Narasimha Stotram 2026: हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष के वैशाख मास को शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन में ‘श्री नृसिंह जयंती’ मनाई जाती हैं। इस दिन भगवान श्री विष्णु जी के चौथे अवतार ‘श्री नृसिंह’ (Lord Narasimha) का अवतरण हुआ था। भारत वर्ष सहित पूरे देश में नृसिंह जयंती का महापर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता हैं।
Narasimha Stotram 2026: नृसिंह जयंती के दिन जरुर पढ़ें यह सिद्ध स्तोत्र, आपके जीवन से मिटेगा बड़ा से बड़ा हर संकट
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भगवान नृसिंह को शक्ति, पराक्रम और अपने भक्तों की सदैव रक्षा के सबसे बड़े प्रतीक माना जाता हैं। उन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए असुरराज हिरण्यकशिपु का वध किया था। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, नृसिंह जयंती की पूजा तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि पूजा में भगवान का ‘नृसिंह स्तोत्र’ (Narasimha Stotram) न पढ़ा जाए। Freeupay.in के इस विशेष लेख में जानिए कल शाम की पूजा का सटीक मुहूर्त और वह चमत्कारी स्तोत्र, जिसका पाठ रातों-रात आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकता है।
🕰️ 30 अप्रैल 2026: नृसिंह जयंती पूजा का सटीक ‘शुभ मुहूर्त’
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह का अवतार गोधूलि बेला (शाम के समय) में हुआ था, इसलिए इनकी मुख्य पूजा और व्रत का संकल्प शाम को ही लिया जाता है:
| विवरण (Event) | तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time) |
| नृसिंह जयंती की तारीख | 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) |
| चतुर्दशी तिथि आरंभ | 29 अप्रैल 2026, रात 07:51 बजे से |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे तक |
| शाम की पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त (Sayana Kala Puja) | शाम 04:17 बजे से 06:56 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 39 मिनट) |
| व्रत पारण का समय (Parana Time) | 1 मई 2026, सुबह 05:41 बजे के बाद |
📖 सिद्ध ‘श्री नृसिंह स्तोत्र’ (Narasimha Stotram in Hindi)
कल शाम 04:17 से 06:56 के बीच भगवान नृसिंह की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर हाथ जोड़कर इस अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र का पाठ करें:
॥ उग्र वीर महामंत्र / नृसिंह स्तोत्र ॥
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥१॥
अर्थ: हे उग्र और वीर महाविष्णु! आपकी ज्वाला हर दिशा में फैल रही है। हे भयानक और कल्याणकारी नृसिंह भगवान! आप मृत्यु के भी मृत्यु हैं, मैं आपको बारंबार नमन करता हूँ।
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाददायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः शिलाटङ्कनखालये॥२॥
अर्थ: प्रह्लाद को आनंद देने वाले हे नृसिंह भगवान, आपको नमस्कार है। आपके नाखून हिरण्यकशिपु की पत्थर जैसी छाती को चीरने वाले छेनी के समान हैं।
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः।
बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥३॥
अर्थ: इधर भी नृसिंह हैं, उधर भी नृसिंह हैं, मैं जहाँ भी जाता हूँ वहाँ नृसिंह हैं। बाहर भी नृसिंह हैं, मेरे हृदय में भी नृसिंह हैं। उन आदि देव भगवान नृसिंह की मैं शरण लेता हूँ।
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृङ्गं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्।
केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥४॥
अर्थ: हे केशव! हे नरहरि रूप धारण करने वाले जगदीश्वर! आपके करकमलों में जो अद्भुत नाख़ून हैं, उन्होंने हिरण्यकशिपु रूपी भौंरे के शरीर को चीर डाला है। आपकी जय हो!
🌟 ज्योतिष और वास्तु का महा-उपाय: कैसे करें मंगल और राहु को शांत?
प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, भगवान नृसिंह की प्रचंड ऊर्जा सीधे तौर पर ‘मंगल’ (Mars) और ‘राहु’ (Rahu) ग्रह को नियंत्रित करती है। जिन लोगों के घर में लगातार वास्तु दोष के कारण क्लेश रहता है, या जिन पर भारी कर्ज (Debt) और कोर्ट-कचहरी के मामले चल रहे हैं, उनके लिए कल (30 अप्रैल) का दिन किसी चमत्कार से कम नहीं है।
शाम की पूजा में भगवान नृसिंह को ‘लाल चंदन’, लाल पुष्प और गुड़ का भोग अवश्य लगाएं। कलश में जल भरकर उसमें थोड़ा सा लाल चंदन मिलाएं और इस नृसिंह स्तोत्र का पाठ करने के बाद उस जल को घर के सभी कोनों (विशेषकर दक्षिण दिशा में) छिड़क दें। इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर तुरंत भस्म हो जाएगी। जो लोग इस दिन अपने गले में ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (जो स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप है) धारण करते हैं, वे हर प्रकार के भय, शत्रु और संकट से जीवन भर सुरक्षित रहते हैं।
⚠️ नृसिंह जयंती पूजा के 3 अहम नियम (Fasting Rules)
- शाम का स्नान: चूँकि मुख्य पूजा शाम को होती है, इसलिए सूर्यास्त से पहले एक बार पुनः स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- ठंडी चीजों का लेप: अवतार के समय भगवान नृसिंह का क्रोध बहुत अधिक था, इसलिए उन्हें शांत करने के लिए उनकी मूर्ति पर ‘चंदन का लेप’ (Chandan Alankara) लगाया जाता है और ठंडी चीजों (जैसे पंचामृत, फल, और जल में भीगी हुई चने की दाल) का भोग लगाया जाता है।
- व्रत का पारण: जो लोग कल नृसिंह जयंती का व्रत रख रहे हैं, वे रात में भगवान की आरती करने के बाद अगले दिन (1 मई की सुबह) सूर्योदय के बाद ही अपना व्रत खोलें।
Narasimha Stotram Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026:❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?
Ans: “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥” यह नृसिंह भगवान का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र और स्तोत्र है।
Q2: क्या घर में नृसिंह भगवान की क्रोधित मुद्रा वाली तस्वीर रख सकते हैं?
Ans: वास्तु के अनुसार, घर में हमेशा भगवान नृसिंह की वह तस्वीर रखनी चाहिए जिसमें प्रह्लाद उनके चरणों में बैठे हों या माता लक्ष्मी उनकी गोद में हों (लक्ष्मीनृसिंह रूप)। अत्यधिक उग्र या क्रोधित तस्वीर घर के मंदिर में नहीं लगानी चाहिए।
Q3: कल की पूजा में भगवान को कौन सा फूल चढ़ाना शुभ है?
Ans: भगवान नृसिंह को पीले और लाल रंग के ताजे फूल (जैसे गेंदा, गुड़हल या गुलाब) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष: भगवान नृसिंह अपने भक्तों की हर विपरीत परिस्थिति में रक्षा करते हैं। नृसिंह जयंती की शाम Freeupay.in पर दिए गए इस सिद्ध ‘नृसिंह स्तोत्र’ का पूरे परिवार के साथ पाठ करें। आपके जीवन की सभी बाधाएं दूर होंगी और घर में असीम सुख-समृद्धि का वास होगा।
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