Surya Shani Yuti: जब मिलते हैं ‘पिता’ और ‘पुत्र’, तो कैसा होता है असर? जानें लक्षण और उपाय
Surya Shani Yuti Yog: वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य (Sun) और शनि (Saturn) का संबंध पिता और पुत्र का माना गया है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में ये दोनों एक-दूसरे के परम शत्रु माने जाते हैं। सूर्य ‘आत्मा और मान-सम्मान’ का कारक है, तो शनि ‘कर्म और दंड’ का कारक माना जाता है। जब भी किसी जातक की जन्म कुंडली में ये दोनों ग्रह एक साथ एक ही घर में बैठ (भाव) जाते हैं, तो सूर्य-शनि युति (Sun-Saturn Conjunction) का निर्माण होता है।
सूर्य-शनि के कारण बनता है अशुभ योग (Surya Shani Yuti), परेशानियां आसानी से खत्म नहीं होती सूर्य-शनि कि युती व्यक्ति के पत्रिका में हो तो जीवन मैं संघर्ष रहता है। सूर्य और शनि, पिता – पुत्र होने के पर भी परस्पर शत्रु भाव रखते हैं। वैसे भी विचार करें तो ज्ञान और अहंकार साथ मिलने पर शुभ प्रभाव अनुकूल नहीं होते।
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अक्सर इसे ज्योतिष में ‘संघर्ष योग’ या ‘विष्कुंभ योग’ के समान प्रभाव देखा जाता है। Freeupay.in के इस लेख में हम जानेंगे कि इस युति का आपके करियर, स्वास्थ्य और रिश्तों पर क्या असर पड़ता है और इसके सरल उपाय क्या हैं।
⚠️ क्यों खास है सूर्य-शनि की युति? (Significance)
सूर्य प्रकाश है और तो शनि अंधकार। जब ये दोनों मिलते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में अजीब द्वंद्व (Conflict) पैदा होते है।
- कामो की सफलता में देरी: जब सूर्य और शनि की युति पत्रिका के प्रथम, पंचम, नवम, दशम भाव में हो, और दोनों में से एक ग्रह इन भावो का कारक हो तो यह योग कामो में सफलता देरी से लाता हैं।
- पिता-पुत्र में विवाद: मेहनत करने के बाद, समय बीत जाने पर सफलता मिलती है। सूर्य – शनि की युति के वजह से पिता – पुत्र के बिच हमेशा मतभेद बना रहता है। और दूर रहने के भी योग बनते हैं।
- कैरियर में देरी: जातक की कुंडली में यह युति होने पर उनको कैरियर संबधित में परेशानी आती हैं और सरकारी नौकरी या प्रमोशन जैसे कार्यों में बाधाएं आती हैं।
- आत्मविश्वास की कमी: इस युति के होने से जातक की कुंडली में सूर्य के प्रभाव को शनि ग्रह कमजोर या फिर अशुभ करता है, जिससे व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास (Confidence) की कमी या फिर मानसिक परेशानी आ सकती है।
- डिप्रेशन: संघर्ष के वजह से व्यक्ति निराश होकर डिप्रेशन में चला जाता है। अगर शनि उच्च का हो और कारक हो तो 36 वे साल के बाद अपनीं दशा – महादशा में सफलता जरूर देता है।
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🔮 सूर्य-शनि युति के प्रभाव (Effects of Sun-Saturn Conjunction)
यह सूर्य-शनि युति (Surya Shani Yuti) हमेशा बुरी नहीं होती। भाव (House) और राशि के अनुसार इसके परिणाम भी बदल सकते हैं:
नकारात्मक प्रभाव (Negative Effects):
- जीवन में संघर्ष: इस युति के होने से महादशा, अन्तर्दशा या गोचर में जातक को आसानी से सफलता नहीं मिलती है, उसे हर कार्य के लिए दोहरा (दुगना) संघर्ष करना पड़ता सकता है।
- हड्डी और आँखों के रोग: ख़ास रूप से इस युति होने से जातक को स्वास्थ्य रूप से हड्डियों (Bone) संबधित समस्या और आँखों की कमजोरी जैसी समस्या होती है।
- मानहानि का डर: व्यक्ति को समाज में बिना कारणों एवं बिना गलतियों से आरोप लगने का भय रहता है, जिससे मान सम्मान में कमी होती है।
सकारात्मक प्रभाव (Positive Effects):
- अनुशासन (Discipline): अगर यह युति आपकी कुंडली में अच्छी स्थिति (जैसे की तुला या मकर राशि) में हो, तो व्यक्ति अत्यंत अनुशासित और न्यायप्रिय होता है।
