Dhumavati Ashtottara Shatanamavali: यह तो आप सब जानते है की धूमावती महाविद्या दस महाविद्याओं में सातंवी स्थान की साधना मानी जाती हैं। मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली पढ़ने से साधक के समस्त शत्रु के स्तम्भन और नाश हो जाते हैं। मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली के पढ़ने से साधक के शत्रु जड़ से नष्ट हो जाते है। साधक का जीवन भय रहित होता हैं।
Dhumavati Ashtottara Shatanamavali: मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली, इन 108 नामों के जाप से कांप उठेंगे शत्रु और मिटेगी कंगाली
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सनातन धर्म के गुप्त तंत्र विज्ञान में दस महाविद्याओं की साधना के बारे में बताया गया हैं और इन्हें बहुत ज्यादा ही शक्तिशाली माना गया है। इन महाविद्याओं शक्तियों में से सातवीं स्थान पर ‘मां धूमावती’ (Maa Dhumavati) आती हैं। यह माता का स्वरूप अत्यंत ही उग्र, मलिन वस्त्र धारी और वृद्ध विधवा का होता है, जो कौवे पर सवार रहती हैं। इन्हें अलक्ष्मी (दरिद्रता की देवी) भी कहा जाता है, लेकिन तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब साधक इनकी शरण में जाता है, तो माता उसके जीवन के सारे कष्टों, दुर्भाग्य, कंगाली और शत्रुओं को अपने सूप में फटक कर हमेशा के लिए बाहर कर देती हैं।
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जब जीवन में चारों तरफ से परेशानियां घेर लें, कोर्ट-कचहरी में हार का डर हो, या किसी तांत्रिक अभिचार (काले जादू) के कारण व्यापार और स्वास्थ्य पूरी तरह ठप हो गया हो, तब ‘धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली’ (मां धूमावती के 108 नाम) का पाठ एक अचूक ढाल बनकर रक्षा करता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां धूमावती की संपूर्ण नामावली, पाठ की सही विधि और इसके तांत्रिक नियम।
🌺 क्विक लिस्ट: धूमावती शतनामावली पाठ के 5 चमत्कारी लाभ (Dhumavati Ashtottara Shatanamavali Benefits)
मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली (Dhumavati Ashtottara Shatanamavali) पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए मां धूमावती के 108 नामों के स्मरण से जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| जीवन का भयंकर संकट (Problem) | शतनामावली पाठ के अचूक लाभ (Benefits) |
| गुप्त शत्रुओं का षड्यंत्र और भय | शत्रुओं की बुद्धि भ्रमित होती है, उनके द्वारा किए गए वार निष्फल होते हैं और वे स्वयं परास्त हो जाते हैं। |
| भयंकर तंत्र-मंत्र और काला जादू | शरीर, परिवार या व्यापार स्थल पर किया गया कोई भी मारण या उच्चाटन प्रयोग तुरंत भस्म हो जाता है। |
| कोर्ट केस और कानूनी विवाद | झूठे मुकदमों और कानूनी अड़चनों से मुक्ति मिलती है और न्याय आपके पक्ष में आता है। |
| घोर दरिद्रता और कंगाली | घर से दुर्भाग्य और अलक्ष्मी विदा होती हैं, जिससे कर्ज उतरता है और धन के गुप्त मार्ग खुलते हैं। |
| पाठ का सर्वश्रेष्ठ दिन और समय | किसी भी शनिवार की रात (मध्यरात्रि 10 बजे के बाद) एकांत स्थान पर काले आसन पर बैठकर। |
📿 मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली (Maa Dhumavati 108 Names Lyrics)
पूर्ण पवित्रता, असीम निर्भयता और पूर्ण गोपनीयता के साथ रात्रि के समय काले रंग के वस्त्र धारण करके बैठें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मां धूमावती का ध्यान करते हुए इन 108 नामों (Dhumavati Ashtottara Shatanamavali) का श्रद्धापूर्वक पाठ करें:
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- श्रीधूमावत्यै नमः ।
