Chandraghanta Ki Aarti: सनातन धर्म में हर आने वाले नवरात्रि के तीसरे दिन में देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप ‘मां चंद्रघंटा’ को समर्पित माना जाता है। यह श्री दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्रघंटा ही हैं। इन देवी माँ के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां दुर्गा की शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। इस माता का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी होता है, परन्तु अपने दुष्टों और शत्रुओं के लिए यह अत्यंत भयंकर मानी जाती है।
Chandraghanta Ki Aarti: मां चंद्रघंटा की ये चमत्कारी आरती रोज़ाना गाने से दूर होगा हर अज्ञात भय, मिलेगी अपार सफलता
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Chandraghanta Ki Aarti: हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ नवरात्रि में या अपने रोज़ाना के पूजा-पाठ में ‘मां चंद्रघंटा की आरती’ (Maa Chandraghanta Aarti) गाता है, उसके जीवन से अज्ञात भय, प्रेत-बाधा, और बड़े से बड़े शत्रुओं का नाश हो जाता है। माता अपने भक्तों को असीम साहस और निर्भयता का आशीर्वाद देती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां चंद्रघंटा की संपूर्ण आरती (Chandraghanta Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और अचूक लाभ।
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🌺 क्विक लिस्ट: मां चंद्रघंटा की आरती करने के 5 चमत्कारिक लाभ (Chandraghanta Ki Aarti Benefits)
मां चंद्रघंटा की आरती (Chandraghanta Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए मां चंद्रघंटा की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | मां चंद्रघंटा की आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| अज्ञात भय और रोगों से मुक्ति | माता के घंटे की ध्वनि से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और प्रेत-बाधा हमेशा के लिए दूर हो जाती है। |
| असीम साहस और आत्मविश्वास | भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह बड़े से बड़े शत्रुओं और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करता है। |
| पापों का नाश और मानसिक शांति | माता की आरती गाने से पूर्व जन्म के पाप कटते हैं और भयंकर मानसिक तनाव (Depression) शांत होता है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | नवरात्रि के तीसरे दिन या रोज़ सुबह-शाम गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 मां चंद्रघंटा की आरती (Chandraghanta Mata Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता चंद्रघंटा का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें, घंटी बजाएं और इस पावन आरती (Chandraghanta Ki Aarti) का गान करें:
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जय मां चंद्रघंटा सुख धाम | पूर्ण कीजो मेरे काम ||
चंद्र समान तू शीतल दाती | चंद्र तेज किरणों में समाती ||
क्रोध को शांत बनाने वाली | मीठे बोल सिखाने वाली ||
मन की मालक मन भाती हो | चंद्र घंटा तुम वरदाती हो ||
सुंदर भाव को लाने वाली | हर संकट मे बचाने वाली ||
हर बुधवार जो तुझे ध्याये | श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय ||
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं | सन्मुख घी की ज्योत जलाएं ||
शीश झुका कहे मन की बाता | पूर्ण आस करो जगदाता ||
कांची पुर स्थान तुम्हारा | करनाटिका में मान तुम्हारा ||
नाम तेरा रटू महारानी | ‘भक्त’ की रक्षा करो भवानी ||
(आरती पूर्ण होने के बाद माता चंद्रघंटा को साष्टांग प्रणाम करें, कर्पूर या दीपक की लौ से आरती लें और जयकारा लगाएं- “बोलिए मां चंद्रघंटा की जय!”)
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🌟 अज्ञात भय और राहु-केतु दोष दूर करने का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जब जन्म कुंडली में ‘शुक्र’ (Venus) या ‘राहु’ (Rahu) ग्रह नीच का होता है, तो व्यक्ति अज्ञात डर, डिप्रेशन और शत्रुओं के साये में जीता है। मां चंद्रघंटा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
नवग्रहों के इन मारक दोषों को 100% शून्य करने, अजेय साहस पाने और साक्षात नवदुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए ‘9 मुखी रुद्राक्ष’ (9 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। 9 मुखी रुद्राक्ष साक्षात नवदुर्गा का स्वरूप है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना मां चंद्रघंटा की आरती करने से व्यक्ति को दुनिया की कोई भी ताकत डरा या हरा नहीं सकती।
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⚠️ मां चंद्रघंटा की आरती करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान (Rules for reciting Chandraghanta Ki Aarti)
- घंटी (Bell) अवश्य बजाएं: माता का नाम ‘चंद्रघंटा’ है, इसलिए इनकी आरती करते समय घर में घंटी (Bell) या शंख की ध्वनि अवश्य गूंजनी चाहिए। इससे घर की सारी दरिद्रता बाहर चली जाती है।
- प्रिय रंग (Lucky Color): माता चंद्रघंटा को भूरा (Brown), सुनहरा (Gold) और पीला रंग अत्यंत प्रिय है। आरती करते समय पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
- माता का प्रिय भोग: आरती से पहले मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई, खीर या लाल सेब (Apple) का भोग अवश्य लगाएं। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में पूरे परिवार में बांटें।
Chandraghanta Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां चंद्रघंटा का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध बीज मंत्र “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” है। आरती से पहले या बाद में इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
Q2: मां चंद्रघंटा की पूजा किस दिन करनी चाहिए?
Ans: मां चंद्रघंटा की मुख्य पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। इसके अलावा रोज़ाना या प्रत्येक बुधवार को माता की आरती करना भी विशेष शुभ माना जाता है।
Q3: मां चंद्रघंटा किस ग्रह की शांति के लिए पूजी जाती हैं?
Ans: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां चंद्रघंटा ‘शुक्र’ (Venus) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी पूजा करने से शुक्र दोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि व आकर्षण बढ़ता है।
निष्कर्ष: मां चंद्रघंटा की आरती (Chandraghanta Ki Aarti) वह अचूक अस्त्र है जो आपके जीवन से हर डर और संकट को मिटाकर असीम सफलता ला सकती है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपने घर में इस आरती का गान शुरू करें। माता भवानी की कृपा से आपके घर में हमेशा सुख-शांति और निर्भयता का वास रहेगा।
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