- वकील और जज: इस युति के होने से कानून (Law) क्षेत्र से जुड़े लोगों को बहुत सफलता मिलते देखा जाता हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति: जन्मकुंडली में यह युति होने पर व्यक्ति को सांसारिक मोह माया से मोहभंग होने भी लगता हैं, जिससे व्यक्ति अध्यात्म की ओर तेजी से बढ़ने लगता है।
(नोट: साल 2026 में मार्च के महीने में मीन राशि में सूर्य और शनि की युति बनेगी, जो सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगी।)
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🙏 सूर्य-शनि युति के अचूक उपाय (Surya Shani Yuti Ke Upay)
यदि आपकी जन्मकुंडली में यह सूर्य-शनि युति (Surya Shani Yuti) का दोष है जिसके बुरे प्रभाव आप अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं, तो Freeupay.in द्वारा बताये गए ये उपाय जरूर करें:
1. जल और तेल का संतुलन
- यह युति होने पर व्यक्ति को सुबह स्नान के बाद उगते हुए सूरज को कुमकुम और गुड़ मिला जल चढ़ाएं (सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए)।
- रोजाना शनिवार की शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं (शनि ग्रह को शांत करने के लिए)।
2. हनुमान चालीसा का पाठ
हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता हैं जो सूर्य (गुरु) और शनि (दास) दोनों को नियंत्रित करके अशुभ प्रभाव दूर कर सकते हैं।
- रोजाना हनुमान चालीसा या शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए। पिता-पुत्र के कलह को शांत करने का सबसे बड़ा उपाय है।
3. पिता का सम्मान
यह केवल एक व्यावहारिक उपाय है। जिसमें जातक को अपने पिता या पिता तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए और उनसे बहस करने से बचाना चाहिए। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए और पिता के कपड़े या फिर गलती से भी चप्पल ना पहनें।
4. तांबा और लोहा
- रविवार को तांबे (Copper) का दान और शनिवार को लोहे (Iron) की वस्तुएं खरीदने से बचाना चाहिए।
5. दशरथ कृत शनि स्तोत्र
रोजाना या फिर शनिवार वाले दिन महाराज दशरथ द्वारा रचित ‘शनि स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए जिससे सूर्य-शनि युति का बुरा प्रभाव खत्म होने लगता है।
6. रुद्राक्ष (Rudraksha)
व्यक्ति को सिद्ध किया हुआ 7 मुखी रुद्राक्ष (शनि ग्रह अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए) और सिद्ध किया हुआ 12 मुखी रुद्राक्ष या फिर 1 मुखी रुद्राक्ष (सूर्य ग्रह अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए) धारण करना चाहिए।
❓ Surya Shani Yuti: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या सूर्य-शनि युति हमेशा खराब होती है?
Ans: नहीं, अगर यह युति 3, 6 या 11वें भाव में हो, तो व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और राजनीति में सफल होता है।
Q2: सूर्य और शनि की युति 2026 में कब होगी?
Ans: साल 2026 में मार्च के मध्य में सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां शनि पहले से विराजमान होंगे। तब यह युति बनेगी।
Q3: पिता से संबंध सुधारने के लिए क्या करें?
Ans: रोज गुड़ खाकर पानी पिएं और रविवार को गाय को गेहूं खिलाएं
निष्कर्ष: सूर्य-शनि की युति संघर्ष देती है, लेकिन यही संघर्ष व्यक्ति को सोने की तरह तपाकर कुंदन बनाता है। घबराएं नहीं, सही उपायों और कर्मों से आप इस योग को ‘राजयोग’ में बदल सकते हैं। ज्योतिष और उपायों की सटीक जानकारी के लिए Freeupay.in को बुकमार्क जरूर करें।
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