- श्रीधूम्रवर्णायै नमः ।
- श्रीधूम्रपानपरायणायै नमः ।
- श्रीधूम्राक्षमथिन्यै नमः ।
- श्रीधन्यायै नमः ।
- श्रीधन्यस्थाननिवासिन्यै नमः ।
- श्रीअघोराचारसन्तुष्टायै नमः ।
- श्रीअघोराचारमण्डितायै नमः ।
- श्रीअघोरमन्त्रसम्प्रीतायै नमः ।
- श्रीअघोरमन्त्रसम्पूजितायै नमः । १०
- श्रीअट्टाट्टहासनिरतायै नमः ।
- श्रीमलिनाम्बरधारिण्यै नमः ।
- श्रीवृद्धायै नमः ।
- श्रीविरूपायै नमः ।
- श्रीविधवायै नमः ।
- श्रीविद्यायै नमः ।
- श्रीविरलाद्विजायै नमः ।
- श्रीप्रवृद्धघोणायै नमः ।
- श्रीकुमुख्यै नमः ।
- श्रीकुटिलायै नमः । २०
- श्रीकुटिलेक्षणायै नमः ।
- श्रीकराल्यै नमः ।
- श्रीकरालास्यायै नमः ।
- श्रीकङ्काल्यै नमः ।
- श्रीशूर्पधारिण्यै नमः ।
- श्रीकाकध्वजरथारूढायै नमः ।
- श्रीकेवलायै नमः ।
- श्रीकठिनायै नमः ।
- श्रीकुहवे नमः ।
- श्रीक्षुत्पिपासार्द्दितायै नमः ।
- श्रीनित्यायै नमः ।
- श्रीललज्जिह्वायै नमः ।
- श्रीदिगम्बरायै नमः ।
- श्रीदीर्घोदर्यै नमः ।
- श्रीदीर्घरवायै नमः ।
- श्रीदीर्घाङ्ग्यै नमः ।
- श्रीदीर्घमस्तकायै नमः ।
- श्रीविमुक्तकुन्तलायै नमः ।
- श्रीकीर्त्यायै नमः ।
- श्रीकैलासस्थानवासिन्यै नमः ।
- श्रीक्रूरायै नमः ।
- श्रीकालस्वरूपायै नमः ।
- श्रीकालचक्रप्रवर्तिन्यै नमः ।
- श्रीविवर्णायै नमः ।
- श्रीचञ्चलायै नमः ।
- श्रीदुष्टायै नमः ।
- श्रीदुष्टविध्वंसकारिण्यै नमः ।
- श्रीचण्ड्यै नमः ।
- श्रीचण्डस्वरूपायै नमः ।
- श्रीचामुण्डायै नमः ।
- श्रीचण्डनिःस्वनायै नमः ।
- श्रीचण्डवेगायै नमः ।
- श्रीचण्डगत्यै नमः ।
- श्रीचण्डविनाशिन्यै नमः ।
- श्रीमुण्डविनाशिन्यै नमः ।
- श्रीचाण्डालिन्यै नमः ।
- श्रीचित्ररेखायै नमः ।
- श्रीचित्राङ्ग्यै नमः ।
- श्रीचित्ररूपिण्यै नमः ।
- श्रीकृष्णायै नमः ।
- श्रीकपर्दिन्यै नमः ।
- श्रीकुल्लायै नमः ।
- श्रीकृष्णरूपायै नमः ।
- श्रीक्रियावत्यै नमः ।
- श्रीकुम्भस्तन्यै नमः ।
- श्रीमहोन्मत्तायै नमः ।
- श्रीमदिरापानविह्वलायै नमः ।
- श्रीचतुर्भुजायै नमः ।
- श्रीललज्जिह्वायै नमः ।
- श्रीशत्रुसंहारकारिण्यै नमः ।
- श्रीशवारूढायै नमः ।
- श्रीशवगतायै नमः ।
- श्रीश्मशानस्थानवासिन्यै नमः ।
- श्रीदुराराध्यायै नमः ।
- श्रीदुराचारायै नमः ।
- श्रीदुर्जनप्रीतिदायिन्यै नमः ।
- श्रीनिर्मांसायै नमः ।
- श्रीनिराकारायै नमः ।
- श्रीधूमहस्तायै नमः ।
- श्रीवरान्वितायै नमः ।
- श्रीकलहायै नमः ।
- श्रीकलिप्रीतायै नमः ।
- श्रीकलिकल्मषनाशिन्यै नमः ।
- श्रीमहाकालस्वरूपायै नमः ।
- श्रीमहाकालप्रपूजितायै नमः ।
- श्रीमहादेवप्रियायै नमः ।
- श्रीमेधायै नमः ।
- श्रीमहासङ्कष्टनाशिन्यै नमः ।
- श्रीभक्तप्रियायै नमः ।
- श्रीभक्तगत्यै नमः ।
- श्रीभक्तशत्रुविनाशिन्यै नमः ।
- श्रीभैरव्यै नमः ।
- श्रीभुवनायै नमः ।
- श्रीभीमायै नमः ।
- श्रीभारत्यै नमः ।
- श्रीभुवनात्मिकायै नमः ।
- श्रीभेरुण्डायै नमः ।
- श्रीभीमनयनायै नमः ।
- श्रीत्रिनेत्रायै नमः ।
- श्रीबहुरूपिण्यै नमः ।
- श्रीत्रिलोकेश्यै नमः ।
- श्रीत्रिकालज्ञायै नमः ।
- श्रीत्रिस्वरूपायै नमः ।
- श्रीत्रयीतनवे नमः ।
- श्रीत्रिमूर्त्यै नमः ।
- श्रीतन्व्यै नमः ।
- श्रीत्रिशक्तये नमः ।
- श्रीत्रिशूलिन्यै नमः ।
(इसी प्रकार माता के सभी 108 दिव्य नामों का उच्चारण ‘नमः’ लगाकर किया जाता है, जो साधक को पूर्ण निर्भयता प्रदान करते हैं।)
संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)
किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।
🌟 केतु दोष, शत्रु बाधा और तंत्र मुक्ति का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
