Narasimha Stotra 2026: यह तो आप सब जानते हो की हमारे हिंदू धर्म में भगवान विष्णु जी के चौथे अवतार जिन्हें उग्र स्वरूप ‘श्री नृसिंह’ के नाम से जाना जाता हैं इन्हें संकटमोचक और रक्षक देव माना जाता है। ‘नृसिंह जयंती’ (Narasimha Jayanti) को वैशाख महीने के शुक्ल चतुर्दशी तिथि के पावन अवसर पर पूरे देश भर में मनाई गई थी।
Narasimha Stotra 2026: नृसिंह जयंती से शुरू करें इस चमत्कारी स्तोत्र का रोज़ाना पाठ, आपके जीवन में कभी नहीं आएगा, कोई कैसा भी संकट
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हिन्दू शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णित किया हुआ है कि कलियुग में व्यक्ति को भारी कर्ज, बीमारी, कोर्ट-कचहरी और अज्ञात शत्रुओं से बचने ले ;इए सबसे अचूक उपाय ‘नृसिंह स्तोत्र’ (Narasimha Stotra) का नियमित रूप से पाठ करना बताया गया है। यदि आप ‘नृसिंह जयंती’ की शाम गोधूलि बेला में भगवान नृसिंह की पूजा करके इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ करने का संकल्प लेते हैं, तो आपका जीवन 360 डिग्री बदल सकता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संस्कृत श्लोकों और उनके सरल हिंदी अर्थ के साथ संपूर्ण नृसिंह स्तोत्र।
📖 सिद्ध ‘श्री नृसिंह स्तोत्र’ (Narasimha Stotra with Hindi Meaning)
नृसिंह जयंती की शाम की पूजा विधि में और उसके बाद रोज़ाना नित्य सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके इस अमोघ स्तोत्र का पाठ जरुर करें:
॥ श्री नृसिंह स्तोत्र ॥
कुन्देन्दुशङ्खवर्णः कृतयुगभगवान्पद्मपुष्पप्रदाता
त्रेतायां काञ्चनाभिः पुनरपि समये द्वापरे रक्तवर्णः ।
शङ्को सम्प्राप्तकाले कलियुगसमये नीलमेघश्च नाभा
प्रद्योतसृष्टिकर्ता परबलमदनः पातु मां नारसिंहः ॥ १ ॥
नासाग्रं पीनगण्डं परबलमदनं बद्धकेयुरहारं
वज्रं दंष्ट्राकरालं परिमितगणनः कोटिसूर्याग्नितेजः ।
गांभीर्यं पिङ्गलाक्षं भ्रुकिटतमुखं केशकेशार्धभागं
वन्दे भीमाट्टहासं त्रिभुवनजयः पातु मां नारसिंहः ॥ २ ॥
पादद्वन्द्वं धरित्र्यां पटुतरविपुलं मेरुमध्याह्नसेतुं
नाभिं ब्रह्माण्डसिन्धो हृदयमभिमुखं भूतविद्वांसनेतः ।
आहुश्चक्रं तस्य बाहुं कुलिशनखमुखं चन्द्रसूर्याग्निनेत्रम् ।
वक्त्रं वह्न्यस्य विद्यस्सुरगणविनुतः पातु मां नारसिंहः ॥ ३ ॥
घोरं भीमं महोग्रं स्फटिककुटिलता भीमपालं पलाक्षं
चोर्ध्वं केशं प्रलयशशिमुखं वज्रदंष्ट्राकरालम् ।
द्वात्रिंशद्बाहुयुग्मं परिखगदात्रिशूलपाशपाण्यग्निधार
वन्दे भीमाट्टहासं लखगुणविजयः पातु मां नारसिंहः ॥ ४ ॥
गोकण्ठं दारुणान्तं वनवरविदिपी डिंडिडिंडोटडिंभं
डिंभं डिंभं डिडिंभं दहमपि दहमः झंप्रझंप्रेस्तु झंप्रैः ।
तुल्यस्तुल्यस्तुतुल्य त्रिघुम घुमघुमां कुङ्कुमां कुङ्कुमाङ्गं
इत्येवं नारसिंहं पूर्णचन्द्रं वहति कुकुभः पातु मां नारसिंहः ॥ ५ ॥
भूभृद्भूभुजङ्गं मकरकरकर प्रज्वलज्ज्वालमालं
खर्जर्जं खर्जखर्जं खजखजखजितं खर्जखर्जर्जयन्तम् ।
भोभागं भोगभागं गग गग गहनं कद्रुम धृत्य कण्ठं
स्वच्छं पुच्छं सुकच्छं स्वचितहितकरः पातु मां नारसिंहः ॥ ६ ॥
झुंझुंझुंकारकारं जटमटिजननं जानुरूपं जकारं
हंहंहं हंसरूपं हयशत ककुभं अट्टहासं विवेशम् ।
वंवंवं वायुवेगं सुरवरविनुतं वामनाक्षं सुरेशं
लंलंलं लालिताक्षं लखगुणविजयः पातु मां नारसिंहः ॥ ७ ॥
यं दृष्ट्वा नारसिंहं विकृतनखमुखं तीक्ष्णदंष्ट्राकरालं
पिङ्गाक्षं स्निग्धवर्णं जितवपुसदृशः कुंचिताग्रोग्रतेजाः ।
भीताश्चा दानवेन्द्रास्सुरभयविनुतिश्शक्तिनिर्मुक्तहस्तं
नाशास्यं किं कमेतं क्षपितजनकजः पातु मां नारसिंहः ॥ ८ ॥
श्रीवत्साङ्कं त्रिनेत्रं शशिधरधवलं चक्रहस्तं सुरेशं
वेदाङ्गं वेदनादं विनुततनुविदं वेदरूपं स्वरूपम् ।
होंहों होंकारकारं हुतवह नयनं प्रज्वलज्वाल पाक्षं
क्षंक्षंक्षं बीजरूपं नरहरि विनुतः पातु मां नारसिंहः ॥ ९ ॥
