Shukra Pradosh Puja Vidhi 2026: कल है शुक्र प्रदोष, शाम को ऐसे करें शिव-अभिषेक, घर में बरसेगा पैसा और प्यार
Shukra Pradosh Puja Vidhi: नए साल 2026 का पहला शुक्र प्रदोष व्रत 16 जनवरी (शुक्रवार) को आ रहा है। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। लेकिन जब यह शुक्रवार के दिन को आता है, तो यह व्यक्ति के जीवन में भौतिक सुख (Luxury), दांपत्य प्रेम के साथ साथ अखंड सौभाग्य लेकर भी आता है।
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शुक्र प्रदोष की विशेष पूजा व्यक्ति को प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में करनी चाहिए। यदि आप भी यह व्रत रख रहे हैं, तो Freeupay.in के इस लेख को पढ़कर जानें पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप विधि, सामग्री लिस्ट और मंत्र।
🕰️ शुक्र प्रदोष पूजा मुहूर्त 2026 (Puja Muhurat)
प्रदोष व्रत में पूजा का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। आप शुक्र प्रदोष पूजा को शुक्र त्रयोदशी व्रत के दिन प्रदोष काल में यानी सुर्यास्त से तीन घड़ी पूर्व, शिव जी का पूजन करना चाहिये यानिकी शिव जी की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक (प्रदोष काल) सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। ज्यादातर शुक्र प्रदोष व्रत पूजा शाम 4:30 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे के बीच की जाती है।
| व्रत की तारीख: | 16 जनवरी 2026 (शुक्रवार) |
| प्रदोष काल (पूजा का समय): | शाम 05:11 बजे से रात 06:41 बजे तक |
📋 शिव पूजा सामग्री लिस्ट (Puja Samagri List)
पूजा शुरू करने से पहले यह सामग्री एक थाली में सजा लें:
- अभिषेक के लिए: जल से भरा हुआ कलश या लोटा, कच्चा दूध (गाय का संभव हो), दही, घी, शहद, गंगाजल (पंचामृत)।
- चढ़ाने के लिए: बेलपत्र (21 या 108), धतूरा, भांग, मदार के फूल, सफेद वस्त्र, सफेद फूल (शुक्रवार के कारण), पुष्पों की माला, चंदन, अक्षत (चावल)।
- भोग: सफेद मिठाई (बर्फी या खीर) और मौसमी फल।
- अन्य: घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर, कलावा और हवन सामग्री (आम की लकड़ी)।
🙏 शुक्र प्रदोष पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step Vidhi)
16 जनवरी को इस विधि से पूजा करें, भोलेनाथ आपकी खाली झोली भर देंगे:
1. सुबह का संकल्प (Morning Sankalp)
आप Shukra Pradosh Puja Vidhi को शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जातक को प्रात:काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो स्नान कर शुद्ध कपडे पहनकर भगवान श्री शिव जी का पूजन करना चाहिये। घर के मंदिर में दीप जलाकर हाथ में जल लें और संकल्प लें: “हे महादेव! मैं आज शुक्र प्रदोष का व्रत रख रहा/रही हूँ। मेरी मनोकामना पूर्ण करें।” पूरे दिन मन ही मन “ऊँ नम: शिवाय ” का जप करें।
2. प्रदोष काल की तैयारी (Evening Preparation)
पूरे दिन निराहार रहें। व्रती को चाहिये की शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में मंडप सजाएं और शिवलिंग स्थापित करें या फिर अपने नजदीक किसी शिवालय (शिव मंदिर) चले जाये। कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें।
3. महा-अभिषेक (Maha Abhishek)
यह पूजा का मुख्य भाग है।
- कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। “ऊँ नम: शिवाय” कहते हुए शिव जी को जल अर्पित करें।
- इसके बाद कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को एक एक करके बारी-बारी से अभिषेक करें।
- अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का लगातार जाप करते रहे।
यदि संभव हो तो पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। अभिषेक करने के बाद इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिव जी का ध्यान करें। ध्यान का स्वरूप- करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले पिंगलवर्ण के जटाजूटधारी, नीले कण्ठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, वरदहस्त, त्रिशूलधारी, नागों के कुण्डल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किये हुए, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान शिव जी हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख समृद्धि प्रदान करें।
4. श्रृंगार और अर्पण
- शिवलिंग पर त्रिपुंड (चंदन) लगाएं।
- बेलपत्र (चिकना हिस्सा नीचे करके), धतूरा और सफेद फूल आदि को चढ़ाएं।
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करें।
5. कथा और आरती
