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Shukra Pradosh Vrat Katha in Hindi: शुक्र प्रदोष व्रत कथा 2026: जानें पौराणिक कथा और महत्व

Shukra Pradosh Vrat Katha 2026: कर्ज और बीमारियों से मुक्ति दिलाता है शुक्र प्रदोष, पूजा में जरूर पढ़ें यह कथा

Shukra Pradosh Vrat Katha: हमारे हिंदू धर्म में हर महीने की दो बार त्रयोदशी तिथि आती हैं, जिस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब भी यह व्रत शुक्रवार के दिन को पड़ता है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat) के नाम से जाना जाता हैं।

साल 2026 का पहला शुक्र प्रदोष व्रत 16 जनवरी (शुक्रवार) को रखा जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन शुक्रवार का दिन होने के कारण यह माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को भी प्रसन्न भी करता है। हमारी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और कथा पढ़ने से आपके जीवन से दरिद्रता (Poverty) और कर्ज (Debt) जैसे समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Shukra Pradosh Vrat Katha
Shukra Pradosh Vrat Katha 2026

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सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

Freeupay.in के इस लेख में हम आपको बताएँगे, की शुक्र प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा, पूजा का शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण विधि।

📅 शुक्र प्रदोष व्रत 2026: तिथि और पूजा मुहूर्त (Date & Muhurat)

व्रत की तारीख:16 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ:15 जनवरी को रात 08:17 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त:16 जनवरी को रात 10:21 बजे तक
पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Kaal):शाम 05:45 बजे से रात 08:25 बजे तक (नोट: प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद के 2.5 घंटे पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।)

शुक्र प्रदोष व्रत 2026: संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

शुक्र त्रयोदशी प्रदोष व्रत करने से आरोग्य लाभ होता है। इसके अतिरिक्त वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है एवं सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर शिवधाम को पाता है। शिव जी हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख समृद्धि प्रदान करें। सूत जी बोले –

॥ दोहा ॥

“अभीष्ट सिद्धि की कामना, यदि हो ह्रदय विचार। धर्म, अर्थ, कामादि, सुख, मिले पदारथ चार ॥”

📖 शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha in Hindi)

स्कंद पुराण के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत कथा में तीन मित्रों का वर्णन बताया गया है। पूजा करते समय जातक को अपने हाथ में फूल और कुछ चावल के दाने लेकर यह व्रत कथा अवश्य पढ़ें:

तीन मित्रों की कहानी

प्राचीनकाल की बात है, एक नगर में तीन मित्र रहते थे – एक राजकुमार, दूसरा ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार व ब्राह्मण कुमार का विवाह हो चुका था। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, किन्तु गौना शेष था । एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय किया।

शुक्र का कोप

माता-पिता ने उसे समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं होता। किन्तु धनिक पुत्र नहीं माना और ससुराल जा पहुंचा। ससुराल में भी उसे रोकने की बहुत कोशिश की गई, मगर उसने जिद नहीं छोड़ी।

माता-पिता को विवश होकर अपनी कन्या की विदाई करनी पड़ी। ससुराल से विदा हो पति-पत्‍नी नगर से बाहर निकले ही थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया अलग हो गया और एक बैल की टांग टूट गई। दोनों को काफी चोटें आईं फिर भी वे आगे बढ़ते रहे। कुछ दूर जाने पर उनकी भेंट डाकुओं से हो गई। डाकू धन-धान्य लूट ले गए । दोनों रोते-पीटते घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलवाया। वैद्य ने निरीक्षण के बाद घोषणा की कि धनिक पुत्र तीन दिन में मर जाएगा।

ब्राह्मण की सलाह और व्रत का चमत्कार

जब ब्राह्मण कुमार को यह समाचार मिला तो वह तुरन्त आया। उसने माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने का परामर्ष दिया और कहा- ‘इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। यह सारी बाधाएं इसलिए आई हैं क्योंकि आपका पुत्र शुक्रास्त में पत्‍नी को विदा करा लाया है। यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा।’ धनिक को ब्राह्मण कुमार की बात ठीक लगी। उसने वैसा ही किया। ससुराल पहुंचते ही धनिक कुमार की हालत ठीक होती चली गई। शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट टल गए।

सारांश: हे भोलेनाथ! जैसे आपने सेठ पुत्र के कष्ट हरे, वैसे ही इस कथा को पढ़ने और सुनने वाले सभी भक्तों के संकट दूर करना।

(यहाँ बोलें: ॐ नमः शिवाय)

➤ यहां से पढ़े: शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि: जानें संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

➤ यहां से पढ़े: शुक्र प्रदोष व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम

🌟 शुक्र प्रदोष व्रत के लाभ (Benefits)

  1. सुखी दांपत्य जीवन: पति-पत्नी के बीच झगड़े खत्म होते हैं और प्रेम बढ़ता है।
  2. इच्छा पूर्ण: इस व्रत को करने से साधक की हर इच्छा पूर्ण होती हैं।
  3. कर्ज मुक्ति: यह व्रत लक्ष्मी जी की कृपा दिलाता है, जिससे पुराने कर्जों से मुक्ति मिलती है।
  4. सुख प्राप्ति: जातक को धर्म, अर्थ, काम आदि का सुख प्राप्त होती हैं।
  5. सौभाग्य: कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।
  6. कष्ट दूर: जातक के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

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Shukra Pradosh Vrat Katha in Hindi ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: शुक्र प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?

Ans: इस व्रत में पूरे दिन निराहार रहें। पूजा के बाद शाम को केवल एक बार फलाहार (फल, दूध) ग्रहण करें। नमक का सेवन न करें।

Q2: 2026 में पहला प्रदोष व्रत कब है?

Ans: साल का पहला प्रदोष 1 जनवरी (गुरु प्रदोष) को था, लेकिन 16 जनवरी को साल का पहला ‘शुक्र प्रदोष’ है।

Q3: क्या महिलाएं मासिक धर्म में यह व्रत कर सकती हैं?

Ans: नहीं, मासिक धर्म के दौरान पूजा वर्जित है। आप मन में शिव जी का ध्यान कर सकती हैं, लेकिन मूर्ति स्पर्श न करें।

निष्कर्ष: शुक्र प्रदोष व्रत जीवन में मिठास और समृद्धि घोलने का काम करता है। 16 जनवरी 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस कथा को पढ़कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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