कोटपूतली, राजस्थान (शक्ति विहार) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि तंत्र विज्ञान और वैदिक ज्योतिष में मां धूमावती का सीधा संबंध ‘केतु’ (Ketu) ग्रह की उग्र ऊर्जा से है। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में केतु नीच का होता है या राहु-केतु जीवन में कालसर्प दोष या ग्रहण दोष जैसी मारक स्थितियां पैदा करते हैं, तो व्यक्ति अचानक गंभीर मुकदमों में फंस जाता है, उसे अज्ञात शत्रुओं का भय सताता है और घर में भयंकर तांत्रिक दोष (ऊपरी हवा का असर) महसूस होता है।
कुंडली के इन मायावी दोषों को 100% शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात महाविद्या शक्ति की कृपा प्राप्त करने के लिए साक्षात नारायण और दस महाविद्याओं का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके शनिवार की रात धूमावती शतनामावली का पाठ करने वाले व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा घेरा बन जाता है जिसे ब्रह्मांड की कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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⚠️ मां धूमावती शतनामावली पाठ के 3 अत्यंत कड़े नियम (Rules for Reciting Dhumavati Ashtottara Shatanamavali)
चूंकि मां धूमावती दस महाविद्याओं में सबसे उग्र सत्ता हैं, इसलिए इनकी पूजा में इन नियमों का पालन अनिवार्य है:
- सुहागिन महिलाएं दूर रहें: तंत्र शास्त्रों के अनुसार, सुहागिन महिलाओं (विवाहित स्त्रियों) को मां धूमावती की मूर्ति, तस्वीर या उग्र साधना घर के मंदिर में नहीं करनी चाहिए, क्योंकि माता स्वयं विधवा स्वरूप में हैं। महिलाएं केवल दूर से प्रार्थना कर सकती हैं। यह पाठ मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा या विशेष मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
- भोग और दिशा का नियम: माता धूमावती की पूजा करते समय मुख हमेशा दक्षिण (South) दिशा की ओर होना चाहिए। माता को नैवेद्य में मीठी चीज़ें नहीं चढ़ाई जातीं, बल्कि उड़द की दाल की खिचड़ी, नमकीन वस्तुएं या तीखे पकवान अर्पित किए जाते हैं।
- पूर्ण एकांत और गोपनीयता: इस नामावली का पाठ कभी भी शोर-शराबे वाले स्थान या दिन के उजाले में न करें। मध्यरात्रि का समय और पूर्ण एकांत इसके लिए अनिवार्य है।
Dhumavati Ashtottara Shatanamavali Lyrics in Sanskrit & Hindi❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां धूमावती का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध और अत्यंत तीव्र बीज मंत्र “धूं धूं धूमावती स्वाहा॥” है। नामावली पाठ के बाद इस मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जाप करना विशेष फलदायी होता है।
Q2: धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
Ans: यदि शत्रुओं का भय बहुत अधिक हो या कोर्ट केस में फंसे हों, तो शनिवार की रात एकांत में बैठकर इस नामावली का 3, 7 या 11 बार निरंतर पाठ करना चाहिए।
Q3: क्या धूमावती माता की तस्वीर घर में रख सकते हैं?
Ans: नहीं! उग्र और अलक्ष्मी स्वरूप होने के कारण मां धूमावती की तस्वीर या मूर्ति कभी भी घर के सामान्य मंदिर में नहीं रखी जाती है। इनकी साधना मानसिक रूप से या विशेष सिद्ध पीठों पर ही की जाती है।
निष्कर्ष: जीवन के सबसे कठिन दौर में जब मनुष्य अकेला पड़ जाता है, तब मां धूमावती की शरण ही एकमात्र सहारा बनती है। वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर कर उन्हें निर्भय कर देती हैं। Freeupay.in पर बताए गए इन नियमों और पूर्ण सावधानी के साथ इस मां धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली (Dhumavati Ashtottara Shatanamavali) का गान करें। माता भवानी की कृपा से आपके जीवन की हर भयंकर बाधा और शत्रुओं का तुरंत नाश होगा।
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