Shattila Ekadashi 2026: मकर संक्रांति के दिन करें षटतिला एकादशी, जानें व्रत कथा और तिल के 6 रहस्यमयी प्रयोग
Shattila Ekadashi Vrat Katha: इस वर्ष मकर संक्रांति वाले दिन को षटतिला एकादशी का व्रत किया जायेगा। यह तो आप सब जानते हो की माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) मनाई जाती हैं। साल 2026 में यह पावन व्रत 14 जनवरी (बुधवार) को रखा जाएगा।
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जैसा कि नाम से ही आप सबको स्पष्ट हो गया है, ‘षट’ मतलब छह और ‘तिला’ मतलब तिल। इस दिन तिल (Sesame) का छह अलग-अलग प्रकार से इस्तेमाल करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। Freeupay.in के इस लेख में बताएँगे षटतिला एकादशी की प्राचीन व्रत कथा, पूजा विधि और पारण का समय।
📅 षटतिला एकादशी 2026: तिथि और पारण का समय (Date & Time)
- व्रत की तारीख: 14 जनवरी 2026, बुधवार
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 जनवरी, 2026 को दोपहर 03:18 बजे से।
- एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी, 2026 के सांय 05:52 बजे तक।
- व्रत पारण (व्रत खोलने का समय): 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को सुबह 07:17 बजे से 09:25 बजे के बीच।
📖 षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को माघ मास की कृष्णपक्ष की एकादशी जिसे षट्तिला एकादशी कहते है उसकी कथा सुनायी थी। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया सबसे पहले षट्तिला एकादशी व्रत की कथा भगवान विष्णु ने देवर्षि नारद जी को सुनायी थी।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नारद जी भगवान विष्णु से मिलने वैकुण्ठ लोक में गये। वहाँ उन्होने भगवान विष्णु से षट्तिला एकादशी व्रत का महत्व सुनाने के लिये कहा। तब भगवान विष्णु ने उनको षट्तिला एकादशी की कथा सुनाते हुये बताया कि अति प्राचीन काल में एक नगर में एक धार्मिक विचारों की वृद्धा ब्राह्मणी रहा करती थी। वो विधवा थी और उसके कोई संतान भी नही थी। उसने अपना सम्पूर्ण जीवन प्रभु भक्ति में बिताने का निश्चय कर रखा था।
इसलिए वो हमेशा प्रभु भक्ति में लीन रहती। भगवान विष्णु ने कहा वो मेरी अनन्य भक्त थी। वो पूरे विधि-विधान और श्रद्ध-भक्ति के साथ मेरी पूजा किया करती थी। उसने मुझे प्रसन्न करने के लिये पूरे एक माह तक व्रत रखा और मेरी आराधना मे लीन रही। इतने कठोर व्रत के प्रभाव से उसके सभी पापों का नाश हो गया और वो निर्मल हो गयी।
भगवान विष्णु ने नारद जी को बताया कि वो मेरी भक्ति तो पूरे मन से करती थी किंतु उसमें एक कमी थी, कि वो कभी किसी को भोजन सामग्री अन्नादि दान नही करती थी। एक बार मैं स्वयं उसके पास वेष बदलकर भिक्षा माँगने के लिये गया था। उसने मुझे भोजन या अन्न देने के स्थान पर मिट्टी का ढेला दे दिया।
धरती पर अपना जीवनपूर्ण करने के बाद अपने पुण्य कर्मों के प्रभाव से उसे स्वर्ग लोक में स्थान मिला। किंतु अन्नादि का दान ना करने के कारण उसे स्वर्ग में एक खाली कुटिया मिली जिसमें एक आम का वृक्ष था। यह देखकर उसे बहुत दुख हुआ और उसने मुझे याद करते हुये कहा, “हे प्रभु! मैंने जीवनभर आपकी उपासना की और उसके फलस्वरूप मुझे यह खाली कुटिया प्राप्त हुयी है। जिसमें सुख-सुविधायें तो दूर नित्य जरूरत का सामान भी नही हैं।“
