Narsingh Stotra 2026: हिंदू धर्म में कहा जाता हैं, की जब जब कोई भी कैसा भी संकट आता है। उस युग में श्री विष्णु जी ने कोई ना कोई अवतार लिया हैं। ऐसे में ही संकटमोचक और रक्षक देवता और भक्तों की बात आती है, तो भगवान विष्णु के सबसे उग्र स्वरूप ‘श्री नरसिंह’ (Lord Narsingh) के अवतार का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इस वर्ष में 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को यानि की वैशाख मास के शुक्ल चतुर्दशी तिथि के पावन अवसर पर पूरे देश में ‘नृसिंह जयंती’ का महापर्व मनाया जा रहा है।
Narsingh Stotra 2026: नृसिंह जयंती से शुरू करें इस चमत्कारी स्तोत्र का रोज़ाना पाठ, जीवन में नहीं फटकेगा कोई संकट
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धर्म शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णन किया हुआ है कि जब भी व्यक्ति कर्ज, गंभीर बीमारी, कोर्ट-कचहरी और अज्ञात शत्रुओं (Hidden Enemies) से परेशान रहेगा उस समय इन सबसे बचने का सबसे अचूक ब्रह्मास्त्र ‘नरसिंह स्तोत्र’ (Narsingh Stotra) का पाठ माना गया है। यदि आप कल (30 अप्रैल) की शाम भगवान नरसिंह की पूजा करके इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ करने का संकल्प लेते हैं, तो आपका जीवन पूरी तरह से सुरक्षित और खुशहाल हो जाएगा। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संस्कृत श्लोकों और उनके सरल हिंदी अर्थ के साथ संपूर्ण नरसिंह स्तोत्र।
📋 नरसिंह स्तोत्र पाठ का विवरण (Details)
| विवरण (Information) | महत्व (Significance) |
| स्तोत्र का नाम | श्री नरसिंह स्तोत्र (Shri Narsingh Stotra) |
| मूल ग्रंथ (Source) | श्रीमद् भागवत (Shrimad Bhagwat) |
| पाठ का सर्वोत्तम दिन | नृसिंह जयंती (30 अप्रैल 2026), या कर्ज, गंभीर बीमारी, कोर्ट-कचहरी और अज्ञात शत्रुओं या फिर रोजाना |
| मुख्य लाभ (Benefits) | चेचकर्ज, गंभीर बीमारी, कोर्ट-कचहरी और अज्ञात शत्रुओं आदि से मुक्ति हेतु |
📖 सिद्ध ‘श्री नरसिंह स्तोत्र’ (Narsingh Stotra with Hindi Meaning)
नृसिंह जयंती की शाम की पूजा में और उसके बाद रोज़ाना सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके इस अमोघ स्तोत्र का पाठ करें:
॥ श्री नरसिंह स्तोत्र ॥
नतोऽस्म्यनन्ताय दुरन्तशक्तये विचित्रवीर्याय पवित्रकर्मणे।
विश्वस्य सर्ग-स्थिति-संयमान् गुणैः स्वलीलया सन्दधतेऽव्ययात्मने॥1॥
श्रीरुद्र उवाच
कोपकालो युगान्तस्ते हतोऽयमसुरोऽल्पकः।
तत्सुतं पाह्युपसृतं भक्तं ते भक्तवत्सल॥2॥
इंद्र उवाच
प्रत्यानीताः परम भवता त्रायतां नः स्वभागा।
दैत्याक्रान्तं हृदयकमलं स्वद्गृहं प्रत्यबोधि।
कालग्रस्तं कियदिदमहो नाथ शुश्रूषतां ते।
मुक्तिस्तेषां न हि बहुमता नारसिंहापरैः किम्॥3॥
ऋषय ऊचुः
त्वं नस्तपः परममात्थ यदात्मतेजो येनेदमादिपुरुषात्मगतं ससर्ज।
तद्विप्रलुप्तमनुनाऽद्य शरण्यपाल रक्षागृहीतवपुषा पुनरन्वमंस्थाः॥4॥
पितर ऊचुः
श्राद्धानि नोऽधिबुभुजे प्रसभं तनूजैर्दत्तानि तीर्थसमयेऽप्यपिबत्तिलाम्बु।
तस्योदरान्नखविदीर्णवपाद्य आर्च्छत्तस्मै नमो नृहरयेऽखिल धर्मगोप्त्रे॥5॥
सिद्धा ऊचु:
यो नो गतिं योगसिद्धामसाधुरहारषीद्योगतपोबलेन।
नानादर्पं तं नखैर्निर्ददार तस्मै तुभ्यं प्रणताः स्मो नृसिंह॥6॥
विद्याधरा ऊचु:
विद्यां पृथग्धारणयाऽनुराद्धां न्यषधदज्ञो बलवीर्यदृप्तः।
स येन संख्ये पशुवद्धतस्तं मायानृसिंहं प्रणताः स्म नित्यम्॥7॥
नागा ऊचु:
येन पापेन रत्नानि स्त्रीरत्नानि हृतानि नः।
तद्वक्षःपाटनेनासां दत्तानन्द नमोऽस्तु ते॥8॥
मनव ऊचु:
मनवो वयं तव निदेशकारिणो दितिजेन देव परिभूतसेतवः।
भवता खलः स उपसंहृतः प्रभो कर वाम ते किमनुशाधि किंकरान्॥9॥
रजापतय ऊचु:
प्रजेशा वयं ते परेशाभिसृष्टा न येन प्रजा वै सृजामो निषिद्धाः।
स एव त्वया भिन्नवक्षाऽनुशेते जगन्मंगलं सत्त्वमूर्तेऽवतारः॥10॥
गन्धर्वा ऊचु:
वयं विभो ते नटनाट्यगायका येनात्मसाद् वीर्यबलौजसा कृताः।
स एव नीतो भवता दशामिमां किमुत्पथस्थः कुशलाय कल्पते॥11॥
चारणा ऊचु:
हरे तवांग्घ्रिपंकजं भवापवर्गमाश्रिताः।
यदेष साधु हृच्छयस्त्वयाऽसुरः समापितः॥12॥
यक्षा ऊचु:
वयमनुचरमुख्याः कर्मभिस्ते मनोज्ञैस्त इह दितिसुतेन प्रापिता वाहकत्वम्।
