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Kurma Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: कूर्म जयंती पर पढ़ें यह सिद्ध ‘श्री कूर्म स्तोत्रम् (PDF)’ का पाठ, नौकरी-व्यापार में मिलेगी चट्टान जैसी स्थिरता और अपार धन

Kurma Stotram 2026: कूर्म अवतार स्तोत्रम् भगवान श्री विष्णु जी को समर्पित हैं। कूर्म अवतार को ‘कच्छप अवतार’ (कछुआ अवतार) भी कहते हैं। भगवान श्री विष्णु जी ने समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को संभाले के लिए कूर्म अवतार लिया था। यह श्री कूर्म स्तोत्र कूर्म पुराणांतर्गत से लिया गया हैं। श्री कूर्म स्तोत्र आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Kurma Stotram 2026: कूर्म जयंती पर पढ़ें यह सिद्ध कूर्म स्तोत्र, घर के वास्तु दोष और धन की कमी होगी हमेशा के लिए दूर

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Kurma Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi
Kurma Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि के दिन को भगवान विष्णु जी ने समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपने पीठ पर धारण करने के लिए ‘कूर्म’ (कछुआ) का अवतार लिया था। 1 मई 2026 (शुक्रवार) को पूरे भारत में यह पावन दिन ‘कूर्म जयंती’ के रूप में मनाया जाएगा।

कलियुग में जब लोगों के जीवन में भारी अस्थिरता हो, व्यापार बार-बार डूब रहा हो या घर में भयंकर वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो, तब भगवान विष्णु के इस स्वरूप की आराधना और ‘श्री कूर्म स्तोत्र’ (Kurma Stotram) का पाठ करना अचूक उपाय माना जाता है। कूर्म अवतार ‘बेस’ या ‘नींव’ का प्रतीक है। जो भक्त कल कूर्म जयंती से इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ शुरू करता है, उसका जीवन चट्टान की तरह स्थिर और धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण कूर्म स्तोत्र।

🕰️ 1 मई 2026: कूर्म जयंती पूजा का ‘शुभ मुहूर्त’

पूर्णिमा तिथि कल है, इसलिए सुबह से लेकर शाम तक किसी भी समय भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा की जा सकती है:

विवरण (Event)तारीख और समय (Date & Time)
कूर्म जयंती और वैशाख पूर्णिमाकल, 1 मई 2026 (शुक्रवार)
पूजा का सर्वोत्तम समयसुबह 07:15 बजे से 10:45 बजे तक (शुभ और अमृत चौघड़िया)
विशेष नियमआज की पूजा में भगवान को तुलसी दल और पीले फूल अवश्य अर्पित करें।

📖 सिद्ध ‘श्री कूर्म स्तोत्र’ एवं ध्यान मंत्र (Kurma Stotram in Hindi)

कल सुबह या शाम की पूजा में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए इस सिद्ध स्तोत्र और मंत्र का पाठ करें:

॥ श्री कूर्म ध्यान मन्त्र ॥

ॐ नमो भगवते अकूपाराय सर्वसत्त्वगुणविशेषणायानुपलक्षितस्थानाय नमो वर्ष्मणे नमो भूम्ने नमो नमोऽवस्थानाय नमस्ते।

॥ श्री कूर्म स्तोत्र ॥

इन्द्रद्युम्न उवाच ।

यज्ञेशाच्युत गोविन्द माधवानन्त केशव ।

कुष्ण विष्णो हृषीकेश तुभ्यं विश्वात्मने नमः ।।१॥

नमोऽस्तु ते पुराणाय हरये विश्वमूर्तये ।

सर्गस्थितिविनाशानां हेतवेऽनन्तशक्तये ॥ २॥

निर्गुणाय नमस्तुभ्यं निष्कलायामलात्मने ।

पुरुषाय नमस्तेस्तु विश्वरूपाय ते नमः ॥३॥

नमस्ते वासुदेवाय विष्णवे विश्वयोनये ।

आदिमध्यान्तहीनाय ज्ञानगम्याय ते नमः ॥४॥

नमस्ते निर्विकाराय निष्प्रपञ्चाय ते नमः ।:

भेदाभेदविहीनाय नमोऽस्त्वानन्दरूपिणे ॥५॥

नमस्ताराय शान्ताय नमोऽप्रतिहतात्मने ।

अनन्तमूर्तयेतुभ्यममूर्ताय नमो नमः ॥६॥

नमस्ते परमार्थाय मायातीताय ते नमः ।

नमस्ते परमेशाय ब्रह्मणे परमात्मने ॥७॥

नमोऽस्तु ते सुसूक्ष्माय महादेवाय ते नमः ।:

