Kushmanda Ki Aarti: हमारे हिन्दू धर्म में नवरात्रि के चौथे दिन में ‘मां कूष्मांडा’ की पूजा अर्चना की जाती है। यह देवी अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड का निर्माण करने वाली “माँ कूष्मांडा” देवी दुर्गा का चौथा स्वरुप हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान (हास्य) से इस ब्रह्मांड की रचना की थी। माता अष्टभुजाधारी हैं और सूर्यमंडल के भीतर निवास करती हैं, इसलिए इनके शरीर की कांति और तेज सूर्य के समान ही देदीप्यमान है।
Kushmanda Ki Aarti: नवरात्रि के चौथे दिन पढ़ें मां कूष्मांडा की चमत्कारी आरती, भयंकर रोगों से मिलेगी मुक्ति और चमकेगा भाग्य
हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।
हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ नवरात्रि के चौथे दिन या अपने नित्य पूजा-पाठ में ‘मां कूष्मांडा की आरती’ (Maa Kushmanda Aarti) गाता है, उसके जीवन से भयंकर रोग, शोक और दरिद्रता हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। माता अपने भक्तों को आयु, यश, बल और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां कूष्मांडा की संपूर्ण आरती (Kushmanda Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और अचूक ज्योतिषीय लाभ।
ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें
ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)।
🌺 क्विक लिस्ट: मां कूष्मांडा की आरती करने के 5 चमत्कारिक लाभ (Kushmanda Ki Aarti Benefits)
मां कूष्मांडा की आरती (Kushmanda Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए मां कूष्मांडा की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | मां कूष्मांडा की आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| भयंकर रोगों और शोक से मुक्ति | पुरानी से पुरानी बीमारियां ठीक होने लगती हैं और शरीर में एक नई ऊर्जा (Energy) का संचार होता है। |
| सूर्य दोष और अपयश से बचाव | माता कूष्मांडा सूर्य ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः इनकी आरती से सूर्य दोष शांत होता है और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। |
| आयु, यश और बल की प्राप्ति | व्यक्ति के आत्मविश्वास में गज़ब की वृद्धि होती है और वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | नवरात्रि के चौथे दिन या रोज़ाना सुबह सूर्योदय के समय शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 मां कूष्मांडा की आरती (Kushmanda Mata Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता कूष्मांडा के अष्टभुजा स्वरूप का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें और इस पावन आरती (Kushmanda Ki Aarti) का गान करें:
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें
कुष्मांडा जय जग सुखदानी | मुझ पर दया करो महारानी ||
पिंगला ज्वालामुखी निराली | शाकम्बरी माँ भोली भाली ||
लाखो नाम निराले तेरे | भगत कई मतवाले तेरे ||
भीमा पर्वत पर है डेरा | स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ||
संब की सुनती हो जगदम्बे | सुख पौचाती हो माँ अम्बे ||
तेरे दर्शन का मै प्यासा | पूर्ण कर दो मेरी आशा ||
माँ के मन मै ममता भारी | क्यों ना सुनेगी अर्ज हमारी ||
तेरे दर पर किया है डेरा | दूर करो माँ संकट मेरा ||
मेरे कारज पुरे कर दो | मेरे तुम भंडारे भर दो ||
तेरा दास तुझे ही ध्याये | ‘भक्त’ तेरे दर शीश झुकाए ||
(आरती पूर्ण होने के बाद मां कूष्मांडा को साष्टांग प्रणाम करें, कर्पूर या दीपक की लौ से आरती लें और उत्तम स्वास्थ्य व यश की प्रार्थना करें। जयकारा लगाएं- “बोलिए मां कूष्मांडा की जय!”)
संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी: Contact us for Astrologer Consultation (+91-9667189678)
किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।
🌟 रोग मुक्ति और सूर्य दोष निवारण का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि वैदिक ज्योतिष में मां कूष्मांडा ब्रह्मांड के राजा ‘सूर्य’ (Sun) ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में सूर्य नीच का होता है या राहु-केतु के साथ ‘ग्रहण दोष’ में होता है, तो व्यक्ति को भयंकर शारीरिक कष्ट होते हैं, हृदय या आंखों के रोग घेर लेते हैं, और सरकारी नौकरी या समाज में लाख मेहनत के बाद भी यश नहीं मिलता।
नवग्रहों (विशेषकर सूर्य) के इन मारक दोषों को 100% शून्य करने, उत्तम स्वास्थ्य पाने और साक्षात भगवान सूर्य व मां कूष्मांडा की कृपा प्राप्त करने के लिए साक्षात सूर्य देव का स्वरूप ’12 मुखी रुद्राक्ष’ (12 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना मां कूष्मांडा की आरती व सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति का तेज और ओज सूर्य के समान चमकने लगता है।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
⚠️ मां कूष्मांडा की आरती और चतुर्थी पूजा के 3 कड़े नियम (Rules for reciting Kushmanda Ki Aarti)
- हरा रंग (Green Color) है अत्यंत शुभ: माता कूष्मांडा को हरा रंग अत्यंत प्रिय है। आरती और पूजा करते समय हरे रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे बुध और सूर्य दोनों ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है।
- मालपुए (Malpua) का भोग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाना अनिवार्य और अत्यंत फलदायी माना गया है। मालपुए का भोग लगाकर उसे ब्राह्मणों को दान करने से बुद्धि कुशाग्र होती है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
- कुम्हड़ा (पेठा) का महत्व: कूष्मांडा का एक अर्थ ‘कुम्हड़ा’ (सफेद पेठा) भी है, जिसकी बलि माता को अत्यंत प्रिय है। पेठे की मिठाई का भोग लगाने से भी माता अति प्रसन्न होती हैं।
Kushmanda Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां कूष्मांडा का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध और परम कल्याणकारी मंत्र “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” है। स्वास्थ्य लाभ और ऊर्जा प्राप्ति के लिए रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
Q2: मां कूष्मांडा की पूजा किस दिन करनी चाहिए?
Ans: मां कूष्मांडा की मुख्य पूजा नवरात्रि के चौथे दिन (चतुर्थी तिथि) की जाती है। इसके अलावा रोज़ाना प्रातःकाल या प्रत्येक रविवार को माता की आरती करना भी विशेष शुभ माना जाता है।
Q3: मां कूष्मांडा की पूजा से किस ग्रह की शांति होती है?
Ans: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कूष्मांडा ‘सूर्य’ (Sun) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी पूजा करने से सूर्य जनित दोष शांत होते हैं, सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है और आरोग्य प्राप्त होता है।
निष्कर्ष: मां कूष्मांडा की आरती (Kushmanda Ki Aarti) वह अचूक अस्त्र है जो आपके जीवन से हर प्रकार के रोग, शोक और अंधकार को मिटाकर जीवन को सूर्य के समान प्रकाशवान बना सकती है। Freeupay.in पर दिए गए इन नियमों और ज्योतिषीय उपायों के साथ माता भवानी की आराधना करें। मां जगदम्बे की कृपा से आपके घर में सदा यश, बल और उत्तम स्वास्थ्य का वास रहेगा।
वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
