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Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye: किस देवता को कौन से फूल चढ़ाएं? जानें पूजा में पुष्प अर्पित करने के सही नियम और फायदे

Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye: हमारे हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक कर्म-कांड, त्यौहारों एवं नित्य पूजा अर्चना में फूलों का विशेष महत्व बताया गया है।कहा जाता हैं, की कोई भी कैसा भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और आरती आदि कार्य बिना पुष्प के अधूरे माने जाते हैं। हम यहाँ आपको किस देव पूजा में किस तरफ का फूल चढ़ाना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye: किस देवता को कौन से फूल चढ़ाएं? जानें पूजा में पुष्प अर्पित करने के सही नियम और अचूक फायदे

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Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye
Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कौनसे फूल देवताओं को चढ़ाना निषेध माना जाता है। और किसी देवी देवता को कौनसा फूल अत्यधिक प्रिय लगता हैं और इसके आपके जीवन में क्या लाभ मिल सकता हैं इसके बारे में यहाँ पूरी जानकारी दी जाएगी।

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कहा जाता हैं, की यदि भगवान को उनकी पसंद के फूल अर्पित किये जाते, तो उन सब व्यक्तियों को शीघ्र मनचाही मनोकामना पूरी हो जाती हैं। वहीं, अज्ञानतावश यदि किसी देवता को उनका वर्जित (मना किया हुआ) फूल चढ़ा दिया जाए, तो पूजा का फल नहीं मिलता और दोष लगता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए कि किस देवता को कौन से फूल चढ़ाने चाहिए और पूजा के क्या नियम हैं।

🌸 क्विक लिस्ट: किस देवी-देवता को चढ़ाएं कौन सा फूल? (Quick Reference Table)

किस देवता को कौन से फूल चढ़ाएं? जानकारी पाने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:

देवी / देवता (Deity)सबसे प्रिय फूल (Favorite Flowers)कौन सा फूल भूलकर भी न चढ़ाएं? (Strictly Avoid)
श्री गणेश जीगेंदा (Marigold), लाल गुड़हल, लाल गुलाब और दूर्वा घासतुलसी दल (तुलसी कभी न चढ़ाएं)
भगवान शिवधतूरे के पुष्प, आक (मदार), बेलपत्र, सफेद कनेर, नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम, कुश, शमी पत्र और हरसिंगार (पारिजात)सेमल, केतकी, कदम्ब, अनार, शिरीष, माधवी, केवड़ा, मालती, जूही और कपास
भगवान विष्णु / कृष्णपीला कमल, गेंदा, चंपा, जूही और वैजयंती के फूल कुमुद, करवरी, चणक, मालती, नंदिक, पलाश व वनमाला के फूलआक (मदार) और धतूरा
माता लक्ष्मीगुलाबी कमल (Pink Lotus), लाल गुलाबअपवित्र या सूखे हुए फूल
हनुमान जीलाल गुलाब, गेंदा, चमेली (Jasmine)सफेद रंग के फूल कम चढ़ाएं
मां दुर्गा / कालीलाल गुड़हल (Hibiscus), लाल गुलाबदूर्वा घास
सूर्य देवलाल कनेर, लाल कमल, लाल गुड़हलबेलपत्र

🙏 विस्तार से जानें देवी-देवताओं के प्रिय पुष्प (Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye)

1. श्री गणेश जी (Lord Ganesha)

आचार भूषण ग्रंथ के अनुसार भगवान श्री गणेश जी को तुलसीदल के अलावा सभी प्रकार के फूल चढ़ाए जा सकते हैं। पद्मपुराण आचाररत्न में वर्णित है कि ‘न तुलस्या गणाधिपम’ अर्थात् तुलसी से गणेश जी की कभी पूजा नहीं करें। यह तो आप सब जानते हैं, की प्रथम पूज्य भगवान गणेश माने जाते हैं इन्हें लाल और पीले रंग के फूल अत्यंत प्रिय लगते हैं। विशेष रूप से पूजा करते समय व्यक्ति को लाल गुड़हल, लाल गुलाब और गेंदे का फूल अर्पित करना चाहिए। इनसे उनकी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।

श्री गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है। कहा जाता हैं, की गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। एवं दूर्वा के ऊपर के हिस्से पर तीन या पांच पत्तियां है तो बहुत ही ज्यादा उत्तम है। ऐसा कहते हैं की भगवान गणेश को 21 दूर्वा (घास) की गाठें चढ़ाने से जीवन के सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।

(ध्यान दें: गणेश जी की पूजा में ‘तुलसी’ का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।)

2. भगवान शिव (Lord Shiva)

भगवान शंकर बहुत ही भोले भाले हैं, इनकी पूजा अर्चना करते समय व्यक्ति को धतूरे के पुष्प, आक (मदार), बेलपत्र, सफेद कनेर, नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम, कुश, शमी पत्र और हरसिंगार (पारिजात) आदि के पुष्प चढ़ाने का विधान है। जिससे अकाल मृत्यु का भय और समस्त प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं। परन्तु भगवान शिव जी को भूल से भी सेमल, केतकी, कदम्ब, अनार, शिरीष , माधवी, केवड़ा, मालती, जूही और कपास आदि के पुष्प नहीं चढ़ाना चाहिए।

