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Satudi Teej Puja Vidhi – सुख-समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए करें सातुड़ी तीज की पूजा विधि

Satudi Teej Puja Vidhi – सुख-समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए करें सातुड़ी तीज की पूजा विधि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सातुड़ी तीज रक्षाबंधन के तीन दिन बाद और कृष्ण जन्माष्टमी से पांच दिन पहले आती है इसे सातुड़ी तीज के रूप से मनाया भी जाता है। इस दिन नीम की पूजा की जाती है। यह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पालकी को सजाकर उसमें तीज माता की सवारी निकाली जाती है। इसमें हाथी, घोड़े, ऊंट, तथा कई लोक नर्तक और कलाकार हिस्सा लेते हैं। महिलाएं और लड़कियां इस दिन परिवार के सुख शांति की मंगल कामना में व्रत रखती है। हम यहां आपको सातुड़ी तीज पूजा विधि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Satudi Teej Puja Vidhi – सुख-समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Satudi Teej Puja Vidhi
Satudi Teej Puja Vidhi

सातुड़ी तीज 2025 में कब हैं?

सातुड़ी तीज यानि कजली तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाई जाती हैं। इस साल 2025 में Satudi Teej Puja का त्यौहार 12 अगस्त, वार मंगलवार के दिन मनाई जाएगी।

Satudi Teej 2025 – पूजा विधि, व्रत नियम और शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सातुड़ी तीज रक्षाबंधन के तीन दिन बाद और कृष्ण जन्माष्टमी से पांच दिन पहले आती है इसे सातुड़ी तीज के रूप से मनाया भी जाता है। इस दिन नीम की पूजा की जाती है। यह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पालकी को सजाकर उसमें तीज माता की सवारी निकाली जाती है। इसमें हाथी, घोड़े, ऊंट, तथा कई लोक नर्तक और कलाकार हिस्सा लेते हैं।

महिलाएं और लड़कियां इस दिन परिवार के सुख शांति की मंगल कामना में Satudi Teej Puja Vrat रखती है। इस दिन सुबह जल्दी सूर्योदय से पहले उठकर धम्मोड़ी यानी हल्का नाश्ता करने का रिवाज है। जिस प्रकार पंजाब में करवा चौथ के दिन सुबह सरगी की जाती है इसके बाद कुछ नहीं खाया जाता और दिन भर व्रत चलता है उसी प्रकार इस व्रत में भी एक समय आहार करने के पश्चात दिन भर कुछ नहीं खाया जाता है। शाम को चंद्रमा की पूजा कर कथा सुनी जाती है।

नीमड़ी माता की पूजा करके नीमड़ी माता की कहानी सुनी जाती है। चांद निकलने पर उसकी पूजा की जाती है। चांद को अर्घ्य दिया जाता है। बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद सत्तू के स्वादिष्ट व्यंजन खाकर व्रत तोड़ा जाता है।

सातुड़ी तीज पर सवाया, जैसे सवा किलो या सवा पाव के सत्तू बनाने चाहिए। सत्तू अच्छी तिथि या वार देख कर बनाने चाहिए। मंगलवार और शनिवार को नहीं बनाए जाते हैं। तीज के एक दिन पहले या तीज वाले दिन भी बना सकते हैं। सत्तू को पिंड के रूप जमा लेते है। उस पर सूखे मेवे इलायची और चांदी के वर्क से सजाएं। बीच में लच्छा, एक सुपारी भी लगा सकते हैं। पूजा के लिए एक छोटा लड्‍डू (तीज माता के लिए) बनाना चाहिए। कलपने के लिए सवा पाव या मोटा लड्‍डू बनना चाहिए व एक लड्‍डू पति के हाथ में झिलाने के लिए बनाना चाहिए।

कुंवारी कन्या लड्‍डू अपने भाई को झिलाती है। सत्तू आप अपने सुविधा हिसाब से ज्यादा मात्रा में या कई प्रकार के बना सकते हैं। सत्तू चने, चावल, गेंहू, जौ आदि के बनते हैं। तीज के एक दिन पहले सिर धोकर हाथों व पैरों पर मेहंदी लगानी चाहिए।

सातुड़ी तीज पूजा सामग्री

Satudi Teej Puja में एक छोटा सत्तू का लडडू , नीमड़ी, शुद्ध घी से भरा दीपक, फल जैसे केला, अमरुद या सेब, ककड़ी, कच्चा दूध मिश्रित जल, कच्चा दूध, नींबू, मोती की लड़/नथ के मोती, पूजा की थाली, शुद्ध जल कलश आदि सामग्री ली जाती हैं।

सातुड़ी तीज पूजा कैसे करे

मिट्‍टी व गोबर से दीवार के सहारे एक छोटा-सा तालाब बनाकर (घी, गुड़ से पाल बांध कर) नीम वृक्ष की टहनी को रोप देते हैं। तालाब में कच्चा दूध मिश्रित जल भर देते हैं और किनारे पर एक दिया जला कर रख देते हैं। नीबू, ककड़ी, केला, सेब, सातु, रोली, मौली, अक्षत आदि थाली में रख लें। एक छोटे लोटे में कच्चा दूध लें।