तब मैंने उसे दर्शन देकर कहा कि तुमने पूरे जीवन मेरी उपासना की किंतु जरूरतमंद को भोजन आदि का दान नही किया। एक बार जब मैं स्वयं तुम्हारे द्वार आया तो तुमने मुझे मिट्टी का ढ़ेला दान में दिया। यह उसी का परिणाम हैं। अब मैं तुम्हे उपाय बताता हूँ जिससे तुम्हे यहाँ सभी सुख-सुविधायें प्राप्त हो सकें।
तब भगवान विष्णु ने उस ब्राह्मणी को बताया कि तुम्हारे पास देवकन्याएं आयेंगी। जब वो तुम्हारे पास आये तो तुम द्वार तब तक मत खोलना जब तक वो तुम्हे षटतिला एकादशी के व्रत की विधि ना बतायें। उनसे षटतिला एकादशी के व्रत का सारा विधान जानकर तुम पूरी श्रद्धा-भक्ति के साथ उसका पालन करना। उसके प्रभाव से तुम्हारी सभी मनोकामनायें पूर्ण हो जायेंगी। तुम्हारी कुटिया धन-धान्य से भर जायेगी।
उस ब्राह्मणी ने वैसा ही किया और उस व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया धन-धान्य से भर गयी। वो सब जो वो वृद्धा प्राप्त करना चाहती थी उसे वो सब प्राप्त हुआ।
तिल दान का चमत्कार
भगवान ने उसे उपाय बताया, “जब देवकन्याएं तुमसे मिलने आएं, तो उनसे ‘षटतिला एकादशी’ की विधि पूछना और यह व्रत करना।” ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया। उसने माघ कृष्ण एकादशी (षटतिला एकादशी) का विधिवत व्रत किया और तिल का दान किया। इस व्रत के प्रभाव से उसका महल धन-धान्य और भोजन से भर गया।
सीख: इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि पूजा-पाठ के साथ-साथ ‘अन्न दान’ और ‘तिल दान’ करना अत्यंत आवश्यक है।
🌟 तिल के 6 प्रयोग (6 Ways to Use Til)
षटतिला एकादशी माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाई जाती हैं। हमारे हिन्दू धर्म में इस षट्तिला एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं। इस एकादशी का व्रत एवं पूजन करने से जातक को भगवान श्री विष्णु की कृपा प्राप्त होती हैं। षट्तिला एकादशी वाले दिन तिलों का प्रयोग करने का विशेष महत्व बताया गया हैं। षट्तिला एकादशी वाले दिन तिलों का छ: प्रकार से प्रयोग करना चाहियें।
- तिल स्नान: इस दिन स्नान वाले जल में तिल डालकर स्नान करना चाहिये।
- तिल उबटन: जातक को तिलों को पीसकर उसका उबटन लगाना चाहिये।
- तिल हवन: इस दिन हवन सामग्री में तिल डालकर हवन करें।
- तिलोदक: पीने वाले जल में तिल डालकर उसे पीना चाहिये।
- तिल भोजन: तिल से बने भोजन और मिष्ठान का भगवान को भोग लगानी चाहिए। तिल से बनी वस्तुओं का सेवन करना चाहिये।
- तिल दान: ब्राह्मणों या गरीबों को तिल और अन्नादि का दान करना चाहिये।
Shattila Ekadashi Vrat Katha 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: षटतिला एकादशी के दिन क्या खाना चाहिए?
Ans: जो लोग व्रत नहीं रख रहे, वे सात्विक भोजन करें। चावल (Rice) का सेवन इस दिन पूर्णतः वर्जित है। तिल से बनी चीजें खाना शुभ होता है।
Q2: क्या 14 जनवरी को मकर संक्रांति और एकादशी दोनों है?
Ans: हाँ, 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, और एकादशी का व्रत भी 14 जनवरी को रखा जाएगा।
Q3: पारण में क्या खाएं?
Ans: द्वादशी के दिन (15 जनवरी) ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद तिल या आंवला खाकर व्रत खोलें।
निष्कर्ष: षटतिला एकादशी अनजाने में हुए पापों को नष्ट करने का उत्तम अवसर है। 14 जनवरी को Shattila Ekadashi Vrat Katha पढ़कर तिल का दान जरूर करें। भगवान विष्णु आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
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