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Tulsi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi: रोज़ाना तुलसी माता की आरती (PDF) गाने से घर में बरसेगा धन, दूर होगा हर भयंकर वास्तु दोष

Tulsi Mata Ki Aarti: हमारे हिन्दू धर्म में तुलसी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। तुलसी को अपने घर पर लगाने से पर्यावरण शुद्ध होता है व सभी रोगों से रक्षा होती है। भगवान् श्री विष्णु जी व भगवान श्री कृष्ण जी को तुलसी अति प्रिय लगती हैं। तुलसी माता की पूजा से व्यक्ति के यंहा सुख सम्पति का वास होता है। हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, जिस भी घर के आंगन में तुलसी का पौधा हरा-भरा रहता है और जहां रोज़ाना उनकी पूजा होती है, वहां यमराज के दूत भी प्रवेश नहीं कर सकते।

Tulsi Mata Ki Aarti: रोज़ाना तुलसी माता की आरती गाने से घर में बरसेगा धन, दूर होगा हर भयंकर वास्तु दोष

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Tulsi Mata Ki Aarti
Tulsi Mata Ki Aarti

मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ विशेषकर कार्तिक मास में, एकादशी पर या अपने रोज़ाना के पूजा-पाठ में ‘तुलसी माता की आरती’ (Tulsi Mata Aarti) गाता है, उसके जीवन से दरिद्रता, गृह क्लेश और हर प्रकार के वास्तु दोष हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। माता तुलसी अपने भक्तों को अखंड सौभाग्य और अपार धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें तुलसी माता की संपूर्ण आरती (Tulsi Mata Ki Aarti), इसे करने के सटीक नियम और अचूक वास्तु लाभ।

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🌺 क्विक लिस्ट: तुलसी माता की आरती करने के 5 चमत्कारिक लाभ (Tulsi Mata Ki Aarti Benefits)

तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना तुलसी माता की आरती गाने से आपके घर में क्या बड़े बदलाव आते हैं:

आरती का प्रभाव (Effects)तुलसी माता की आरती के अचूक लाभ (Benefits)
वास्तु दोष और नकारात्मकता का नाशघर से हर प्रकार की नेगेटिव एनर्जी बाहर जाती है और भयंकर से भयंकर वास्तु दोष कट जाते हैं।
अपार धन और माता लक्ष्मी का वासघर में धन का प्रवाह बढ़ता है। जहां तुलसी प्रसन्न होती हैं, वहां माता लक्ष्मी स्थायी रूप से वास करती हैं।
रोगों से मुक्ति और पारिवारिक शांतिघर के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम व शांति बढ़ती है।
आरती का सर्वोत्तम समयरोज़ाना गोधूलि बेला (शाम के समय) सूर्यास्त के बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करना सर्वश्रेष्ठ है।

📿 तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Aarti Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता तुलसी और सालेग्राम (भगवान विष्णु) का ध्यान करें, हाथ में शुद्ध घी का दीपक लें और इस पावन आरती (Tulsi Mata Ki Aarti) का गान करें:

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जय जय तुलसी माता

सब जग की सुख दाता, वर दाता

जय जय तुलसी माता ।।

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर

रुज से रक्षा करके भव त्राता

जय जय तुलसी माता।।

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली हे ग्राम्या

विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता

जय जय तुलसी माता ।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वन्दित

पतित जनो की तारिणी विख्याता

जय जय तुलसी माता ।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में

मानवलोक तुम्ही से सुख संपति पाता

जय जय तुलसी माता ।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी

प्रेम अजब हैं उनका तुमसे कैसा नाता

जय जय तुलसी माता ।।

(आरती पूर्ण होने के बाद तुलसी माता की 3 परिक्रमा करें, उन्हें साष्टांग प्रणाम करें और अपने घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।)

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी: Contact us for Astrologer Consultation (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

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राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के ‘ईशान कोण’ (North-East) या ‘उत्तर’ दिशा में तुलसी का पौधा होना सबसे शुभ माना जाता है। ज्योतिष में तुलसी का संबंध बुध (Mercury) और शुक्र (Venus) ग्रह से है। जब बुध पीड़ित होता है तो व्यापार में घाटा होता है, और शुक्र के कमज़ोर होने पर घर में दरिद्रता आती है।

नवग्रहों के इन मारक दोषों को 100% शून्य करने, असीम सफलता पाने और साक्षात भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए नारायण का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना तुलसी माता की आरती करने से व्यक्ति के जीवन की सभी आर्थिक और मानसिक बाधाएं तुरंत दूर हो जाती हैं।

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⚠️ तुलसी माता की आरती और पूजा के 3 कड़े नियम (भूलकर भी न करें ये गलतियां) (Rules for reciting Tulsi Mata Ki Aarti)

  1. रविवार और एकादशी का नियम: रविवार, चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को न तो जल चढ़ाना चाहिए और न ही उनके पत्ते तोड़ने चाहिए। इन दिनों माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
  2. दीपक जलाने की विधि: आरती करते समय हमेशा गाय के शुद्ध घी का या तिल के तेल का दीपक ही प्रयोग करें। आरती के बाद दीपक को तुलसी के गमले के ठीक ऊपर न रखें, बल्कि थोड़ा दूर रखें ताकि माता तुलसी को ताप न लगे।
  3. स्वच्छता का पूर्ण ध्यान: बिना स्नान किए या अशुद्ध हाथों से कभी भी तुलसी को नहीं छूना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) के दौरान तुलसी के पौधे से दूर रहना चाहिए।

Tulsi Mata Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: तुलसी माता को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

Ans: तुलसी पूजन और जल चढ़ाते समय “महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते॥” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।

Q2: घर में किस प्रकार की तुलसी लगाना शुभ होता है?

Ans: घर में ‘रामा तुलसी’ (हरे पत्तों वाली) और ‘श्यामा तुलसी’ (गहरे नीले-काले पत्तों वाली) दोनों ही लगाई जा सकती हैं। श्यामा तुलसी भगवान कृष्ण को अति प्रिय है।

Q3: क्या रात के समय तुलसी जी को जल चढ़ा सकते हैं?

Ans: नहीं! सूर्यास्त के बाद तुलसी जी को जल चढ़ाना या उन्हें स्पर्श करना वर्जित है। शाम के समय केवल उनके सामने दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए।

निष्कर्ष: तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti) वह दिव्य महा-अस्त्र है जो आपके घर के हर वास्तु दोष और दरिद्रता को मिटाकर जीवन को खुशियों से भर सकती है। Freeupay.in पर दिए गए इन नियमों के साथ आज ही से अपने घर के आंगन में आरती का गान शुरू करें। माता तुलसी की कृपा से आपके घर में सदा धन, स्वास्थ्य और शांति का वास रहेगा।

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