Kuber Ji Ki Aarti: भगवान श्री कुबेर जी की पूजा अर्चना में श्री कुबेर जी की आरती का पाठ किया जाता हैं। श्री कुबेर जी की आरती नियमित करने से जातक हमेशा धनवान रहता है। हमारे सनातन धर्म में भगवान कुबेर (Lord Kuber) जी को इस ब्रह्मांड का कोषाध्यक्ष (Treasurer) और ‘धन का देवता’ के नाम से जाने चाहते है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता हैं, परन्तु उस घर में रखे हुए धन को घर में संजोकर रखने और वृद्धि करने का काम कुबेर देव करते है।
Kuber Ji Ki Aarti: कुबेर महाराज की आरती, रोज़ाना गाने से घर में छप्पर फाड़ कर बरसेगा धन
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यदि किसी भी व्यक्ति के घर में पैसा तो आता है, परन्तु उसके पास में टिकता नहीं, तो इसका अर्थ है कि कुबेर देव उससे रुष्ट चल रहे हैं। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ विशेषकर धनतेरस, दीपावली या अपने रोज़ाना के पूजा-पाठ में ‘श्री कुबेर जी की आरती’ (Shri Kuber Ji Ki Aarti) गाता है, उसके जीवन से भयंकर दरिद्रता और कर्ज हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें कुबेर महाराज की संपूर्ण आरती (Kuber Ji Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और असीम धन प्राप्ति के अचूक लाभ।
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🌺 क्विक लिस्ट: कुबेर जी की आरती गाने के 5 चमत्कारिक लाभ (Kuber Ji Ki Aarti Benefits)
कुबेर की आरती (Kuber Ji Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना धनपति कुबेर की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | कुबेर आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| अपार धन और बरकत | घर में धन का स्थायी वास होता है। पैसा व्यर्थ के कामों (जैसे बीमारियों या मुकदमों) में बर्बाद नहीं होता। |
| कर्ज से 100% मुक्ति | बड़े से बड़ा कर्ज चुकाने के लिए आय (Income) के नए और गुप्त स्रोत अपने आप खुलने लगते हैं। |
| रुका हुआ पैसा वापस मिलना | यदि आपका धन कहीं फंसा है और कोई लौटा नहीं रहा है, तो आरती के प्रभाव से वह धन शीघ्र वापस मिलता है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | रोज़ाना शाम के समय (गोधूलि बेला में) उत्तर दिशा (North) की ओर मुख करके आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 श्री कुबेर महाराज की आरती (Shri Kuber Ki Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ यक्षराज कुबेर का ध्यान करें, उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध घी का दीपक जलाएं और इस पावन आरती (Kuber Ji Ki Aarti) का गान करें:
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ॐ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े।
अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
(आरती पूर्ण होने के बाद कुबेर देव को प्रणाम करें और अपने घर की तिजोरी व व्यापार में बरकत की प्रार्थना करें।)
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🌟 व्यापार में वृद्धि और धन प्राप्ति का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जब व्यक्ति की जन्म कुंडली में ‘शुक्र’ (Venus) और ‘बृहस्पति’ (Jupiter) ग्रह कमज़ोर होते हैं, तो व्यक्ति लाख मेहनत करने के बाद भी दरिद्रता और भारी कर्ज के जाल में फंसा रहता है। कुबेर देव उत्तर दिशा और अपार धन के स्वामी हैं।
कुंडली के दरिद्र योग को 100% शून्य करने और व्यापार में चारों दिशाओं से धन आकर्षित करने के लिए साक्षात माता महालक्ष्मी का स्वरूप ‘7 मुखी रुद्राक्ष’ (7 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना कुबेर आरती करने वाले व्यक्ति की तिजोरी कभी खाली नहीं रहती और उसे व्यापार में असीम सफलता मिलती है।
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⚠️ कुबेर आरती करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान (Rules for reciting Kuber Ji Ki Aarti)
- उत्तर दिशा का महत्व: वास्तु शास्त्र के अनुसार ‘उत्तर दिशा’ (North) कुबेर महाराज की दिशा है। आरती करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। घर की तिजोरी भी इसी दिशा में खुलनी चाहिए।
- कौड़ी और गोमती चक्र: आरती की थाली में या कुबेर देव की मूर्ति के पास 5 पीली कौड़ियां और गोमती चक्र अवश्य रखें। पूजा के बाद इन्हें अपनी तिजोरी (Cash Box) में लाल कपड़े में बांधकर रख दें।
- स्वच्छता का ध्यान: कुबेर देव वहीं वास करते हैं जहाँ पूर्ण स्वच्छता हो। आरती से पहले घर और विशेषकर ईशान कोण (North-East) की अच्छी तरह सफाई करें।
Kuber Ji Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: कुबेर भगवान को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?
Ans: कुबेर देव का अत्यंत सिद्ध और चमत्कारिक मंत्र है: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥” आरती के बाद इस मंत्र का 108 बार जाप (कमलगट्टे की माला से) करना चाहिए।
Q2: कुबेर जी की पूजा किस दिन करनी चाहिए?
Ans: कुबेर महाराज की पूजा के लिए मंगलवार, शुक्रवार, त्रयोदशी (धनतेरस) और दीपावली का दिन सबसे ज्यादा शुभ और फलदायी माना जाता है।
Q3: कुबेर भगवान को किस चीज़ का भोग लगाना चाहिए?
Ans: कुबेर देव को धनिया (Coriander), गुड़, और पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है।
निष्कर्ष: कुबेर महाराज की आरती (Kuber Ji Ki Aarti) वह अचूक और दिव्य चाबी है जो आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकती है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपने घर में इस आरती का गान शुरू करें। भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की कृपा से आपके घर में कभी धन और वैभव की कमी नहीं होगी।
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