नमः शिवाय शुद्धाय नमस्ते परमेष्ठिने ॥८॥

त्वयैव सृष्टमखिलं त्वमेव परमा गतिः ।

त्वं पिता सर्वभूतानां त्वं माता पुरुषोत्तम ॥९॥

त्वमक्षरं परं धाम चिन्मात्रं व्योम निष्कलम् ।

सर्वस्याधारमव्यक्तमनन्तं तमसः परम् ॥१०॥

प्रपश्यन्ति परात्मानं ज्ञानदीपेन केवलम् ।

प्रपद्ये भवतो रूपं तद्विष्णोः परमं पदम् ॥११॥

🌟 वास्तु और ज्योतिषीय रहस्य: कैसे मिलती है जीवन में स्थिरता?

कूर्म अवतार को वास्तु शास्त्र में ‘नींव’ (Foundation) का सबसे बड़ा देवता माना जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि या केतु पीड़ित होते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में कभी ‘स्टेबिलिटी’ (Stability) नहीं आती—नौकरी बार-बार छूटती है और पैसा टिकता नहीं है।

‘कूर्म स्तोत्र’ का ध्वनि विज्ञान घर के वास्तु दोष, विशेषकर ‘ब्रह्मस्थान’ (घर का केंद्र) और ‘ईशान कोण’ के दोषों को खत्म कर देता है। कल 1 मई को कूर्म जयंती के दिन घर की उत्तर दिशा (North) में पीतल या स्फटिक का ‘कछुआ’ पानी के बर्तन में रखना अत्यंत शुभ होता है। इसके साथ ही, जीवन में अपार सफलता, करियर में मजबूती और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए गले में ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सर्वोत्तम ज्योतिषीय उपाय है।

⚠️ कूर्म स्तोत्र के रोज़ाना पाठ के 3 विशेष नियम (Rules for Path)

  1. आसन और स्थिरता: कूर्म अवतार स्थिरता का प्रतीक है। इसलिए इस स्तोत्र का पाठ करते समय बार-बार अपनी जगह से उठें नहीं। एक लाल या पीले कुशा के आसन पर स्थिर होकर बैठें।
  2. दिशा का ज्ञान: पाठ करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
  3. निरंतरता: यदि आप इसे अपने करियर या व्यापार में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए पढ़ रहे हैं, तो कूर्म जयंती (1 मई) से संकल्प लेकर कम से कम 41 दिनों तक रोज़ाना 11 बार इसका पाठ करें।

Kurma Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: कूर्म जयंती का महत्व क्या है?

Ans: कूर्म अवतार के बिना ‘समुद्र मंथन’ संभव नहीं था और उसी मंथन से माता लक्ष्मी (धन) प्रकट हुई थीं। इसलिए आर्थिक स्थिरता और दरिद्रता नाश के लिए कूर्म जयंती का बहुत बड़ा महत्व है।

Q2: घर में कछुआ (Kurma) किस दिशा में रखना चाहिए?

Ans: वास्तु के अनुसार, कछुए को हमेशा घर की ‘उत्तर दिशा’ (North) में रखना चाहिए और उसका मुख घर के अंदर की तरफ होना चाहिए। यह धन के आगमन का रास्ता खोलता है।

Q3: क्या महिलाएं कूर्म स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?

Ans: जी हाँ, परिवार की सुख-शांति और पति के व्यापार में वृद्धि के लिए महिलाएं पूर्ण श्रद्धा के साथ इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ कर सकती हैं।

निष्कर्ष: जीवन में किसी भी बड़ी सफलता को पाने के लिए एक मजबूत ‘आधार’ (Base) का होना जरूरी है और भगवान कूर्म उसी आधार के देवता हैं। कल 1 मई 2026 को कूर्म जयंती के परम शुभ अवसर पर Freeupay.in पर दिए गए इस सिद्ध ‘कूर्म स्तोत्र’ का पाठ अवश्य करें। भगवान श्रीहरि आपके जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे।

अभी तुरंत शेयर करें: कल ही कूर्म जयंती है! इस ‘चमत्कारी स्तोत्र और वास्तु उपाय’ को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में आज रात ही शेयर कर दें ताकि कल सुबह की पूजा में हर कोई इसका लाभ उठा सके।

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