घी का दीपक जलाकर शुक्र प्रदोष व्रत कथा (तीन मित्रों वाली कहानी) को पढ़ें (जिसका लिंक नीचे दिया गया है)। अंत में कपूर जलाकर हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार “ऊँ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा ” मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिव जी की आरती करें। उपस्थित जनों को आरती दें। सभी को प्रसाद वितरित करें। उसके बाद भोजन करें। भोजन में केवल मीठी सामग्रियों का उपयोग करें।
➤ यहां से पढ़े: शुक्र प्रदोष व्रत कथा: जानें पौराणिक कथा और महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम | Shukra Pradosh Udyapan Vidhi: A Complete Step-by-Step Guide (with Samagri List)
स्कंद पुराण के अनुसार व्रती को कम-से-कम 11 अथवा 26 त्रयोदशी व्रत के बाद उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन के एक दिन पहले( यानी द्वादशी तिथि को) श्री गणेश भगवान का विधिवत षोडशोपचार विधि से पूजन करें तथा पूरी रात शिव-पार्वती और श्री गणेश जी के भजनों के साथ जागरण करें। उद्यापन के दिन प्रात:काल उठकर नित्य क्रमों से निवृत हो जायें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को शुद्ध कर लें।
Shukra Pradosh Puja Vidhi में पूजा स्थल पर रंगीन वस्त्रों और रंगोली से मंडप बनायें। मण्डप में एक चौकी अथवा पटरे पर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। अब शिव-पार्वती की विधि-विधान से Shukra Pradosh Puja Vidhi पूरी करें। भोग लगायें। शुक्र त्रयोदशी प्रदोष व्रत कथा सुने अथवा सुनायें।
अब हवन के लिये सवा किलो (1.25 किलोग्राम) आम की लकड़ी को हवन कुंड में सजायें। हवन के लिये गाय के दूध में खीर बनायें। हवन कुंड का पूजन करें। दोनों हाथ जोड़कर हवन कुण्ड को प्रणाम करें। अब अग्नि प्रज्वलित करें। तदंतर शिव-पार्वती के उद्देश्य से खीर से ‘ऊँ उमा सहित शिवाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करते हुए 108 बार आहुति दें। हवन पूर्ण होने के पश्चात् शिव जी की आरती करें।
ब्राह्मणों को सामर्थ्यानुसार दान दें एवं भोजन करायें। आप अपने इच्छानुसार एक या दो या पाँच ब्राह्मणों को भोजन एवं दान करा सकते हैं। यदि भोजन कराना सम्भव ना हो तो किसी मंदिर में यथाशक्ति दान करें। इसके बाद बंधु बांधवों सहित प्रसाद ग्रहण करें एवं भोजन करें।
इस प्रकार उद्यापन करने से व्रती पुत्र-पौत्रादि से युक्त होता है तथा आरोग्य लाभ होता है। इसके अतिरिक्त वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है एवं सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर शिवधाम को पाता है। खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
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शुक्र प्रदोष व्रत पूजा 2026: Benefits of Shukra Pradosh Vrat Puja
इसे भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है। जीवन में सौभाग्य की वृद्धि हेतु यह Shukra Pradosh Puja की जाती है। यदि मनुष्य का सौभाग्य है तो धन और संपदा स्वत: ही मिल जाती है। इससे जीवन में हर कार्य में सफलता भी मिलती है।
✨ शुक्र प्रदोष के 3 विशेष उपाय (Special Remedies)
शुक्रवार का प्रदोष होने के कारण ये उपाय आपकी किस्मत चमका सकते हैं:
- कर्ज मुक्ति के लिए: शिव पूजा करते समय शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाएं। इससे माता लक्ष्मी जी विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को धन प्राप्ति होती है।
- दांपत्य सुख के लिए: पति-पत्नी दोनों मिलकर शिवलिंग पर इत्र (Perfume) और गुलाब के फूल को चढ़ाना चाहिए।
- रोग मुक्ति के लिए: इस दिन आपको महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए।
Shukra Pradosh Puja Vidhi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: प्रदोष व्रत में नमक खा सकते हैं?
Ans: नहीं, प्रदोष व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित है। आप शाम को पूजा के बाद मीठा फलाहार ले सकते हैं।
Q2: 16 जनवरी को पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
Ans: शाम को 5:11 बजे से 6:41 बजे के बीच का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम है।
Q3: क्या घर पर शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं?
Ans: जी हाँ, आप घर पर पारद या मिट्टी के शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं, लेकिन मंदिर जाना ज्यादा फलदायी होता है।
निष्कर्ष: शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और शुक्र देव का संगम है। 16 जनवरी 2026 को Freeupay.in द्वारा बताई गई Shukra Pradosh Puja Vidhi से अभिषेक करें, आपके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।
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