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Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: हर संकट और दरिद्रता को जड़ से मिटाने वाला अचूक शिव का आर्तत्राणपरायण गंगाधराष्टकम (PDF)

Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam: आर्त त्राण परायण गंगाधरा अष्टकम भगवान श्री शिव जी को समर्पित हैं। आर्त त्राण परायण गंगाधरा अष्टकम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं। सनातन धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव के नाम से जाना चाहता है। जब भी व्यक्ति चारो ओर से संकटों, भयंकर कर्ज और बीमारियों से घिर जाता है और उसे जब कोई रास्ता नज़र नहीं आने लगता हैं, तब महादेव का ये बताया जा रहा ‘आर्तत्राणपरायण गंगाधराष्टकम’ (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam) एक अचूक रामबाण की तरह कार्य करने लगता है।

Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam: हर संकट और दरिद्रता को जड़ से मिटाने वाला अचूक शिव स्तोत्र

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Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam
Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam

‘आर्तत्राणपरायण’ का अर्थ ही है— दीन-दुखियों और संकट में पड़े भक्तों की रक्षा करने वाले। अपनी जटाओं में मोक्षदायिनी गंगा को धारण करने वाले भगवान गंगाधर (शिव) का यह अष्टकम (8 श्लोकों का स्तोत्र) इतना चमत्कारी है कि इसके पाठ से यमराज भी भक्त का रास्ता छोड़ देते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण गंगाधराष्टकम (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam), इसके नियम और जीवन को बदलने वाले अचूक लाभ।

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🌺 क्विक लिस्ट: गंगाधराष्टकम पाठ के चमत्कारिक लाभ (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam Benefits)

आर्तत्राणपरायण गंगाधराष्टकम (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना इस स्तोत्र को पढ़ने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:

पाठ का प्रभाव (Effects)गंगाधराष्टकम पढ़ने के अचूक लाभ (Benefits)
भयंकर संकटों से मुक्तिबड़े से बड़ा कोर्ट केस, कर्ज, या शत्रुओं का भय रातों-रात खत्म होने लगता है।
असाध्य रोगों का नाश‘आर्तत्राण’ स्वरूप की पूजा से गंभीर और पुरानी बीमारियों से चमत्कारिक रूप से राहत मिलती है।
अपार धन और मानसिक शांतिघर की दरिद्रता दूर होती है, डिप्रेशन खत्म होता है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
पाठ का सर्वोत्तम समयरोज़ सुबह स्नान के बाद या प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में शिवजी के समक्ष।

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📿 आर्तत्राणपरायण श्री गंगाधराष्टकम पाठ (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ भगवान शिव का ध्यान करें, उनके समक्ष एक घी का दीपक जलाएं और इस कल्याणकारी स्तोत्र (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam) का पाठ करें:

क्षीराम्भोनिधिमन्थनोद्भवविषात् संदह्यमानान् सुरान्,

ब्रह्मादीनवलोक्य यः करुणया हालाहलाख्यं विषम् ।

निश्शंकं निजलीलया कबलयन् लोकान् ररक्षादरात्,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ १ ॥

क्षीरं स्वादु निपीय मातुलगृहे गत्वा स्वकीयं गृहं,

क्षीरालाभवशेन खिन्नमनसे घोरं तपः कुर्वते ।

कारुण्यादुपमन्यवे निरवधिं क्षीरांबुधिं दत्तवान्,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ २ ॥

मृत्युं वक्षसि ताडयन् निजपदध्यानैकभक्तं मुनिं,

मार्कण्डेयमपालयत् करुणया लिङ्गाद्विनिर्गत्य यः ।

नेत्राम्भोजसमर्पणेन हरयेऽभीष्टं रथांगं ददौ,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ३ ॥

व्यूढं द्रोणजयद्रथादिरथिकैः सैन्यं महत् कौरवं,

दृष्ट्वा कृष्णसहायवन्तमपि तं भीतं प्रपन्नार्तिहा ।

पार्थं रक्षितवान् अमोघविषयं दिव्यास्त्रमुद्बोधयन्

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ४ ॥

बालं शैवकुलोद्भवं परिहसत् स्वज्ञातिपक्षाकुलं,

खिद्यन्तं तव मूर्ध्नि पुष्पनिचयं दातुं समुद्यत्करम् ।

दृष्ट्वाऽऽनम्य विरिञ्चिरम्यनगरे पूजां त्वदीयं भजन्,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ५ ॥

