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Ravi Pradosh Vrat Katha in Hindi: रवि प्रदोष व्रत कथा 2026: जानें पौराणिक कथा और महत्व

Ravi Pradosh Vrat Katha 2026: 1 मार्च को है ‘रवि प्रदोष’, पूजा के समय पढ़ें यह पौराणिक कथा, भगवान शिव और सूर्य देव की बरसेगी कृपा

Ravi Pradosh Vrat Katha 2026: हमारे हिंदू धर्म में भगवान शिव को विशेष रूप से प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत करने का महत्व बताया गया है। जब यह व्रत का दिन रविवार होता है, तो इसे ‘रवि प्रदोष व्रत’ के नाम से कहा जाता है। इस साल फाल्गुन मास का आखिरी प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 (रविवार) को रखा जा रहा है।

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Ravi Pradosh Vrat Katha
Ravi Pradosh Vrat Katha 2026

हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार का दिन सूर्य देव का होता है और प्रदोष तिथि भगवान शिव की होती है। इसलिए रवि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को शिव जी के आशीर्वाद के साथ-साथ सूर्य देव की कृपा के साथ तेज, यश, अच्छा स्वास्थ्य और सरकारी नौकरी में सफलता आदि की भी प्राप्ति होती है। Freeupay.in के इस लेख में पंडित ललित त्रिवेदी (Pandit Lalit Trivedi) से जानें रवि प्रदोष व्रत पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त एवं व्रत कथा जिसके बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

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🕰️ रवि प्रदोष व्रत 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त (Date & Puja Muhurat)

रवि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के कुछ समय पहले और बाद) में की जाती है। 1 मार्च को पूजा करने का समय बहुत ही सीमित है, इसलिए पूजा शुभ मुहूर्त का विशेष रूप से ध्यान रखें:

विवरण (Details)तिथि और समय (Time)
त्रयोदशी तिथि शुरू28 फरवरी 2026, (शनिवार) रात 08:43 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त1 मार्च 2026, (रविवार) शाम 07:09 बजे तक
व्रत का दिन1 मार्च 2026 (रविवार)
प्रदोष काल पूजा मुहूर्तशाम 06:21 बजे से रात 07:09 बजे तक (नोट: प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद के 2.5 घंटे पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।)
व्रत पारण का समय2 मार्च, सुबह 06:12 से 07:38 बजे के बीच

रवि प्रदोष व्रत 2026: संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

त्रयोदशी अर्थात् प्रदोष का व्रत करने वाला मनुष्य सदा सुखी रहता है। उसके सम्पूर्ण पापों का नाश इस व्रत से हो जाता है। इस व्रत के करने से सुहागन नारियों का सुहाग सदा अटल रहता है, बंदी कारागार से छूट जाता है। जो स्त्री पुरुष जिस कामना को लेकर इस व्रत को करते हैं, उनकी सभी कामनाएं कैलाशपति शंकर जी पूरी करते हैं। सूत जी कहते हैं- त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गऊ दान का फल प्राप्त होता है। इस व्रत को जो विधि विधान और तन, मन, धन से करता है उसके सभी दु:ख दूर हो जाते हैं। सूत जी बोले –

॥ दोहा ॥

आयु, बुद्धि, आरोग्यता, या चाहो सन्तान। शिव पूजन विधवत् करो, दुःख हरे भगवान॥

किसी समय सभी प्राणियों के हितार्थ परम् पुनीत गंगा के तट पर ऋषि समाज द्वारा एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जिसमें व्यास जी के परम् प्रिय शिष्य पुराणवेत्ता सूत जी महाराज हरि कीर्तन करते हुए पधारे। शौनकादि अट्ठासी हजार ऋषि-मुनिगण ने सूत जी को दण्डवत् प्रणाम किया। सूत जी ने भक्ति भाव से ऋषिगण को आशीर्वाद दे अपना स्थान ग्रहण किया।

ऋषिगण ने विनीत भाव से पूछा, “हे परम् दयालु! कलियुग में शंकर भगवान की भक्ति किस आराधना द्वारा उपलब्ध होगी? कलिकाल में जब मनुष्य पाप कर्म में लिप्त हो, वेद-शास्त्र से विमुख रहेंगे । दीनजन अनेक कष्टों से त्रस्त रहेंगे । हे मुनिश्रेष्ठ! कलिकाल में सत्कर्मं में किसी की रुचि न होगी, पुण्य क्षीण हो जाएंगे एवं मनुष्य स्वतः ही असत् कर्मों की ओर प्रेरित होगा। इस पृथ्वी पर तब ज्ञानी मनुष्य का यह कर्तव्य हो जाएगा कि वह पथ से विचलित मनुष्य का मार्गदर्शन करे, अतः हे महामुने! ऐसा कौन-सा उत्तम व्रत है जिसे करने से मनवांछित फल की प्राप्ति हो और कलिकाल के पाप शान्त हो जाएं?”

