Skandmata Ki Aarti: हिन्दू धर्म के नवरात्र पर्व के पांचवे दिन की शक्ति स्वरूपा मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। यह दिन ‘मां स्कंदमाता’ को समर्पित किया गया है। भगवान शिव और माता पार्वती के कुमार कार्तिकेय (जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है) की माता होने के कारण इनका नाम ‘स्कंदमाता’ पड़ा। माता के इस स्वरूप में वे अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए हुए शेर पर विराजमान हैं। माता की चार भुजाएं हैं और वे कमल के आसन पर बैठती हैं, इसलिए इन्हें ‘पद्मासना देवी’ भी कहा जाता है।
Skandmata Ki Aarti: नवरात्रि के पांचवें दिन पढ़ें मां स्कंदमाता की ये आरती, सूनी गोद भरेगी और चमकेगी बुद्धि
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हिन्दू धर्म की मान्यता मानी जाती है, कि जो भी भक्त या दंपत्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ नवरात्रि के पांचवें दिन या अपने नित्य पूजा-पाठ में ‘मां स्कंदमाता की आरती’ (Maa Skandmata Ki Aarti) गाते हैं, उनकी झोली कभी खाली नहीं रहती। माता अपने भक्तों को असीम ज्ञान, बुद्धि और परम सुख यानी ‘संतान सुख’ का वरदान देती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें मां स्कंदमाता की संपूर्ण आरती (Skandmata Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और अचूक ज्योतिषीय लाभ।
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🌺 क्विक लिस्ट: मां स्कंदमाता की आरती करने के 5 चमत्कारिक लाभ (Skandmata Ki Aarti Benefits)
मां स्कंदमाता की आरती (Skandmata Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | मां स्कंदमाता की आरती के अचूक लाभ (Benefits) |
| सूनी गोद भरना (संतान सुख) | जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, माता की कृपा से उन्हें सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। |
| बुद्धि और एकाग्रता का विकास | माता स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः इनकी आरती से याददाश्त तेज़ होती है और मंदबुद्धि भी विद्वान बनता है। |
| मोक्ष और परम शांति | संसार के सारे चक्रों और चिंताओं से मुक्ति मिलती है, और मन विशुद्ध चक्र में स्थित होकर परम शांति पाता है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | नवरात्रि के पांचवें दिन या रोज़ाना सुबह स्नान के बाद कपूर या शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करना सर्वश्रेष्ठ है। |
📿 मां स्कंदमाता की आरती (Skandmata Mata Aarti Lyrics)
पूर्ण पवित्रता और मातृभाव के साथ कमल पर विराजमान माता स्कंदमाता और उनकी गोद में बैठे बाल कार्तिकेय का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें और इस पावन आरती (Skandmata Ki Aarti) का गान करें:
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जय तेरी हो अस्कंध माता । पांचवा नाम तुम्हारा आता ॥
सब के मन की जानन हारी । जग जननी सब की महतारी ॥
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं । हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं ॥
कई नामों से तुझे पुकारा । मुझे एक है तेरा सहारा ॥
कही पहाड़ो पर हैं डेरा । कई शहरों में तेरा बसेरा ॥
हर मंदिर में तेरे नजारे । गुण गाये तेरे भगत प्यारे ॥
भगति अपनी मुझे दिला दो । शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो ॥
इंद्र आदी देवता मिल सारे । करे पुकार तुम्हारे द्वारे ॥
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं । तुम ही खंडा हाथ उठाएं ॥
दासो को सदा बचाने आई । ‘चमन’ की आस पुजाने आई ॥
📿 मां स्कंदमाता की आरती (Skandmata Ki Aarti Lyrics)
जय तेरी हो स्कंदमाता।
पांचवा नाम तुम्हारा आता॥
सब के मन की जानने वाली।
जग जननी सब की प्रतिपाली॥
तेरी जोत जलाता रहूं मैं।
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कही पहाड़ों पर है डेरा।
कई शहरों में रूप तेरा॥
निशदिन तेरे गुण गाऊं।
मनवांछित ही फल पाऊं॥
शरण कल्पतरु वृक्ष हमारा।
सदा बचाना हमें दुलारा॥
महिमा तेरी सब जग जाने।
सब मानव तुझको ही माने॥
ध्यान तुम्हारा जो जन ध्यावे।
शरण तुम्हारी जो जन आवे॥
शिव की शक्ति तुम कहलाती।
भक्तों के सब कष्ट मिटाती॥
(आरती पूर्ण होने के बाद मां स्कंदमाता को साष्टांग प्रणाम करें, कर्पूर की लौ से आरती लें और सुख-समृद्धि व संतान की प्रार्थना करें। जयकारा लगाएं- “बोलिए मां स्कंदमाता की जय!”)
