Makar Sankranti Vrat Katha 2026: पूजा के समय पढ़ें यह कथा, तभी मिलेगा स्नान और दान का पूरा फल
Makar Sankranti Vrat Katha: मकर संक्रांति का पावन पर्व का त्यौहार इस वर्ष को 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मनाया जा रहा है। कहा जाता है की हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार किसी न किसी कारणों से मनाया जाता हैं इसलिए हर व्रत त्यौहार की पूजा और उसकी कथा (Katha) होती हैं जिसे पढ़े या सुने बिना पूरी नहीं मानी जाती है।
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मकर संक्रांति के पीछे मुख्य रूप से सूर्य देव और उनके पुत्र शनि देव की कथा प्रचलित है। और इसके अलावा एक या दो और मुख्य कथा भी हैं। Freeupay.in के इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं मकर संक्रांति की संपूर्ण व्रत कथा, जिसे पढ़ने मात्र से पापों का नाश होता है।
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📖 मकर संक्रांति की पौराणिक कथा (मुख्य कथा)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) के अनोखे मिलन का त्योहार है।
सूर्य और शनि का मिलन
कथा के अनुसार, भगवान सूर्य देव और उनके पुत्र शनि देव के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। एक बार सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर (मकर राशि) गए। उस समय शनि देव मकर राशि के स्वामी थे।
जब सूर्य देव वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि शनि देव के पास धन-वैभव कुछ नहीं था। उनका घर ‘काले तिल’ से भरा हुआ था। अपने पिता को अपने द्वार पर आया देख शनि देव ने काले तिल से ही सूर्य देव की पूजा की और उनका स्वागत किया।
शनि देव की इस विनम्रता और पूजा से सूर्य देव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने शनि को वरदान दिया कि— “जब भी मैं मकर राशि (तुम्हारे घर) में आऊंगा, तो मेरा घर धन-धान्य से भर जाएगा। और जो भी भक्त इस दिन (मकर संक्रांति) काले तिल और गुड़ से मेरी पूजा करेगा, उस पर मेरी और तुम्हारी (शनि की) कृपा एक साथ बरसेगी।”
यही कारण है कि मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने और दान करने की परंपरा शुरू हुई। यह कथा हमें सिखाती है कि बड़ों का सम्मान करने से भाग्य बदल सकता है।
🏹 भीष्म पितामह और मकर संक्रांति (दूसरी कथा)
महाभारत काल की एक और कथा इस पर्व के महत्व को बढ़ाती है।
मकर संक्रान्ति के त्यौहार के ऊपर अनेक पौराणिक कथाएं व् तथ्य जुड़े हुये हैं। जिसमें से कुछ कथाओं के अनुसार भगवान आशुतोष जी ने मकर संक्रान्ति के दिन भगवान विष्णु जी को आत्मज्ञान का दान दिया था। और इसके अतिरिक्त देवताओं के दिनों की गणना मकर संक्रान्ति के दिन से ही प्रारम्भ होती है। इससे पहले सूर्य जब दक्षिणायन में रहते है तो मकर संक्रान्ति वाले दिन से उतरायण में आ जाते हैं। जो की देवताओं की रात्रि व उतरायण के छ: माह को दिन कहा जाता है। महाभारत की कथा के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन ही भीष्म पितामह ने अपनी देह का त्याग किया था।
इसलिए मकर संक्रांति को ‘मोक्ष का द्वार’ भी कहा जाता है।
🌊 गंगा अवतरण की कथा (तीसरी कथा)
एक मान्यता यह भी है कि मकर संक्रांति के दिन ही माता गंगा, राजा भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर (Ocean) में मिली थीं।
आज ही के दिन यानी मकर संक्रान्ति के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है। मकर संक्रान्ति के दिन से मौसम में बदलाव आना आरम्भ होता है। यही कारण है कि रातें छोटी व दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के उतरी गोलार्द्ध की ओर जाने के कारण ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ होता है। सूर्य के प्रकाश में गर्मी और तपन बढ़ने लगती है। इसके फलस्वरुप प्राणियों में चेतना और कार्यशक्ति का विकास होता है।
इसलिए इस दिन गंगा सागर (पश्चिम बंगाल) में स्नान करने और गंगा जल को स्पर्श करने का विशेष महत्व है।
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🙏 कथा पढ़ने की विधि (How to Read)
मकर संक्रांति (14 जनवरी) के दिन पूजा के समय नीचे बताई गई इस विधि से कथा पढ़ें:
- हाथ में थोड़े से चावल, तिल और एक फूल लें।
- भगवान सूर्य का ध्यान करें और ऊपर दी गई “सूर्य-शनि मिलन” या बताई गई सभी कथा बोलकर पढ़ें।
- कथा पूरी होने के बाद हाथ में ली हुई सामग्री सूर्य देव को या भगवान विष्णु की मूर्ति पर चढ़ा दें।
- अंत में “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
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Makar Sankranti Vrat Katha 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मकर संक्रांति की कथा कब पढ़नी चाहिए?
Ans: 14 जनवरी की सुबह स्नान और पूजा के दौरान इस कथा को पढ़ना सबसे शुभ होता है।
Q2: क्या मकर संक्रांति पर व्रत रखना जरूरी है?
Ans: आमतौर पर लोग इस दिन स्नान और दान करते हैं, निर्जला व्रत नहीं रखते। लेकिन कुछ जगहों पर महिलाएं सुहाग के लिए व्रत रखती हैं।
Q3: इस दिन किस भगवान की आरती करनी चाहिए?
Ans: इस दिन ‘सूर्य देव’ और ‘शनि देव’ की आरती करनी चाहिए।
निष्कर्ष: मकर संक्रांति का पर्व हमें रिश्तों को निभाने और बड़ों का आदर करने की सीख देता है। Makar Sankranti Vrat Katha पढ़ने के बाद गरीबों को दान जरूर करें।
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