Saptarishi Mantra for Rishi Panchami Puja Vidhi, Lyrics & PDF: ऋषि पंचमी 2025: सप्तर्षि पूजा मंत्र और विधि हम यहां आपको सप्तऋषियों के मन्त्रों के बारे में बताने जा रहे हैं बताये जा रहे सप्तर्षि पूजा मंत्र का प्रयोग ऋषि पंचमी पूजा विधि में भी कर सकते हैं बताये जा रहे सप्तर्षि पूजा मंत्र का जाप करने से सप्तऋषियों का आशीर्वाद बना रहता हैं।
ऋषि-मुनियों के सिद्ध मंत्र | Powerful Rishi Panchami Puja Mantras of the Sages for Worship
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सप्तऋषियों के नाम ये हैं:
👉 कश्यप,अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ और अरूंधति (वशिष्ठ की पत्नी) आकाश में सप्तर्षि मंडल के साथ अरूंधति भी एक नक्षत्र तारे के रूप दिखाई देती है जो कि सप्तश्रृषियों की शक्ति रूपा है सप्तश्रृषियों के साथ इनका पूजन किया जाता है। अब सप्तऋषि के आवाहन हेतु ध्यान मंत्र पढकर पुष्प अर्पण करेंगे।
मूर्तं ब्रह्मण्यदेवस्य ब्रह्मणस्तेज उत्तमं सूर्यकोटिप्रतीकाशं ऋषीवृंदं विचिंतये श्री अरुंधती सहित कश्यपादि सप्तऋषिभ्यो नम: ध्यायामि।
अब सप्तऋषि मे से प्रत्येक ऋषि का ध्यान मंत्र पढकर उनका आवाहन करे और पुष्प अक्षत अर्पण करते जायेंगे।
👉 कश्यप ऋषि :-
ॐ कश्यपाय ऋषये नमः।
ॐ कश्यपाय विद्महे वसुंध्राय देवदनुजपितामहाय धीमहि। तन्नो ऋषिः प्रचोदयात्।
कश्यप: सर्वलोकेश: सर्वदेवेषु संस्थित: !
नराणां पापनाशाय ऋषीरुपेण तिष्ठति !!
श्री कश्यपाय नम: ! कश्यपं आवाहयामि।
👉 अत्रि ऋषि :-
ॐ अत्रि ऋषये नमः।
ॐ अनसुईया पतये च विदमहे दत्तात्रेय जनकाय धीमहि तन्नो अत्रि प्रचोदयात्।
अत्रये च नमस्तुभ्यं सर्वभूतहितैषिणे ! तपोरुपाय सत्याय ब्रह्मणेsमिततेजसे !!
श्री अत्रये नम: ! अत्रिं आवाहयामि।
👉 भारद्वाज ऋषि :-
ॐ भारद्वाज ऋषये नमः।
ॐ भारद्वाजाय विद्महे विमानशास्त्रप्रवर्तकाय धीमहि। तन्नो ऋषिः प्रचोदयात्।
भारद्वाज नमस्तुभ्यं सदाध्यानपरायण !
महाजटिल धर्मात्मा पापं हरतु मे सदा !!
श्री भारद्वाजाय नम: ! भारद्वाजं आवाहयामि।
👉 विश्वामित्र ऋषि :-
ॐ विश्वामित्र ऋषये नमः।
ॐ गाधिपुत्राय विद्महे गायत्रीमन्त्रप्रवर्तकाय धीमहि। तन्नो विश्वामित्रः प्रचोदयात्।
विश्वामित्र नमस्तुभ्यं बलिं मखमहाव्रतं !
अध्यक्षींकृत गायत्री तपोरुपेण संस्थितं !!
श्री विश्वामित्राय नम: ! विश्वामित्रं आवाहयामि।
👉 गौतम ऋषि :-
ॐ गौतम ऋषये नमः।
ॐ गौतमाय विद्महे, त्रयम्बकम् ज्योतिर्लिंग अर्चकाय धीमहि, तन्नो ऋषिः प्रचोदयात्।
गौतम: सर्वभूतानां ऋषीणां च महाप्रिय:!
श्रौतानां कर्मणां चैव संप्रदायप्रवर्तक: !!
श्री गौतमाय नम: ! गौतमं आवाहयामि।
👉 जमदग्नी ऋषि :-
ॐ जमदग्नि ऋषये नमः
ॐ रेणुका पतये च विदमहे, परशुराम जनकाय धीमहि, तन्नो जमदग्नि प्रचोदयात्।
जमदग्निर्महातेजास्तपसा ज्वलितप्रभ: !
लोकेषु सर्वसिद्धर्थ्यं सर्वपापनिवर्तक: !!
श्री जमदग्नये नम: ! जमदग्निं आवाहयामि।
👉 वसिष्ठ ऋषि :-
ॐ वशिष्ठ ऋषये नमः।
ॐ अरूंधति पतये च विदमहे सुर्यवंश कुलपुरोहिताय धीमहि तन्नो वशिष्ठ प्रचोदयात्।
नमस्तुभ्यं वसिष्ठाय लोकानां वरदाय च !
सर्वपापप्रणाशाय सूर्यान्वयहितैषिणे !!
श्री वसिष्ठाय नम: ! वसिष्ठं आवाहयामि।
👉 अरुंधती :- (सप्तश्रृषियों की शक्ति रूपा)-
ॐ अरूंधत्यै वशिष्ठ पत्नयै नमः।
ॐ वशिष्ठ पत्न्यै च विदमहे महापतिव्रताय धीमहि। तन्नो अरुंधती प्रचोदयात्।
अरुंधति नमस्तुभ्यं महापापप्रणाशिनि !
पतिव्रतानां सर्वासां धर्मशीलप्रवर्तके !!
श्री अरुंधत्यै नम: ! अरुंधती आवाहयामि।
ऋग्यजु:सामवेदानां स्वरुपेभ्यो नमो नम:।
पुराणपुरुषेभ्यो हि देवर्षिभ्यो नमो नम:।
लोकानां तुष्टिकर्तारो युयं सर्वे तपोधना: !
नमो वो धर्मविज्ञेभ्यो महर्षिभ्यो नमो नम: !!
श्री अरुंधति सहित कश्यपादि सप्तऋषीभ्यो नम: !!
पंचोपचार पूजनं समर्पयामि !!
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सप्तर्षि पूजा मंत्र | Saptarishi Mantras for Rishi Panchami Vrat PDF
ॐ श्रीं ह्रीं ऐं सप्तऋषिभ्यः ब्रह्मवर्चसम् ऐं ह्रीं श्रीं ॐ ॐ सप्त ऋषये च विदमहे, ब्रह्मज्ञान रूपाय धीमहि, तन्नो ऋषि मंडल प्रचोदयात्।
सप्त ऋषियों की कृपा प्राप्ति हेतु इन मंत्रों का १०८ बार या यथासंभव जप करें।
(यदि कोई साधक हो तो इस केवल उपरोक्त मंत्र का अधिकाधिक जाप मात्र (जैसे- 21, 51, 108 माला) से संपूर्ण व्रत पूजन का फल प्राप्त कर सकता है)।

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