(ध्यान दें: शिव जी को ‘केतकी’ का फूल कभी नहीं चढ़ाया जाता, क्योंकि इसे शिवजी ने श्राप दिया था।)

3. भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna)

महाभारत में युधिष्ठिर उल्लेख करते हैं की भगवान श्री कृष्ण को पीले रंग के फूल अत्यंत प्रिय लगते हैं। जिनमें पीला कमल, गेंदा, चंपा, जूही और वैजयंती के फूल कुमुद, करवरी, चणक, मालती, नंदिक, पलाश व वनमाला के फूल आदि प्रिय लगते हैं। कहा जाता हैं की भगवान श्री कृष्ण पूजा करते समय केसर का तिलक अथवा पीले चन्दन का तिलक करके उन्हें पीले फूल चढ़ाने से वह बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है।

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4. भगवान विष्णु (Lord Vishnu)

भगवान श्री विष्णु जी को कभी भी आक, धतूरा, शिरीष, सेमल, कचनार, सहजन और गूलर आदि के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। साथ विष्णु जी पर अक्षत (चावल) भी नहीं चढ़ाये जाते है। परन्तु उन्हें कमल, मौलसिरी, जूही, कदम्ब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वासंती, चंपा, वैजयंती के पुष्प आदि विशेष रूप से प्रिय लगते हैं। इन्हें ख़ास रूप से पीले रंग का फूल बहुत ही पसंद है। कहा जाता है, की विष्णु भगवान को तुलसी दल अवश्य चढ़ानी चाहिए इससे वह अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। और कार्तिक मास में भगवान नारायण को केतकी के फूलों से पूजा अर्चना करने से विशेष रूप से प्रसन्न किया जा सकता है।

5. माता लक्ष्मी (Goddess Lakshmi)

सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी जी को गुलाबी रंग का कमल (Lotus) का फूल अत्यंत प्रिय है। यदि आपको कमल का फूल नहीं मिले, तो लाल गुलाब का फूल भी अर्पित कर सकते हैं। जो व्यक्ति पूरे नवरात्र में या फिर विशेषकर अष्टमी तिथि को और दीपावली के दिन में माँ लक्ष्मी को कमल का फूल अवश्य अर्पित करने से ऐश्वर्यवान बनता है और उसे कभी सांसारिक सुख की कमी नहीं होती है। एवं हर शुक्रवार के दिन को माता लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाने से व्यक्ति के ऊपर माँ की शीघ्र कृपा प्राप्त होती है और उसके घर में कभी पैसों की कमी नहीं रहती हैं।

6. माँ दुर्गा (Goddess Durga)

माँ दुर्गा को विशेष रूप से लाल रंग के पुष्प, लाल गुलाब और गुड़हल का फूल अत्यधिक प्रिय लगते है। इसके अलावा पूजा करते समय बेला, अशोक, माधवी, केवड़ा, अमलतास आदि के फूल भी चढ़ाये जा सकते है। परन्तु नवरात्री के दिनों में और हर शुक्रवार के दिन को माँ दुर्गा को लाल गुलाब या लाल गुड़हल के फूलो की माला चढ़ाने से व्यक्ति का आर्थिक संकट दूर होता है। परन्तु माता दुर्गा को दूर्वा, तुलसीदल, आँवला और तमाल के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए साथ ही आक और मदार के फूल भी नहीं चढ़ाने चाहिए ।

7. माँ सरस्वती (Goddess Sarswati)

विद्या की देवी माने जाने वाली माँ सरस्वती देवी को सफेद या पीले रंग का फूल चढ़ाये जाते हैं। इसके साथ ही आप माँ सरस्वती जी की पूजा करते समय सफेद गुलाब, सफेद कनेर या फिर पीले रंग के गेंदे के फूल से भी अर्पित कर सकते हैं।

8. भगवती गौरी (Goddess Gouri)

भगवान शिव को चढ़ाने वाले सभी पुष्प माँ गौरा जी को भी प्रिय लगते हैं। इसके अलावा व्यक्ति इनकी पूजा में बेला, सफेद कमल, पलाश और चंपा के फूल भी चढ़ा सकता हैं।

9. सूर्य नारायण (Lord Surya)

भगवान सूर्य नारायण को कुटज के पुष्प अधिक प्रिय लगते है। इसके अलावा आप उनकी उपासन करते समय आक, कनेर, कमल, चंपा, पलाश, अशोक, बेला, आक, और मालती आदि के पुष्प भी चढ़ा साकते हैं इन्हें यह भी प्रिय लगते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार यदि प्रतिदिन सूर्य भगवान को एक आक का फूल चढ़ाया जाए तो व्यक्ति को स्वर्ण की दस अशर्फियों को चढ़ाने जितना फल की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान सूर्य देव को लाल फूल बहुत ही पसंद लगते है ।