Satudi Teej Vrat Puja Vidhi – सुहागिनों के लिए खास पूजा विधि

सातुड़ी तीज के पूरे दिन व्रती को सिर्फ पानी पीकर उपवास किया जाता है और सुबह सूर्य उदय से पहले धमोली की जाती है इसमें सुबह मिठाई, फल आदि का नाश्ता किया जाता है। सुबह नहा धोकर महिलाएं सोलह बार झूला झूलती हैं, उसके बाद ही पानी पीती है।

सायंकाल के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता अथवा नीमड़ी माता की पूजा करती हैं। सबसे पहले तीज माता को जल के छींटे दें। रोली के छींटे दें व चावल चढ़ाएं। नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली व काजल की तेरह-तेरह बिंदिया अपनी अंगुली से लगाएं। मेहंदी, रोली की बिंदी अनामिका अंगुली से लगानी चाहिए और काजल की बिंदी तर्जनी अंगुली से लगानी चाहिए। नीमड़ी माता को मौली चढाएं। मेहंदी, काजल और वस्त्र (ओढ़नी) चढ़ाएं। दीवार पर लगाई बिंदियों पर भी मेहंदी की सहायता से लच्छा चिपका दें। नीमड़ी को कोई फल, सातु और दक्षिणा चढ़ाएं।

Satudi Teej Puja के कलश पर रोली से तिलक करें और लच्छा बांधें। किनारे रखे दीपक के प्रकाश में नींबू, ककड़ी, मोती की लड़, नीम की डाली, नाक की नथ, साड़ी का पल्ला, दीपक की लौ, सातु का लड्‍डू आदि का प्रतिबिंब देखें और दिखाई देने पर इस प्रकार बोलना चाहिए ‘तलाई में नींबू दीखे, दीखे जैसा ही टूटे’ इसी तरह बाकि सभी वस्तुओं के लिए एक-एक करके बोलना चाहिए। इस तरह Satudi Teej Puja करने के बाद सातुड़ी तीज माता की कहानी सुननी चाहिए, नीमड़ी माता की कहानी सुननी चाहिए, गणेश जी की कहानी व लपसी तपसी की कहानी सुननी चाहिए। रात को चंद्र उदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

चंद्रमा को जल के छींटे देकर रोली, मौली, अक्षत चढ़ाएं। फिर चांद को भोग अर्पित करें व चांदी की अंगूठी और आंखें (गेंहू) हाथ में लेकर जल से अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय थोड़ा-थोड़ा जल चंद्रमा की मुख की और करके गिराते रहें। चार बार एक ही जगह खड़े हुए घूमें। परिक्रमा लगाएं। अर्घ्य देते समय बोलें, ‘सोने की सांकली, मोतियों का हार, चांद ने अरग देता, जीवो वीर भरतार’ सत्तू के पिंडे पर तिलक करें व भाई / पति, पुत्र को तिलक करें। पिंडा पति / पुत्र से चांदी के सिक्के से बड़ा करवाएं।

यानी जो आपने सत्तु का बड़ा सा केक बनाया है उसे चांदी के सिक्के से पुत्र या पति को तोड़ने के लिए कहें। इस क्रिया को पिंडा पासना कहते हैं। पति पिंडे में से सात छोटे टुकड़े करते हैं, व्रत खोलने के लिए यही आपको सबसे पहले खाना है। पति बाहर हो तो सास या ननद पिंडा तोड़ सकती है। सातु पर ब्लाउज़, रुपए रखकर बयाना निकाल कर सासुजी के चरण स्पर्श कर कर उन्हें देना चाहिए। सास न हो तो ननद को या ब्राह्मणी को दे सकते हैं। आंकड़े के पत्ते पर सातु खाएं और अंत में आंकड़े के पत्ते के दोने में सात बार कच्चा दूध लेकर पिएं इसी तरह सात बार पानी पिएं।

दूध पीकर इस प्रकार बोलें- ‘दूध से धायी, सुहाग से कोनी धायी, इसी प्रकार पानी पीकर बोलते हैं- पानी से धायी, सुहाग से कोनी धायी’ सुहाग से कोनी धायी का अर्थ है पति का साथ हमेशा चाहिए, उससे जी नहीं भरता। बाद में दोने के चार टुकड़े करके चारों दिशाओं में फेंक देना चाहिए।

यह Satudi Teej Puja Vrat सिर्फ पानी पीकर किया जाता है। चांद उदय होते नहीं दिख पाए तो चांद निकलने का समय टालकर आसमान की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोल सकते हैं। इस तरह तीज माता की पूजा संपन्न होती है। इस व्रत में गर्भवती स्त्री फलाहार कर सकती हैं।

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