किसी ना किसी रूप में बनाया जाता है। यह तो आप सब जानते हो की होली हर वर्ष की फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनायी जाती है। तथा भद्रारहित समय में होली का दहन किया जाता हैं।
हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।
हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

इस साल की होली बहुत खास समय पर आ रही है क्योंकि होली दहन के अगले दिन यानिकी 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लग रहा है। ऐसे में सही विधि से पूजा करना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। Freeupay.in के इस लेख में जानें होलिका दहन और अगले दिन रंग वाली होली की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में पंडित ललित त्रिवेदी (Pandit Lalit Trivedi) के साथ।
📋 होली पूजा सामग्री लिस्ट (Holi Puja Samagri)
होलिका पूजा करते समय कोई भी पूजा सामग्री छूट न जाए, इसलिए पहले से यह थाली तैयार कर लें:
| सामग्री (Items) | विवरण (Details) |
| पवित्र जल | एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल और थोड़ा सा गंगाजल। |
| तिलक और रंग | रोली, कुमकुम, हल्दी और अबीर/गुलाल। |
| चढ़ावे की वस्तुएं | अक्षत (साबुत चावल), मेहंदी, फूल, मौली, साबुत हल्दी, मूंग-चावल, नारियल और सूत का धागा (कच्चा सूत)। |
| प्रसाद और भोग | बताशे, गुड़, नारियल, और घर में बनी गुजिया या मिठाई। |
| अग्नि के लिए | गाय के गोबर से बनी ढाल और बड़कुले (गुलरियां/उपले), गेहूं की नई हरी बालियां एवं हरे चने का पौधा। |
🕰️ होली पूजा का सही समय (ध्यान दें!)
- पूजा का मुहूर्त: सूर्योदय से सुबह 08:22 बजे तक उसके बाद सुबह 09:48 बजे से 11:13 बजे तक एवं इसके बाद दोपहर 02:05 से सांय 06:20 बजे तक होलिका की पूजा करें।
✨ बड़कूले कितने होने चाहिए (Badakule)
होली से दस बारह दिन पहले शुभ दिन देखकर गोबर से सात बड़कूले बनाये जाते है। गोबर से बने बड़कूले को भरभोलिए भी कहा जाता है। पाँच बड़कूले छेद वाले बनाये जाते है ताकि उनको माला बनाने के लिए पिरोया जा सके।
दो बड़कूले बिना छेद वाले बनाये जाते है । इसके बाद गोबर से ही सूरज, चाँद, तारे, और अन्य खिलौने बनाये जाते है। पान, पाटा, चकला, एक जीभ, होला–होली बनाये जाते है। इन पर आटे, हल्दी, मेहंदी, गुलाल आदि से बिंदियां लगाकर सजाया जाता है। होलिका की आँखें चिरमी या कोड़ी से बनाई जाती है। अंत में ढाल और तलवार बनाये जाते है ।
बड़कूले से माला बनाई जाती है। माला में होलिका, खिलोंने, तलवार, ढाल आदि भी पिरोये जाते है। एक माला पितरों की, एक हनुमान जी की, एक शीतला माता की और एक घर के लिए बनाई जाती है। बाजार से तैयार माला भी खरीद सकते है। यह होली पूजा में काम आती है।
🙏 होलिका दहन पूजा विधि (Holika Dahan Vidhi – 2 मार्च)
आप शुभ मुहूर्त में अपने परिवार के साथ होलिका के पास जाकर इस पूजा विधि का पालन करते हुए पूजा करनी चाहिए:
- दिशा: होली की पूजा अर्चना करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की तरफ होना चाहिए।
- स्मरण: इसके बाद जल की बूंदों का छिड़काव आसपास तथा पूजा की थाली और खुद पर करें। इसके पश्चात नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- जल और तिलक: अब इसके बाद सबसे पहले होलिका देवी और भक्त प्रह्लाद का ध्यान करते हुए होलिका पर थोड़ा सा गंगाजल मिश्रित जल छिड़कें। फिर रोली, कुमकुम और हल्दी से तिलक करें।
- सामग्री अर्पण: अब अक्षत (साबुत चावल), फूल, साबुत हल्दी, नारियल, मेहंदी, बताशे, नारियल और गोबर की गुलरियां (बड़कुले) होलिका पर अर्पित करें।
- भोग: इसके बाद होलिका को चावल मूंग का भोग लगाएं।
- परिक्रमा (सबसे महत्वपूर्ण): हाथ में कच्चा सूत (धागा) लेकर होलिका के चारों ओर घूमते हुए 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करते हुए लपेटते जाएं। और जल का लोटा वहीं पूरा खाली कर दें।