संत्रस्तेषु पुरा पुरासुरभयात् इन्द्रादिबृन्दारके,

ष्वारूढो धरणीरथं श्रुतिहयं कृत्वा मुरारिं शरम् ।

रक्षन् यः कृपया समस्तविबुधान् जित्वा सुरारीन् क्षणात्,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ६ ॥

श्रौतस्मार्तपथे पराङ्मुखमपि प्रोद्यन्महापातकं,

विश्वातीतमपि त्वमेव गतिरित्यालापयन्तं सकृत् ।

रक्षन् यः करुणापयोनिधिरिति प्राप्तप्रसिद्धिः पुरा,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ७ ॥

गांगं वेगमवाप्य मान्यविबुधैः वोढुं पुरा याचितो,

दृष्ट्वा भक्तभगीरथेन विनुतो रुद्रो जटामण्डले ।

कारुण्यादवनीतले सुरनदीं आपूरयन् पावनीं,

आर्तत्राणपरायणः स भगवान् गंगाधरो मे गतिः ॥ ८ ॥

(पाठ पूर्ण होने के बाद भगवान शिव को साष्टांग प्रणाम करें और अपने संकट दूर करने की प्रार्थना करें।)

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

🌟 संकट मोचन और दरिद्रता दूर करने का ज्योतिषीय रहस्य

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जब व्यक्ति की जन्म कुंडली में ‘शनि’ और ‘राहु’ की भयंकर दशा चल रही हो, तब जीवन में ऐसे संकट आते हैं जिनका समाधान इंसान की बुद्धि नहीं खोज पाती (जैसे अचानक व्यापार ठप होना या भयंकर बीमारी)।

इन सभी मारक दोषों को 100% शून्य करने, अकाल मृत्यु के भय को खत्म करने और भगवान शिव की ‘आर्तत्राण’ (रक्षक) कृपा पाने के लिए साक्षात एकादश रुद्र का स्वरूप ’11 मुखी रुद्राक्ष’ (11 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना इस गंगाधराष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति अजेय हो जाता है और कोई भी संकट उसका बाल बांका नहीं कर सकता।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

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⚠️ गंगाधराष्टकम पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for reciting Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam)

  1. स्वच्छता और दिशा: इस अष्टकम का पाठ हमेशा कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर, पूर्व या उत्तर दिशा (ईशान कोण) की ओर मुख करके ही करें। बिना स्नान किए इसका पाठ पूर्णतः वर्जित है।
  2. भस्म या चंदन का लेप: पाठ शुरू करने से पहले अपने माथे पर त्रिपुंड (भस्म या चंदन) अवश्य लगाएं। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इससे मन एकाग्र होता है।
  3. तामसिक भोजन का त्याग: जिस घर में इस चमत्कारी स्तोत्र का नियमित पाठ होता है, वहां पूर्ण सात्विकता होनी चाहिए। घर के सदस्यों को मांस-मदिरा या तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।

Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या आर्तत्राणपरायण गंगाधराष्टकम का पाठ महिलाएं कर सकती हैं?

Ans: जी हाँ, महिलाएं पूर्ण श्रद्धा और शुद्धता के साथ इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं। भगवान शिव सभी के रक्षक (आर्तत्राण) हैं।

Q2: इस अष्टकम का पाठ विशेष रूप से किस दिन करना चाहिए?

Ans: वैसे तो इसका पाठ रोज़ाना करना उत्तम है, लेकिन ‘सोमवार’, ‘प्रदोष व्रत’ और ‘मासिक शिवरात्रि’ के दिन इसका पाठ करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।

Q3: पाठ के बाद क्या करना चाहिए?

Ans: पाठ के बाद शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल (गंगाजल मिलाकर) और बिल्वपत्र (Belpatra) अवश्य अर्पित करें। इससे भगवान शिव तुरंत प्रसन्न होते हैं।

निष्कर्ष: श्री आर्तत्राणपरायण गंगाधराष्टकम (Artatrana Parayana Gangadhar Ashtakam) वह अचूक और दिव्य मार्ग है जो आपके जीवन के भयंकर से भयंकर संकट को नष्ट कर सकता है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपनी दैनिक पूजा में इसका पाठ शुरू करें। महादेव की कृपा से आपके जीवन में अपार सुख और शांति का वास होगा।

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