Ganga Mata Ki Aarti: गंगा माता जी की आरती हमारे हिन्दू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया हैं। ऋग्वेद वेद में गंगा नदी का वर्णित किया हुआ हैं। गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। जो भी व्यक्ति श्री गंगा माता की आरती नियमित रूप से पाठ करते है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है और गंगा माँ की विशेष कृपा बनी रहती हैं। उसकी बुद्दि भी निर्मल हो जाती हैं और जीवन समाप्त होने के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं। श्री गंगा माता की आरती आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
Ganga Mata Ki Aarti: ॐ जय गंगे माता आरती, रोज़ाना गाने से घर में आएगी अपार सुख-शांति और समृद्धि
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हिंदू धर्म में माता गंगा को सभी नदियों में सबसे पवित्र और मोक्षदायिनी के रूप में माना गया है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, किसी भी प्रकार की पूजा विधि एवं अनुष्ठान या गंगा स्नान का पूर्ण फल व्यक्ति को जब तक नहीं प्राप्त होता हैं, जब तक अंत में ‘गंगा माता की आरती’ (Ganga Mata Ki Aarti) नहीं गाई जाए।
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“ॐ जय गंगे माता” की ध्वनि मात्र से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बाहर निकल जाती है और मन को अपार शांति मिलती है। जो व्यक्ति रोज़ाना पूर्ण श्रद्धा के साथ माता गंगा की आरती करता है, उसके घर में कभी भी दरिद्रता और अकाल मृत्यु का वास नहीं होता। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण गंगा माता की आरती (Ganga Mata Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और इसके अचूक लाभ।
🌺 क्विक लिस्ट: गंगा माता की आरती करने के चमत्कारिक लाभ (Ganga Mata Ki Aarti Benefits)
गंगा माता की आरती (Ganga Mata Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना यह आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | गंगा माता की आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| पापों और दोषों का नाश | इसके गान से जाने-अनजाने में हुए जन्म-जन्मांतर के पाप और पितृ दोष तुरंत कट जाते हैं। |
| मानसिक शांति की प्राप्ति | भयंकर तनाव, चिंता और अज्ञात भय को दूर कर मन को निर्मल और शांत बनाती है। |
| अपार धन और बरकत | घर में जल तत्व संतुलित होता है, जिससे रुका हुआ पैसा वापस आता है और दरिद्रता दूर होती है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | रोज़ सुबह पूजा के अंत में या शाम के समय (गोधूलि बेला में) गंगा जी की आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
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📿 श्री गंगा माता की आरती (Shri Ganga Mata Ki Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें और इस आरती (Ganga Mata Ki Aarti) का गान करें:
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ।
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता ।
शरण पड़े जो तेरी , सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता ।
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता ।
एक ही बार जो तेरी, शरण गति आता ।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ।
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता ।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता ।
(आरती पूर्ण होने के बाद माता गंगा को प्रणाम करें, कर्पूर या दीपक की लौ से आरती लें और जल को पूरे घर में छिड़क दें।)
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राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जल तत्व का सीधा संबंध व्यक्ति की जन्म कुंडली के ‘चंद्रमा’ (Moon) ग्रह से होता है। जब चंद्रमा कमज़ोर होता है, तो व्यक्ति को भयंकर मानसिक तनाव (Depression), डर और धन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है।
चंद्रमा के मारक दोषों को पूरी तरह शून्य करने, मानसिक शांति पाने और दसों दिशाओं से अपार धन आकर्षित करने के लिए साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना ‘गंगा माता की आरती’ करने से व्यक्ति के जीवन की हर बाधा तुरंत समाप्त हो जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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⚠️ गंगा आरती करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान (Rules for reciting Ganga Mata Ki Aarti)
- स्वच्छता और आसन: आरती हमेशा खड़े होकर और पूर्ण श्रद्धा भाव से करनी चाहिए। आरती करते समय शरीर और वस्त्र एकदम शुद्ध होने चाहिए।
- दीपक का चुनाव: माता गंगा की आरती के लिए हमेशा गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक ही प्रयोग करें। दीपक में विषम संख्या (जैसे 1, 3, 5, 7) में बत्तियां होनी चाहिए।
- जल का पात्र: आरती करते समय अपने पास एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा गंगाजल और सादा जल मिलाकर अवश्य रखें। आरती के बाद इस अभिमंत्रित जल को पूरे घर में छिड़कें।
Ganga Mata Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या गंगा माता की आरती शाम के समय की जा सकती है?
Ans: जी हाँ, शाम के समय (गोधूलि बेला में) घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाकर माता गंगा की आरती करना घर में सुख-समृद्धि लाता है।
Q2: गंगा आरती के बाद क्या बोलना चाहिए?
Ans: आरती पूर्ण होने के बाद क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और “हर हर गंगे” या “नमामि गंगे” का जयकारा लगाना चाहिए।
Q3: घर पर गंगाजल न हो तो आरती कैसे करें?
Ans: यदि गंगाजल उपलब्ध नहीं है, तो शुद्ध जल में माता गंगा का स्मरण करके आरती की जा सकती है। माता गंगा भाव की भूखी हैं, पूर्ण श्रद्धा से की गई आरती वे तुरंत स्वीकार करती हैं।
निष्कर्ष: श्री गंगा माता की आरती (Ganga Mata Ki Aarti) वह अचूक और दिव्य मार्ग है जो आपके जीवन की हर बाधा और नकारात्मकता को नष्ट कर सकता है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपनी दैनिक पूजा में इस आरती का गान शुरू करें। माता गंगा की कृपा से आपके घर में कभी भी धन, सुख और शांति की कमी नहीं रहेगी।
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गंगा माता की आरती पढ़कर मन को बहुत शांति मिलती है। गंगा नदी को माँ का दर्जा देने की परंपरा हमारे धर्म में कितनी गहरी है, यह बात इस आरती से स्पष्ट होती है। गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है, यह विश्वास कितना प्राचीन और मजबूत है! जो लोग नियमित रूप से इस आरती का पाठ करते हैं, उन्हें गंगा माँ की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस आरती के बोलों में कितना आध्यात्मिक सुख छिपा है, यह सचमुच अद्भुत है। क्या आपने कभी गंगा में स्नान करके इस आरती का पाठ किया है? यदि हाँ, तो कैसा अनुभव रहा?