- मंत्र: परिक्रमा करते समय बताये गये मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करनी चाहिए। मंत्र: “असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्त्वां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।”
- जल अर्पण: परिक्रमा पूरी होने के बाद जल का लोटा होलिका के पास चढ़ा दें। अब धूपबत्ती और दीपक जलाकर हाथ जोड़कर होलिका से सुख समृद्धि की कामना करें।
- अग्नि में आहुति: इसके बाद साथ लाये गए हरे गेहूं और चने होली की अग्नि में भून लें। होली की अग्नि थोड़ी सी अपने साथ घर ले आएं। ये दोनों काम बड़ी सावधानी पूर्वक करने चाहिए। होली की अग्नि से अपने घर में धूप दिखाएँ। भूने हुए गेहूं और चने प्रसाद के रूप में ग्रहण करे।
- होली का दहन: इसके बाद होली का दहन किया जाता है। पुरुषों के माथे पर तिलक लगाया जाता है। होली जलने पर रोली चावल चढ़ाकर सात बार अर्घ्य देकर सात परिक्रमा करनी चाहिए।
🙏 होली पूजा मंत्र (Puja Mantra)
होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः ।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम् ॥
होलिका दहन के पश्चात उसकी जो राख निकलती है, जिसे होली – भस्म कहा जाता है, उसे शरीर पर लगाना चाहिए। होली की राख लगाते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि माँ देवी ! भूति भूतिप्रदा भव॥
ऐसा माना जाता है, कि होली की जली हुई राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही ऐसा करने से घर में शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है।
🎨 रंगवाली होली की सुबह की पूजा (Dhulandi Puja – 4 मार्च)
4 मार्च की सुबह रंग खेलने से पहले अपने घर के मंदिर में जाकर नीचे बताई गई यह छोटी सी पूजा जरूर करें:
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- अब घर के मंदिर में जाकर राधा-कृष्ण और अपने कुलदेवता/कुलदेवी एवं इष्ट देव एवं देवी की मूर्ति (तस्वीर) के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए।
- सबसे पहले आपको भगवान के चरणों में गुलाल अर्पित करना चाहिए।
- घर में बनाये गये पकवान (गुजिया आदि) का भोग लगाये। इसके बाद ही अपने घर के बड़ों को रंग लगाकर उनका आशीर्वाद लें और फिर अन्य लोगों से होली खेलना शुरू करें।
⚠️ होली पूजा में इन 3 बातों का रखें ध्यान (Rules)
- काले कपड़े न पहनें: होली की पूजा करते समय या होलिका की परिक्रमा करते समय काले रंग के कपड़े पहनने से बचाना चाहिए। पीला या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है।
- भस्म (राख) का प्रयोग: 4 मार्च की सुबह को होलिका दहन की थोड़ी सी ठंडी राख अपने घर लाएं और परिवार के सदस्यों के माथे पर उसका तिलक लगाएं। ऐसा करने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है।
Holi Puja Vidhi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या गर्भवती महिलाएं होलिका की पूजा कर सकती हैं?
Ans: जी हाँ। गर्भवती महिलाएं स्नान करके होलिका की पूजा और दर्शन कर सकती हैं, लेकिन अग्नि की परिक्रमा करने से बचें।
Q2: घर पर होलिका पूजा कैसे करें?
Ans: अगर आप बाहर नहीं जा सकते, तो घर के आंगन या बालकनी में एक गोबर का उपला (कंडा) जलाकर उस पर बताशे और लौंग चढ़ाएं और वहीं बैठकर भक्त प्रह्लाद का ध्यान करें।
Q3: परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए?
Ans: होलिका की परिक्रमा विषम संख्या में की जाती है। आप 3, 5, या 7 बार परिक्रमा कर सकते हैं।
निष्कर्ष: होली का त्योहार श्रद्धा, प्रेम और बुराई के अंत का प्रतीक है। चंद्र ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए 2 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताई गई इस विधि से पूजा करें। भगवान विष्णु और नरसिंह देव आपके परिवार की रक्षा करेंगे।
वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
