WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Ganga Dussehra Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: गंगा दशहरा पर करें इस चमत्कारी ‘गंगा दशहरा स्तोत्र (PDF)’ का पाठ, तुरंत नष्ट होंगे 10 भयंकर पाप

Ganga Dussehra Stotram: गंगा दशहरा स्तोत्र यदि जो भी जातक नियमित रूप से किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करके गंगा दशहरा स्तोत्र का पाठ करते है तो जातक के सभी दोष व पापों का नाश हो जाता है। साथ ही साथ जातक को अग्नि, चोर व सर्प आदि का डर व भय नही रहता हैं। भविष्य पुराण में के इसके बारे में वर्णित हैं। गंगा दशहरा स्तोत्र आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Ganga Dussehra Stotram: गंगा दशहरा पर करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, धुल जाएंगे जन्म-जन्मांतर के 10 पाप

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

Ganga Dussehra Stotram
Ganga Dussehra Stotram

हमारे हिंदू धर्म के अनुसार में ‘गंगा दशहरा’ के दिन में माता गंगा का पृथ्वी लोग पर अवतरण के उपलक्ष्य में इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हमारे हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, कहा जाता हैं, की इस दिन जो व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करता है, उसके 10 प्रकार के पाप (कायिक, वाचिक और मानसिक) आदि हमेशा के लिए नष्ट होकर भस्म हो जाते हैं।

ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें

ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)

किंतु, यदि आप इस दिन गंगा घाट तक जाने में असमर्थ होते हैं, तो आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। हमारे पुराणों में बताया गया है कि घर पर ही जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने और ‘गंगा दशहरा स्तोत्र’ (Ganga Dussehra Stotram) का पूर्ण श्रद्धा से पाठ करने से साक्षात गंगा स्नान के बराबर ही पुण्य प्राप्त होता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें ‘गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram)’ और इसके पाठ की अचूक विधि।

🌺 क्विक लिस्ट: गंगा दशहरा स्तोत्र पाठ के चमत्कारिक लाभ

गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram) जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए गंगा दशहरा के दिन इस गंगा दशहरा स्तोत्र को पढ़ने का क्या फल मिलता है:

पाठ का विवरणचमत्कारिक फायदे और रहस्य (Benefits & Secrets)
मुख्य लाभ (Benefits)अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में अपार सुख-शांति आती है।
पाठ का सर्वोत्तम समयगंगा दशहरा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या गोधूलि बेला (शाम के समय)।
पूजा का विशेष नियमपाठ करते समय तांबे के लोटे में जल और गंगाजल भरकर सामने अवश्य रखें।
पापों का नाशयह स्तोत्र विशेष रूप से अनजाने में हुए 10 प्रकार के पापों को नष्ट करने में अमोघ है।

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें

📿 श्री गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram in Hindi)

यह ‘श्री गंगा दशहरा स्तोत्र’ माता गंगा को अत्यंत प्रिय है। गंगा दशहरा के दिन पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इसका पाठ अवश्य करें:

ॐ नमः शिवायै गंगायै, शिवदायै नमो नमः।

नमस्ते विष्णु-रुपिण्यै, ब्रह्म-मूर्त्यै नमोऽस्तु ते।।1।।

नमस्ते रुद्र-रुपिण्यै, शांकर्यै ते नमो नमः।

सर्व-देव-स्वरुपिण्यै, नमो भेषज-मूर्त्तये।।2।।

सर्वस्य सर्व-व्याधीनां, भिषक्-श्रेष्ठ्यै नमोऽस्तु ते।

स्थास्नु-जंगम-सम्भूत-विष-हन्त्र्यै नमोऽस्तु ते।।3।।

संसार-विष-नाशिन्यै, जीवानायै नमोऽस्तु ते।

ताप-त्रितय-संहन्त्र्यै, प्राणश्यै ते नमो नमः।।4।।

शन्ति-सन्तान-कारिण्यै, नमस्ते शुद्ध-मूर्त्तये।

सर्व-संशुद्धि-कारिण्यै, नमः पापारि-मूर्त्तये।।5।।

भुक्ति-मुक्ति-प्रदायिन्यै, भद्रदायै नमो नमः।

भोगोपभोग-दायिन्यै, भोग-वत्यै नमोऽस्तु ते।।6।।

मन्दाकिन्यै नमस्तेऽस्तु, स्वर्गदायै नमो नमः।

नमस्त्रैलोक्य-भूषायै, त्रि-पथायै नमो नमः।।7।।

नमस्त्रि-शुक्ल-संस्थायै, क्षमा-वत्यै नमो नमः।

त्रि-हुताशन-संस्थायै, तेजो-वत्यै नमो नमः।।8।।

नन्दायै लिंग-धारिण्यै, सुधा-धारात्मने नमः।

नमस्ते विश्व-मुख्यायै, रेवत्यै ते नमो नमः।।9।।

बृहत्यै ते नमस्तेऽस्तु, लोक-धात्र्यै नमोऽस्तु ते।

नमस्ते विश्व-मित्रायै, नन्दिन्यै ते नमो नमः।।10।।

पृथ्व्यै शिवामृतायै च, सु-वृषायै नमो नमः।

परापर-शताढ्यै, तारायै ते नमो नमः।।11।।

पाश-जाल-निकृन्तिन्यै, अभिन्नायै नमोऽस्तु ते।

शान्तायै च वरिष्ठायै, वरदायै नमो नमः।।12।।

उग्रायै सुख-जग्ध्यै च, सञ्जीविन्यै नमोऽस्तु ते।

ब्रह्मिष्ठायै-ब्रह्मदायै, दुरितघ्न्यै नमो नमः।।13।।

प्रणतार्ति-प्रभञजिन्यै, जग्मात्रे नमोऽस्तु ते।

सर्वापत्-प्रति-पक्षायै, मंगलायै नमो नमः।।14।।

शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे।

सर्वस्यार्ति-हरे देवि! नारायणि ! नमोऽस्तु ते।।15।।

निर्लेपायै दुर्ग-हन्त्र्यै, सक्षायै ते नमो नमः।

परापर-परायै च, गंगे निर्वाण-दायिनि।।16।।

गंगे ममाऽग्रतो भूया, गंगे मे तिष्ठ पृष्ठतः।

गंगे मे पार्श्वयोरेधि, गंगे त्वय्यस्तु मे स्थितिः।।18।।

आदौ त्वमन्ते मध्ये च, सर्व त्वं गांगते शिवे!

त्वमेव मूल-प्रकृतिस्त्वं पुमान् पर एव हि।।19।।

गंगे त्वं परमात्मा च, शिवस्तुभ्यं नमः शिवे।।20।।

।।फल-श्रुति।।

य इदं पठते स्तोत्रं, श्रृणुयाच्छ्रद्धयाऽपि यः।

दशधा मुच्यते पापैः, काय-वाक्-चित्त-सम्भवैः।।21।।

रोगस्थो रोगतो मुच्येद्, विपद्भ्यश्च विपद्-युतः।

मुच्यते बन्धनाद् बद्धो, भीतो भीतेः प्रमुच्यते।।22।।

(पाठ पूर्ण होने के बाद माता गंगा की आरती करें और लोटे का जल पूरे घर में छिड़क दें।)

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

🌟 जीवन के भयंकर संकट दूर करने का ज्योतिषीय रहस्य

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि गंगा दशहरा का दिन केवल पाप धोने का नहीं, बल्कि नवग्रहों के मारक दोषों और विशेषकर घर की भयंकर नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को बाहर निकालने का सबसे बड़ा अवसर होता है।

जिन लोगों के जीवन में भारी आर्थिक तंगी है, या काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, उन्हें इस पावन अवसर पर साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना चाहिए। यह रुद्राक्ष दसों दिशाओं से आने वाले संकटों, कोर्ट-कचहरी की बाधाओं और तंत्र-मंत्र (Black Magic) को रोकता है। गंगा दशहरा के दिन इसे धारण करने से व्यक्ति के सभी 10 भयंकर पाप तुरंत शून्य हो जाते हैं।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

⚠️ गंगा दशहरा स्तोत्र पाठ के 3 कड़े नियम

  1. स्वच्छता अनिवार्य: गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram) का पाठ बिना स्नान किए या अशुद्ध वस्त्र पहनकर भूलकर भी नहीं करना चाहिए। पूजा स्थान की भी अच्छी तरह सफाई होनी चाहिए।
  2. मांस-मदिरा का त्याग: गंगा दशहरा के दिन और इस स्तोत्र के पाठ के दौरान घर में तामसिक भोजन (अंडा, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।
  3. जल का आदर: पाठ वाले दिन भूलकर भी जल की बर्बादी न करें। पानी को व्यर्थ बहाना या जल स्रोतों को गंदा करना माता गंगा का सीधा अपमान माना जाता है, जिससे पूजा का फल नष्ट हो जाता है।

Ganga Dussehra Stotram❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या गंगा दशहरा पर घर में गंगाजल छिड़कना शुभ होता है?

Ans: जी हाँ! गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram) का पाठ करने के बाद, तांबे के पात्र में रखे गए गंगाजल को आम या अशोक के पत्तों से पूरे घर (विशेषकर मुख्य द्वार) पर छिड़कने से वास्तु दोष और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

Q2: इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

Ans: गंगा दशहरा के दिन इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ कम से कम 1 बार, 3 बार या 11 बार अपनी श्रद्धा के अनुसार करना अत्यंत फलदायी होता है।

Q3: गंगा जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

Ans: माता गंगा का बीज मंत्र “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा” अत्यंत शक्तिशाली है। इस मंत्र का 108 बार जाप करने से अपार सफलता मिलती है।

निष्कर्ष: गंगा दशहरा का पर्व आपके सोए हुए भाग्य को जगाने और जीवन के सभी पापों से मुक्ति पाने का सबसे सुनहरा अवसर है। Freeupay.in पर दिए गए इस श्री गंगा दशहरा स्तोत्र (Ganga Dussehra Stotram) का पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करें। माता गंगा आपके परिवार को हमेशा सुरक्षित और समृद्ध रखेंगी।

अभी शेयर करें: माता गंगा की यह स्तुति किसी के भी जीवन में अमृत घोल सकती है। इस पवित्र और बहुमूल्य लेख को अपने परिवार, दोस्तों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment

Call Us Now
WhatsApp
We use cookies in order to give you the best possible experience on our website. By continuing to use this site, you agree to our use of cookies.
Accept