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🌟 संतान सुख, बुध ग्रह शांति और विद्या का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
कोटपूतली-बहरोड़ (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि वैदिक ज्योतिष में मां स्कंदमाता ‘बुध’ (Mercury) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह कमज़ोर या पीड़ित होता है, तो व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित रहती है, त्वचा के रोग होते हैं, व्यापार में घाटा होता है और शिक्षा में भयंकर अड़चनें आती हैं। इसके अलावा कुंडली का पंचम भाव पीड़ित होने से संतान सुख में भारी विलंभ होता है।
नवग्रहों (विशेषकर बुध) के इन मारक दोषों को 100% शून्य करने, बच्चों की बुद्धि कुशाग्र करने और साक्षात मां स्कंदमाता की कृपा प्राप्त करने के लिए ज्ञान के देवता का स्वरूप ‘4 मुखी रुद्राक्ष’ (4 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसके साथ ही जिन महिलाओं को गर्भधारण में समस्या आ रही है, उन्हें ‘गर्भ गौरी रुद्राक्ष’ धारण करना चाहिए। इसे गले में पहनकर रोज़ाना मां स्कंदमाता की आरती करने से वंश वृद्धि के मार्ग की हर बाधा तुरंत भस्म हो जाती है।
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⚠️ मां स्कंदमाता की आरती और पंचमी पूजा के 3 कड़े नियम (Rules for reciting Skandmata Ki Aarti)
- केले (Banana) का भोग है अनिवार्य: मां स्कंदमाता को पीली वस्तुएं और विशेष रूप से केला (Banana) अत्यंत प्रिय है। आरती और पूजा के समय माता को पके हुए केलों का भोग अवश्य लगाएं। बाद में इस प्रसाद को छोटे बच्चों में बांट दें, इससे माता अति प्रसन्न होती हैं।
- शाही नीला या पीला रंग (Lucky Color): नवरात्रि के पांचवें दिन पूजा और आरती करते समय ‘शाही नीले’ (Royal Blue) या ‘पीले’ (Yellow) रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना जाता है। माता को गेंदे या पीले कनेर के फूल अवश्य अर्पित करें।
- करुणा और वात्सल्य भाव: चूंकि माता ममतामयी स्वरूप में हैं, इसलिए पूजा के दिन अपने घर में छोटे बच्चों को बिल्कुल न डांटें और न ही किसी महिला का अपमान करें। शांत और सात्विक मन से की गई आरती तुरंत स्वीकार होती है।
Skandmata Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मां स्कंदमाता का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?
Ans: माता का सिद्ध और अत्यंत फलदायी मंत्र “ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः” है। इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए “सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q2: मां स्कंदमाता की पूजा से किस ग्रह के दोष दूर होते हैं?
Ans: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां स्कंदमाता ‘बुध’ ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी आराधना करने से कुंडली का बुध मजबूत होता है, जिससे व्यापार, वाणी और बुद्धि में चमत्कारिक लाभ मिलता है।
Q3: क्या पंचमी तिथि को स्कंद कार्तिकेय की भी पूजा करनी चाहिए?
Ans: जी हाँ! मां स्कंदमाता की गोद में भगवान कार्तिकेय बाल रूप में बैठे हैं। इसलिए जब आप स्कंदमाता की आरती और पूजा करते हैं, तो भगवान कार्तिकेय की पूजा अपने आप हो जाती है और उनका भी पूर्ण आशीर्वाद मिलता है।
निष्कर्ष: मां स्कंदमाता की आरती (Skandmata Ki Aarti) वह दिव्य चाबी है जो आपकी बंद किस्मत के ताले खोलकर आपके आंगन को बच्चों की किलकारियों से भर सकती है। Freeupay.in पर दिए गए इन नियमों और ज्योतिषीय उपायों के साथ पंचमी तिथि की आराधना करें। मां जगदम्बे की कृपा से आपके घर में सदा विद्या, बुद्धि, धन और सुख-संतान का वास रहेगा।
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