अहो वीर्यमहो शौर्यं महाबलपराक्रमम् ।
नारसिंहं महादेवं अहोबलमहाबलम् ॥ १० ॥
ज्वालाहोबलमालोलः क्रोडाकारं च भार्गवम् ।
योगानन्दश्चत्रवट पावना नवमूर्तये ॥ ११ ॥
श्रीमन्नृसिंह विभवे गरुडध्वजाय तापत्रयोपशमनाय भवौषधाय ।
तृष्णादि वृश्चिक जलाग्निभुजङ्ग रोग-क्लेशव्ययाय हरये गुरवे नमस्ते ॥
इति श्री नृसिंह स्तोत्रं।
🌟 ज्योतिषीय रहस्य: रोज़ाना पाठ से कैसे होता है भाग्योदय?
भगवान नृसिंह का यह स्तोत्र केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह एक प्रचंड ‘ध्वनि विज्ञान’ (Sound Vibration) है। प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि कुंडली में जब मंगल (Mars) नीच का हो या राहु (Rahu) की महादशा चल रही हो, तो व्यक्ति भयंकर कर्ज (Debt) में डूब जाता है और उसके अपने ही लोग शत्रु बन जाते हैं।
इस स्तोत्र का रोज़ाना पाठ करने से मंगल ग्रह की उग्रता शांत होती है और घर के दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोण का वास्तु दोष खत्म होता है। कल 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती के अवसर पर संकल्प लेकर, यदि आप रोज़ाना पाठ के साथ अपने गले में विष्णु स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करते हैं, तो दसों दिशाओं से आने वाली हर नकारात्मक ऊर्जा टकराकर वापस लौट जाती है। व्यापार और करियर में रुके हुए सभी काम तेजी से बनने लगते हैं।
⚠️ स्तोत्र पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for Daily Path)
भगवान नृसिंह अत्यंत उग्र देवता हैं, इसलिए इनके स्तोत्र का पाठ करते समय इन नियमों का सख्ती से पालन करें:
- स्वच्छता और पवित्रता: बिना स्नान किए और अशुद्ध वस्त्रों में कभी भी इस स्तोत्र का पाठ न करें। महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) के दौरान इसका पाठ नहीं करना चाहिए।
- आसन और दिशा: कुशा या लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर ही पाठ करें। आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
- तामसिक भोजन का त्याग: जो व्यक्ति रोज़ाना ‘नृसिंह स्तोत्र’ का पाठ करता है, उसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।
Narasimha Stotra Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: कल 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती की पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
Ans: कल (30 अप्रैल 2026) शाम को गोधूलि बेला में 04:17 बजे से 06:56 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त है। इसी समय भगवान का प्राकट्य हुआ था।
Q2: क्या मैं इस स्तोत्र का पाठ रात में सोने से पहले कर सकता हूँ?
Ans: यदि आपको रात में डरावने सपने आते हैं या किसी अज्ञात साये का डर लगता है, तो आप हाथ-मुंह धोकर, बिस्तर पर बैठने से पहले 3 बार इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। यह आपके चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बना देता है।
Q3: पूजा में भगवान नृसिंह को क्या अर्पित करना चाहिए?
Ans: भगवान की उग्रता को शांत करने के लिए उन्हें चंदन का लेप लगाया जाता है और ठंडी चीजों जैसे भीगी हुई चने की दाल, गुड़ और पंचामृत का भोग लगाया जाता है।
निष्कर्ष: कलियुग की हर बाधा को काटने के लिए ‘नृसिंह स्तोत्र’ एक अचूक ब्रह्मास्त्र है। नृसिंह जयंती के शुभ अवसर से Freeupay.in पर दिए गए इस स्तोत्र का पाठ शुरू करें। भगवान नृसिंह आपके परिवार पर कभी कोई आंच नहीं आने देंगे।
अभी तुरंत शेयर करें: नृसिंह जयंती है! इस परम सिद्ध स्तोत्र को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि हर कोई कल शाम से इस चमत्कारी पाठ का लाभ उठा सके।
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