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Pitru Suktam Lyrics in Hindi & Benefits (Labh) | पितृ सूक्त (PDF): पढ़ें संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और लाभ

Pitru Suktam 2026: पितरों को बुलाने और प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली मंत्र, मौनी अमावस्या पर जरूर पढ़ें

Pitru Suktam Path 2026: हमारे सनातन धर्म में पितरों (पूर्वजों) का स्थान देवता तुल्य माना जाता है। देखा जाता है, की जिन व्यक्ति के यदि पितृ नाराज होते है, तो उस व्यक्ति के जीवन में कभी तरक्की नहीं होती देख जा सकती है। इसलिए अपने पितरों को मनाने के लिए हमारे वेदों में ‘पितृ सूक्तम्’ (Pitru Suktam) का वर्णन दिया गया है।

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Pitru Suktam
Pitru Suktam

घर में रोज होते हैं झगड़े या नहीं हो रही तरक्की? ये ‘पितृ दोष’ है! बस पहनें ये 1 रुद्राक्ष, पूर्वज देंगे खजाना?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

यह तो आपको पता होगा, की साल 2026 की सबसे बड़ी अमावस्या यानी मौनी अमावस्या (18 जनवरी, रविवार) आ रही है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, हर अमावस्या और श्राद्ध पक्ष के दिनों में पितृ सूक्त का पाठ करने से भयंकर से भयंकर पितृ दोष (Pitru Dosh) भी शांत होने लगता है। Freeupay.in के इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं यहां पितृ सूक्त का महत्व, पाठ विधि और इससे होने वाले लाभ।

📖 क्या है पितृ सूक्त? (What is Pitru Suktam?)

इस पितृ सूक्त को आपको हमारे प्राचीन स्तोत्र ऋग्वेद के 10वें मंडल से लिया गया है। इस पितृ सूक्त में अग्नि देव (आग) के माध्यम से हमारे पितरों (पूर्वजों) को हवि (भोजन) स्वीकार करने की प्रार्थना करके अपने वंशजों (पितरों) को आशीर्वाद देने का आह्वान किया जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष या अमावस्या के दिन इसका पाठ करने से हमारे पितृ (पूर्वजों) तत्काल रूप से तृप्त हो जाते हैं।

📅 पाठ करने का शुभ मुहूर्त (Best Time for Recitation)

इस मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) पर इसका पाठ करना ‘अमृत’ के समान माना गया है।

तारीख:18 जनवरी 2026 (रविवार)
पाठ करने का समय:दोपहर 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच (कुतुप मुहूर्त)।
पाठ करने की दिशा:दक्षिण (South) दिशा की ओर मुख करके पाठ करें।

🙏 पितृ सूक्त का पाठ कैसे करें? (Path Vidhi)

  1. स्नान: रोजाना या विशेष रूप से अमावस्या के दिन और श्राद्ध पक्ष में सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान: इसके बाद अपने घर किसी भी साफ़ जगह में दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके सामने एक चौकी रखकर उस पर एक सफेद कपड़ा बिछाएं।
  3. दीपक: इसके बाद एक लोटा जल रखें और पितरों के निमित्त सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  4. पाठ: इसके बाद हाथ जोड़कर नीचे बताये गये पितृ सूक्त का पाठ करें (हो सके तो संस्कृत में ही पाठ करें इससे जल्दी परिणाम देखने को मिलते है)।
  5. तर्पण: एक लोटे में शुद्ध जल, गंगाजल, काले तिल और सफेद फूल डाल लें। फिर कुशा (घास) की मदद से पितरों को जल अर्पित करें (तर्पण)।

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नोट: धार्मिक पुराणों के अनुसार पितृ सूक्त पाठ पितृ दोष का निवारण करने में अत्यंत चमत्कारी पाठ है पितृ सूक्त का पाठ शुभ फल प्रदान करने वाला और लाभदायी है अमावस्या हो या पूर्णिमा अथवा श्राद्ध पक्ष के दिनों में संध्या के समय तेल का दीपक जलाकर पितृ सूक्त का पाठ करने से पितृदोष की शांति होती है और सर्वबाधा दूर होकर उन्नति की प्राप्ति होती है जिस जातक के जीवन में पितृदोष के कारण बहुत परेशानी आ रही हैं पितृ सूक्त पाठ प्रतिदिन अवश्‍य पढ़ना चाहिए इससे उनके जीवन के समस्त संकट दूर होकर उन्हें पितरों का आशीर्वाद मिलता है सीताराम हनुमान।

📜 पितरों की शांति और मोक्ष के लिए पढ़ें यह चमत्कारी पितृ सूक्त | Pitru Suktam for Shradh Puja

उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।

असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥1॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।

तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥2॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।

तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥3॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।

तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥4॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।

वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥5॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।

तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥6॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।

तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥7॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।

बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥8॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।

तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥9॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।

अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥10॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।

अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥11॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।

तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥12॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।

ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥13॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।

मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥14॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।

पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥15॥

॥ॐ शांति: शांति:शांति:॥

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🌟 पितृ सूक्त पाठ के 5 चमत्कारी लाभ (Benefits)

  1. पितृ दोष से मुक्ति: इस पाठ को करने से पितृ दोष से हो रही धन हानि और बीमारियों में तुरंत लाभ मिलता है।
  2. विवाह में बाधा: यदि पितृ दोष के कारण से घर में बच्चों की शादी में देरी या रुकावट हो तो, यह पाठ नियमित रूप से करना रामबाण उपाय है।
  3. संतान सुख: इस पाठ को करने से पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति को वंश वृद्धि (संतान प्राप्ति) होती है।
  4. गृह क्लेश: पितृ दोष के कारण हो रहे घर के झगड़े खत्म होने लगते है, और घर में शांति बनी रहती है।
  5. आकस्मिक संकट: परिवार या किसी भी सदस्यों पर आने वाली अचानक मुसीबतें इस पाठ करने से टल जाती हैं।

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Pitru Suktam Lyrics in Hindi & Benefits (Labh) ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या पितृ सूक्त का पाठ महिलाएं कर सकती हैं?

Ans: जी हाँ, महिलाएं भी श्रद्धापूर्वक पितरों की शांति के लिए इसका पाठ या श्रवण (सुनना) कर सकती हैं।

Q2: 18 जनवरी को पाठ किस समय करें?

Ans: मौनी अमावस्या पर दोपहर के समय (12 बजे के आसपास) पाठ करना सबसे शुभ होता है।

Q3: क्या बिना ब्राह्मण के पाठ कर सकते हैं?

Ans: बिल्कुल, आप खुद भी शुद्ध मन से हिंदी या संस्कृत में इसका पाठ कर सकते हैं। भाव प्रधान होता है।

निष्कर्ष: पितृ हमारे जीवन की जड़ें हैं। यदि जड़ें मजबूत होंगी, तभी पेड़ (जीवन) फलेगा-फूलेगा। 18 जनवरी 2026 को Freeupay.in की सलाह मानें और पितृ सूक्त का पाठ जरूर करें। आपके पितृ खुश होकर आपको मालामाल कर देंगे।

धर्म और पितृ पूजा की सटीक जानकारी के लिए Freeupay.in के साथ जुड़े रहें।

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