सूत जी बोले- “हे शौनकादि ऋषिगण! आप धन्यवाद के पात्र हैं। आपके विचार प्रशंसनीय व जनकल्याणकारी हैं। आपके ह्रदय में सदा परहित की भावना रहती है, आप धन्य हैं। हे शौनकादि ऋषिगण! मैं उस व्रत का वर्णन करने जा रहा हूं जिसे करने से सब पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं तथा जो धन वृद्धिकारक, सुख प्रदायक, सन्तान व मनवांछित फल प्रदान करने वाला है। इसे भगवान शंकर ने सती जी को सुनाया था।” सूत जी आगे बोले- “आयु वृद्धि व स्वास्थ्य लाभ हेतु रवि त्रयोदशी प्रदोष का व्रत करें। इसमें प्रातः स्नान कर निराहार रहकर शिव जी का मनन करें।

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📖 रवि प्रदोष व्रत कथा (Ravi Pradosh Vrat Story in Hindi)

इस वर्ष 1 मार्च (रविवार) को शाम की पूजा करते समय अपने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर नीचे बताई गई इस पौराणिक कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए:

गरीब ब्राह्मण और उसकी भक्ति

तब श्री सुत जी कथा सुनाने लगे – “एक ग्राम में एक दीन-हीन ब्राह्मण रहता था । उसकी धर्मनिष्ठ पत्‍नी प्रदोष व्रत करती थी। उनके एक पुत्र था। एक बार वह पुत्र गंगा स्नान को गया। दुर्भाग्यवश मार्ग में उसे चोरों ने घेर लिया और डराकर उससे पूछने लगे कि उसके पिता का गुप्त धन कहां रखा है। बालक ने दीनतापूर्वक बताया कि वे अत्यन्त निर्धन और दुःखी हैं।

उनके पास गुप्त धन कहां से आया। चोरों ने उसकी हालत पर तरस खाकर उसे छोड़ दिया। बालक अपनी राह हो लिया। चलते-चलते वह थककर चूर हो गया और बरगद के एक वृक्ष के नीचे सो गया। तभी उस नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए उसी ओर आ निकले। उन्होंने ब्राह्मण-बालक को चोर समझकर बन्दी बना लिया और राजा के सामने उपस्थित किया।

रवि प्रदोष व्रत का प्रभाव और चमत्कार

राजा ने उसकी बात सुने बगैर उसे कारावार में डलवा दिया। उधर बालक की माता प्रदोष व्रत कर रही थी। उसी रात्रि राजा को स्वप्न आया कि वह बालक निर्दोष है। यदि उसे नहीं छोड़ा गया तो तुम्हारा राज्य और वैभव नष्ट हो जाएगा। सुबह जागते ही राजा ने बालक को बुलवाया।

बालक ने राजा को सच्चाई बताई। राजा ने उसके माता-पिता को दरबार में बुलवाया। उन्हें भयभीत देख राजा ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘तुम्हारा बालक निर्दोष और निडर है। तुम्हारी दरिद्रता के कारण हम तुम्हें पांच गांव दान में देते हैं।’ इस तरह ब्राह्मण आनन्द से रहने लगा। शिव जी की दया से उसकी दरिद्रता दूर हो गई।”

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निष्कर्ष: मान्यता है कि जो भी व्यक्ति रोगों से मुक्ति, लंबी आयु और समाज में मान-सम्मान पाने के लिए रवि प्रदोष का व्रत करता है और इस कथा को पढ़ता या सुनता है, महादेव उसके सारे कष्ट हर लेते हैं।

(यहाँ बोलें: ॐ नमः शिवाय)

🌟 रवि प्रदोष व्रत के लाभ (Benefits)

  1. आयु में वृद्धि: रवि प्रदोष व्रत करने से साधक की आयु में वृद्धि होती हैं।
  2. निरोगी काया: इस व्रत को करने से साधक हमेशा स्वास्थ्य रहता हैं।
  3. संतान प्राप्ति: जिस भी साधको के संतान संबधित परेशानी हो तो रवि प्रदोष व्रत करने से लाभ मिलता हैं।

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रवि प्रदोष व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम


Ravi Pradosh Vrat Katha in Hindi ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: रवि प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?

Ans: इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है (खासकर रवि प्रदोष में, क्योंकि रविवार को नमक खाने से सूर्य कमजोर होता है)। आप फलाहार, दूध, या बिना नमक का मीठा भोजन कर सकते हैं।

Q2: पूजा के लिए सिर्फ 48 मिनट का समय क्यों है?

Ans: कल 1 मार्च को त्रयोदशी तिथि शाम 07:09 बजे ही समाप्त हो रही है। इसलिए प्रदोष काल की पूजा तिथि के समाप्त होने से पहले (06:21 से 07:09 के बीच) कर लेना सबसे श्रेष्ठ रहेगा।

Q3: क्या बिना व्रत रखे भी पूजा कर सकते हैं?

Ans: जी हाँ! अगर आप स्वास्थ्य कारणों से व्रत नहीं रख सकते, तो कल शाम के मुहूर्त में शिव मंदिर जाकर एक लोटा जल और बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। इससे भी आपको शिव कृपा प्राप्त होगी।

निष्कर्ष: रवि प्रदोष व्रत शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कष्टों को दूर करने का अमोघ अस्त्र है। 1 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताई गई इस कथा और विधि के साथ पूजा संपन्न करें। भगवान शिव आपके जीवन को सुखमय बनाएंगे।

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