10. हनुमान जी (Lord Hanuman)

संकटमोचन हनुमान जी को लाल या पीले रंग के फूल बहुत ज्यादा पसंद है। इनकी पूजा करते समय लाल गुलाब, कमल, लाल गुड़हल और गेंदे के फूल की माला अवश्य अर्पित करनी चाहिए। इसके अलावा, श्री हनुमानजी को नित्य इनके प्रसन्न के फूलों का चढ़ाकर और साथ में केसर के साथ घिसा लाल चंदन का तिलक लगाने से जातक की सभी मनोकामनाएँ शीघ्र ही पूरी हो जाती है। एवं नित्य पूजा करते समय चमेली का फूल और चमेली के तेल का दीपक जलाने जातक को हर भय से मुक्ति मिलती हैं।

11. शनि देव (Lord Shani)

शनि देव की पूजा अर्चना में नीले लाजवन्ती के फूल चढ़ाने चाहिए। इसके अलावा शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न करने के लिए कोई भी नीले या गहरे रंग के फूल चढ़ा सकते है।

12. कुछ बातें

कमल का फूल को लेकर मान्यता यह है कि यह फूल दस से पंद्रह दिन तक भी बासी नहीं होता हैं।

चंपा की कली के अलावा किसी भी पुष्प की कली देवताओं को अर्पित नहीं की जानी चाहिए।

किसी भी देवता के पूजन में केतकी के पुष्प नहीं चढ़ाए जाते हैं।

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🌟 वास्तु और ज्योतिषीय रहस्य: सही फूल चमका सकता है किस्मत

प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी के अनुसार, फूलों का सीधा संबंध ग्रहों और हमारे घर के वास्तु (Vastu) से होता है।

लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल और गुलाब) सूर्य और मंगल ग्रह को मजबूत करते हैं, जिससे आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है। पीले फूल (जैसे गेंदा) गुरु (Jupiter) ग्रह को बलवान करते हैं, जो घर में धन और विवाह के योग बनाता है।

पूजा करते समय यदि व्यक्ति ने सही फूलों का चुनाव किया है और एकाग्रता के लिए गले में ‘रुद्राक्ष’ धारण किया हुआ है, तो उस पूजा की ‘पॉजिटिव एनर्जी’ (Positive Energy) दस गुना बढ़ जाती है। भगवान शिव की पूजा के लिए ‘पंचमुखी रुद्राक्ष’ और विष्णु जी की पूजा के लिए ’10 मुखी रुद्राक्ष’ धारण करके फूल अर्पित करना अमोघ फल देता है।

⚠️ पूजा में फूल चढ़ाते समय 3 कड़े नियम (Rules for Offering Flowers)

  1. फूलों को धोना नहीं चाहिए: ताजे तोड़े गए फूलों को कभी भी पानी से धोना नहीं चाहिए (आप हल्का सा जल छिड़क सकते हैं)। तुलसी और बेलपत्र को धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
  2. सूर्यास्त के बाद फूल न तोड़ें: शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त (शाम) के बाद पेड़ों से फूल तोड़ना पाप माना जाता है। सुबह की पूजा के लिए फूल हमेशा सूर्योदय के आस-पास ही तोड़ने चाहिए।
  3. सूखे फूल तुरंत हटाएं: भगवान को अर्पित किए गए फूल जब सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत वहां से हटा लेना चाहिए। सूखे फूल घर में ‘नेगेटिव एनर्जी’ (वास्तु दोष) पैदा करते हैं।

Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: भगवान शिव को कौन सा फूल नहीं चढ़ाना चाहिए?

Ans: भगवान शिव को ‘केतकी’ और ‘कदंब’ के फूल भूलकर भी नहीं चढ़ाने चाहिए।

Q2: सभी देवी-देवताओं को चढ़ने वाला एक फूल कौन सा है?

Ans: ‘गेंदे का फूल’ (Marigold) और ‘गुलाब’ लगभग सभी प्रमुख देवी-देवताओं (शिव जी को छोड़कर) को अर्पित किया जा सकता है।

Q3: सूखे हुए निर्माल्य फूलों का क्या करें?

Ans: पूजा से हटाए गए सूखे फूलों को कभी कूड़े में न फेंकें। इन्हें आप घर के गमलों (खाद के रूप में) में डाल सकते हैं या किसी बहती नदी में प्रवाहित कर सकते हैं।

निष्कर्ष: Kis Devta Ko Kon Se Phool Chadhaye: भगवान भाव के भूखे होते हैं, लेकिन शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार उनके ‘प्रिय पुष्प’ अर्पित करने से पूजा शीघ्र सिद्ध होती है। Freeupay.in की इस जानकारी को अपनाकर अपनी दैनिक पूजा को और भी फलदायी बनाएं।

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