स तु जनपरितापं तत्कृतं जानता ते नरहर उपनीतः पंचतां पंचविंशः॥13॥
किंपुरुषा ऊचु:
वयं किंपुरुषास्त्वं तु महापुरुष ईश्वरः।
अयं कुपुरुषो नष्टो धिक्कृतः साधुभिर्यदा॥14॥
वैतालिका ऊचु:
सभासु सत्रेषु तवामलं यशो गीत्वा सपर्यां महतीं लभामहे।
यस्तां व्यनैषीद् भृशमेष दुर्जनो दिष्ट्या हतस्ते भगवन् यथाऽऽमयः॥15॥
किन्नरा ऊचु:
वयमीश किन्नरगणास्तवानुगा दितिजेन विष्टिममुनाऽनुकारिताः।
भवता हरे स वृजिनोऽवसादितो नरसिंह नाथ विभवाय नो भव॥16॥
विष्णुपार्षदा ऊचु:
अद्यैतद्धरिनररूपमद्भुतं ते दृष्टं नः शरणद सर्वलोकशर्म।
सोऽयं ते विधिकर ईश विप्रशप्तस्तस्येदं निधनमनुग्रहाय विद्मः॥17॥
॥ इति श्रीमद्भागवतान्तर्गते सप्तमस्कन्धेऽष्टमध्याये नृसिंहस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
🌟 ज्योतिषीय रहस्य: रोज़ाना पाठ से कैसे होता है भाग्योदय?
भगवान नरसिंह का यह स्तोत्र केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह एक प्रचंड ‘ध्वनि विज्ञान’ (Sound Vibration) है। प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि कुंडली में जब मंगल (Mars) नीच का हो, राहु (Rahu) की बुरी दशा चल रही हो या घर में भयंकर वास्तु दोष हो, तो व्यक्ति कर्जे में डूब जाता है और परिवार में क्लेश खत्म होने का नाम नहीं लेता।
इस नरसिंह स्तोत्र का रोज़ाना पाठ करने से मंगल ग्रह की उग्रता शांत होती है और घर के दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोण का वास्तु दोष स्वतः ही खत्म हो जाता है। नृसिंह जयंती के अवसर पर यह संकल्प लें कि आप रोज़ाना इसका पाठ करेंगे। पाठ के बाद जल के कलश में फूंके हुए पानी को पूरे घर में छिड़कने से घर की सारी ‘नेगेटिव एनर्जी’ और ‘बुरी नजर’ हमेशा के लिए भस्म हो जाती है।
⚠️ नरसिंह स्तोत्र पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for Daily Path)
भगवान नरसिंह अत्यंत उग्र देवता हैं, इसलिए इनके स्तोत्र का पाठ करते समय इन नियमों का सख्ती से पालन करें:
- स्वच्छता और पवित्रता: बिना स्नान किए और अशुद्ध वस्त्रों में कभी भी इस स्तोत्र का पाठ न करें। महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) के दौरान इसका पाठ करने से बचना चाहिए।
- आसन और दिशा: कुशा या लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर ही पाठ करें। पाठ करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
- तामसिक भोजन का त्याग: जो व्यक्ति रोज़ाना ‘नरसिंह स्तोत्र’ का पाठ करता है, उसे अपने जीवन से मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए, तभी इस स्तोत्र की सिद्धि प्राप्त होती है।
Narsingh Stotra Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: कल 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती की पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
Ans: कल (30 अप्रैल 2026) शाम को गोधूलि बेला में 04:17 बजे से 06:56 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त है। इसी समय भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट हुए थे।
Q2: क्या मैं इस स्तोत्र का पाठ रात में सोने से पहले कर सकता हूँ?
Ans: जी हाँ! यदि आपको रात में डरावने सपने आते हैं, नींद नहीं आती या किसी अज्ञात साये का डर लगता है, तो आप हाथ-मुंह धोकर, बिस्तर पर बैठने से पहले 3 बार इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। यह आपके चारों ओर एक अभेद्य ‘रक्षा कवच’ (Kavach) बना देता है।
Q3: पूजा में भगवान नरसिंह को क्या भोग लगाना चाहिए?
Ans: भगवान की उग्रता को शांत करने के लिए उन्हें चंदन का लेप लगाया जाता है और ठंडी चीजों जैसे जल में भीगी हुई चने की दाल, गुड़, मौसमी फल और पंचामृत का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष: कलियुग की हर बाधा को काटने और संकटों से बचने के लिए ‘नरसिंह स्तोत्र’ एक अचूक ब्रह्मास्त्र है। नृसिंह जयंती के पावन अवसर से Freeupay.in पर दिए गए इस स्तोत्र का पाठ शुरू करें। भगवान नरसिंह आपके परिवार पर कभी कोई आंच नहीं आने देंगे।
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